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ଫାଲଗୁନି ରଣା

Inspirational

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ଫାଲଗୁନି ରଣା

Inspirational

मन की आवाज़

मन की आवाज़

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गहराईयों में मत घुसो तुम

मन का कहना मानो

स्वच्छ परिमल आत्मा है सबका

अच्छे से पहचानो । 


सूक्ष्म दृष्टि से मत देखो तुम

कुछ दिनों के मेहमानों

नहीं कोई जीव छोटा बड़ा

अच्छे से पहचानो । 


अज्ञानी तो वह है, जिसकी

हृदय है जहर से भरा

साधु सज्जन वह ही कहां ?

जिनकी वाणी न मिठास भरा। 


रे मनुष्य अभिमान में इतना

क्यों है मन ही मन इठलाता

निर्मल हृदय से परिहार करो सब

कटने वाला है जीवन का खाता। 


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