STORYMIRROR

Rashmi Srivastava

Abstract

4  

Rashmi Srivastava

Abstract

इन्द्रधनुष समान भारतीय नारी

इन्द्रधनुष समान भारतीय नारी

1 min
408

इन्द्रधनुष की भाँति तेरे रूप हैं अनेक है

भारत की नारी, तूने रंग बिखेरे हैं

अपनी प्रतिभा के चहुँओर,

है भारत की नारी तुमने

अबला से सबला बन दिखाया है,


भारत की नारी में कितना है दम

इसका सम्पूर्ण विश्व को भान कराया है।

भारत की आशा हो तुम

अंतरिक्ष पर जाने वाली प्रथम महिला हो तुम।


कला हो या विज्ञान, सबका है तुमको भरपूर ज्ञान

बेटी, बहन,पत्नी, मां बन सब पर प्यार लुटाती हो,

लेकिन शत्रु को मार गिराने को झांसी की रानी बन जाती हो।


आशा को कर प्रज्वलित निराशा का अँधेरा दूर भगाया है,

सामाजिकसेवी, दार्शनिक, राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक

आदि बन नारी जाति का गौरव बढाया है।


चट्टान सी मजबूत, वायु सी तेज, पुष्प सी कोमल,

किलकिलाती नदी के समान हो चंचल तुम,

सब पर प्यार लुटाती त्याग की मूर्ति हो तुम।


शत शत नमन में तेरा करती हूं,

है भारत की नारी, भारत की आन भारत की शान हो तुम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract