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Vinita Vinita pawar

Abstract Inspirational

4.5  

Vinita Vinita pawar

Abstract Inspirational

संघर्ष से भरे गिरते झरने आंखों से ।।

संघर्ष से भरे गिरते झरने आंखों से ।।

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तो मैं विनीता अपनी इस किताब को 17 वर्ष की उम्र में लिख रही हूँ तो मेरी कहानी शुरू होती है कुछ इस प्रकार से —
"कि उड़ चली छूने ये आसमान पर छूना कहा इतना आसान
ठोकर-ठोकर पर है "औरों के गुलाम, फैसला लेना कहाँ हमारी "मजाल"।"
बिछड़ रही हूँ अपनों से जैसे बिछड़ते पत्ते पेड़ों से।
उस बिछड़ के वियोग में गिरते झरने आँखों से।
हर रोज़ एक नया सफ़र तय करके लड़ती आ रही हूँ उस संघर्ष से।
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ये सोच करके कि, वो रात जिसमें मैं फिर से उड़ सकूँ उन रातिचर के साथ में।
पर अक्षर बंधी हूँ उन जंजीरों से जिसकी "कुंजी" भी संघर्ष के हाथों में और "वुंजी" भी संघर्ष के हाथ में।
# सायरी #
20 साल तक कि दिहाड़ी
फिर भी मैं हारी कि हारी।


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