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Saurabh Pandey

Tragedy Classics Fantasy

4.5  

Saurabh Pandey

Tragedy Classics Fantasy

संघर्ष

संघर्ष

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15

जो जीव जग में जीते संघर्षों से
उनकी कहनी कथनी में अन्तर क्या
जो फूल खिले अतिकष्टों से
उस फूल सूल में अन्तर क्या


जीवन की यह करुण कहानी
कुछ तो जानी कुछ पहचानी है
संघर्षों में तने तंबू तले
क्या खुशियां शेष अब आनी है

मर्यादाओं की दीवारों में
क्या शस्त्र खनखनाते है
परिस्थिति का जो दास बने
भला वे कहाँ संघर्ष कर पाते हैं

त्यागकर सुख का दामन जिसने
चौदह वर्ष वन में बिताया
मर्यादाओं की सीमा में रहकर
जो पुरुषों में पुरुषोंत्तम कहलाया

देख दुःख की दुनियां को
जिसने वैभव को ठुकराया
संघर्षों में  कर शेष यात्रा
दुनियां भर में ज्ञान फैलाया

तो संघर्षमयी फिर क्यों न जग हो
जब संघर्ष से ओस मोती बन जाते हैं
सहर्ष संघर्ष की छाया में रहकर
अश्रु भी आँखों के किरीट बन आते हैं


संघर्ष तले जो जीव
                जीवन की नीव बनाते हैं
जड़ता के इस जग में
                   उदाहरण बन जाते है

Writen by S.pandey 


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