असत्य का प्रभाव कविता
असत्य का प्रभाव कविता
असत्य की राहो पर चलने वाले का
इस जग में न कहीं ठोर ठिकाना है
जीता है वह डर डर के
जीवन यूं ही गवाता है
रहता न कोई साथी संगी
न ही होता अपनों का प्यारा है
अपनाता है जो असत्य की राह
जीवन भर पछताता है
झूठ सच से बेहतर लगता शुरू शुरू में है
जिस दिन सामना होता सबसे
सबका विश्वास वह खोता है
अपनों का प्यार,भरोसा टूटे
तब कभी न जुड़ पाता है
होती है जीवन भर निंदा
सबकी आंखों में खटकता है
असर बुरा पड़ता है जीवन पर
तनहा,एकाकी में जिंदगी बिताता है
ए मानव तू बात हमारी गांठ बांध ले
सत्य का दामन थामे रहना
जीवन भर सत्य की राहों पर चलना
गांधी सत्यवादी हमारे
तभी राष्ट्रपिता कहलाते है
तू भी गांधी,हरिश्चन्द्र की भांति
सत्य का आंचल थामे रहना
आ जाए कैसी भी मुश्किल
तू सत्य की राहों पर ही चलना
तू सत्य की राहों पर ही चलना।
