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Yayawargi (Divangi joshi)

Drama


4.0  

Yayawargi (Divangi joshi)

Drama


समव्हाट लव

समव्हाट लव

15 mins 11.9K 15 mins 11.9K

तीन साल वैसे तो काफी लंबा अरसा है किसी को भुला ने के लिए... कहते हैं कि नई आदतें बनने मे 21 दिन लगते हैं ३६ महीने तो बहुत है आदत छोड़ने के लिए...

स्तुति, एक प्राइवेट कंपनी मे जॉब करने लगी है ओर “सोमवार से शुरू होते इतवार के इंतज़ार मे जिंदगी कट रही है” सुबह १० बजे से शाम ७ बोरिंग कॉर्पोरेट लाइफ ! 

ओर राहुल , किसी पता ओर अब फर्क भी क्या पड़ता है , 

बस स्तुति कभी-कभी प्रोफ़ाइल देख लेती है २ महीनो मे एकाद बार डीपी चेंज कर लेता था राहुल... कभी लगता था क्या हालत बना ली है अपनी यह चसमे बिलकुल अच्छे लग रहे है ओर यह बाल पूरा अंकल बन गया है यहा तक यह एसे डाट दिखा के कब से हसने लगा , वो तो अक्सर हसी आने पर अपने दोनों होठो से मुह बंध कर हस्ता था ओर सेलफ़ी तो एट्टीट्यूड वाली ही होती थी ओर अब यह अंकल वाला लूक !

फिर सोचती स्वीटी को जेसे पसंद ! वेसे भी हर फोटो मे वेताल की तरह चिपकी तो रहती है ! 

स्तुति अब राहुल को याद नहीं करती थी क्यूंकी वोह जान चुकी थी जिस राहुल से वोह तीन साल पहले मिली थी वो तो अब इस यूनिवरस मे एकसिस्ट करता ही नहीं , अब जो चीज़ है ही नहीं उसकी अपेक्षा केसी ?

एक रात की बात यू ट्यूब पे कोई वीडियो देखते – देखते स्तुति कोम्मेंट्स पढ़ रही थी अचानक दिल की धड़कन तेज़ हो गई उसे समज नहीं आया वोह ऊपर गयी बोहोत से अनजाने चेहरो के बीच एक जाना हुआ चेहरा दिखा , राहुल.....! तीसरी बार था जब राहुल एसे अचानक मिल गया था, कुछ तो है तुजसे राबता...

सीरियसली जीमेल प्रोफ़ाइल पे भी उसने उस स्वीटी ध वेताली के साथ वाली फोटो डाली हुई थी हद है ! वोशरूम तो अकेले जाता होगा न? वेसे वाहा से भी शायद कॉल करेगा मीच यू माइ चकुलु !

“भले ही तुमसे हमें रूहानी मोहब्बत नहीं थी , लेकिन तेरे मुख्तार से सिद्दतवाली नफरत निभा गए हम॥

चाहते तो अब भी रेह सकते थे राज़दार तुम्हारे , छोड़ तुम्हें मसरूफ़ तुम्हारी दोस्ती भी नामजूर कर गए हम॥“

यायावरगी की लिखे चंद शब्द याद आ गए वोही झूठी सी मुस्कान के साथ कोममेट मे लिखा था “आइ विल शिफ्ट टू फ़्रांस सून”

गुड नाइस !

रुकिए जनाब आप यहा तक की कहानी पढ़ के यह लग रहा हो के यह लग रहा हो के स्तुति फ़ीमेल कबीर सिंह बन चुकी है तो हो सकता है आप गलत हो ! जो बंदा खुदसे प्यार करना सीख जाए वो कभी अकेला नहीं पड़ता , दो-तीन साल बाद घर वाले शादी करवा ही देंगे इस्स लिए ये साल जी भर के जी रही थी अपने छोटे-छोटे ख्वाब समेट रही थी रोज़ रात को ऑफिस से निकालके बासुरी बजाना सीख रही थी इतवार को दोस्तो के साथ गेड़ी मारने जाती थी , सारे त्योहार खुलके मनाती थी नवरात्रि हो , होली हो , ईद हो के क्रिसमस सब कुछ... डांस करना भी सीख रही थी यू ट्यूब से ही सही ! इंसटा ग्राम पे सेलेब्रेटी से बात करती , रेडियो का कॉन्टेस्ट खेलती , सोलो ट्रिप पे जा के खुद से मिलती ! उसे अब खुश रहने के लिए किसी की ज़रूरत नहीं थी ! लेकिन उसके साथ बोहोत से लोग थे जो खुश रहते थे !

पता है किसी को न याद करने के दो तरीके होते है एक दुखी होके “ वो चला गया मुझे छोड़ के , उसके बिना केसे जी पाऊँगी , पीछले साल तो हम एसे करते थे , मेरी ज़िंदगी तबाह हो गयी” अजी छोड़ो 

“किसी का हो न या ना होना सिर्फ ज़िंदगी का हिस्सा हो सकता है उसस हिस्से का कोई किस्सा हो सकता है पूरी कहानी नहीं , रिसतों के भी रूप बदल ते है , कहानी मे भी नए किरदार आते है” ॥

एसे ही एक दिन की बात कान मे एअर प्लग कंधे पे बस्ता ओर ऑटो मे कटनेवाला था ऑफिस तक का लंबा रास्ता स्टेशन पे राह देख रही थी शायद दिख जाए कोई चेहरा जाना पहचाना तभी एक चेहरा उसे देख मुस्काया , उसके चेहरे पे भी मुस्कान छाई, ऑटो आते देख उसमे बेठ गयी , वोह अंजाना चेहरा किसका था समज न पाई तभी वोह इंसान भी उसी ऑटो मे बेठा , हैलो केसी हो कहके पहचान दे बेठा ! अछि हु, शायद पहले कही मिले होंगे मुझे याद नहीं होगा वेसे भी लड़को को स्कूल ओर कॉलेज मे कहा जानती थी जादा! बातों सिलसिला जब जारी हुआ पता चला यह तो कोई अंजान ही पहचान दे बेठा ! सोसियल मीडिया पे मिले होंगे कहके स्तुति ने बात टाली , बंदे ने तो इंसटा की आईडी ही मांग्ली !

बातों मे हो गया ऑफिस जाना लेट हड़बड़ी औटोवाले को पेसे देना भूल गयी स्तुति सूद समेत”

इंसटा पे फॉलोइंग रिकवेस्ट के साथ मेसेज था आया पेसे देना भूल गयी तुम यह था कहलाया 

चेतन... 2-3 साल से मेरे शहर मे आया हुआ एक एंजीनियर है दीदी की शादी हो गई है ओर भी भोहोत बाते हुई पूरा दिन बाते करने के बाद चेतन ने पूछ लिया शाम को घर साथ मे चले... पहले तो सोचा किसी अंजान बंदे के साथ बाद मे सोचा ऑटो मे? वेसे तो अजनबी ही होते है इसे तो थोड़ा बोहोत जान लिया है ! स्कार्फ चेहरे पे बांध के 2 मिनिट के इंतज़ार मे, चेतन आ गया मुसकुराता! 

“बहुत शर्म आती है तुझे ?” ऐसा कुछ नहीं है मुझे कि उसे शरम-वरम नहीं आती ! वाह क्या बेशरम लड़की है !” ओर स्तुति हसने लगी! तेरा चेहरा तो देखने दे ! ठिक है देखलों कोई बदल नहीं गई हु चंद घंटो मे !”

बातों का सिलसिला जारी रहा कल शनिवार था चेतन को छुट्टी रहती है इंसटा पे बात चालू थी चेतन काफी अछि वन लाइनर फेकता था ! दिखने मे भी ठीक-ठाक था पापा क्या करते है जिजू क्या करते है शादी को कितने साल हुये स्तुति समज रही थी के यह कहानी किस ओर मूड रही है वेसे भी तीन सालो मे काफी बंदो ने “आओ कभी लपेटे मे” की कोशिश कर्ली थी ! लेकिन स्तुति इंतज़ार मे थी कोई एसे के जो राहुल की जगह ले सके जिसके सामने वो नन्ही बची बन सके जिससे कोई राज़ न रखना हो जो उसे अपना कहे !”

लेकिन जब चेतन को पूछा के ये है मेरे मूड स्विंग्स , मेरा दोस्त बना है तो इसे हैंडल करना पड़ेगा ! ओर उसका रिप्लाइ था आइ केन हैंडल होल ऑफ यू नोट जस्ट योर मूड!

‍बस इस बात पे पता नहीं यकीन आ गया स्तुति को चेतन पे उसको अपना नंबर दे दिया!

दूसरे दिन इस्स बात पे थोड़ी नोक-जोक हो ही गयी के ऑटो के पेसे तुमने क्यू दिये मे अपने पेसे खुद दे सकती हु ! मूड स्विंग्स था या फिर चेतन की बातों से उसे राहुल याद आ रहा था ! उसका राहूल !

सोमवार को तेय किया के शाम को साथ मे घर जाएंगे बात भी कर लेंगे ! काफ़ी मूवी के रेफरेंस याद आ रहे थे उसे! जेसा फिल्मों मे होता है हो रहा है हूबहू!

बाहर मोसम काफी ओसम था बादल गरज रहे थे, धुयाधर बारिश हो रही थी , चेतन का मेसेज आया देख कितनी प्यारा मोसम है अंदर भी तूफान बाहर भी तूफान बीच मे तूफानो के ये सीसे सा मकान ! गाना बाजा रेडियो पे ! एक दूसरे ने खुद के खिड़की के व्युज शेर किए ! 

स्तुति फ्लेश बेक मे चली गई “यार क्या सही बारिश हो रही है बाहर , अगर कोई साथ मे होता तो आज की रात भी क्या सही रहती है , वेसे तू भी साथ मे होती तो भी सही था ! एक बारिश की एसी रात ओर साथ मे तू ढेफ्ले जेसी ! 

स्तुति : देख तू अब ए दिल है मुसकिल का रणबीर कपूर बन रहा है !

राहूल : अरे….! उसमे रणबीर का कोई काम नहीं अगर तू हा बोले तो कल के लिए ओयों की होटल बूक करवालु?

स्तुति : नहीं सुधरेगा ना तू!

राहुल : सोच ले 24 घंटे है तेरे पास ! थक जाएगी तू पक्का !

स्तुति : मार खाएगा अब तू !

स्तुति के चेहरे पे मुस्कान थी !

बादल गरजे तो स्तुति राहुल के ख़यालो से बाहर आई ! क्या था उसके ओर राहुल के बीच मे एसा जो उसे आज भी जंजोड़ता था, राहुल ने केह दिया था मे तो मेरी वाइफ़ का हो गया, लेकिन तू अभी वही के वही है ! बोहोत पछताओगी! 

स्तुतिने जवाब दिया था,

 “लेट बी ! लेट मी !” 

राहुल क्या था ना होके भी हमेशा उसके साथ था , एक सुकून था उसके यादों मे भी! भले स्वीटी ने राहुल छिन लिया था लेकिन उसकी यादों पे तो उसका हक था उसने अपनी तनहाइया राहुल की यादों को दे दी थी , 

सुबह जब उठती है तब उसकी छि गोबरी अभी तक ब्रुश नहीं किया वोह बात याद आती है ! 

जब घर पर कोई नहीं रेहता तब उसकी यादे बिना दस्तक दिये मिल के जाती है ! 

प्यार नहीं हो तुम राहुल अगर प्यार होता तो कब का खतम हो जाता , नफरत हो जाती तुमसे!

मेरे अंदर एसे ज़िंदा नहीं रहते यह जानने के बावजूद के तुम कभी मेरे नहीं होंगे ओर मूजे तुम्हारी चाह भी नहीं, तुम्हारी राह भी नहीं ! तुम जब मेरे थे तब भी तुम कहा मेरे थे , मे अकेली ही थी तुम कहा थे

तो तुम क्या हो ना रहके भी रहते हो तुम क्या हो ! पर क्या तुम हो? ध फेमस वर्ड प्ले 

“क्या तुम हो? ओर तुम क्या हो!” 

शायद तुम ना मेरा वोह खयाल हो जिसे बचपन से मेने समेटा है.... वोह बचपन सा जुनून हो, जिसे हर बार गिर-गिर के संभाला है ।

मेरा हमसफर केसा हो जब भी ये सोचती हु तुमसे मिलता ही चेहरा नज़र आता है! “लड़की को सेटिंग मानने वाली मेले मे तुम मेरा मूजे भी मेरी सचि मोहोब्बत मिलेगी यह विश्वास हो, मेरा यकीन हो तुम !

इसी ख्यालो मे वो घर के लिए निकल गयी आधा रास्ता काटने के बाद याद आया उसे चेतन के साथ जाना था !

बस्स दो मिनिट रूक मे पोहोचने ही वाला हु चेतन का मेसेज आने पे याद आया! सोर्री मे तो निकल गयी आधा रास्ता भी कट गया! मूजे अकेले जाने की आदत हो गयी है कोई मेरे साथ नहीं होता अकेले रहने की इतनी आदत है अब किसी का साथ अछा नहीं लगता ! किसी के लिए ठहरना नहीं लुभाता!

“ मैं, भीगी सड़कें, तेज़ गति में दौड़ता मेरा शहर , रंग बदलता आसमा कभी-कभी साथ देता चाँद ओर कानो मे घूलता संगीत” ये दिन का एसा टाइम होता है जहा भीड़ मे भी मे खुद से मिलती हु ओर मेरे खुद से मिलने का या मेरे खुदा से मिलने का समय! ओर यह समय मांग रहा था चेतन”

कॉल कीया उसे सोर्री कहने के लिए घरपे पोहोचने के बाद भी घर पे कोई था नही इसी वजह से बाते चली ढाई घंटे हो गए पहली बार पता नहीं चला वीडियो कॉल की फरमाइश पे भाव खाने के बाद अपना चेहरा दिखा भी दिया , नचरल ब्यूटी का खिताब भी मिल गया लेकिन सबसे जादा बात हुई राहुल के बारे मे 

“केसे दोस्त थे हम , केसे अपनी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात बाटते थे , केसे तेरे लिए बायोदाता देखते थे, केसे स्वीती तेरे लाइफ मे आई , केसे तू मुजे भूल गया ओर केसे मे आज भी तुजे नहीं भूली !”

चेतन ने बताया के उसके लिए भी अब तक 45 से जादा लड़किया देखि जा चुकी है इस्स बात पे स्तुति हसने लगी! 

चेतन को उसकी हसी बोहोत पसंद थी एक बार क्या हुआ पता है शादी मे गए थे तभी पापा ने एक साथ 6 लड़किया दिखा दी के इस मे से जो भी पसंद आ जाए उससे शादी करवा देंगे ओर केसे उसे फोर्स किया उस लड़की के साथ डांडिया खेलने के लिए ओर वो नहीं गया!

इस बात पे स्तुति कितना हसी के गए होते तो कितना मज़ा आता ओर माना ही करना था तो खा माँ खा सबको उम्मीड़े क्यू बंधवाना के कितना हैंडसम बंदा जो इतना अच्छा नाच रहा है उसने शादी के लिए माना कर दिया लेकिन सीरियसली 45 लडकीया! 

स्तुति इतना हसी इतना हसी के ‘आंखे’ भर आई! उसस रात वोह चेन की नीद सोई सुबह सुकून से उठी उठते ही चेतन को गुड मॉर्निंग विश किया! हमेशा के जेसे लेट थी ऑफिस के लिए! 

आज पहली बार ओफिस जाने के लिए वो तैयार हुई देखा चेहरे पे अलग ही चमक थी एक रोनक थी रास्ते मे चेतन से बात होती रही 

चेतन : “ रात को जल्दी सो जाना चाहिए था ना किसी से भी फोन पे बात करती रहती है “

स्तुति : “ अच्छा अब से सो जाया करूंगी तेरी तरह मेरी नींद कम नहीं है”

चेतन : “एसा मत करना मुजसे बात कोण करेगा “

स्तुति : “उन 45 मेसे किसी एक को हा बोल देता, पूरी रात बात करती, स्पेशल ट्रेटमेंट भी देती “

चेतन : “ओर, फिर सुबह काम पे जाने का मन नहीं करता “

स्तुति : “तुम तो एसे कह रहे हो जेसे शादी के बाद कोई काम भी नहीं करता सब बस अपने बीवी के पल्लू मे घूसे रहते है “

चेतन : “लेकिन स्टार्टिंग के एक साल तो नशा रेहता है ना “

स्तुति : “हा तो वो रेहता है “

इस बार चेतन ने पहले से ही याद दिला दिया था के शाम को साथ जाना है स्तुति उसका इंतजार मे रुकी थी खुश थी स्तुति तभी सहेली के कॉल आने पर बात करने लगी तभी चेतन दिखा बात करते – करते दोनों ऑटो मे बेठ गए! 

तीसरी पासेंजर लड़की आने की वजह से चेतन को आगे बेथना पड़ा! तो उसे गुस्सा आ गया औटोवाले से बहस करने लगा स्तुति को ये बात बिलकुल अछि नहीं लगी! 

आधा रास्ता काटने के बाद जब वो पास मे बेठा तो चेतन ने उसके गाल खिचे “बोहोत हसी आ रही है” कहके! अच्छा नहीं लगा दूसरी बार तो मिले थे ओर चेतन बात- बात पे मानो उसे छूने की ही कोशिश कर रहा हो एसा लगा उसने ध्यान से उसकी आंखो मे देखा एक नेगेटिव वाइब मिली !

उसकी हसी गायब हो गयी!

उसने आंखे बंध की राहुल ने जब उसे पहली बार देखा था वोह याद किया! 

वोह बच्चो सी मासूम आखे , वोह उसके लिए छलकता स्नेह , उसकी आंखो से उसका दिल पढ़ सकते थे जब झूठ बोलता तो केसे आंखे चुरा लिया करता , गंदी नजर से कभी उसने स्तुति को नहीं देखा छूने की बात तो बोहोत दूर की बात है! एक हाथ की दूरी हमेशा रेहती दोनों के बीच! 

जब भी राहुल की नजर असपे पड़ती वोह आम से खास बन जाती ओर चेतन की नजर देख के एसा लगा मानो कोई भूखी बिल्ली दूध को देख रही हो !

स्तुति ने जब चेतन को साफ-साफ शबदों मे बता दिया के देखो तुम ने मेरे गाल पकड़े मुझे बिलकुल अच्छा नही लगा तब उसका रिएक्शन था मेने कोई गलत जगह पे नहीं छूवा तुम एसे कह रही हो। 

स्तुति ने कहा की देखो “मुजे किसी के साथ भी कमफर्ट जोने बनाने मे देर लगती है , तो उसने कह दिया वेसे तो तू थोड़े दीनो के बात भी यही बोल देगी ना!

थोड़ी देर बाद चेतन का सोर्री का मेसेज आया के मूड खराब था कुछ भी अनाप-सनाप बोल गया 

स्तुति ने मन ही मन ठान लिया की मेरी वाइब्स गलत नहीं हो सकती इसका मकसद डुढना ही पड़ेगा !

वेसे भी उसका लाइफ लेसन के जब भी कोई भी खून के रिसते ओर दोस्त यारो के अलावा! आप के पीछे बिना मतलब पेसे बिगड़े संभाल जाओ या तो वो आपमे इन्वेस्ट कर रहा है या इन्टरेस्ट ले रहा है 

स्तुति ने मन ही मन तेय कर लिया के वो अपने इस सिक्स्थ सैन्स को सच साबित कर के रहेगी उसने चेतन से बात करनी सुरू की , बिना कोई फीलिङ्ग्स जोड़े ! कुछ ही दिनो मे सिर्फ यह कहने पे के वो गर्ल फ्रेंड मटिरियल नहीं है उसका रिप्लाइ कुछ एसा आया के ,

अगर तूम हा कहो तो हम साथ रेह सकते है , गर्ल फ्रेंड – बॉय फ्रेंड बनके नहीं लेकिन दोस्त बनके हम दोनों की लाइफ मे कोई था जिसे हम भूलना चाहते है , हमारी कास्ट अलग है शादी नहीं कर सकते लेकिन हम लोग मूवी जा सकते है , घूमने जा सकते है ओर बाकी सब तरह के मज़े कर सकते है !

फ्रेंड्स विथ बेनेफिट्स 

हा एसा ही कुछ मेरी शादी के बाद भी हम दोस्त रहेंगे मिलेंगे सारे रिलेशन रहेंगे !

स्तुति समज गयी ! सारे तरह के मज़े का अर्थ ! फ़्रेंड्स विथ बेनेफिट्स ! हा कुछ समाज मे मुखोते पहने लोग इसे टाइम पास कह सकते है वेस्टन कल्चर कह सकते है! लेकिन यह नाम ‘फ़्रेंड्स विथ बेनेफिट्स’ भारत के लिए कुछ नया नहीं है ! कुछ अनामी रिस्ते होते थे बस उसका नामकरण किया गया है ! दोस्त एक फायदे अनेक ! ओर अगर एक तरह से देखा जाए तो कुछ बुरा है भी नहीं ! शादी के जूठे वादे नहीं पूरी ज़िंदगी साथ निभाने के वादे नहीं ! “बस तुम आज मेरे साथ हो वही काफी है” टाइप फलसफा !

एसे अनामी रिस्ते तब पनपते है जब या तो आपको किसी की इमोशनली जरूरत हो या फिजिकली ! 

जिसमे कोई नियम-कानून नहीं , जी हा सही पढ़ा आपने यह अनामी रिस्ते सिर्फ हवस के लिए नही होते कभी – कभी रूह के भी होते है ! ओर पहले से ही पता होने के करण बिछदने पर शायद दर्द भी कम होता होगा लेकिन तब तक – जब तक सवेदनाए जुड़ न जाए ओर घर मे एक कुत्ता पालने पर उसे भी अपनी औलाद जितना प्यार करने लगते हो आप तो यह “दोस्त एक.....” आपके लिए नहीं बना ! उनके लिए सही है जो सिर्फ शारीरिक ज़रूरत के लिए रिस्ते बनाते है ओर खतम हो जाने पर तोड़ते है इसमे दोनों के मज़े है लड़का-लड़की दोनों के तब तक – जब तक भावनाए जग न जाए दोनों की जाग गयी तो फिर क्या बात है तब तो वो रिस्ता इश्क जुनून की सारी हद तोड़ देगा लेकिन एक तरफा मीरा जेसा जोग दिला देता है !

एसे ही ख़यालो मे डूबी हुई थी स्तुति तब मेसेज आया “तुम्हारे मेसेज का इंतज़ार कर रहा हु”

सोचना कुछ जादा पड़ा ही नहीं ना कर दिया ! अरे यार अगर एक साल बाद अगर राहुल को इतना याद करती है वो भी बिना कोई फिसिकल रिलेशन के तो पता नहीं इस से कितना अटेच हो जाती वेसे कोई खास भावना है भी नहीं इसके लिए ! कुछ खास है भी नहीं यह चेतन 

चेतन ने बोहोत समजाया , मनाया ओर बात अटकी एक लब्ज पे हार्ट-लेस !

जी हा चेतन ने स्तुति को हार्ट-लेस का बिरूद दे दिया क्यूकी चेतन ने कहा के मे तुमसे बात करूंगा तो मौजे तुमहारी जादा तलब होगी यह कहने पे स्तुति के कहा ठीक है ब्लॉक कर दो मुजे ओर बदले मे मिला बिना दिल वाली लड़की होने का मशहूर खिताब !

ब्लॉक अँड रिपोर्ट !

वाह क्या खिताब मिला स्तुति को हार्ट लेस ! सोचो अगर सिर्फ कुछ दिन की मुलाक़ात मे इतना बोल दिया या कहे इतना लगाव हो गया तो क्या यह फ़्रेंड्स विथ बेनेफिट्स मुमकिन है अगर यह मुमकिन होता तो होती स्तुति हार्ट लेस !

सही कहा ना ?


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