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सफ़र

सफ़र

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सुरेखा लम्बे लम्बे डग भरते हुए अस्पताल की ओर जा रही थी। उसकी सहेली साधना कभी उसके साथ पढ़ा करती थी, आज एम्स में भर्ती जिन्दगी मौत से जंग लड़ रही थी। उसे बचपन की स्मृतियाँ झकझोररही थी। अभी कल की बात है जब वो दोनों अपनी अपनी मास्टर डिग्री लेकर कैम्पस से निकल रही थी। हंसते खिलखिलाते दोनों अपने में खुश थी। दोनों ने जाकर पार्क में खूब मस्ती की।

फिर अपने-अपने घर को जाने के लिए दोनों तैयार थी। आज आँखों से अश्रु टपकने लगे। दोनों अपने अपने जीवन पथ पर चलने के लिए चल पड़ी। इधर सुरेखा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करके एक नये जीवन की शुरुआत की। उसकी शादी भी उसके मित्र महेश से हो गयी। दोनों अपनी जिंदगी में खुश थे। उनके दो बच्चे रजनी व मोहित हुए। बच्चे भी बड़े हो गये। सब अपनी अपनी पढ़ाई में मस्त थे।

रजनी आज एम्स में डॉक्टर हो गयी। मोहित अभी इन्जीनीरिंग कर रहा था। उधर सुरेखा ने पीएचडी इकोनॉमिक्स किया और एक कॉलेज में प्रोफेसर हो गयी। उसकी शादी एक प्रोफेसर रोनित के साथ हो गयी। उनकी जिंदगी भी खुशियों से भरी थी। उसके तीन बच्चे सोहन, सोहा और आरव भी पढ़ चुके थे। सोहन बैंकर,आरव प्रोफेसर तथा सोहा साइंटिस्ट हो गयी थी। एक दिन साधना व उसके पति रोनित कार से जा रहे थे कि सामने से आ रही ट्रक ने जोरदार टक्कर मारी। रोनित को हल्की चोटें आयी परन्तु साधना बुरी तरह जख्मी हो गयी। उसे एम्स में भर्ती कराया गया जहां उसका इलाज डॉ रजनी कर रही थी।

उसके बचने की उम्मीद न के बराबर थी। साधना के बच्चों व पति की बुरी हालत थी। इसी बात से व्यथित रजनी ने यह बात अपनी माँ को बताया। साधना का नाम व पता सुनकर वह परेशान हो उठी कि कहीं यह उसकी सहेली तो नही !यही विचार उसके मन मस्तिष्क में कौंध रहे थे। इस चिन्ता में उसके पग आज अस्पताल की ओर थे। वह जब पहुंची देखा साधना ही थी। वो जोर से उसे भींच कर रोने लगी। साधना का शरीर निष्प्राण हो चुका। सुरेखा कहीं खो सी गयी। आसपास सभी लोग गमगीन हो गये, किंतु इन सबसे इतर साधना एक अंजान सफ़र की ओर चल पड़ी । एक ऐसा सफ़र ....जो अनन्त की ओर जाता है।


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