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prabhakar singh

Romance

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prabhakar singh

Romance

तारीफ़ में तेरी लिखूं क्या

तारीफ़ में तेरी लिखूं क्या

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तारीफ़ में तेरी लिखूं क्या छोटे हैं लफ्ज़ के पैमाने

उनसे पूछो जो देख चुके जो अंधे हैं वो क्या जाने।


तुझे देख के इंसा हद भूले बहता दरिया सरहद भूले

तू मिल जाए तो रस्ता क्या राही अपना मकसद भूले

तू है तो स्वर्ग है धरती पर तू नहीं तो मंदिर मयखाने

तारीफ़ में तेरी लिखूं क्या छोटे हैं लफ्ज़ के पैमाने।


सुख का संसार दिखे तुझमें बस प्यार ही प्यार दिखे तुझमें

नज़रों से नजर मिल जाए तो हर सपना साकार दिखे तुझमें

दीदार तेरा हो जाए जिसे वो ख़ुदा किसी को क्यूं माने

तारीफ़ में तेरी लिखूं क्या छोटे हैं लफ्ज़ के पैमाने।


मुमताज़ की कातिल नज़रों के अंदाज़ तुम्हारे क़दमों में

शाह ए जहां का बेमिसाल वो ताज तुम्हारे क़दमों में

साहिर की लिखी ग़ज़लों के अल्फ़ाज़ तुम्हारे क़दमों में

विश्वास के लिखे गीतों के एहसास तुम्हारे क़दमों में

सारे सुर सारे गीत ये सारे साज तुम्हारे क़दमों में

तेरा ख़ुदा भी तुझसे मिलने को मोहताज तुम्हारे क़दमों में।


इक तुझको अपना रब माने तेरे प्यार को सब मज़हब माने

तुझे देख के खुद को भूल गए तुझे देख के खुद को पहचाने

तारीफ़ में तेरी लिखूं क्या छोटे हैं लफ्ज़ के पैमाने

उनसे पूछो जो देख चुके जो अंधे हैं वो क्या जाने।



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