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Rafat khan

Tragedy


2.5  

Rafat khan

Tragedy


सेख मास्टर की गरीबी

सेख मास्टर की गरीबी

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आज ये देख के मुझे बस हंसी आ गयी एक इंसान जो करवार के हेड क्वाटर में पुलिस की नौकरी कर चूका है अपने ही घर के अंदर से दरवाजे बंद कर के अपने ही खिड़कियों से डर के झांक रहा था। वजह थी एक नारी। आज दिवाली की लक्समी पूजा थी और मेरे ऑफिस की छुट्टी थी। आज एक लड़की सुबह के चार बजे उठी पैरो में चलने की ताक़त न थी मन में वैस्या कहलाने का डर। फिर भी जीवन के सवाल इतने बड़े थे की जाना ही था। मौसम तूफानी था और मौसम विज्ञानं के अनुसार करवार में बहुत बारिश होने की संभावना थी। फिर भी एक लड़की के मन के अंदर के तूफान बहार के तूफान से काफी खतरनाक था। और लड़की डरी नहीं  बस अपने सवालो के जवाब ढूंढने निकल पड़ी। सुबह के 4 बजे अपनी स्कूटी की चाभी ली और साइक्लोन के इस तूफानी मौसम में स्कूटी से निकल गयी। अक्टूबर 26 लक्समी पूजा के दिन करवार में मौसम इतना ख़राब था की अँधेरे के कारण राश्ते तक दिखाई नहीं दे रहा था फिर भी देश की एक निडर लड़की अँधेरे राश्ते में स्कूटी की लाइट की मदद से 100 किलोमीटर का राह

तय कर के शाहिद सेख के घर का राश्ता पूछते हुए करवार पहुंच गयी। वहां पहुंचने के बाद लड़की को पता चला शाहिद सेख एक ड्राइवर है और कार चलाता है। अब लड़की शाहिद सेख के दरवाजे पे पहुंच के आवाज लगाई शाहिद -शाहिद अंदर से उसके बाबा निकल के आये और शाहिद को बहार बुलाया। सुबह सुबह एक लड़की को अपने दरवाजे पे देख के वो बस हैरान हो गया और पूछने लगा क्या हुआ ?लड़की ने कुछ नहीं कहा और पूछने लगी बताओ फैसल सेख का घर हेड क्वाटर में कहा कहा है। शाहिद ने बताया के फैसल सेख के पिता का नाम हान सेख ह और वह पहले करवार के हेड क्वाटर में रहते थे लेकिन अब वह रिटायर हो गए है और वो लोग अब उन्नावर में रहते है उनको लोग सेख मास्टर के नाम से जानते है। एक लड़की जो सुबह के ४ बजे से ड्राइव कर के १०० किमीटर की यात्रा 8:30 तक तय कर के करवार पहुँचती है ये जान के परेशान हो जाती हैं के अब वो यह से फिर से 100 किलोमीटर की यात्रा तय कर के उन्नावर कैसे जाएगी अगर पहुंच भी गयी तो वापस आने में 4 घंटे तो लग ही जायेंगे फिर भी मन के तूफान के आगे ये १०० किलोमीटर की यात्रा भी काम था।   

हुआ ये था की एक लड़की जो मास्टर की एक छात्र थी अपने जीवन में 24 की आयु में अपने लिए एक अचे वर की तलाश में थी। लड़की मास्टर के साथ साथ पीएचडी के लिए कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन के झेत्र में नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग पे रिसर्च पेपर भी लिखने की कोसी स कर रही थी। अथात लड़की इस बात पे रिसर्च की तयारी कर रही थी की एक मशीन को इंसान के जैसा सोचने कैसे सिखाया जाये। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। इस दौरान लड़की को फैसल सेख नाम के एक युवा से प्यार हो गया। फैसल सेख से लड़की का परिचय फेसबुक से हुआ था और बात चित करते करते प्यार हो गया। फैसल सेख जो बकरीद की छुट्यो में दुबई से 20-25 दिन के लिए करवार अपने परिवार के पास आया था। फेसबुक पे दोनों में इतना प्यार बढ़ चूका था की दोनों ने मिलने का फैसला किया पर लड़की के लिए किसी से पहली मुलाक़ात में ही होटल में मिलने जाना अजीब बात थी पर लड़के ने लड़की को इतने प्यार से समझाया की लड़की होटल में मिलने के लिए तैयार हो गयी।

और दोनों 23 अगस्त को आखिर वो दिन आ ही गया जब दोनों एक दूसरे से किसी रोड के चौराहे पे मिले। बारिश का मौसम था और फिर उन्होंने होटल में जाने का फैसल किया। और दोनों होटल में गए लड़के ने अपनी हवश पूरी की सायद वो वही लेने आया था निकाह तो सिर्फ एक बहाना था।

पता नहीं क्या सच और क्या झूठ। होटल में मिलने के बाद लड़की घर आ गयी। अब तो सायद दुनिया ही बदल चूका था लड़की बार बार लड़के से बात करने की कोसिस करती रही पर लड़के की तरफ से जवाब काम हो गया और एक जवाब आया मुझे आप अछि नहीं लगी मैंने मेरे लिए दुबई में लड़की देख ली ह। और फिर लड़के ने लड़की के नंबर को ब्लॉक लिस्ट में दाल दिया लड़की लाख कोसिस करती रही पर जवाब कुछ भी नहीं आया। एक दिन किसी तरह लड़की ने लड़के के दोस्त को कांटेक्ट कर के के लड़के के बारे में पूछा तो उसी समय लड़के को फ़ोन आया के क्यों पीछे पड़ी हो मेरे यार मेरी इंगेजमेंट होने वाली ह। अब मै तुम्हे दुबारा कॉल नहीं करूँगा। बस लड़के ने इतना कहा और फ़ोन काट दिया लड़की रोती रही। पर अबतक लड़के का कोई फ़ोन नहीं आया।

लड़की उदास हो गयी रो रो के हल बुरे हो गए। फिर किसी तरह लड़की ने लड़के के एक बहन को कांटेक्ट कर लिया और बहन ने बताया की उसकी कोई इंगेजमेंट नहीं होने वाली ह मै उसके लिए लड़की धुंध रही हु आप अपनी तस्वीर दे दो मै अपने माता पिता से बात करुँगी और अपने भाई को भी समझाउंगी। एक लड़की जो मास्टर की एक छात्र थी एक अछि नौकरी करती थी और नेट के साथ रिसर्च पेपर लिखने के लिए तयारी कर रही थी अपने आप से हार गयी। और इतने पढ़ी लिखी होने के बावजूद लड़के का कोई जवाब न आने पर स्कूटी चलाते समय अपनी आंखे बंद कर लेती है। और एक्सीडेंट के कारण लड़की के दाहिने हाथ में चोट आ जाती ह और अब वो कुछ लिखने लायक नहीं रही। जब लड़की ने लड़के के बहन को बताया के उसने आत्महत्या करने की कोशिश की तो लड़की की बहन ने सायद लड़के को बताया और फिर लड़की की बहन ने लड़की को कॉल किया अब तो ये लोग और भी बदल गए थे। बहन ने बताया के लड़ने ने हम सब को बताये बिना दुबई में शादी की है।

लड़के की बहन अब पूरी तरह बदल चुकी थी आप की जगह उसने तुम शब्द का इस्तेमाल किया और लड़की को गन्दी गन्दी गालिया दी। फिर एक जवाब आया फेसबुक पे यार क्यों पीछे पड़ी हो मै शादी सुदा हु और मेरी बीबी माँ बनने वाली है। अब तो लड़की जो पीएचडी के सपने देख रही थी उसके लिए एक कदम का सफर तय करना भी मुश्किल था। हसने खिलखिलाने वाली लड़की समाज को नयी पेरेना देने वाली लड़की आज खुद ही हार चुकी थी। और रो रो के जीने लगी के कैसा सैतान आया था अपनी हवश पूरी करने फिर भी लड़की का मन नहीं मन रहा था था और वो अपने सवालो का जवाब लेने जिस ड्राइवर के साथ फैसल सेख मिलने आया था उस से मिलने पहुंची।

और इस तरह ड्राइवर जो फैसल सेख का रिश्तेदार भी था।

बताया के सेख मास्टर के रिटायर होने के बाद अब वो काजू बाग हेड क्वाटर में नहीं रहते अब वो उन्नावर में रहते ह 100 किलोमीटर दूर। लड़की ने बस समय देखा और और चल पड़ी और इतनी लम्बी दुरी तय करने के बाद लड़की अब लड़के के दरवाजे पे कड़ी थी की लड़के से पिता से मिलेगी। लड़की ने जब दरवाजे पे खड़े हो के आवाज लगाई तो लड़के के माता पिता दादी और बहन सब घर के बाहर आ गए जब लड़की ने पूछा के क्या ये फैसल सेख का घर ह ?पूरा परिवार चुप था फिर लड़की ने पिता को उसकी फोटो जो फैसल सेख ने अपने माता पिता कह के दिया था। अजीब बात थी एक इंसान जो पुलिस में काम कर चूका था अपनी ही तस्वीर देख के कहने लगा मुझे नहीं पता ये कौन ह। लड़की फिर भी दरवाजे पे खड़ी रही और अंत में लड़के की बहन ने लड़की को घर के अंदर बुलाया। बाबा का सर झुका हुआ था कहने लगे हमे बताये बिना उसने दुबई में शादी की है। और तो और बाबा की बातो से लड़की को पता चला के ये कोई पहली कांडा नहीं ह जो लड़के ने किया लड़कियों के साथ ऐसी हरकत करता ह। अब लड़की को ये समझ में आ गया था के लड़का सिर्फ अपनी हवश पूरी करने आया था।

रोती हुयी लड़की को बाबा ने कहा मैं तुम्हें दुआ देता हूँ। लड़की की बहन ने बताया के हम चार बहनों का एक भाई है। ये शायद इसलिए हम उसे बर्दास्त करते ह वो ऐसा ही ह। हवशी। । लड़की के पास अब कोई जवाब न था जिस बहन से वो बात कर रही थी वो भी उन्नावर के पुलिस में थी लड़की बस पूछ बैठी घर में दो दो वर्दी वाले लोग और बीटा ऐसी हरकत करते चलता ह। वो कहते ह ना रक्षक के घर में भक्षक।

लड़की सोच में डूब गयी अब किस पुलिस के पास जाऊँ जिस घर में दो दो वर्दी वाले लोग उसका बेटा ही हमारे देश की बेटियों को लूट रहा है। लड़की घर के बाहर आ गयी। लड़के की वो बहन जिस से वो बात करती थी भटकल में शिक्षक की नौकरी करती है। उसने तो लड़की को वैश्या भी कहा। पूछा था के बता तू कितने में बिकेगी ? लड़की लड़के के घर के बाहर खड़े हो के सोचने लगी कि एक नारी की कीमत लगाने वाले लोग शायद बहुत अमीर। होंगे लड़की ने बस दो चक्कर लड़के के घर के आसपास लगा दी। जो सेख मास्टर कभी वर्दी पहना करता था दर से अपने ही घरो में चुप के खिड़कियों से झांक रहा था। ये वही सेख मास्टर जो थोड़ी देर पहले एक लड़की को कह रहा था मैंने पता किया तुम कॉल गर्ल नहीं हो डर के चुप गया।

लड़की को सब समझ में आ गया था के ये लड़का फैसला किस तरह हमारे देश की भोली भली लड़कियों को फंसा कर अपनी सेक्स की प्यास बुझाता है और जब घर वालों को पता चलता है तो वो लड़कियों को वैश्या कह के अपने दामन साफ करते हैं। अब तक लड़की को ये विश्वास नहीं हुआ के एक इंसान इतना बुरा कैसे हो सकता है। अब तक लड़की इस सच को स्वीकार नहीं कर पायी कि ये प्यार नहीं सिर्फ एक लड़के ने अपनी हवस पूरी करने के लिए एक लड़की का इस्तेमाल किया। बस कुदरत के इस फैसले से एक लड़की बस हैरान है क्योंकि कहा जाऊँ, कौन इसका इंसाफ करेगा ? कब होगा कुदरत का इंसाफ ?

लेखक का विचार -----जैसे हर कहानी में लिखा होता है इस कहानी का उद्देश्य किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाना नहीं है |ये कहानी किसी भी जाती ,धर्म और व्यक्ति विशेष के भावनाओ को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं लिखा गया है | इस कहानी में लिए गए पात्रो ,जगह का नाम और दिनांक  महज एक कल्पना है | पर क्या हम ये कह सकते है के ये कहानी आज हमारे समाज में हो रहे बुराइयों को नहीं दर्शाता ह |इस कहानी में जिस काल्पनिक फैसल सेख का नाम लिया गया है ना जाने ऐसे फैसल सेख अपने बाप और बहन की वर्दी और सोहरत का फायदा उठा के हमारे देश के कितने बेटियों को लूट रहे हैं। क्या ऐसे लुटेरों से हमारा समाज आज़ाद है ? क्या गलती थी एक लड़की की। विश्वास ही तो किया किसी पे ? दुनिया तो विश्वास पे ही टिकी है ? इसका इंसाफ कौन करेगा ? क्या वो कुदरत जिसने एक रेसेअर्चेर को इस हवशी से मिलाया वो इसका इंसाफ करेगी ? 


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