उपन्यास: टूटे हुए वादे
उपन्यास: टूटे हुए वादे
प्रोलॉग – किस्मत की पहली चोट
रात के लगभग ग्यारह बजे थे। आसमान काले बादलों से घिरा हुआ था। बिजली की तेज़ चमक बार-बार पूरे शहर को रोशन कर रही थी और कुछ ही पल बाद बादलों की गड़गड़ाहट वातावरण को डरा देती थी। मूसलाधार बारिश सड़कों पर इस तरह बरस रही थी, मानो आसमान भी किसी के बिछड़ने का मातम मना रहा हो।
हाईवे पर एक पुरानी कार तेज़ी से आगे बढ़ रही थी। कार के अंदर बैठे दंपति बार-बार पीछे की सीट पर बैठे अपने दस साल के बेटे की ओर देख रहे थे। उस मासूम लड़के का नाम आरव था।
उसकी माँ ने मुस्कुराकर कहा, "बस बेटा... थोड़ी देर में घर पहुँच जाएंगे।"
आरव भी मुस्कुरा दिया। उसे क्या पता था कि यह उसकी माँ की आख़िरी मुस्कान होगी।
अचानक सामने से तेज़ रफ़्तार में आता एक ट्रक नियंत्रण खो बैठा।
एक ज़ोरदार धमाका हुआ।
कार कई बार पलटी खाकर सड़क किनारे जा गिरी।
चारों तरफ़ सन्नाटा छा गया।
बारिश अब भी लगातार बरस रही थी।
कुछ देर बाद आरव ने काँपते हुए अपनी आँखें खोलीं। उसके सिर से खून बह रहा था। उसने अपनी माँ का हाथ पकड़ना चाहा, लेकिन वह बिल्कुल शांत थीं। उसके पिता भी निश्चल पड़े थे।
"माँ... उठो ना..."
उसकी आवाज़ बारिश में खो गई।
"पापा... मुझे डर लग रहा है..."
लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
उस रात आरव ने सिर्फ़ अपने माता-पिता को नहीं खोया, उसने अपना पूरा संसार खो दिया।
अगले कुछ दिनों में रिश्तेदार आए, आँसू बहाए, अफ़सोस जताया... और फिर एक-एक करके चले गए।
"हम इसकी ज़िम्मेदारी नहीं उठा सकते।"
"हमारे अपने बच्चे हैं।"
"अनाथ बच्चे को पालना आसान नहीं होता।"
हर बहाने के साथ आरव का दिल थोड़ा-थोड़ा टूटता गया।
आख़िरकार वह शहर के एक छोटे से अनाथालय पहुँचा दिया गया।
उसी शहर में, कुछ ही किलोमीटर दूर, संगमरमर से बने एक विशाल महल जैसे बंगले में रहने वाला आदमी अपने करोड़ों के साम्राज्य पर राज करता था।
उसका नाम था विक्रम सिंह चौहान।
शहर का सबसे ताकतवर उद्योगपति।
जिसके एक इशारे पर बड़े-बड़े लोग झुक जाते थे।
लेकिन उसके दिल में गरीबों के लिए न दया थी, न सम्मान।
उसकी नज़र में गरीबी कोई मजबूरी नहीं, बल्कि कमजोरी थी।
उसी बंगले में उसकी बारह साल की बेटी अनन्या चौहान रहती थी।
अनन्या अपने पिता से बिल्कुल अलग थी।
उसके दिल में अमीरी का घमंड नहीं, बल्कि इंसानियत थी।
एक दिन स्कूल जाते समय उसकी कार ट्रैफिक सिग्नल पर रुकी।
खिड़की के बाहर उसने एक दुबला-पतला लड़का देखा, जो लोगों की मदद करके कुछ पैसे कमाने की कोशिश कर रहा था।
वह लड़का आरव था।
उनकी नज़रें कुछ पल के लिए मिलीं।
आरव की आँखों में दर्द था।
अनन्या की आँखों में सवाल।
उसे नहीं पता था कि यही लड़का एक दिन उसकी ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन जाएगा।
और आरव को भी नहीं पता था कि इसी लड़की का पिता उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन बनेगा।
समय बीतेगा...
एक अनाथ लड़का मेहनत करके अपनी पहचान बनाएगा।
एक अमीर लड़की अपने पिता की सोच को चुनौती देगी।
और एक ऐसा आदमी, जिसके पास दौलत, ताकत और सत्ता सब कुछ होगा, एक गरीब लड़के की हर खुशी छीन लेने की कसम खाएगा।
यह कहानी सिर्फ़ प्यार की नहीं...
यह कहानी संघर्ष, सम्मान, विश्वासघात और अधूरे वादों की है।
कभी-कभी किस्मत दो लोगों को मिलाती है...
सिर्फ़ इसलिए कि उन्हें हमेशा के लिए अलग कर सके।
यहीं से शुरू होती है...
"टूटे हुए वादे"।

