गुरु महिमा अनन्त
गुरु महिमा अनन्त
गुरु मंत्र में है वो शक्ति
हरती हर एक रोग दोष।
देव भी करते गुरु का अर्चन ,
जीवन होता भागो वाला ।
जहां वास करें गुरुजन,
देव भी करते पुष्पों की वर्षा।
सारे तामसिक दोष गुरु हरते,
कष्ट क्लेश सब दूर भगाते ।
गुरु चरण जहां पड़े ,
वह धरती तीर्थ समान ।
रज उस अवनी की,
माथे पर लो लगा।
गुरु के निकट रहो ,
होगा असीम कल्याण ।
चरणो में गुरु के स्वर्ग ,
करते उर के तम को दूर ,
ज्ञान की असंख्य धाराएं ,
प्रस्फुटित गुरु करते।
गुरु ज्ञान गंगा में जिसने
गोते लगाये ,
जीवन सफल उसका हुआ।
लौ गुरु के ज्ञान की
करती प्रकाशित जगत सारा।
जीवन रथ के सारथी ,
थाम के हाथ लगाते बेड़ा पार ।
करे गुरु आराधन,
हम तन से, मन से ,धन से,
आओ करें गुरुवर के चरण वंदन।
कर ले निज जीवन चंदन।
