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Vijay Erry

Fantasy Inspirational Others

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Vijay Erry

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तारों की अंतिम चिट्ठी

तारों की अंतिम चिट्ठी

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शीर्षक: "   तारों की अंतिम चिट्ठी"

एक छोटे से पहाड़ी गाँव में रहने वाला सोलह वर्षीय आरव हर रात छत पर लेटकर तारों को घंटों निहारा करता था। गाँव वाले उसे "पागल खगोलशास्त्री" कहकर चिढ़ाते थे। कोई कहता, "तारे कभी किसी से बात नहीं करते." कोई हँसते हुए कहता, "अगर ऊपर वाले के पास इतना समय होता तो पहले हमारी समस्याएँ हल करता."

पर आरव मुस्करा देता. उसे विश्वास था कि ब्रह्मांड मौन नहीं है, बस उसकी भाषा अलग है.

उसके दादाजी कहा करते थे, "बेटा, तारे सिर्फ रोशनी नहीं भेजते, वे समय भेजते हैं. जो प्रकाश आज तुम्हें दिखाई दे रहा है, वह लाखों वर्षों पहले चला था. इसलिए जब तुम किसी तारे को देखते हो, तो वास्तव में अतीत को देख रहे होते हो."

यही बात आरव के मन में घर कर गई.

एक रात उसे आकाश में एक अनोखा तारा दिखाई दिया. वह बाकी तारों की तरह स्थिर नहीं था. उसकी चमक हर तीस सेकंड में बदल रही थी. पहले तेज, फिर धीमी, फिर तेज.

आरव ने कागज पर उसका क्रम लिखना शुरू किया.

तेज... धीमा... तेज... तेज... धीमा...

कई रातों तक यही क्रम चलता रहा.

गाँव वालों ने कहा, "यह तो साधारण बात है."

लेकिन आरव को लगा कि यह कोई संकेत है.

उसने पुराने विज्ञान की पुस्तकें पढ़ीं. इंटरनेट कैफे जाकर तारों के संकेतों पर लेख खोजे. फिर उसने मोर्स कोड के बारे में पढ़ा.

उसने चमक के क्रम को मोर्स कोड में बदलना शुरू किया.

पहला शब्द बना—

HOPE

आरव की धड़कन तेज हो गई.

उसने सोचा यह संयोग होगा.

दूसरे दिन फिर नए संकेत आए.

इस बार शब्द बना—

WAIT

अब उसे यकीन हो गया कि कुछ असाधारण हो रहा है.

धीरे-धीरे पूरे गाँव में चर्चा फैल गई.

पत्रकार आए.

वैज्ञानिक आए.

टीवी चैनलों ने इसे "स्टार मिस्ट्री" नाम दे दिया.

देश-विदेश की वेधशालाओं ने उस तारे पर निगरानी शुरू कर दी.

सभी हैरान थे.

क्योंकि संकेत वास्तव में दोहराए जा रहे थे.

कई महीनों की मेहनत के बाद पूरा संदेश सामने आया.

"यदि तुम यह संदेश पढ़ रहे हो, तो इसका अर्थ है कि हमारी सभ्यता अब अस्तित्व में नहीं है."

दुनिया सन्न रह गई.

संदेश आगे कहता था—

"हम भी कभी तुम्हारी तरह विकास पर गर्व करते थे. हमने ऊँची इमारतें बनाई, कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाई, ग्रहों पर शहर बसाए. हमें लगा कि विज्ञान हमें अमर बना देगा."

"लेकिन हमने एक भूल की."

"हमने प्रकृति को संसाधन समझा, साथी नहीं."

"हमने मशीनों को सेवक बनाया, फिर स्वयं उनके दास बन गए."

"हमने ज्ञान बढ़ाया, पर बुद्धि खो दी."

"हमने हथियार बनाए, पर विश्वास नहीं."

"हमने गति पाई, पर दिशा खो दी."

संदेश यहीं समाप्त नहीं हुआ.

उसमें पृथ्वी जैसी एक दुनिया का पूरा इतिहास था.

किस प्रकार वहाँ जल समाप्त हुआ.

कैसे जंगल खत्म हुए.

कैसे मनुष्य एक-दूसरे के शत्रु बन गए.

कैसे अंत में पूरी सभ्यता केवल इतिहास बनकर रह गई.

दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने संदेश का अध्ययन किया.

कुछ ने कहा, "यह असंभव है."

कुछ बोले, "यह किसी प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है."

कुछ ने इसे धोखा कहा.

लेकिन जितनी जाँच होती, उतना ही रहस्य गहराता.

क्योंकि संदेश के भीतर ऐसे खगोलीय तथ्य भी थे जिनकी पुष्टि बाद में आधुनिक दूरबीनों ने की.

अब पूरी दुनिया आरव को जानने लगी.

पर आरव को प्रसिद्धि में कोई रुचि नहीं थी.

वह केवल एक प्रश्न पूछता—

"यदि वे हमें चेतावनी दे सकते हैं, तो क्या हम स्वयं को बदल सकते हैं?"

एक दिन विश्व के कई बड़े नेताओं की बैठक हुई.

पहली बार पर्यावरण, युद्ध, तकनीक और मानवता पर गंभीर चर्चा शुरू हुई.

कई देशों ने हथियारों पर खर्च कम करके जल संरक्षण पर धन लगाना शुरू किया.

स्कूलों में नया विषय पढ़ाया जाने लगा—

"ब्रह्मांड और मानव जिम्मेदारी."

बच्चों को सिखाया जाने लगा कि पृथ्वी केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि जीवित विरासत है.

लेकिन सभी लोग नहीं बदले.

कुछ उद्योगपति बोले—

"डर फैलाकर विकास रोका जा रहा है."

कुछ राजनेता बोले—

"यह विदेशी साजिश है."

कुछ धार्मिक लोग बोले—

"तारों का संदेश नहीं, केवल ईश्वर का संदेश सत्य है."

समाज फिर दो भागों में बँट गया.

आरव निराश होने लगा.

एक रात वह फिर उसी पहाड़ी पर बैठा था.

उसने आकाश की ओर देखा.

वह रहस्यमय तारा अब पहले से अधिक मंद हो चुका था.

उसकी चमक धीरे-धीरे समाप्त हो रही थी.

अचानक अंतिम बार उसने प्रकाश भेजा.

इस बार केवल एक शब्द था—

REMEMBER

फिर वह हमेशा के लिए बुझ गया.

आरव की आँखों से आँसू बह निकले.

उसे लगा जैसे किसी दूर बैठे मित्र ने अंतिम विदाई दी हो.

साल बीतते गए.

आरव बड़ा होकर विश्वविख्यात खगोलशास्त्री बन गया.

उसने कभी यह दावा नहीं किया कि उसने एलियन देखे हैं.

वह केवल इतना कहता—

"चाहे संदेश किसी सभ्यता ने भेजा हो या प्रकृति ने, उसका अर्थ बदलता नहीं."

"यदि हम नफरत बोएँगे तो विनाश काटेंगे."

"यदि लालच बोएँगे तो अकेलापन पाएँगे."

"यदि प्रेम बोएँगे तो भविष्य सुरक्षित होगा."

उसकी मृत्यु के कई वर्षों बाद उसकी डायरी मिली.

अंतिम पन्ने पर केवल तीन पंक्तियाँ लिखी थीं—

"तारे भविष्य नहीं बताते."

"वे केवल अतीत की गलतियाँ दिखाते हैं."

"भविष्य लिखना अभी भी मनुष्य के हाथ में है."

आज भी उस पहाड़ी पर एक छोटा-सा वेधशाला संग्रहालय है.

हर वर्ष हजारों बच्चे वहाँ आते हैं.

रात को जब आकाश तारों से भर जाता है, तो गाइड उनसे एक ही प्रश्न पूछता है—

"क्या तुम्हें सचमुच लगता है कि तारे हमसे बात नहीं करते?"

बच्चे मुस्कराकर आकाश की ओर देखते हैं.

क्योंकि अब वे जानते हैं कि हर चमकती रोशनी केवल एक तारा नहीं, बल्कि समय की गहराइयों से आई एक चिट्ठी भी हो सकती है.

समाप्त।

लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसर.

संपर्क: vijayerry5@gmail.com


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