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Rashmi Srivastava

Others

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Rashmi Srivastava

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जीवन के रिश्ते

जीवन के रिश्ते

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जीवन को रिश्तों की माला में पिरोया गया है,

जन्म लेते ही मां -बाप की आंखों का तारा बन जाना ।

बाबा-दादी,नाना नानी का दुुलार पाना ।।

भाई बहनों के साथ खेलतेे -लड़ते हुए बचपन बिताना,

बचपन की यादों को संजोते हुए मायका छोड़ ससुराल आ जाना ।

बहु,पत्नी,भाभी बन नये रिश्तेे निभाना,अपनाना 

सास ससुर की आत्मीयता,पति का प्यार,

देवर की छेड़छाड़,नंद की मनुहार,

यही तो है जीवन में रिश्तो की बहार ।

जैसे-जैसे उम्र ढलती जाती है रिश्तों की बाढ़ सी आ जाती है,

बच्चों के बड़े होने पर बहू दामाद का आ जाना,

नाती पोतों से घर का गुलजार हो जाना ।

जीवन के अंतिम पड़ाव में आत्मसंतुष्ट होकर सारे रिश्तों को सहेजते जाना,

यही तो है जीवन में रिश्तों का महत्व ।। 



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