जीवन के रिश्ते
जीवन के रिश्ते
जीवन को रिश्तों की माला में पिरोया गया है,
जन्म लेते ही मां -बाप की आंखों का तारा बन जाना ।
बाबा-दादी,नाना नानी का दुुलार पाना ।।
भाई बहनों के साथ खेलतेे -लड़ते हुए बचपन बिताना,
बचपन की यादों को संजोते हुए मायका छोड़ ससुराल आ जाना ।
बहु,पत्नी,भाभी बन नये रिश्तेे निभाना,अपनाना
सास ससुर की आत्मीयता,पति का प्यार,
देवर की छेड़छाड़,नंद की मनुहार,
यही तो है जीवन में रिश्तो की बहार ।
जैसे-जैसे उम्र ढलती जाती है रिश्तों की बाढ़ सी आ जाती है,
बच्चों के बड़े होने पर बहू दामाद का आ जाना,
नाती पोतों से घर का गुलजार हो जाना ।
जीवन के अंतिम पड़ाव में आत्मसंतुष्ट होकर सारे रिश्तों को सहेजते जाना,
यही तो है जीवन में रिश्तों का महत्व ।।
