शादी के बाद का प्यार
शादी के बाद का प्यार
पहली बार मैंने नन्दनी को उनके चाचा के यहाँ देखा था। बहुत ही साधारण सी थी वो थोड़ी डरी डरी भी लग रही थी, जब हम दोनो को आमने सामने बिठाया गया था। हम दोनो ही अभी शादी जैसे बड़े बंधन में नहीं बंधना चाहते थे। मुझसे मेरी राय पूछी गई मुझे तो लड़की बहुत पसंद थी पर किसी ने भी नन्दनी से उसकी राय नहीं जानी और आख़िरकार हमारी शादी हो गई।
शादी के पन्द्रह दिन तक हम एक दूसरे के नज़दीक नहीं आए क्यूँ कि नन्दनी को मैं पसंद नहीं था। किसी तरह मैंने उन्हें दोस्ती के लिए मनाया और धीरे धीरे एक दूसरे के पसंद नापसंद को समझा। ये घर उनके लिए नया था, लोग नए थे, सारे लोगों को समझने में मैंने उनकी मदद की धीरे धीरे मैंने उनका भरोसा जीता। अब वो मुझसे अपने दिल की हर बात बताने लगी। हमलोग काफ़ी घुलमिल गए थे।
अचानक एक दिन उन्हें अपने मायके जाना पड़ा। मेरा किसी भी काम में मन ही नहीं लगता था। मैंने उन्हें अपने दिल का हाल बताया मोबाइल के माध्यम से उन्होंने मुझे वहाँ उनके घर बुलाया मिलने के लिए लेकिन एक शर्त रखी कि मुझे एक प्रेमी की तरह छुप के मिलना होगा। मैं बहुत खुश हुआ और अपनी मोटरसाइकल से चला गया। ये सिलसिला काफ़ी दिनो तक चलता रहा मुझे भी प्रेमी प्रेमिका की तरह मिलने में बहुत आनंद आता था।
प्यार तो मुझे हो गया था उनसे पर हिम्मत नहीं थीं इज़हार करने की पर करना तो था। एक दिन मैंने प्यारे से तोहफ़े के साथ प्यार का इज़हार कर ही दिया और मेरी ख़ुशी उस वक़्त दोगुनी हो गई जब मुझे उनका जबाब हाँ में मिला। हम दोनो एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे। आज तीन साल हमारी शादी को हो गये एक प्यारा सा बेटा भी है कर्तव्य एक साल का जो की हमारे प्यार की निशानी है।

