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Rafat khan

Crime Inspirational Romance


2.5  

Rafat khan

Crime Inspirational Romance


अस्तित्व

अस्तित्व

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डॉक्टरेट की उपाधि एक बहूँत बड़ी बात है वो भी मेरे लिए सायद मेरी दुनिया। जब मैं कच्छा 8 में थी तब टीचर मिनकाची किसी हिंदी की कहानियो के किताब से रेडियम के खोज के बारे में बता रही थी  उन्होंने बताया की किसी 28-29 साल की महिला ने अपने पति की मदद से इसका खोज किया और डॉक्टरेट की उपाधि ली। मेरे दादा जी डॉक्टर थे मेरी बहैन हमेशा कहा करती थी वो भी दादा जी की तरहै डॉक्टर बनेगी और मेरे दादा जी का एक सपना भी था के उनके बच्चे डॉक्टर बने। पर मेरे जैसी लड़की जिसे खून देख के ही डर लगता था तो किसी का इलाज मैं कैसे कर सकती हूँ?ये कहानी मेरे लिए अजीब था बिना डॉक्टर बने डॉ। वो कैसे बार बार सवाल करने लगी टीचर से के आखिर ये पीएचडी है क्या ?जो इंजेक्शन नहीं दे सकता क्या वो भी डॉक्टर बन सकता है ?

ये कैसे हो सकता है अब मन में सिर्फ अजीब अजीब सवाल थे क्या,कहाँ,कैसे और हैमारे टीचर के बड़े बड़े जवाब,पर इन जवाबों को समझना भी मेरे बस की बात न थी। पर फिर भी डॉ ये सब्द मेरे लिए बहूँत ही खुशियों से भरा था मैं खुश हो गयी के मैं बिना इंजेक्शन के भी डॉक्टर बन सकती हूँ मैं भी मेरे दादा जी का सपना पूरा कर सकती हूँ। टीचर की आँखों में देखा और कहाँ मैंम मैं ये डॉ की उपाधि जरूर लुंगी मैं भी डॉ बनूँगी। मैं पीएचडी जरूर करुँगी। मैं मेरे नाम के आगे डॉ जरूर लगाउंगी। बस ये वही दिन था जबमैंने एक सपना देखा था डॉ बनने का|और आँखों में एक और सपना था के किस तरह रेडियम की खोज करने वाली महिला के पति ने उसकी मदद की हैमारा भी जीवनसाथी अगर मैं कहि डगमगा जाऊ तो मेरी मदद करे। |जीवनसाथी और डॉ दोनों सब्दो के मतलब से अनजान एक 13 साल की लड़की ने उस दिन अपने खुली आँखों से अपने पलकों पर ये सपना सजाया और आज बरसो के इंतजार के बाद आखिर हैमारे जीवन में वो दिन आ ही गया जब मैं मेरे पीएचडी के लिए संघर्ष कर रही हूँ। डॉ की उपाधि के लिए तैयार हो रही हूँ। पीएचडी की टॉपिक धुंध रही हूँ। कुछ सपने ऐसे होते है जो हैमारे लिए हैमारा जीवन होते है। और जब हैम कुछ सपने खुली आँखों से देखते है तो उसे पूरा करने के लिए हैमारे राश्ते में क्या कठिनाईया आती है हैम उसे देख नहीं सकते।

आज 24दिसंबर 2019 मुझे एक ईमेल आया नोशन प्रेस की तरफ से जिस में लिखा था अगर आप ने अपनी कहानी पूरी तरहै लिख ली हो तो क्या हैम इस कहानी को हैमारे प्रेस के जरिये छाप दे और ये कहानी अब अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे वेबसाइट पे बिकेगी। हैम ने नोशन प्रेस वालो को कॉल किया तो मुझे पता चला के उन्हों ने मेरी कहानी स्टोरी मिरर के वेबसाइट पे पढ़ी और उन्हैें ये कहानी अछि लगी इसलिए वो मुझे लिखने के लिए कहै रहैे थे ताकि वो इस कहानी को छाप के बेच सके। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था के मैं मेरे प्यार के कहानी को लिख के इस तरहै दे दूंगी ताकि ये कहानी बिक सके। सोचा नहीं था के मेरा प्यार एक कहानी की तरहै किसी किताब में छप जायेगा।

बात तो सच है जबतक दिखोगे नहीं तो बिकोगे कैसे और अगर बिकोगे नहीं तो अनमोल कैसे बनोगे। सायद ये कहानी किसी किताब में छप जाये दुनिया के हैजारो लोग पढ़ ले पर क्या ये कहानी मेरे प्यार फैसल सेख की आँखों में दो बून्द पानी भर पायेगी क्या ये कहानी उसे ये एहैसास दिला पायेगी के आखिर उसने क्या किया है ?आखिर उसकी मॉडर्निटी की सोच ने एक लड़की के दिल पर क्या असर किया है ? सायद नहीं,क्यों की जो रिश्तो की मर्यादा नहीं समझ सका वो सब्दो का मतलब कैसे समझ सकता है !

हर कोई कहानी नहीं लिख सकता हैर किसी में ये गुण नहीं होता के वो अपने विचारो को लोगो तक पंहूँचा सके और इसलिए नोशन प्रेस ने मुझे जो किताब छापने का अवसर दिया थामैंने उसे स्वीकार किया और लिखने लगी| क्या ये कहानी फैसल सेख को ये एहैसास दिला पायेगी ये कैसी मॉडर्निटी की सोच जो जो रफत खान को पुलिस स्टेशन जाने पे मजबूर कर दे?ये भाई की कैसी सोच जिसके कारण उसकी बहैन दिलसा सब को वाना पुलिस स्टेशन आना पड़ा? ये कैसी सोच जिसके कारण वर्दी पहैनने वाले हान सेख का सर एक लड़की के सामने झुका था ?ये कैसी सोच ये कैसा प्यार जिस के कारण नवशा सेख के आँखों में आंशु भर जाये ?ये कैसा विस्वाश जिसके कारण दिलसा सब को हाथ में एक लड़की को मारने के लिए चप्पल उठाना पड़े ? एक लड़की जो अपने पीएचडी की पढाई और अपने जीवनसाथी के विषय में बहूँत चिंतित थी आज 24 की आयु में मुझे अब ये लगने लगा सायद मुझ में कुछ कमी है इसलिए आजतक मुझे कभी प्यार नहीं हूँआ ये मैं अपने आप में बहूँत परेशान थी क्युकी मुझे हर लड़के में कुछ न कुछ कमी नजर अति थी। लड़के तो हैमारे जीवन में बहूँत ही अच्छे अच्छे मिले पर आजतक किसी पे इतना विस्वास नहीं हूँआ के ये मेरे जीवन के लिए सही है। और इनसब कारणों से मैं बहूँत चिंतित थी। घर वालो की भी अपेछा थी की मेरे जीवन में कोई लड़का आये|अब तो उम्मीद भी ख़त्म हो गयी थी की मुझे प्यार होगा मैं बस यही सोचती थी आखिर कैसे एक लड़की किसी लड़के पे आंखे बंद कर के भरोसा कर सकती है ?क्यों मुझे तो हैर लड़के में कुछ न कुछ कमी ही दिखाई देता है। मैं बहूँत परेशान थी और सोचने लगी हो सकता है सायद मुझे एक अच्छी दुनिया मिली है और मैं अपने अच्छी से जीवन से सायद बाहैर नहीं आना चाहैती हूँ। जीवन में सायद मैं कुछ जयादा ही उम्मीद रखती हूँ।

शायद अबतक कोई ऐसा मिला नहीं जिस से मैं आज आखिर मेरे जीवन का सायद वो दिन था जब मैं फेसबुक पे ऑनलाइन थी 16 अगस्त

11:29 2019 जब मैं ऑफिस में बैठी थी तभी एक मेसेज आया हाय रफत कैसी हो। इस इंसान को सायदमैंने 5-6 दिन पहैले अपने फ्रेंड लिस्ट में जोड़ा था। लड़के ने कहा सायद आप ोयस्त नहीं होमैंने हाँ कहा फिर उसने कहा जब तुम्हैे समय मिले मुझे बता देनामैंने कहा ठीक है। फिर थोड़ी देर बादमैंने मैंसेज किया के मेरे पास टाइम है अब बताओ क्या बात है क्यों की वो तो लंच टाइम था और मेरे पास टाइम ही टाइम था। कहने लगा कहा से होमैंने कहा गोवा|उसने फिर पूछा नमाज पढ़ ली क्यामैंने कहा अबतक तो नहीं। आप क्या करती हो जॉब या पढाईमैंने कहा फ़िलहाल तो अभी ऑफिस में हूँ। कहने लगा चलो एक दूसरे को जानते है आशा है मैं आपसे जयादा निजी बाते नहीं कर रहा हूँमैंने कहा क्यों ?मैं आपको जयादा मनोरंजित नहीं कर सकती और है मुझे गर्ल फ्रेंड बॉय फ्रेंड रखना बिलकुल पसंद नहीं है। कहने लगा मुझे भी गर्ल फ्रेंड बॉय फ्रेंड रखना बिलकुल पसंद नहीं है|मैंंने तो साफ साफ कहा मजाक कर रहैे हो कहने लगा मैं तो निकाहै के लिए एक लड़की धुंध रहा हूँ। मैं 29 का हूँ और इस साल शादी करने वाला हूँ। मैं निकाहै के लिए लड़की देख रहा हूँ। आप भी पूछ सकती हो आपको जो भी पूछना है मुझ से। पता नहीं क्यों आज इस इंसान पे मुझे यकीन आ गया पता नहीं क्यों मुझे उसकी बाते झूठी लगी ही नहीं।मैंने कहा मेरी बहैन है और मेरी उम्र 25 चल रहा है। उसने कहा ाचा और क्या करती हो आप ?मैंने बताया के मैं बी सी ए हूँ और मैं एम् सी ए के साथ साथ नेट के लिए तैयारी कर रही हूँ ताकि मैं पीएचडी कर स्कू। कहने लगा ये तो बहूँत अच्छा है तो कब करनी है आपको शादी ?मैं ऑफिस के कंप्यूटर से ऑनलाइन थी

इसलिएमैंने उस से कहा के मेरा वाट्सप नंबर ले लो मैं फेसबुक पे जयादा देर बात नहीं कर पाऊँगी। उसने मैंसेज किया रफत?मैंंने कहा हाय आपने मुझे गलत नंबर दिया फैसल हूँ और ये मेरा नंबर है डिअरमैंने कहा ठीक है सायदमैंने ही गलत नंबर लिखा होगा। कहने लगा नहीं ये मेरा दुबई का नंबर है मैं चौक गयी क्या आप दुबई में हो?उसने बताया के फ़िलहाल मैं हिंदुस्तान में हूँ बकरीद मनाने दुबई से 11 अगस्त को आया हूँ और जल्द ही वापस चला जाऊंगा। उसने मुझ से पूछा क्या आपको कुछ पूछना है ?मैंंने कहा नहीं क्यों की मुझे लगता है के जीवन में जिसे जो मिलना है वो ही मिलता है। उसने कहा मुझे लगता है जीवन में हैम जो चाहैते है वो ही हैमें मिलता है। उसने मुझ से मेरे जॉब के बारे में भी पूछामैंने उसे बताया के मैं ऑफिसियल जॉब करती हूँ। मैंने उस से साफ साफ कहै दिया के लड़के सिर्फ टाइम पास करने की सोचते है इसलिए मैं इनसब पे जयादा विस्वास नहीं करती और मुझे कोई नहीं मिला तो मैं आरेंज मैंरिज कर लुंगी। कहने लगा मुझे समझ नहीं ा रहा है आप मेरी तुलना और लड़को से क्यों कर रही हो|मैंंने साफ साफ कहै दिया के सच तो यही है के मैं थोड़े समय के बाद शादी करना चाहैती हूँ और मुझे ये बिलकुल पसंद नहीं के कोई मुझे शादी से पहैले हाथ तक लगाए। कहने लगा इंशाअल्लाहै। कहने लगा आप तो बहूँत सिंपल हो मुझे लगा था आप की सोच मॉडर्न होगी।

मैंंने उसे बताया के मेरा एक बड़ा सा और स|दा सा परिवार है। मेरी शादी होने में लगभग 2-3 साल लगेगी क्यों की मेरी बहैने है और मुझे पीएचडी भी करना है। लेकिन अब मुझे मेरे परिवार ने एक लड़का चुनने को कहा है और अब मैं अपने लिए लड़का पसंद कर सकती हूँ। उसने भी बताया के उसका भी परिवार बड़ा है लेकिन उनकी सोच अच्छी है। मैंने बताया के मैं जयादा मॉडर्न सोच तो नहीं रखती पर मुझे छोटे कपडे पहैहैना बहूँत पसंद है। कहने लगा अगर आप मुझे नहीं जानती तो कम से कम गलत सोच तो मेरे बारे में मत रखो। कहने लगा क्या आप मेरे बारे में और कुछ जानना चाहैती हो या अपने बारे में कुछ बताना चाहैती हो।मैंने कहा केमैंने इस से पहैले कभी किसी लड़के से शादी की बात नहीं की और इसलिए मुझे नहीं पता के मुझे क्या सवाल पूछना चाहिए और मेरा कोई बॉय फ्रेंड भी नहीं है।

और उसने मेरे परिवार के बारे में काफी सारे सवाल किया और इस तरहै हैम दोनों की बाते काफी हैद तक नजदीकी ला रही थी। कहने लगा आप इतना लेट शादी कर रही होमैंने उसे बताया के पीएचडी के लिए सायद मैं पागल हूँ और इसलिए इनसब चक्कर में नहीं पड़ती पीएचडी मेरा सपना है। उसने कहा अगर आपका पति चाहैे के आप दुबई में उसके साथ रहो तो क्या आप रहोगीमैंने हा कहा| उसने बताया मैं एमिरेट्स सॉफ्टवेयर में ऑपरेशनल मैंनेजर के पोस्ट पे जॉब करता हूँ औरमैंने बी सी ए किया है। और ऍम बी ए मणिपाल दुबई में किया है। और मेरा दुबई में रेंट अपार्टमेंट का बिज़नेस भी है| अब हैम काफी नजदीक आ रहैे थे| इतनी सारी बाते होने के बाद वो कहने लगा केमैंने अबतक आपको देखा नहीं है आपकी सोच बहूँत अछि है और आपको एक अच्छा इंसान मिलेगा। उसने बताया के मैं जयादा हैंडसम नहीं हूँ सिंपल ही दीखता हूँ।

फिर हैमदोनो ने एक दूसरे को अपनी तस्वीर भेजी। अब वो पूछने लगा शादी कब करनी हैमैंने साफ साफ बताया के मैं अभी अपने परिवार को बता के इंगेजमेंट कर सकती हूँ पर 2 साल मुझे समय चाहिए मैं शादी नहीं करना चाहैती। वो कहने लगा मेरा परिवार मेरे पीछे पड़ा है शादी के लिए और मैं रिलेशनशिप में विस्वास नहीं करता हूँ। मैंने कहा के अपने परिवार को मनाओ कहो के आप रिलेशनशिप में है।मैंने उस दिन सच ही कहा था उस से क्यों की मैं फ़िलहाल शादी करना नहीं चाहैती थी क्यों के ये वो समय था जब मैं अपने सपनो के इतने करीब थी बस मैं पीएचडी के लिए जीना चाहैती थी। फैसल सेख से रिश्ता बढ़ाने की कहि न कहि वजहै मेरा परिवार भी था क्यों की वो भी चाहैते थे के मैं शादी नहीं तो कम से कम रिश्ते में बंध तो जाऊ| उसने बताया के अबतकमैंने वापस जाने की टिकट नहीं की है मुझे इसी सप्ताहै वापस जाना है।

और कहने लगा मैं पूरा एक दिन आपके साथ बिताना चाहैता हूँ। आप कर्नाटक लोगो को पसंद तो करती है न,मैंने कहा हा। कहने लगा हैमलोग बहूँत अमीर हैमैंने पूछा और दिल के कहने लगा बहूँत ही बुरे। एक लड़की ने बताया एक लड़के को के उसे कोई अमीर इंसान नहीं बल्कि एक अच्छा इंसान चाहिए कम भी पढ़ा लिखा हो तो भी चलेगा लेकिन प्यार करने वाला होना चाहिए जो मेरे लिए तकलीफ उठा सके मुझे वो चाहिए कहने लगा मैं तुम्हारे लिए तकलीफ उठा सकता हूँ। बाते अब बहूँत आगे बढ़ रही थी और हैम मिलने की बाते करने लगे। कहने लगा कब मिल सकती होमैंने कहा आपको जब भी समय मिले बता देना। औरमैंने उसे साफ साफ कहै दिया एक और बात मैं आपको अपना हाथ तक छूने नहीं दूंगी और कोई शारीरिक सम्बन्ध भी नहीं बनाने दूंगी कहने लगा मेरा अनादर मत करो क्या मतलब है तुम्हारा। और वो गुस्सा हो गया और कहने लगा मुझे नहीं मिलना आपसे। मैंने कहा फेसबुक पे मैं ही मिली कहने लगा मजाक बना रही होमैंने आपको पसंद करके बहूँत बड़ी गलती की। ”आपको मैं क्या प्ले बॉय लगता हूँ “?आपको नहीं मिलना तो साफ साफ मना कर देती मेरे पसंद करने के बाद आप अपना सही रंग दिखा रही हो।मैंने माफ़ी माँगा और कहा चलो इसी बहाने पता तो चला के आप मुझे पसंद करते है। कहने लगा मैं आपको बहूँत पसंद करता हूँ लेकिन आपकी और मेरी सोच बहूँत अलग है। मुझे कभी चोट मत पहूँँचाना कुछ भी बोलो पर मेरे चरित्र पे नहीं।मैंने कहा ठीक है नहीं बोलूंगी और अगर आपको बुरा लगा तो मुझे माफ़ कर दो। हैम अब बहूँत पास आ चुके थे कहने लगा एक बात पुछु सही सही बोलोगी मेरा जवाब हा था क्या आपके मन में मेरे लिए कोई एहैसास हैमैंने हा कहा कहने लगा सही मेंमैंने फिर से हा कहा। कहने लगा आपके मन में नहीं है

मैंंने फिर से कहा हा है आपके लिए एहैसास। कहने लगा कुछ भी करोगे मेरे लिए एक लड़की का जवाब था ऐसा कुछ भी नहीं है। वो खुश हो गया और कहा माशाअल्लाहै। पता नहीं क्यों इस इंसान की एक भी बात मुझे झूठा नहीं लगा पता नहीं क्यों मन ने कहा के इस इंसान पे आंखे बंद करके भरोसा कर लू। और उसदिनमैंने अपने आप से एक वादा किया। चाहैे ये इंसान बुरा हो या अच्छा मैं इसे हमेशा प्यार करुँगी कभी भी हिटलर बन के परेशान नहीं करुँगी। और अगर ये इंसान एक चोर भी निकला तो मैं उसे प्यार से जवाब दूंगी कभी भी गलत राश्ता नहीं अपनाउंगी। औरमैंने उसे जवाब दिया के लेकिन मैं निकाहै के बाद आपके लिए सब कुछ कर सकती हूँ। कहने लगा इसका मतलब आपके मन में मेरे लिए कोई एहैसास ही नहीं हैमैंने उसे बताया के ऐसा कुछ भी नहीं है लेकिन मैं किसी के साथ भी कोई नाजायज रिश्ता नहीं रखना चाहती

आपके लिए एहैसास तो है मेरे मन में औरमैंने आपको जितना जाना है उस से तो मुझे आप बुरे इंसान नहीं लगे। पूछने लगा नाजायज रिश्ते का क्या मतलब कहने लगा तुम्हारा मतलब है सेक्स क्या ?मैंंने कहा नहीं बस मैं निकाहै से पहैले कोई शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहैती और किस और हैग भी मेरे लिए बहूँत बड़ी बात है। वो चौक गया और कहने लगा " ओ माय गॉड " आपकी सोच बहूँत छोटी है एक लड़की ने जवाब दिया के मेरी सोच छोटी नहीं है लेकिन मुझे लगता है के मुझे ये रोजा (व्रत) रखना चाहिए। कहने लगा सच में बहूँत छोटी सोच है आपकी चलो एक बात पूछता हूँ मेरी कसम है आपको सही सही बताना। आपने कहा के आपके मन में मेरे लिए एहैसास है तो अगर मई आपके सामने आऊंगा तो क्या आपका दिल नहीं चाहैेगा के हैग करू?मेरा जवाब हा था लेकिनमैंने कहा फिर भी मई अपने आप पे काबू कर सकती हूँ जबमैंने आपकी तस्वीर देखि तभीमैंने सोच लिया था के मई आपको हैग कर सकती हूँ लेकिन अभी नहीं बाकि का जवाब आप जब मुझ से मिलोगे तो आपको अपने आप मिल जायेगा। कहने लगा मुझे न आपसे मिलना है लेकिन मुझे पता है आप कैसी पर्तिकिर्या करोगी। मैंने उस से कहा केमैंने कभी किसी लड़के के साथ डेटिंग नहीं की है तो हो सकता है के मैं अलग तरीके से पर्तिकिर्या करू| कहने लगा आप बहूँत देसी हो बहूँत ही जयादामैंने कहा हा ये सच है। कहने लगा मुझे पता है आपकी प्रतिकिया क्या होगीमैंने पूछा खाना खाया क्या कहने लगा आप टॉपिक बदल रही हो। मैंने कहा हैम एक दूसरे को जानेगे लेकिन थोड़ा समय लगेगा। कहने लगा मैं हमेशा 12 फेब्रुअरी को अपने जन्मदिन पर अपनी माँ से मिलने अ|त| हूँ तब तक हैम दोनों एक दूसरे को जानते है। 12 फेब्रुअरी जन्मदिन ये बात सुन के मैं बहूँत खुश हो गयी क्यों की बचपन से मुझे इस बात से बहूँत चीड़ थी की मेरा सर्टिफिकेट में जन्मदिवस गलत है 12 फेब्रुअरी और मेरी एक इच्छा थी की ये दिन मेरे लिए बहूँत ही महैत्वपूर्ण हो आखिरकर ये दिन में मेरे प्यार का जन्मदिवस निकला मैं बहूँत खुश हो गयी। पर ये बातमैंने उसे नहीं बताया के बचपन से 12 फेब्रुअरी को मैं दूसरी जन्मदिवस इसलिए मनाती हूँ के इस दिन का तालुक मेरे जीवनसाथी से हो। अजीब संयोग था ये और आज मेरा विस्वास भगवान पे और बढ़ गया के जो हैमने माँगा वो मुझे मिला इतनी छोटी सी इच्छा भी भगवान ने मेरी पूरी कर दी। मैंने उसे ये बात नहीं बताई की ये 12 फेब्रुअरी मेरे लिए कितना महैत्वपूर्ण है। वो कहने लगा चलो मिलने से पहैले तबतक एकदूसरे को जानते है। मैंने कहा सही बात है आप अपनी पूरा जीवन की बाटे चैटिंग करके नहीं बता सकते और मैं भी अपनी साडी बाटे ऐसा इतनी जल्दी नहीं बता सकती तो ये ठीक रहैेगा ाचा है अभी 12 फेब्रुअरी में 5 महीने बाकि है। अच्छा है। कहने लगा मैं नहीं चाहैता के मैं आपसे मिलने आओ और आप मुझे अपने आपको गले लगाने तक ना दे। मैंने कहा ये सही रहैेगा क्यों की पहैली मुलाकात में सायद हैमदोनो ही आश्चर्यचकित हो जाये कहने लगा मैं नहीं आप आश्चर्यचकित हो सकती हो मैं हैसने लगी।मैंने कहा मैं लड़की हूँ ना कहने लगा मैं अपमानित नहीं होना चाहैता लड़की हो तो पर सिर्फ मेरी हो किसी और की नहीं और मैं जो मर्जी वो करू लोगो का क्या ?मैंने फिर पूछा अगर मैं मिलने के बाद आपको पसंद नहीं आयी तो ?कहने लगा बस मुझे रोकना और अपमानित ना करना बाकि सब ठीक है। मैंने कहा मेरी भी सिमा समझने की कोसिस करो। कहने लगा अगर आपको मेरे लिए सही में एहैसास होता ना तो आप मुझे किश और हैग देने से कभी नहीं रोकती।मैंने कहा ऐसा नहीं है कहने लगा मैं ऐसा ही सोचता हूँ किश और हैग तो सामान्य बात है।मैंने कहा मुझे पता है गोवा में सामान्य बात है लेकिन मुझे तो बहूँत गुस्सा आता है। कहने लगा रफत सच में मुझे ऐसे छोटे सोच वाली लोग नहीं पसंद आप दुबई में मेरे साथ रहोगी। और तब तो आप मुझे रोक भी नहीं पाओगीमैंने कहा सोच तो मेरी बहूँत बड़ी है तब आप जो चाहैे जो कर सकते है कोई दिक्कत नहीं है। कहने लगा एक बात पुछु क्या आप इस समय मेरे साथ गोवा से बहार घूम सकती हो ?मैंंने कहा इसबार नहीं क्यों की अभी मैं बहूँत व्यस्त हूँ। कहने लगा तो फिर मैं खाने का बाद मंगल नहीं तो बुध का टिकट देख लूंगा वापसी का दुबई। |मैंने कहा पहैले मिल तो लो फिर किश हैग कर लेना पहैले जान तो लो मुझे पहैली मुलाकात में किश हैग ! कहने लगा मुझे अच्छा लगा के आप मुझ से मिलना चाहैती हो।मैंने भी बताया के मैं थोड़ी बहादुर लड़की में से हूँ सायद थोड़ी नहीं बहूँत ही जयादा। कहने लगा इसका क्या मतलब मरोगी तो नहीं न ?मैंंने कहा नहीं थोड़ी हिटलर और बहादुर जैसी सैतान और मस्ती हूँ। कहने लगा आप मुझे नहीं जानती आप 1 सेकंड के लिए भी नहीं छोड़ोगी। और इस तरहै हैमने बहूँत सारि बाते की। मैंने कहा बाद में बात करते है आप मुझे दिन में कॉल कर सकते है और मुझे चाट करना बिलकुल भी पसंद नहीं है ये समय बर्बाद करने वाला काम है कहने लगा आप बहूँत जल्दी सो जाती हो क्या?मैंने कहा नहीं कुछ पढ़ रही थी आपने परेशान कर दिया कहने लगा आज से आप मुझ से रोज देर रात तक चाट करोगीमैंने कहा मैं फेल हो जाउंगी और पीएचडी मेरा सपना ही बन के रहै जायेगा कहने लगा ठीक है जबतक इंडिया में हूँ मैं कम से काम तबतक तो चाट करो। और लड़के से चाट करना मेरे लिए सर दर्द का काम थामैंने कहा तो वापस कब जा रहैे हो ?मैंंने बताया के कोचिंग में मेरा टेस्ट है और रविवार को तैयारी कर के नहीं गयी तो फेल हो जाउंगी। कहने लगा ठीक है पढ़ लो मैं आपको परेशान नहीं करना चाहैता मेरा जवाब यही था के आप चाट के बजाये मुझे दिन में कॉल कर लिया करो सही रहैेगा कहने लगा मुझे चाट भी चाहिए कम से कम साथ तो होती होमैंने फिर भी कहा कॉल जयादा अच्छा है। इस तरहै दोनों में कहि न कहि एक लगाव का रिश्ता तो बन ही गया था ये प्यार था या कुछ और मुझे पता नहीं पर कहि न कहि मई भी सायद अपने राश्ते से अलग हो रही थी। मुझे यकीन हो गया था के ये वही इंसान है जिसके साथ मैं अपना पूरा जीवन बिता सकती हूँ। और आंखे बंद कर के भरोसा कर सकती हूँ। फिर उसका मैंसेज आया कहने लगा रफत एक काम करो अपनी एक अछि सी तस्वीर मुझे दे दो मैं उसे अपनी दुबई वाली बहैन को दिखाने वाला हूँमैंने कहा फ़िलहाल तो इस मोबाइल में बहैन को दिखाने लायक तस्वीर नहीं है मैं बाद में भेज दूंगी वो जिद करने लगामैंने उसे एक सेल्फी जो हैवाई जहाज में ली थी वो भेज दिया कहने लगा ये तस्वीर भेजू बहैन को?मैंने कहा ये आपके लिए और सूट वाला तस्वीर बहैन को दिखा दो कहने लगा दिखा दिया वो और तस्वीर मांग रही है वो कहै रही है के आप के पास तस्वीर है पर आप नहीं दे रही हो।मैंने कहा मैं बाद में देती हूँ। कहने लगा मेरी बहैन को अभी चाहिए। देर रात चैटिंग करना मुझे पसंद नहीं था और वैसे भी तभी मैं बस अपने पढाई पर धयान देना चाहैती थी तोमैंने कहै दिया अब आप मुझे मानसिक तौर पे परेशान कर रहैे हो मैं पढ़ रही थी पर आपका मैंसेज आ रहा है आपने मेरा पूरा दिन बर्बाद कर दिया कहने लगा मुझ से बाते करना आपके लिए समय की बर्बादी है ?कहने लगामैंने आपको बाते करने के लिए जबरदस्ती नहीं किया मेरा जवाब यही था के मैं एक छात्रा हूँ और इस हिसाब से चैटिंग मेरे लिए समय की बर्बादी ही है। वो गुस्सा हो गया कहने लगा साफ साफ बता दो अगर आपको मुझ में दिलचस्पी नहीं है तोमैंने कहा दिलचस्पी तो है पर मुझे फ़िलहाल पढ़ना है कहने लगा आप पढ़ो मैं आपको तंग नहीं करूँगा। कहने लगा अच्छा सुनो क्या आप एक पूरा दिन मेरे साथ धूमना पसंद करोगी घर में कहै देना के ट्रेनिंग है।मैंने कहा पहैले गोवा आ के मिल तो लो फिर कुछ और सोचेंगे। कहने लगा वादा करो के आप मुझे आपको किश करने से नहीं रोकेगी !मैंंने कहा डिअर ऐसी सर्त कहने लगा हैमैंने कहा पहैली मुलाकात में आपको किश करना है कहने लगा हा जी |मैं आपको पहैले ही कहै रहा हूँ जबरदस्त नहीं हैमैंने कहा मैं लड़की हूँ थोड़ा तो समय दो मुझे। कहने लगा ठीक है रहैने दो फिरमैंने कहा मैं लड़की हूँ और कोई वजहै नहीं है। कहने लगा आप मुझे लगता है आप मेरी गर्ल हो और आपकी साडी चीजे मेरी है आपकी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त है। मैं डर गयीमैंने कहा हैक़ जताओ पर धीरे धीरे कहने लगा हा बाबा मैं तो निकाहै करना चाहैता हूँ पर आप नहीं कर सकती हो मैं 5 दिन बाद वापस जा रहा हूँ और 5 महीने बाद आऊंगा तबतक जो भी है सोच लेना। एक लड़की का जवाब यही था के क्या सोचना मैं आपके साथ जीना चाहैती हूँ कोई झूठ नहीं सच के साथ पर थोड़ा रिश्ता धीरे धीरे बढ़ाना चाहैती हूँ। कहने लगा लव युमैंने कहा हा पता है उसने फिर से वही बात दुहैराई केमैंने कुछ कहा आपको "आयी लव यु "औरमैंने कहा पता है। और इसतरहै दूसरे दिनमैंने उसे सुबहै मैंसेज किया के आप उठ गए हो या अबतक सो रहैे हो कहने लगा अभी तुरंत उठा हूँ। औरमैंने उस से बहूँत साडी बाते पूछी पर जवाब सिर्फ नहीं,पता नहीं,ठीक है बस इतना ही आ रहा था फिरमैंने उस से पूछा आप क्यों उदास हो क्या आपको ठेस पहूँंची है ?कहने लगा कुछ नहीं बस मैं सामान्यता लोगो से जल्दी ही जुड़ जाता हूँ और जब वो ठेस पहूँंचाते है तो मुझे बहूँत बुरा लगता है और अब मैं नहाने जा रहा हूँ। ऐसी बाते सुन के मैं भी थोड़ी भावुक हो गयीमैंने पूछा क्यामैंने आपको ठेस पहूँंचाया ?कहने लगा पता नहीं !मैंने फिर से पूछा क्या हूँआ सॉरी।मैंने उस से कहा मुझे पता नहीं के मैं आपकी एक अच्छी गर्लफ्रेंड बन सकती हूँ या नहीं लेकिन मुझ पे भरोसा करो मैं पूरा जीवन आपकी एक अच्छी दोस्त जरृर बन सकती हूँ आप मुझ से सब कुछ बता सकते है। चाहैे आपके बीते कल से भी क्यों न जुड़ा हो और आप मुझ से खुल के बात कर सकते हो कोई दिक्कत नहीं है मैं हमेशा आपकी मदद करुँगी। न जाने क्योंमैंने उस से ये वादा कर दिया सायद मुझे कुदरत पे भरोषा हो गया था। और आजमैंने उसे बहूँत सारि तस्वीर भेजा कहा देखो मेरे अलग अलग तस्वीर। कहने लगामैंने आपको कुछ जयादा ही दिल से लगा लिया था मई आपसे बहूँत खुल गया था आपसे समय मांग रहा था।मैंने कहा कोई बात नहीं है कहने लगा आप मुझे नहीं जानती हो अगर मैं एक बार व्यस्त हो गया तो मुझे ये याद भी नहीं रहैेगा केमैंने कुछ वादा किया है आपसे। ये बाते सुन के मैं पूछने लगी फ़्लर्ट हो आप मुझे लगता है के आप सही हो मेरे लिए और जैसे कल थे वैसे हमेशा पूरा जीवन।मैंने उस से कहा कुछ तो कहो आखिर क्या हूँआ चुप मत बैठो क्यों परेशान हो,झूठ इंसान को हमेशा परेशान करता है। कहने लगा मुझे लगता है के आप एक बहूँत ही अच्छे इंसान के लायक हो। मैंने पूछा आप क्यों नहीं? मुझे नहीं लगता के आप में कुछ बुरा है अगर आप झूठे भी हो तो मैं संभल सकती हूँ हो सकता है के आप लड़कियों के साथ टाइम पास करते होंगे मैं आपको हैर रूप में स्वीकार करुँगी आपके बीते कल के साथ। कहने लगा चुप रहो "टाइम पास "इतनी गन्दी सोच है आपकी मुझे नहीं चाहिए आप।मैंने कहा मेरी सोच गन्दी नहीं है बस मैं आपको हैर पहैलु से आज़ाद कर रही हूँ सिर्फ प्यार और एहैसास के लिए। बोलो क्या हूँआ आप कहोगे नहीं तो मुझे कैसे पता चलेगा कहने लगा मुझे कुछ नहीं कहैना सब साफ दिख रहा है मैंं नहीं आप "टाइम पास "कर रही हो।मैंने कहा नहीं सर मैं आपसे शादी करना चाहैती हूँ बहाने तो आप बना रहैे है। और फिर गुस्से में उस ने मुझे कल रात की उन लाइन का तस्वीर भेजा जिसमे उसने मुझे "आयी लव यु "कहा था औरमैंने कहा था मुझे पता है। मैंं समझ नहीं प् रही थी आखिर इन लाइन से गुस्सा होने की क्या बात है फिर समझ में आया के बदले मेंमैंने उसे "आयी लव यु "नहीं कहा। उफ़ मुझे हैसी आ गयी। और समझ में आया के वो इस वजहै से गुस्सा हो गया था। मन में तो हैसी आ रही थी वैसे "आयी लव यु "ये लाइन मेरे जैसी लड़की के लिए अर्थहीन था। ये क्या बात हूँयी।मैंने कहा ओ तोमैंने "आयी लव यु " नहीं कहा इसलिए गुस्सा हो आप आपके लिए बहूँत प्यार और इज़्ज़त रखा हैमैंने।मैंने कहा "आयी लव यु " यही सुनना था न आपको लो कहै दिया। कहने लगा आपने मेरा बहूँत निरादर कर लिया आपकी गन्दी सोच शारीरिक सम्बन्ध और क्या क्या। मई कहा नहीं डिअर ऐसा नहीं है और आप मुझे गलत समझ रहैे होमैंने आपकी कोई बेइज़्ज़ती नहीं की है। कहने लगा अगर आप मुझ पे थोड़ा भी भरोसा करती और मेरे लिए थोड़ा भी एहैसास होता तो ऐसा कभी नहीं कहैती। मेरे "आयी लव यु " कहने पर कहने लगा ज़बरदस्ती बोल रही हो। मुझे फिर से हैसी आ गयी क्यों की ये लाइन सायदमैंने ज़बरदस्ती ही बोला था। मैंने फिर से कहा के मुझे समझने की कोसिस करोमैंने आपको दुखी नहीं किया है मुझे माफ़ कर दो ऐसा नहींमैंने आपके "आयी लव यु " कहने पे मई भी लिखने वाली थी पर मैं लड़की हूँ न तो थोड़ी हिचक गयी।मैंने आपके लिए सारे तस्वीर ढूंढा अगर मैं टाइम पास करती तो आपको इतनी सारि तस्वीर कभी नहीं देती। आप मुझे गलत समझ रहैे हो मुझे माफ़ कर दो इसके अलावा मैं और कुछ नहीं कहै सकती। कहने लगा रफत हैमे मिले अभी चार दिन भी नहीं हूँए है और इतना झगड़ा और ग़लतफ़हैमी मुझे ये सब नहीं चाहिए मेरी सोच मॉडर्न है और आप मुझ से बहूँत अलग हो सच में मैं आपके लिए जो एहैसास रखता हूँ मैं उसे छुपा नहीं सकता।मैंने कहा मैं आपके साथ खुल जाउंगी थोड़ा समय दो मुझे। आप मुझ से कहै सकते हो मुझे पता है के मैं थोड़ा समय लेती हूँ पर इसका मतलब ये नहीं है के मुझे एहैसास नहीं है मुझे गलत मत समझो और मुझे माफ़ कर दो अगरमैंने आपको दुखी किया है तो।मैंने उस से कहै| के मैं भी आप से कुछ छुपाना नहीं चाहैती पर मई लड़की हूँ न डिअर। " लव यु "अब मान जाओ मेरे स्वीटहार्ट आगे से ऐसी गलती दुबारा नहीं दुहैराऊंगी। कहने लगा "आयी लव यु रफत " मुझे अनदेखा मत करना। इसबारमैंने उसे छोटे कपडे वाली तस्वीर भेजी कहने लगा अगर मई आपसे मिलूंगा तो मई अपने एहैसास को नहीं रोकूंगा और मई आपको हैग और किश करूँगा। और इस तरहै बहूँत सारि बाते हूँयी जो सायद इन कागज के पन्नो पे लिखू तो कागज कम पड़ जायेगा।मैंने उस से पूछा के आपको तस्वीर पसंद आयी या नहीं कहने लगा सब अच्छे है और आप मुझ से अच्छे इंसान के लायक हो। अब मैं प्यार के इस वेड में पूरी तरहै मन से बंध चुकी थीमैंने कहा नहीं आप मेरे लायक हो। पर अगर आपके परिवार को मैं पसंद नहीं आयी तो ?कहने लगा मुझे पता नहीं मैं आपके लिए कभी उन से झगड़ा नहीं करूँगा क्यों के आप मुझे कभी खुश नहीं रख सकती।मैंने फिर से पूछा आपको क्या लगता है पसंद आएगा या नहीं कहने लगा मुझे नहीं पता और पहैले मेरी पसंद है।मैंने ठीक है मतलब आप खुश है तो वो भी। कहने लगा मैं आपके बारे में बहूँत दुविधा में हूँ पता नहीं क्योंमैंने कहा जो भी है आप साफ साफ कहै सकते हो। कहने लगा मैं उल्लू नहीं बनना चाहैतामैंने कहा एक दोस्त की तरहै भरोसा करो कहने लगा ठीक है सिर्फ दोस्तमैंने कहा नही मुझ पे भरोसा करो मैं थोड़ी हिचकती हूँ लेकिन मैं आपको पसंद करती हूँ और इसमें कोई दो राय नहीं है मैं आपके जैसा जीवनसाथी चाहैती हूँ।मैंने कहा फ़ोन कर लिया करो कम से कम थोड़ी गलतफैमिया कम हो जाएगी। और फिर उस दिन थोड़ी देर बाद उसके कॉल आया और हैमने फ़ोन पे बाते की। कहने लगामैंने सुना है के अगर प्यार होता है तो लोगो को भूक नहीं लगती और नींद भी उड़ जाते है। मैं हैस पड़ी और कहा मैं हिटलर हूँ सारे सिस्टम ही अलग है मेरे मतलब अगर मुझे प्यार हूँआ है तो मैं और जयादा खाने लगूंगी और सोने लगूंगी वो हैसने लगा। फिर फ़ोन काट के वो वीडियो कालिंग करने लगामैंने कहा मैं रोड पे हूँ और मेरे पास हैडफ़ोन भी नहीं तो मैं फ़ोन नहीं उठाउंगी वीडियो कॉल बंद करो और वौइस् कॉल करो कहने लगा बस थोड़ी देर आपको देखना है। और फिर हैमने एक दूसरे को वीडियो कॉल पे देखा। और रात को मैं उस से शिकायत करने लगी की वीडियो कॉल कर के सब काम ख़राब कर दिया मुझे आपसे बहूँत सारि बाते पूछनी थी पर आप वीडियो कॉल पे मुझे देख रहैे थे औरमैंने तो आपको देखा भी नहीं कहने लगा चल झूटी घूर घूर के देख रही थी मैंंने कहामैंने नहीं देखा आपको कहने लगा मुझे पता है इतना देखा है झूटी। मैंने कहा मेरी आंखे निचे थी और आप मुझे देख रहैे थे इसलिएमैंने सर भी झुका लिया था लड़की हूँ न तो शर्म तो आएगी ही। कहने लगा चलो मान लिया "आई मिस यु "

इस तरहै बाते काफी जयादा होने लगी थी और बहूँत सारि हैर बात को लिखना तो संभव है नहीं। कहने लगा आपके सोने का समय हो गया है तो सो जाओ मैं तो आजकल देर से ही सो रहा हूँमैंने कहा हां आपको तो प्यार हो गया है न किसी से कहने लगा है है कोई पगली सी न न एक प्यारी प्यारी लड़कीमैंने कहा हैद नहीं है मेरी बेवकूफियों का कहने लगा ऐसा नहीं कहैते। मैं आपको दुबई में भी बहूँत याद करूँगा मैं कहने लगी क्यों आपके फ़ोन में फ़ोन करने की सुविधा नहीं है क्या कहने लगा मिल तो नहीं सकता न। मैंने कहा के आपकी दुविधा सायद दूर हो गयी होगी कहने लगा मैं जयादा सोचता नहीं हूँ अगर मैंं किसी को पसंद करता हूँ तो दूसरी सोच नहीं रखता बस करता हूँ। कहि न कहि एक छात्रआ होने के नाते पढाई के लिए भी मेरी चिंता उतना ही थी और मैं बस यही कोसिस में रहैती के 10 बजे तक ही चैटिंग करू ताकि मैं थोड़ा पढ़ स्कू क्यों के ये वो साल था जब मैं पहैली बार नेट का इम्तिहान में बैठने वाली थी और मैं किसी तरहै इन 4 महीनो का इस्तेमाल कर के पास होना चाहैती थी। ताकि अपने सपने पीएचडी के लिए आगे जा स्कू। उस दिन वो कहने लगा 10 बजे सोने वाली छात्रा होमैंने कहा पीएचडी मेरा पागलपन और जॉब मेरी जिद है लेकिन अगरमैंने पढाई पे धयान नहीं दिया तो मैं फेल हो जाउंगी और आपको "आयी लव यु" नहीं बोलै तो आप गुस्सा। कहने लगा मेरी बातो में मिलावट के लिए "आयी लव यु" मत कहो| जो करना है करो मैं आपको सहैयोग करूँगा| उसने वादा भी किया के वो अगले साल इसी महीने और इसी समय मिलने आएगा मुझ से। उसका कहैना यही था के अगर इस बार मिला तो मैं अपने आपको भावुक होने से नहीं रोक सकता और आप ये सब देख लोगी इसलिए इंशाअल्लाहै अगले साल मिलेंगे। और फिर से बातो बातो में डिअर कहने पर कहने लगा "डिअर" मैं आपका दोस्त नहीं हूँ। तो कुछ और बोल सकती होमैंने कहा डिअर सब्द अच्छा है कहने लगा वो तो दोस्तों के लिए होता है मेरी "लव"मैंने कहा नहीं डिअर सही है जो मैं कभी भी किसी के सामने बिना घबराए कहै सकती हूँ। कहने लगा ठीक है जो सही लगे फिरमैंने पूछा अच्छा आप बताओ आप क्या उम्मीद रखते है क्या बुलाऊ आपको ?कहने लगा भाई ! मैंने कहा क्या ! कहने लगा अच्छा सब्द है आप इसे कभी भी कहि भी पुकार सकती हो।मैंने कहा इडियट यही सही सब्द है कहने लगा भाई!!!मैंने कहा मारूंगी कहने लगा किश पड़ेगी होटो पे। पता नहीं क्यों ये बातो बातो में किश हैग से होटो तक पहूँंच गया और मुझे बुरा भी नहीं लग रहा था। हैमारे बिच अब नजदीकियां बढ़ चुकी थी। और इस तरहै रात में उसका मैंसेज आया के उसे फ्लाइट की टिकट नहीं मिल रही है और उस ने अपने कंपनी में बोल दिया है के वो मंगलवार को ऑफिस आएगा कहने लगा मंगलौर से देखता हूँ लेकंग फिर भी उसे टिकट नहीं मिला और इस तरहै उसने बताया के उसकी छुटिया उस ने बढ़ा दी है अब वो और 10 दिन रुकने वाला है। अब मिलने की बात बिलकुल साफ था अब हैमलोगो ने सोचा के मिल लेते है एक दूसरे से। कहने लगा इंशाअल्लाहै हैम जल्द ही मिलेंगे। पता नहीं क्यों मेरा ये लिखते हूँए आज मेरा अक्श सरमाया है इसमें मेरा क्या कसूर ?क्या दोष मेरा ?किसी पे विस्वाश करना कोई गलती नहीं होती। किसी को अच्छा इंसान समझना कोई बेवकूफी नहीं होती। रिश्ते तो विस्वाश पे ही चलता है न।

“हाय नारी तेरी यही कहानी,

अंचल में दूध आँखों में पानी। “

मिलने की बात मतलब अब एक लड़की को अपने प्यार को साबित करने के लिए एक लड़के पे विस्वास तो करना ही था। अबमैंने अपनी आंखे बंद की और मन में एक विस्वास का डोर बंधा और फैसल सेख पे अंधे की तरहै विस्वास किया। उसने मुझे फ़ोन पे भी पूछा था के बताओ कितना विस्वास करती हो मुझ पे मेरे जवाब यही था के विस्वास तो मैं किसी पे भी नहीं करती हूँ लेकिन आप पे अँधा विस्वास किया है कहने लगा माशाअल्लाहै माशाअल्लाहै। एक लड़की ने कहने का तो कहै दिया के ठीक है मैं मिल सकती हूँ आप से पर वाकई में किसी से मिलना इतना आसान काम नहीं था। अब तो एक लड़की वादे में बांध गयी थी पर फिर भी होटल में किसी से मिलना एक लड़की के लिए बहूँत बड़ी बात थी। दूसरे दिन तो रविवार था औरमैंने सुबहै ही बोल दिया आज मैं आपसे बात नहीं कर पाऊँगी क्यों की मैं नेट के क्लास में रहैूंगी और मेरा फ़ोन बंद होगा फिर भी आपको अगर मैंसेज करना है तो कर देना ब्रेक के समय मैं आपसे बाते कर लुंगी। और इस तरहै उसने मुझे अपनी बनायीं हूँयी वीडियो भेजा लेकिन मैं तो नेट के क्लास में थी और वीडियो देखना मुश्किल था लेकिंन फिर भी खाने के समयमैंने उसकी वीडियो थोड़ी बहूँत देखि उसकी छोटी सी भांजी का भी वीडियो भेजा था मुझे अच्छा लगा वो वीडियो। उसने बताया के उसकी छोटी सी भांजी भी है। कहने लगा मैं फ्लाइट मंगलौर से ले रहा हूँ तोमैंने कहा गोवा से ले लो और एयरपोर्ट पे आ के मैं आपसे मिल लुंगी कहने लगा और किश कहा कृ रोड पे ?मैंंने भी हैस के जवाब दिया अगर आपको रोड पे करना है तो आप कर सकते है मुझे कोई दिक्कत नहीं है। और इसतरहै बातो बातो मेंमैंने कहा आपसे बाते कर लू नहीं तो पता नहीं आपका दिनचर्या फिर कितना व्यस्त हो जाये कहने लगा झूठी खुद व्यस्त होती हो। और कहने लगा टिकट तो नहीं मिल रहा है तो मैंं अपनी छुटिया बढ़ा रहा हूँ 10 दिन और ताकि आपसे मिल सकू। अब एक लड़की ने कहने का तो कहै दिया अच्छा समाचार है मैंं खुश हूँ के मैं

आपसे मिल सकती हूँ लेकिन मिलना एक बहूँत बड़ी बात थी। ऐसा नहीं था के मेरा विस्वास डगमगाया था मुझे विस्वास था के मेरे साथ कुछ गलत नहीं होगा और बातो से मुझे ये इंसान बुरा तो लगा ही नहीं। मेरे मन ने कहा के मैं इस इंसान पे भरोसा कर सकती हूँ। आजमैंने आखिर वो वादा दे दिया अपने आपको के इस इंसान को मैं कभी बेइज़्ज़त नहीं करुँगी। हमेशा इसकी खुशियों और इसके मान का ख्याल रखूंगी इसे इज़्ज़त दूंगी चाहै ये बुरा इंसान हो या अच्छा हिंसा नहीं अहिंशा से ही काम करुँगी और प्यार की ही लड़ाई लड़ूंगी। जीवन में हमेशा सिर्फ और सिर्फ अपने मन की सुनना चाहिए और मेरे मन ने कहा के मैं इस इंसान को अपना बना लू। किसी एहैसास को लिखना इतना आसान काम नहीं होता है। इस तरहै अब बाते मिलने की होने लगी कहने लगा आप बताओ आपको कहा मिलना है। कुछ योजना बनाओ एक लड़की थी मैं तो होटल में किसी से मिलना मेरे लिए एक बड़ी बात थी। मेरा तो हिसाब यही था के किसी सार्वजनिक जगहै पर मिलते है

पर वो कहने लगामैंने एक ही दिन में वापस नहीं लौटूंगा तो रत के लिए मुझे होटल तो लेना ही होगा और मैंं अकेले नहीं आऊंगा मेरे किसी रिस्तेदार को तो ले के आऊंगा। और वैसे भी बारिश का मौसम है तो 5-6 घंटे बाहैर कहा रहैेंगे। होटल में किसी के साथ जाना मेरे लिए तो क बड़ी बात थी ऐसा नहीं था के इस इंसान पे मुझे भरोसा नहीं था लेकिन फिर भी मेरे हिसाब से होटल ठीक नहीं था इसलिए मैंं अलग अलग तरहै की योजना बनाने लगी और उसे बताया उसने भी बहूँत सारि योजना बनाई कहने लगा कितना समय मेरे साथ रहै सकती हो शुकरवार को मैंं आऊंगा अपने रिश्तेदार के साथ फिर नमाज़ के बाद आप आ जाना फिर आपकी स्कूटी से जहां कहैना चर्च या पार्क हैम चले जायेंगे। फिर उसने कहा पर अभी तो बारिश का मौसम है न इतनी देर कहा बैठेंगे ?मैंं होटल ले रहा हूँ अभी आप आ जाना| और अंत में पूछ बैठा? अच्छा मुझे साफ साफ बताओ आपको होटल से दिक्कत है या घर से दूर है जगहै इसलिएमैंने कहा दोनों से। कहने लगा मुझे नहीं मिलना आपसे| एक लड़की होने के नाते होटल के नाम से मुझे भी गुस्सा आ रहा था और इस तरहै होटल में मिलने की बात पर दोनों झगड़ पड़े। वो बहूँत गुस्सा हो गया कहने लगा मुझे नहीं मिलना आपसे गुस्सा वाली बाते बहूँत बढ़ गयी थी तोमैंने कहा ठीक है बुक कर लो होटल अभी,मैंं आ रही हूँ होटल में और जो मन करे वो करना। कहने लगा मैंं क्या भिकारी हूँ जो पार्क में चर्च में बैठु ?आपके लिए अच्छा होगा मेरे लिए नहीं इतना गर्मी है ऊपर से बारिश का मौसम। सच में मैं आपसे मिलना नहीं चाहैता।मैंने कहा अरे सब आरामदायक है अच्छी जगहै है। कहने लगा बहूँत सुन लिया बकवास चर्च पे मिलना हैं न ठीक है चर्च पे ही मिलेंगे मैंं आपसे 1 घंटे के लिए मिलूंगा और फिर वापस पणजी में होटल बुक कर लेता हूँ 2 बजे आपसे मिलूंगा और 3:30 वापस चला जाऊंगा।मैंने कहा मैं पणजी आ सकती हूँ कहने लगा आप रहैने दो बहूँत बुरा हूँ अपन। आप सच में बहूँत उलझी हूँयी हो। और इस तरहै मेरे अलग अलग बहाने से परेशान हो गया और बहूँत गुस्सा हो गया रत को तो कहने लगा आप बस टाइम पास कर रही हो। कितने दिन से शता रही हो मिलने के लिए कभी चर्च कभी पार्क कभी फ्रूगिलैंड। मेरे लाख समझने के बावजूद कहने लगा मेरी माँ मुझे मिलना ही नहीं है। और इस तरहै दूसरे दिन भी जबमैंने मैंसेज किया तो वो गुस्सा ही था कहने लगा मैंं नाराज़ नहीं लेकिन जो लोग गंभीर नहीं हो मैं उन से बहूँत नफरत करता हूँ। आपको क्या मैं रोड साइड रोमियो लगता हूँ ?जो पार्क और चर्च पे समय बिताओ ?

और इस तरहै बहूँत सारि झगडे वाली बाते होने लगी फिर उसने पूछा आपने नाश्ता कर लियामैंने कहा नहीं। फिर बातो बातो में दोपहैर भी हो गया उसने फिर पूछा खाना खाया रोज़ा हो,डाइट पे हो ?मैंंने कहा मेरा मूड ऑफ है इसलिएमैंने नाश्ता नहीं किया खाना भी नहीं खाया और कल रात में बालकनी में बैठ के आपके मैंसेज का इंतजार भी कर रही थी कहने लगा आप हो या मैं हैम दोनों कभी खाना खाना नहीं छोड़ेंगे। खा लो खाना। ये पुरे दो दिन हैमदोनो बस झाड़गते रहै गए। और फिरमैंने कहा "आयी लव यु " और अगर अब आप नहीं माने तो मैं भाई बोल दूंगी। कहने लगा भाई ही हूँ मैं आपका !!!मैंंने कहा अगर आप चाहैते है तो आप इस रिश्ते को समय दे सकते है नहीं तो आपकी मर्ज़ी कहने लगा रफत मैं आपसे बहूँत प्यार करता हूँ पर मैं अभी आपसे मिलना नहीं चाहैता। और उसने कहा अब मैंं गाना गाने की अभ्यास करने जा रहा हूँ आपसे बाद में बात करता हूँ। और फिर थोड़ी देर बाद उसने मुझे उसका एक गाने का ऑडियो भेजा।मैंने उतने अच्छे से गाना सुना भी नहीं "गाना था ----समझ कर चाँद जिसको अश्मा ने दिल में रखा है !!! मेरी महैबूब की टूटी हूँयी चूड़ी का टुकड़ा है !!!|" और पूछ बैठी ये कौन गा रहा है ?अब तो वो और भी गुस्सा हो गया कहने लगा ये मेरी आवाज है आप मेरी आवाज नहीं पहैचानती ?मैंंने कहा नहीं मेरा मतलब है ये गाना मेरे लिए है कहने लगा न न आप न बस टाइम पास कर रही हो। और कुछ नहीं।मैंने कहा ऐसा कुछ नहीं है चलो कॉल कर लेना शाम को कहने लगा शाम को नहीं शुकरवार कोमैंने कहा शुकरवार तो हैम मिलने वाले है न कहने लगा मिलके बात करते हैं और चिंता मत करो मैं आपसे जरूर मिलूंगा। जब मुझे पता चला के ये आवाज उसकी है तोमैंने उस गाने को फिर से सुना। गाने को सुन के एक बात याद आ गयी मुझे हाल ही में मई दिल्ली गयी थी

और ट्रैन में जब मैं सो रही थी ऊपर वाले बर्थ पे तो गुजरात से एक लड़का सामने के सीट पे आ के बैठा। मैंं तो सो रही थी आंखे बंद कर के अचानक से मेरे कान में रोने की आवाज में एक गाना सुनाई दिया "तुमसे प्यार है कितना जाने जाना तुम्हैे मिलके है तुमको बताना "मैंंने जल्दी से आंखे खोला वो आवाज बहूँत ही दर्द भरा था और वो लड़का बिना आसपास देखे बस ये गाना अपनी गर्लफ्रेंड को सुना रहा था कान में हैडफ़ोन लगा के। और वो इंसान रो भी रहा था मैंं तो उस लड़के को देखती ही रहै गयी इतना प्यार? इतना दर्द गाने में ?एक लड़का रो कैसे सकता है ?और इस तरहै मैंं उस लड़के को देखने लगी और बस मन में चुपके से उसके गाने सुनने लगी। बस मुझे ये देख के आश्चर्य हूँआ क्या कोई सच में रो सकता हैं इतना दर्द वाला प्यार। बस उस दिनमैंने भी सोचा क्या मुझे कभी ऐसा प्यार होगा ?क्या सच में किसी से इतना लगाव होता है ?वो गाना अबतक मेरे कानो में गूंज ही रहा था के फैसल का गानामैंने बार बार सुना और सायद मुझे यकीन हो गया था के कोई मेरे लिए भी गाने गा सकता है। और इस तरहै बहूँत लड़ झगड़ के मिलने की बात तय हो गयी के शुकरवार को हैम जरूर मिलेंगे।मैंने उसे अब मैंसेज कर दिया के दो दिन मैं आपसे बात नहीं करुँगी नहीं तो फिर से झागडा हो जायेगा और आपको गुस्सा भी आएगा कहने लगा आप बात नहीं करोगी तो मिलने की बात फिर ख़त्म प्यार से रहो मुझे गुस्सा नहीं आएगा। इतनी देर तक चैटिंग करना और दिनभर किसी से बाते करना मेरे जैसे लड़की के लिए समय की बर्बादी के अलवा कुछ नहीं था मुझे ख़ुशी थी की सायद मेरी माँ की तलाश ख़त्म हो गयी और अगर लड़के से मिलने के बाद सब ठीक रहा तो जल्द से जल्द शादी न सही पर इंगेजमेंट तो कर लुंगी। इस बिच मुझे पीएचडी की चिंता सताए जा रही थी। और मैं बस ये सब चैटिंग,कालिंग बंद कर के पढ़ना चाहैती थी लेकिन रिसर्च का एक भी पढाई मेरे दिमाग में नहीं जा रही थी वजहै कहि न कहि यही थी के मैं मानसिक तौर पर फैसल सेख के बारे में जयादा सोच रही थी सायद इसको प्यार कहैते हैं !!! मैं पढ़ रही थी तो उसने मैंसेज किया लव क्या कर रही होमैंने कहा के मैं पढ़ रही थी पर कुछ भी दिमाग में नहीं जा रहा है मुझे न अपने पढाई पे ध्यान देना चाहिए।

वो कहने लगा दो दिन पहैलेमैंने ब्लीच किया था पूरा चेहैरा काला काला हो गया है मेरा ध्यान उसकी बातो पे नहीं था मैं बहूँत चिंतित थी के ये पढाई मेरे दिमाग में क्यों नहीं जा रहा है कहि मैं मेरे राश्ते से भटक न जाऊमैंने उस से कहा मैं जगी तो हूँ पढ़ने के लिए लेकिन पढ़ नहीं पा रही हूँ कहने लगा जबतक मुझ से मिलोगी नहीं कुछ दिमाग में नहीं जाने वाला। उसे मिलने की बाते करने की पड़ी थी उसे अपने चेहैरे काले होने की चिंता थी और मुझे नेट एग्जाम की चिंता सताए जा रही थी। बहैन ने मुझे जयादा चैटिंग करते हूँए देखा तो कहा पढ़ ले और हां तुम्हैे पता तो है न इंसान को ब्लॉक कहाँ से करते है ब्लॉक पता है न सेटिंग में जा के करते हैंमैंने उस से कहा चुप रहो सब लोग बुरे नहीं होते है। उसने फिर से मैंसेज किया अच्छा बताओ क्या पहैन के आओगीमैंने कहा सूट कहने लगा ठीक हैमैंने कहा सुक्रिया इसमें फिर से टांग नहीं अड़ाने के लिए। कहने लगा लोल। मैंने कहा तो क्या मैं हैर तरहै के कपडे पहैनती हूँ लेकिन फ़िलहाल सूट ठीक है। कहने लगा जिस कपडे में तुम अपने आपको अच्छा महैसूस करती हो पहैनो। और पूछने लगा मैंं क्या पहै्नुमैंने कहा आपकी मर्जी कहने लगा बताओ कौन सा कलर,टी शर्ट और शर्ट,जींस और फॉर्मल?मैंंने कहा मुझे ही पता नहीं कहने लगा जूते का कलर

मैंंने कहा जो पहैनना चाहैते हो पहैनो क्युकी आपकी जीएफ बहूँत ही उबाऊ है और उसकी कोई ऐसी खाइश नहीं हैं। कहने लगा आपको क्या चाहिए मेरा जवाब यही था सिर्फ आप। अब वो मिलने के लिए सोच रहा था लेकिन उसे कोई कार नहीं मिल रहा था जो गोवा ए और रत को रुकेमैंने कहा आप खुद तो ड्राइव कर सकते हो न ऊपर से आपको आपके रिश्तेदार के साथ क्यों आना है कहने लगा मैं मैंन्युअल कार नहीं चलाता और रत को मुझे होटल में डर लगता हैं न इसलिए कोई चाहिए। कहने लगा मेरे रिश्तेदार से इतनी नफरत क्यों ?मैंंने कहा एक तो आप नए और ऊपर से रिश्तेदार बहूँत जयादा हो जायेगा। कहने लगा अच्छा सुनो कहा मिलना हैं बताओमैंने कहा आप बताओ कहने लगा होटल के अलावा जहा आप बोलो। होटल में न मिलने की बात पे मैं खुश हो गयी औरमैंने पूछा भी इतना कैसे सुधर गए कहने लगा मैं अब आपसे और लड़ना नहीं चाहैता हूँ। और कहने लगा मुझे एप्पल स्टोर भी जाना है और उसी दिन फिर वापस भी आना हैं। और इस तरहै बेचारा गोवा आने के लिए कार का जुगाड़ करने लगा लेकिन कोई भी नहीं मिल रहा था ड्राइवर के साथ वो बहूँत परेशान हो गया था। और इस तरहै हैमारे बिच जान,लव,डिअर और हीरो जैसे सब्द आम हो गए थे। और वो परेशान हो के कहने लगा मैं सैलून जा रहा हूँ क्यों की ब्लीच के कारन मेरा चेहैरा पूरा काला हो गया है मैंंने तो कहा कोई बात नहीं है

वो बार बार चेहैरा चेहैरा किये जा रहा थामैंने कहा पता है पिछले सप्ताहै मैं उत्तर प्रदेश गयी थी धूल और गंदगी से मेरा चेहैरा भी थोड़ा ख़राब हूँआ है कहने लगा ये इंडिया ऐसा ही है मेरा वजन भी बढ़ गया हैमैंने पूछा कितना किलो कहने लगा 79 हो गया हैमैंने कहा इतना तो ठीक है औरमैंने उसे चिढ़ाया भी 100 किलो और खाओ पैन पिज़्ज़ा कहने लगा नहीं माँ के हाथ की बिरयानीमैंने कहा आ गए लाइन पे और कहै रहैे हो इंडिया ऐसा ही है। कहने लगा मुझे कार नहीं मिल रहा है और वैसे भी 5 घंटे ही तो मिलोगी और मिल के आपको करना क्या है,कितना विश्वास करती हो मुझ पर, आपका तो पीरियड था न? इतने सारे सवाल बस पूछे ही जा रहा था। मैंने भी कहा उस से ऐसे रिश्ते को अगर आधार नहीं दिया तो टूट जायेगा कहने लगा चिंता मत करो इंशाअल्लाहै मैं जाने से पहैले आप से जरूर मिलूंगा मैं कार का इंतजाम कर रहा हैूँ। और सायद मिलने की तयारी हो रही थी मैंना पूछा साफ साफ बताओ कल आ रहैे हो तो क्यों की मुझे ऑफिस से छुट्टी भी लेना था उसने कहा है जी। और उसका कॉल भी आया के मई कल आ रहा हूँ अगर कोई अड़चन नहीं आया तो! लेकिन वो नमाज के बाद आने वाला था मतलब शुकरवार को अगर वो 2 बजे निकला तो गोवा 6 बजे पहूँंचेगा मतलब हैम सुकरवार को नहीं मिल सकते हैमैंने उस से कहा तो उस ने कहा मैं सुबहै ही आ जाऊंगा और कल ही मिलेंगे बाकि मैं कॉल करूँगा इस तरहै शुकरवार को मुझे थोड़ा हैॉस्पिटल में काम था इसलिए मैं ऑफिस नहीं जाने वाली था लेकिन उसका फ़ोन भी आया के आज एक काम करो आप ऑफिस चले जाओ क्युकी मैं शाम तक गोवा पहूँँचूँगा तो आज हैमलोग नहीं मिल सकते है हम लोग कल मिलेंगे।

और मैं आराम से ऑफिस चली गयी दिन में 10 बजे से 1 बजे तक दो तीन बार कॉल आया उसका उसदिन और उसने बताया था के वो नमाज के बाद ही निकलेगा तो मई खुश थी के लगभग वो शाम तक पहूँंचेगा।मैंने 1 बजे के बाद उस से बात भी नहीं की क्युकी मुझे लगा वो नमाज पढता होगा 2:30 बजे तक। और मैं ऑफिस में थी इसलिएमैंने उसका मैंसेज भी नहीं देखामैंने सोचा के अब वो पहूँंच कर ही बात करेगा शाम 4 बजे उसने पूछा था के आज आप मिल सकती हो क्यामैंने कहा नहीं तो कहने लगा ठीक है और उसके बादमैंने मोबाइल देखा ही नहीं। इस तरहै घर जा के कल मिलने जाने की तयारी करने लगीमैंने मोबाइल तो देखा ही नहीं फिर शाम तक़रीबन 6:30 को जब मोबाइल देखा तो उसका मैंसेज था के कल सुबहै मैं वापस जा रहा हूँमैंने वो मैंसेज रात के 8 बजे देखा थामैंने पूछा क्या कहने लगा मुझे माफ़ कर दोमैंने आपको परेशान कियामैंने भी मजाक बनायामैंने कहा सायद मुझे ही माफ़ी मांगनी चाहिए क्यों की लोग गोवा में है और सायद मैं ही उसे परेशान कर रही हूँ। कहने लगा अच्छा है रफत बहूँत अच्छा किया मैं गोवा सिर्फ और सिर्फ आपसे मिलने आया !!!और आप तो मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रही हो,फ़ोन तो छोड़ो मैंसेज का जवाब तक नहीं दे रही हो। | वो बहूँत गुस्से में था मुझे समझ में नहीं आया उसने कब कॉल किया थामैंने जब अपने फ़ोन देखा तो मिसकॉल थे। मैं कहने लगी कहा था फ़ोन ग़लतफ़हैमी बढ़| सकती है फ़ोन मेरे पास नहीं था सॉरी। कहने लगा आपको पता था के मैं 5 बजे से यहां हूँ मैंने कहा हा।

कहने लगा कोई और होता तो फ़ोन कर के पूछ लेता किधर हो वगैरा वगैरा !मैंने फिर से पूछा वैसे हो कहाँ? कहने लगा टाइम पास करना अच्छा सीखा है। मैंने कहा उफ़ अब जगहै का नाम बताओ ?कहने लगा कल सुबहै 7 बजे मैं वापस जा रहा हूँ अपने घर।मैंने कहा क्यों ?वो बहूँत गुस्से में था कहने लगा मुझे अकेला छोड़ दो। औरमैंने उसे बहूँत समझाया पर वो बहूँत गुस्से में था मेरे एक भी मैंसेज का जवाब नहीं दे रहा था और मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रहा था। उस दिन तो हाथ दर्द हो गया बिना जवाब मिलने वाला मैंसेज लिख लिख के वो बस पढ़ के चुप चाप था। घंटो मैंसेज करने के बाद उसका एक लम्बा चौड़ा मैंसेज आया उसमे लिखा था। "देखो रफत मैं आपके जैसा नहीं हूँ, मैं रिश्ते को इतना दिखाओ नहीं लेता,मुझे ही पता है के मैं यहां कैसे सिर्फ आप से मिलने आया हूँ,अपने मुझे 4 बजे मैंसेज किया के आप मुझ से नहीं मिल सकती और

उस के बाद 8 बजे मेरे फ़ोन करने के बाद,मैंसेज कर रही हो की फ़ोन पास नहीं था। अगर आप मेरी जगहै आती न तो मैं आपको हैर 1 मिनट पर कॉल करके पूछता के कहा हो क्या कर रही हो,फालतू का जवाब नहीं देता के फ़ोन मेरे पास नहीं था। अल्लाहै का सुकुर है के मुझे समझ में आ गया की मेरी क्या अहैमियत है आपके जीवन में,मैं कल सुबहै वापस जा रहा हूँ,आज के सब कुछ के लिए बहूँत बहूँत सुक्रिया"। मैंने उसे बहूँत समझाया एक बार मिल लो अपनी लव से लेकिन वो बहूँत गुस्से में था कहने लगा मैं अभी आपको ब्लॉक कर रहा हूँ मुझे माफ़ कर देना लेकिन सच में "आई रेअली लव यु "और उसने मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया फिरमैंने उसे कॉल किया तो मैंसेज करके कहने लगा क्या है अब ?मैंने उस से फिर से माफ़ी मांगी और कहा जगहै का नाम बताओ कहने लगा मैं वापस जा रहा हूँ रफत।मैंने कहा नो डिअर आपको मेरी कसम कहने लगा अभी वापस जाने पे मजबूर मत करो। और फिरमैंने बहूँत माफ़ी मांगी बार बार मैंसेज करने पे फिर उसने कहा पंजीमैंने कहा अगर आप कहोगे तो मैं कल सुबहै 7 बजे आ सकती हूँ। कहने लगा जरूरत नहीं हैमैंने पूछा जगहै का नाम बताओ कहने लगा मुझे नहीं पतामैंने कहा होटल का नंबर दो कहने लगा मेरे पास नहीं है। और कहने लगामैंने कहा न मुझे नहीं मिलना है। मेरे बहूँत मैंसेज करने पर कहने लगा सो जाओ अच्छा किया अपने आज जो भी किया।

मैंने फिर से कहा अच्छा ठीक है सिर्फ 5 मिनट मिल लो अपना चेहैरा तो दिखा दो कहने लगा ठीक है 5 मिनट मिल जायेंगे आपको जहां कहोगी वहां आ जाऊंगा। अबतक उसका गुस्सा शांत नहीं हूँआ था। मैंने कहा अब बताओ कहा हो कहने लगा नहींमैंने कहा मैं 5 बजे 4 बजे नहीं तो 3 बजे भी आ सकती हूँ। कहने लगा कल मुझे 7:30 को मिलो मेरे 3 बजे वाली बात पे कहने लगा ड्रामा,क्यों अब घर पे कोई नहीं पूछेगा रात को 3 बजे किधर जा रही हो रात को ?मैंने कहा आज वैसे भी जन्माष्टमी है तो लोग मंदिर में है घर पे कुछ कहै सकती हूँ। कहने लगा रात को घर से बहार निकलना ठीक नहीं है। घर पे पता चला तो मर पड़ेगी। सुबहै के 4 बजे मुझे ड्राइव पे जाना बहूँत पसंद है क्यों के सुबहै सुबहै थोड़ा ठंडा मौसम और ऊपर से अँधेरे का डर सच में मुझे ये काम बहूँत पसंद था लेकिनमैंने उसे बताया नहीं के मैं तो 4 बजे घर से बहार निकलने के बहाने ढूंढते रहैती हूँ कभी मछी का बहाना तो कभी कोई भाई स्टेशन पे आया तो लेने जाने का। और मेरे परिवार वालो को ये अचे से पता है के मैं कभी कभी बिना मतलब दूर दूर तक अकेले ड्राइव करने जाती हूँ वो भी 4 बजे के आसपास। मेरी माँ हमेशा कहैती है डरती क्यों नहीं हो कुछ हो गया तो अकेले निडर वाली हैरकत क्यों करती हो मैं उन्हैें हमेशा समझ|ती के आप नहीं समझ पाउगी के मुझे 4 बजे ड्राइव कर के कितना ख़ुशी मिलता है। मैंने उसे बताया के घर में कोई कुछ नहीं बोलेगा क्यों की मुझे पता था के लोगो को पता है के मुझे ड्राइव का सिर्फ बहाना चाहिए। कहने लगा मैंं सो जाऊंगा तो उठ नहीं पाउँगा रहैने दो। कहने लगा मेरे रिश्तेदार ने एकदम कचरा रूम बुक किया है ऊपर से यहां किसी का मिलने आना मना है। कहने लगा सही नहीं हैमैंने कहा मैं बाहैर इंतजार कर लुंगी जितना आपने किया कहने लगा रहैने दो बाहैर बारिश हो रही है। कहने लगा कभी कभी तो बात भी नहीं करती और कभी करती हो तो पागल करती हो। कहि न कहि कुछ बाते उस में ऐसी थी जो मुझे उस की तरफ खींच रही थी वो भी मुझे अच्छे से जान गया था। कहने लगा मेरा रिश्तेदार बाहैर गया है बेयर पिणि है उसकोमैंने कहा आप भी पि लो कहने लगा घर में पता चल गया तो फिर कहने लगा यार मुझे भी पीना हैमैंने कहा मारूंगी पिया तो !!!कहने लगा साथ में मिल के पीते है।मैंने बातो बातो में पूछा कहाँ आना है बताओ कहने लगा नहीं मिलना है। फिर कहने लगा कब आओगीमैंने कहा आप कहैे तो 12 के बाद कभी भी। कहने का तो कहै दिया के 12 के बाद कभी भी पर 4 से पहैले घर से बाहैर निकलना मेरे लिए मुश्किल था लेकिन उस दिन एक बात थी के जन्मआष्ट्मी था तो सायद मैं कोई बहाना बना सकती थी लेकिन उसने कहा नहीं मैं आपको कोई मुश्किल में नहीं डालना चाहैता। और वैसे भी होटल वाले आपको अंदर आने नहीं देंगे। जबतक मैं आपके लिए एक और रूम बुक नहीं करता। और फिर उसने मुझे होटल का पता भेजा। पूछने लगा कितना समय मेरे साथ रुक सकती हो। और फिर बहूँत कुछ। कहने लगा यहां दूसरा रूम खाली नहीं है। फिर हैमने बहूँत सारि बाते की कहने लगा आप अभी लॉन्ग राइड पे जाना चाहोगीमैंने कहा मेरी माँ न मुझे कहैेगी आने के बाद जहाँ गयी थी हमेशा के लिए वही चले जाओ कहने लगा रहैने दो फिर ! सो जाओ मैं भी सोऊंगा। और फिर दूसरे दिन 24 अगस्त मई 5 बजे उठी और उसे मैंसेज किया के मई आ रही हूँ और मई आपका फ़ोन न लू तो गुस्सा मत होना मई ड्राइव कर रही हूँ और लगभर 7 बजे मई घर से बरसाती पहैन के निकल पड़ी। बारिश तो बहूँत तेज हो रही थी इसलिए जयादा तेज बाइक नहीं चला सकती थी। राश्ते तो जाने पहैचाने थे पर होटल कहाँ है मुझे ये पता नहीं था इसलिए पणजी पहूँंच कर मैं होटल के रिसेप्शनिस्ट को कॉल करने लगी ताकि मैं उस से राश्ता पूछ स्कू। उसने राश्ता बताया फिरमैंने उस से पूछा के फैसल सेख के नाम से कोई है तो उसे कहै दो के मैं निचे खड़ी हूँ कहने लगा फैसल सेख के नाम से तो कोई कमरा बुक नहीं हूँआ है लेकिन आपको जिस से मिलना है। वो यही बैठे हैं मैं उन्हैें निचे आने के लिए कहैता हूँ आप निचे ही इंतजार करो। और मैं 18 जून रोड पे खड़ी थी तो पीछे से एक आवाज आयी रफत ! पीछे मुड़ी तो देखा एक प्यारा सा इंसान ट्रॉउज़र पहैने सिकायतो की दुकान ले के खड़ा था। ये इंसान मेरे लिए कोई अनजाना नहीं था उसमे कुछ भी मुझे ऐसा नहीं लगा के मेरे जैसा नहीं है। पता नहीं क्यों ये इंसान मुझे बिलकुल मेरे पिता जैसा लगा। और फिर हैमदोनो ने हाथ मिलाया और वो तो सायद शिकायत की दुकान ले के आया था कहने लगा आपने मेरा फ़ोन नहीं उठाया,यहां आते ही मेरे और मेरे रिश्तेदार दोनों का फ़ोन से नेटवर्क चला गया,हैमे होटल नहीं मिल रहा था। ये होटल कचरा है मैं रत भर सोया नहीं हूँ। नहाया नहीं हूँ। बस शिकायत ही शिकायत मैं चुप चाप सॉरी बोलके गर्दन झुकाये खड़ी थी और वो बताये जा रहा था ये वो ये वो .....।

बारिश तो नहीं हो रही थी उस समय पर हैलकी हैलकी बुँदे टपक रही थी मैं बरसाती में थी। और जहाँ हैम दोनों खड़े हो के बाते कर रहैे थे वहां ऊपर से पानी टपक रहा था मैं तो बाते करते करते उसका मुँहै देखने लगी जब पानी मेरे ऊपर गिरा,रोड के उस पार थोड़ी जगहै थी जो साफ थी कहने लगा चलो उस तरफ जा के बाते करते हैं। और फिर हैम रोड पार कर के इस तरफ आ गए। मैंने कहा वैसे क्या कहा था रोड साइड रोमियो अभी देखो रोड पे ही खड़े हो के बाते करना पड़ रहा है। कहने लगा कसम से आप मेरे सर पे आ के बैठी हो सच बोलता हूँ आपके वजहै से बहूँत तकलीफ उठाई नहाया भी नहीं हूँ। मैंं आया ही क्यों ?पता है 2700 का कमरा है ये इतना बुरा। मैंने कहा सॉरी उस से अच्छा मैं आपको अपने रिस्तेदार के घर में रखवा देती वही सही था कहने लगा नहीं न। आपको परेशान नहीं कर सकते न। लम्बी चौड़ी शिकायत उसकी ख़त्म होने वाली नहीं थी ऊपर से मेरे फ़ोन न उठाने वाला शिकायत बहूँत थी। बैठ के बाते करने के लिए कोई जगहै मिल नहीं रही थी व्हा कहने लगा थोड़ा समय दे दो मुझे मैं दूसरी होटल ले लेता हूँ और अगर आपको कहि जाना है तो जा सकती हो। वो मोबाइल भी ऊपर ही छोड़ के आया था। पूछने लगा नाश्ता किया क्या आपने?

मैंने कहा नहीं कहने लगा दो मिंट रुको मैं ऊपर से आता हूँ फिर इस होटल में चलेंगे खाने के लिए। मैंने कहा देखो स्कूटी भी रोड पे लगाया है कहने लगा चाभी दे दो मैं सही जगहै पे ला के लगा देता हूँ। चलो पहैले नाश्ता करते है मैं 2 मिनट में ऊपर से आता हूँ मैंं अपने गाड़ी के पास आयी तो मुझे यद् आया के मुझे लाइब्रेरी भी जाना है किताब लाने|और फिरमैंने सोचा उसे थोड़ा तो समय चाहिए पास में लाइब्रेरी है मैं तब तक अपने काम कर लुंगीमैंने उसे मैंसेज किया के मैं लाइब्रेरी जा रही हूँ बस 5 मिनट काम है। 5 मिनट तोमैंने डर से लिखा क्यों के वो फिर से गुस्सा हो जाता के आप मुझ से मिलने आयी हो या लाइब्रेरी जाने ?पर काम तो था मुझे एकाउंट्स की कुछ किताबे लेना था। उसने मैंसेज किया अच्छा ठीक है उधर ही बैठो मैं दूसरी होटल का इंतजाम कर रहा हूँ कहने लगा यार कोई मुझे होटल नहीं दे रहा है। मैंने कहा अब तो चर्च में ही बैठना पड़ेगा ! मैं लाइब्रेरी में थी और वो मुझे कॉल करने लगामैंने कहा कॉल नहीं कर सकती जो भी मैंसेज कर दो और इस तरहै लगभग 1 घंटे मैं लाइब्रेरी में ही थी। सुबहै सेमैंने कुछ भी नहीं खाया थामैंने सोचा के लाइब्रेरी के बाहैर जा के कुछ खा लू लेकिन फिर याद आया के उसने भी तो कुछ नहीं खाया है। मन ने कहा ये तो गलत होगा न वो भूखा है और मैं खा लू ?इसलिएमैंने भी कुछ नहीं खाया। घर से बस 2 बिस्कुट खा के आयी थी मैंं। मैं अगर खा भी लेती तो कुछ नहीं था पर मुझे मेरे पापा की एक बात यद् आ गयी वो हमेशा कहा करते थे बेटा जब भी किसी से प्यार करना उस से कुछ उम्मीद मत रखना सिर्फ और सिर्फ उसे बेवकूफ की तरहै प्यार करना। बात पुरानी थी पर दमदार थी एक दिन रविवार को जब पापा काम से घर आये तो उन्होंने बताया के

आज काम बहूँत था इसलिए देर हो गयी। बात ऐसी थी के पापा हमेशा रविवार को हैमारे साथ खाना खाया करते थे क्यों के उसदिन हैम सब की छूटि होती थी। घर आने के बाद जबमैंने उन से पूछा इतना देर क्यों हूँआ कहने लगे बेटा कुछ काम फस गया था पूरा दिन धुप में भूखे प्यासे खड़ा रुकना पड़ा ! मैं चौक गयी भूखे प्यासे का क्या मतलब कहने लगे सब ने खाना खा लिया दोपहैर को परमैंने नहीं खाया। मुझे बहूँत गुस्सा आया और मैं पिता से पूछ पड़ी आखिर आपने क्यों नहीं खाया ?कहने लगे बेटा मेरी तो आदत है के मैं आप लोगो के साथ खाना खाता हूँ ! तो आज आपके बिना कैसे खा सकता था ? क्युके मुझे लगा आप भी मेरे वजहै से भूखी होगी ! मुझे बहूँत गुस्सा आया !मैंने कहा मैं यहां आराम से बिस्तर पे ठन्डे में सो रही हूँ ! और तो औरमैंने दो दो बार खायामैंने आपका कोई इंतजार नहीं किया ! फिर आप मेरे वजहै से भूखे क्यों है ? मुझे उसदिन सच में बहूँत गुस्सा आया उन पे ! वो हैस के कहने लगे बेटा इसे प्यार और विस्वास कहैते है। किसी के लिए अपने मन से भूखा रहैना बिना ये सोचे के वो कौन सा भूखा है मेरे लिए ! किसी के लिए कुछ दे देना बिना उस से कुछ लिए इसे ही प्यार और विस्वास कहैते है। और सायद उस दिन यही वजहै थी केमैंने फैसल सेख के बिना कुछ नहीं खाया !

फिर काफी ढूंढने के बाद उसे गोपिका इंटरनेशनल में कमरा मिल ही गया कहने लगा मुझे कमरा मिल गया है और आपके पास आईडी तो है न 12 बजे चेक इन हैं।मैंने हा कहामैंने कहा ठीक है कहने लगा सस्ता है 2300 का कुछ।मैंने कहा कम से कम हैम बैठ के तो बाते कर सकते हैं। और इस तरहै हैमने होटल जाने का फैसला किया। सच तो यही है के मुझे इस इंसान से बिलकुल भी किसी तरहै का डर नहीं लगा। मन में कोई डर था ही नहीं बस मन ने कहा ये सही हैं। होटल 18 जून से और 1-2 किलो मीटर दूर था और इसलिएमैंने कहा के एक काम करती हूँ मैं अपनी स्कूटी लाइब्रेरी के पास ही रख देती हूँ और आप मुझे यही पास वाले ब्रिज से ले लो अपने साथ अपनी कार में कहने लगा अपना लोकेशन भेजो मैं ले लूंगा आपको। और मैं थोड़ा चल के पास वाले ब्रिज के पास उसका इंतजार करने लगी और इस तरहै उसने मुझे अपनी कार में ले लिया। कार में वो आगे बैठा था ड्राइवर के साथ और गाना बड़ा ही मस्त लगाया था (" कभी शर्मा के,कभी घबरा के ")उसने गाने का वॉल्यूम बढ़ाया हैम दोनों ने एक दूसरे को देख के हाशा। एक लड़की होने के नाते कार में बैठना थोड़ा अजीब लग रहा था क्युकी साथ में उसका रिस्तेदार भी था ऊपर से इतना मस्त गाना। आखिर कार हैम होटल पहूँंच गए|मैंं कार से उतरी तो मुझे कार का नंबर दिखामैंने सोचा नंबर याद कार लू फिर मन ने कहा क्यों नंबर याद करना औरमैंने मन में कहा या खुदा मैंं ने इस इंसान पे अँधा विस्वास किया है और विस्वास का मतलब ये नहीं के मैं उसके कार नंबर का तस्वीर ले के रखु अब सिर्फ और सिर्फ तुम ही मुझे राहै दिखाना मैं ये नंबर नहीं देखूंगी क्युकी मुझे तुम पे भरोसा हैं। औरमैंने कार का नंबर तक नहीं देखा। होटल पहूँंचते ही हैम दोनों रिसेप्शन में जा के जैसे ही सोफे पे बैठे सामने एक वेटर शीशे की ग्लास में लाल रंग का कुछ तरल पदार्थ सबको पिने के लिए दे रहा था। अब हैम दोनों की पर्तिकिर्या ही अलग थी दोनों एकदूसरे का चेहैरा देखने लगे।

चौका का वो भी था और मैं भी सायद हैम दोनों एक ही बात सोच रहैे थे के वो है क्या ?और ये गोवा था तो वाइन वगैरहै तो आम ही था वहाँ। फिर उसने वेटर से पूछा के वो क्या है वेटर ने बताया कोकम जूस। दोनों के जान में जान आयी। उसने एक ग्लास लिया मुझे देने लगामैंने कहा नहीं चाहिए मुझे और फिर उसने एक और ग्लास वेटर को टेबल पे रखने कहा क्यों के उसका रिश्तेरदार भी था साथ में। और फिर उसने होटल का जो भी फॉर्म था भरा। कहने का तो कहै दिया थामैंने के चलो होटल में बैठ के बाते करते है पर अब थोड़ा कुछ एहैसास हो रहा था। 12 बज चूका था अब हैम सीढ़ियों से कमरे के तरफ जा रहैे थे के सीढ़ियों पर मुझे भगवान की मूर्ति नजर आयी वो कौन सी देवी थी पता नहीं फूल चढ़े हूँए थेमैंने उस के चरणों में दोनों हाथ रखा और कहा अब मेरी मान सिर्फ और सिर्फ तुम बचाना। और फिर कमरे की तरफ चल पड़ी। कमरे के अंदर जाते ही उसने दरवाजा बंद किया मुझे बिलकुल डर नहीं लगा और कहने लगा मैं पहैले 1 घंटा सोऊंगा यार मैं सोया नहीं हूँ ! मैं चुप चाप बेड पे बैठ गयी और वो बतियाँ बूझा के सोने लगा। मैं बैठी थी अचानक थोड़ी देर बाद मेरे गॉड में आ के सो गया। और मेरे हाथो से अपने बाल सहैलाने लगा फिरमैंने उसके बाल सहैला दिए एक दो बार। मेरे जैसी लड़की इतनी सुधरी हूँयी नहीं थी के किसी लड़के को गोद में सुला के उसके बाल सहैलाये फिर भी 3-4 बारमैंने सहैलाया और फिर छोड़ दिया। सिर्फ और सिर्फ लगाव के कारन जो मेरे मन में उसके लिए था।मैंने कहा इतने लम्बे लम्बे बाल उठ के बैठ गया और मेरे आँखों में देख के कहने लगा काट दू क्या?छोटे करवा लू ?मैंंने कुछ नहीं कहा। एक बहूँत ही प्यारा इंसान था। बचपना था उसमे पर बहूँत ही प्यारा था। और हैमने थोड़ी बाते की बहूँत ही कोमल था मेरी छोटी छोटी बातो का धयान था उसे।

लगा ही नहीं के वो मेरा नहीं हैं। गोद में सो के बाते करते करते अपने माथे की तरफ इसारा करते हूँए कहने लगा यहाँ किश करोमैंने कहा मुझे नहीं आता किश करना मैं नहीं करुँगी। कहने लगा यार इसमें आने की क्या बात है ! करो तोमैंने न कहै दिया और फिर थोड़ी देर गोद में सोये सोये वो उठ के दूसरी तरफ सोने जाने लगा कम्बल ठीक कर के क्यों के वो रात भर सोया नहीं था कहने लगा रात को पंखे से और ऐसी से लड़ रहा था,कभी पंखा ख़राब कभी ऐसी ख़राब। और इस तरहै वो कंबल ठीक करके दूसरी तरफ सोने लगा उसने मुझे भी कंबल दिया और कहने लगा कंबल के अंदर पैर डाल लो। और वो कंबल ओढ़ के सो गया मैं पास में ही बैठी थी। और उसके बाल भी सहैलाया। वो गहैरी नींद से सो गया लेकिन बार बार समय देख रहा था। फिर उसने मुझे कहा मेरे होठो पे किश करोमैंने कहा मुझे नहीं आता है मैं नहीं करुँगी|मैंंने कहामैंने कभी किसी को किश नहीं किया कहने लगा जीवन में हैर काम पहैली बार ही होता हैं। इसमें क्या हैं। और फिर अपने होठो की तरफ इसारा करने लगा। फिर आखिर मैं उसके होठो तक अपने होठ ले गयी और फिर हैमदोनो ने एकदूसरे के होठो को चूमा। फिर थोड़ी देर बाद उसने अपने ट्रॉउज़र निकाल दिया और वो नंगा हो गया। हैर बात को लिखना सायद संभव ही नहीं है। एक मर्द को नंगा देख मुझे अच्छा नहीं लगा पर फिर भीमैंने अपने आपको वादा किया के मैं इस मर्द का कभी भी उसकी भावनाओ का मजाक नहीं उडाऊंगी। कभी नहीं सायद इसे ही लगाव और प्यार कहैते है। के किसी के निजी भावनाओ को अपने मन में रखना। कभी हिटलर की तरहै और लड़को का जैसे अपमान करती हूँ नहीं करुँगी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था फिर थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आया लेकिन फिर चला गया ट्रॉउज़र पहैन के दुसरी तरफ और कहने लगा मुझे सोना है मुझे कुछ समझ नहीं आया और मुझे पता था के उसे नींद आ रही है क्यों के वो रात को ठीक से सो नहीं पाया था।

और वो सो गया मैं पास में बैठी थी हैमने बहूँत सारि बाते की वो अपने और अपने परिवार के बारे में बहूँत कुछ बताने लगामैंने पूछा के अकेले बुरा नहीं लगता दुबई में कहने लगा हैर जुम्मा को मैं अपनी बहैन से मिलने जाया करता हूँ। कहने लगा देखो न मेरा पूरा चेहैरा काला हो गया है ब्लीच से, मैं तो चुप थी पर मुझे सच में लड़के काले ही पसंद है। । देखो पेट भी आ गए यहां आ के कहने लगा सिर्फ 12 दिन ही हूँए है न, यहां आ के !! मैं भी उसकी बातो में हा में हां मिला रही थी। मेरे चेहैरा पे हाथ लगा के कहने लगा आपको इतना दाना कैसे हो गया? और फिर सो गया मैंं उसके पास गयी तो कहने लगा रफत पता नहीं क्या पर मुझे बहूँत चुभ रहा है सायद आपके बाल और आपके कपडे और मेरे हाथो के चूडियो की तरफ इसरा कर के सब चुभ रहा है मुझे आप दूर रुको। मुझे कुछ समझ नहीं आया फिर मुझे याद आया के सायद वो थोड़ी देर पहैले जब मुझे गले लगाने आया था तो उसे मेरा शरीर चुभ गया इसलिए वो दूर आ के सो गया मुझे भी समझ नहीं आया के इतना क्या गड़ा उसे। फिरमैंने सोचा सायदमैंने स्पंज वाला ब्रा पहैना है वो ही गड़ा होगा। और मुझे याद आया के ब्रा सिर्फ स्पंज वाला नहीं है बल्कि रॉड वाला है। जो पहैनने वाले को चुभता नहीं है पर उसको तो चुभेगा ही ऊपर से। अब मैं चुप थी कहने लगा बस आप दूर रुको। मुझे बहूँत अजीब लगा क्यों की कहि वो ये न सोचे के मैंं उस से मिलने अपनी पूरी सुरछा के साथ आयी हूँ।मैंने अपने गले में हाथ डाला और ताबीज दिखते हूँए कहा के सायद ये आपको गड़ा होगा कहने लगा नमाज तो पढ़ती नहीं हो और ताबीज पहैनी हो।

मुझे हैसी आ गयी के ये मुझे अच्छा पहैचानता है "आयी लव यु "बोलै तो भी पहैचान गया के जबरदस्ती बोल रही हो और नमाज वाली बात भी।मैंने कहा नहीं नमाज तो पढ़ती हूँ। थोड़ी देर सोने के बाद उठ के मेरी आँखों में देख के इतनी मासूम सी सकल बना के कहने लगा यार थोड़ा तो प्यार करो इतनी दूर से आया हूँ। ऐसी सकल देख के मुझे सच में बहूँत प्यार आ गया और फिर हैमदोनो ने किश किया एक दूसरे को होठो पे। और फिर उसने ट्रॉउज़र निकल दिया सोये सोये और फिर किश करने के बाद वो पूछने लगा आपको सेक्स करना है क्या ? कंडोम है ! कहने लगा कुछ नहीं होगा सिर्फ आधा डालूंगा। मेरा जवाब कुछ नहीं था। ये बात उसने थोड़ी देर पहैले भी पूछा था पर मेरा जवाब कुछ नहीं था। जब वो उठने लगा तो उसके लिंग से वीर्य निकल रहा था वीर्य देख के मैं चौक गयी इतना जयादा जैसे पिशाब कर रहा हो। कहने लगा टॉवल दो फिर कहने लगा वो चादर थी न पिली वाली वो दो और वो चादर ले के उसे अपने लिंग पे रखा और वीर्य को साफ किया फिर ट्रॉउज़र पहैन लिया। उसे नहाना भी था और एप्पल स्टोर भी जाना था इतना समय नहीं था हैमारे पास। बातो बातो मेंमैंने उस से पूछ लिया वैसे आप पॉकेट में कंडोम ले के घूमते हो? कहने लगा नहीं है। झूठे !!!फिर भीमैंने इस विषय पर उस से जयादा बहैस नहीं किया। इतना जयादा वीर्य और कंडोम वाली बात, तथा इतनी आसानी से ट्रॉउज़र उतारने ये सब देख मुझे ये तो समझ आ गया था के वो किश हैग तो क्या पता नहीं कितनी बार सेक्स कर चूका होगा।मैंने उस से पूछा वैसे कितनी गर्लफ्रेंड है आपकी ?मेरी आँखों में आंखे डाल के कहने लगा गर्लफ्रेंड नहीं है मेरी, नहीं है। हैम ये तो पूछ ही न सके तो क्या वाइफ है !!मैंने फिर पूछा वैसे शादी का ख्याल कैसे आ गया कहने लगा शादी तो करनी ही है न। मैंने पूछा मैंं उबाऊ हूँ न कहने लगा कसम से बहूँत उबाऊ हो पता नहीं मैंं यहाँ आया ही क्यों ? ये बाते सुन के मुझे मन में लगा के वो मुझे हैग भी नहीं कर पाया सायद इसलिए थोड़ा नाराज हो गया है। पर मैंं क्या करती क्युकी मेरा रॉड वाला ब्रा हैम दोनों के बिच था। और फिर वो कहने लगा आप सो जाओ मैं नहा के आता हूँ वो बात उसने फिर से दुहैराया के गर्लफ्रेंड नहीं है मेरी। कहने लगा,लड़कियाँ... यार बहूँत आयी बहूँत गयी। थोड़ी देर में ही वो दूसरे कमरे में चला गया अपना सामान ले के नहाने। औरमैंने टीवी बंद कर दिया फिर गैलरी की तरफ जा के खड़ी हो गयी। किश करने के कारन मेरे होठो से लिपस्टिक जा चूका था इसलिएमैंने फिर से लिपस्टिक लगा लिया। पता नहीं क्यों मन में कुछ बात थी पर क्या पता नहीं सायद उस से दूर जाने का डर। मैं पूरी शांत हो गयी थी। और फिर वो नहा के आ गया कहने लगा

आप सोई नहीं अपने टीवी भी बंद कर दिया और उसने फिर से पूछा आप सोई नहीं मेरा जवाब हा न न हा ऐसा ही था। कहने लगा ठीक है चलो अब, होटल के दरवाजे पे आ केमैंने मेरे पेट पे हाथ रखा वो कहने लगा क्या हूँआ भूक लगी हैमैंने हा कहा कहने लगा मुझे भूक नहीं हैं। फिर हैम कार में आ गए। कार में आते ही कहने लगा एप्पल स्टोर किधर हैंमैंने उसे बताया के बस स्टॉप के पास में ही है फिर थोड़ी देर बाद पूछने लगा बस स्टॉप किधर है और कार ड्राइवर मेरे कहने पे कार इधर उधर धुमाने लगा। वो लोग कार दूसरी तरफ से ले के आ रहैे थे इसलिए मैं थोड़ा राश्ता भूल गयी वो पूछने लगा रफत राश्ता बोलोमैंने कहा इधर से लो और कार ड्राइवर ने कार मोड़ दिया और इस तरहै कार वन वे पे आ गयी ड्राइवर कहने लगा ये वन वे है अब तो लव कहने लगा रफत बताओ राश्तामैंने कहा इधर कहने लगा दायी और बायीं बताओ मुझे राश्ता समझ में नहीं आ रहा था वो गुस्सा हो गया कहने लगा रफत यार हैमलोग मुसाफिर है यार, हैमलोगो को राश्ता नहीं पता !कहाँ है आपका लाइब्रेरी !कार तभी लाइब्रेरी के पास ही थी उसके गुस्से के वजहै सेमैंने कहा थोड़ी और आगे है फिर उसने अपने मोबाइल से लोकेशन ट्रैकर लगाया और कहने लगा लो आ गया आपका चर्च। वो मजाक उड़ा रहा था क्यों केमैंने पहैले काफी समय उसे चर्च में मिलने के िए कहा था न।मैंने कहा आगे मुझे उतार दो और ड्राइवर ने कार रोक दी कार में हूँयी बातो से मैंं और चुप हो गयी पता नहीं क्यों मन बस शांत हो गया मैं कार से निचे उतरी और उस की तरफ हाथ बढ़ा के उस से हाथ मिलाया पता नहीं क्योंमैंने उसका हाथ बहूँत जोर से दबाया कहाँ पता था के उन हाथो को मैंं सायद आखिरी बार छू रही हूँ या किस्मत को कुछ और मंजूर हैं !!!। मन का डर अब सायद मेरी चुप्पी में दिखने लगा। मुझे प्यार हो गया था उस से। और मैंं बहूँत उदास हो गयी उस से दूर हो के। मन पूरा शांत मैं अब लाइब्रेरी के पास तक़रीबन 3 बजे आ के स्कूटी चालू करने वाली थी सोचा पूछ लू स्टोर मिला के नहींमैंने मैंसेज किया। के आपको स्टोर मिला कहने लगा हाँ मिल गयामैंने कहा जान बहूँत भूख लगी है खाना खिलाने वाले हीरो तो सिर्फ फिल्मो में मिलते है न असल जीवन में आपके जैसे सिर्फ प्यार से पेट भरने वाले हीरो मिलते है न ?

कहने लगा आप रहैने दो एक तो आप मुझे देरी से ले गयी। मैंने कहा क्या कहने लगा कुछ नहीं। फिर मैं घर आ गयी और खाना खाया। उसदिनमैंने उसे शाम को बहूँत मैंसेज किया बहूँत सारि बाते लिखी पर उसका जवाब बिलकुल भी नहीं आया सिर्फ मैंसेज पढ़ा उसने मुझे लगा राश्ते में होगा। मैंसेज किया के पहूँंचे के नहीं जवाब आया हाँ। मैंने उसे रात को सिर्फ गुड नाईट कहा और सो गयी क्यों के मुझे लगा आज ही तो मिल के गया है और अभी पंहूँचा है तो परेशान करना ठीक नहीं है। दूसरे दिन रविवार था और मेरा टूशन तोमैंने उसे बताया के मैं आज टूशन जा रही हूँ तो बाते नहीं कर पाऊँगी लेकिन फिर भीमैंने टूशन के ब्रेक टाइम में उसे दो चार मैंसेज किया था लेकिन उसका जवाब मुझ से भी काम था। उसने कहा वो व्यस्त है। और फिर तक़रीबन 3 बजे उसने मुझे कहा के वो वापस जा रहा है और थोड़ी देर में पहूँंचेगा मैं टूशन में थी तोमैंने उस समय कोई जवाब नहीं दिया फिर शाम कोमैंने पूछा दुबई क्या,कहने लगा हाँ। और अब तो उसने मुझ से कहै भी दिया था के वो दुबई में है तोमैंने भी उसे परेशान नहीं किया। मन जो शांत था डरा हूँआ था और एक लड़की के मन को सायद पता था के अब क्या होगा। 26 अगस्तमैंने बहूँत मैंसेज कियामैंने कहा के आप सायद दुबई जा के व्यस्त हो गए हो और बहूँत सारि बाते उसने सारे मैंसेज पढ़े और उसदिन तक़रीबन 9:51 को उसका जवाब आया। मैं आपमें इंटरेस्टेड नहीं हूँ मुझे माफ़ कर दो। सायद उसकी इंसानियत जाग उठी !अब मेरे मन का जो डर था सच हो ही गया उसके ऐसे मैंसेज देख के अब लड़की बस मौन हो गयी।मैंने कहा मुझे पता है,कैसे करते हो ये सब छी,इतनी मासूम लड़की के साथ ऐसी हैरकत !मैंने कभी किसी को अपने आप को छुने तक नहीं दिया,मैंंने आप पे भरोसा किया इसलिए आपने मुझे बेवकूफ बनाया न। कहने लगामैंने कुछ भी गलत नहीं किया आपके साथ !!! सायद उसे किसी बात का बहूँत अफ़सोस था !मैंंने कहा आपने मुझे किश किया भूल गए कहने लगा नहीं मैंं नहीं। कहने लगा मैं फिर गोवा आ रहा हूँमैंने कहा अब मैं कभी किसी के साथ कोई रिश्ता नहीं बनाउंगी कहने लगा थोड़ा व्यस्त हूँ जल्द ही मैंसेज करता हूँ। अब सब ख़त्म हो चूका था। आँखों में आँशु भर गया क्या कहूँ क्या लिखू और क्या पुछु ! मन में एक लगाव थामैंने कहा आप झूठे हो सच्चे हो जो भी हो मैं आपके लिए जान दे सकती हूँ कहने लगा मुझे ये सब बाते नहीं पसंद। मैंने कहा मैं आपसे प्यार करती हूँ कहने लगा ज़बरदस्ती से मुझे नहीं अच्छी लगी आप मुझे नहीं अच्छी लगती ये सब बातें !

और फिर मैं पागलो की तरहै मैंसेज पे मैंसेज करती रही और अब वही भावनाओ से भरा मेरा मैंसेज पढ़ने के बाद वो कहने लगा यार क्या कर रही हो ? मुझे बुखार है। मैं और भावुक हो गयीमैंने कहा बुखार तो आपको उसदिन ही था न दवाई ले लो आराम करो कहने लगा अच्छा ठीक है अब सोने दो। मैं थोड़ी खुश हो गयी क्यों की मुझे पता चला के वो बुखार के वजहै से मेरे सवालो का जवाब नहीं दे रहा था। मैंने फिर से काफी समय बाद मैंसेज किया तो कहने लगा यार क्यों सता रही हो ? अब एक लड़की के मन का डर बार बार उसे मैंसेज करता रहा पर वो मैंसेज पढता लेकिन कोई जवाब नहीं दे रहा था और बहूँत सारे मैंसेज के बाद रात को जवाब आया मैं व्यस्त हूँ। फिर से मेरे मन ने कहा सायद मैं उसे परेशान कर रही हूँ !और कहने लगा कसम से अगर ऐसे ही तकलीफ डोंगी न तो ब्लॉक कर दूंगा। अब तो सारे आस ही ख़त्म हो रही थे। दूसरे दिनमैंने उसे सिर्फ दो चार मैंसेज ही भेजा वो पढ़ा लेकिन उस ने कोई जवाब नहीं दिया मुझे पता था के वो व्यस्त होगा दुबई में। इसलिए जवाब नहीं दे रहा है। और इस तरहै अब जवाब बंद ही हो गया फिरमैंने बहूँत सारे मैंसेज भेजा तो दूसरे दिन जवाब आया कहने लगा मैं जरूर मैंसेज करूँगा थोड़ा व्यस्त हूँ। और इस तरहै मेरे मैंसेज बढ़ते गए और वहाँ से दिन में सिर्फ एक ही जवाब आता वो भी मैंं व्यस्त हूँ इस तरहै 2 सेपटेम्बेर को कहने लगा यार क्यों पीछे पड़ी हो ?मैंने उस दिन कॉल किया तो उसने फ़ोन उठाया और पूछा कौन ?फिर फ़ोन काट दिया तबमैंने उसे और लिखा लव क्या हूँआ? मेरा मैंसेज पढ़ा और

कहने लगा ठीक है,और अब व्यस्त हूँ। |और फिर 5 सेपटेम्बेर का जवाब था मुझे आप नहीं चाहिए आप क्यों नहीं समझती ! मुझे नहीं पसंद हो आपमैंने पूछा क्या हूँआ कहने लगा आप बहूँत अजीब दिखती हो। मैंने कहा पहैला किश लास्ट मत बनाओ कहने लगा अब आप मेरे साथ जबरदस्ती कर रही हो। कहने लगा मैंं अपनी जान दे दूंगा अल्लाहै की कसम अगर आपने मुझे और परेशान किया तो अब तो मेरे पैरो तले से जमीं भी खिसक चूका थामैंने पूछा और मैंं क्या करू ?कहने लगा मुझे नहीं पसंद हो आप,मुझे बहूँत काम है आप हमेशा तंग करती हो ! मैंं सो रहा हूँ !क्या मैंं सो जाऊ ?कल मुझे ऑफिस जाना है मरे लिखने पे कहने लगा मुझे सोना है सोने दोगी अभी? गुड नाईट !और जब मैंं फिर भी लिखती रही तो कहने लगा मैंं आपको ब्लॉक कर दूंगा,अगर और तंग किया तो ! और फ़िलहाल अभी सोने दो। मैंं फिर भी लिखती रही तो कहने लगा यार आप थकती नहीं इतना सारा मैंसेज कर के ?नींद तो मेरी अब उड़ चुकी थी। इंसानियत का ये रूप अब सायद मुझे खाने लगा था। मैंने उसे जब ये लिखा के मैंं मरना नहीं चाहैती तो कहने लगा यार मैंं काम से जर्मनी जा रहा हूँ ! गुरुवार तक आऊंगा 12 तकमैंने कहा मुझे बात करनी है जयादा समय मत लेना ! तब तक मुझे मेरे प्रोजेक्ट पे काम करने दो ! आके मैं आपसे इंडिया में बात करता हूँ ! मैं खुश हो गयी के वो फिर मिलने आएगा औरमैंने फिर उसे मैंसेज नहीं किया लेकिन मन की दशा अब शरीर पर असर डालने लगी थी और मैं धीरे धीरे बीमार पड़ रही थी। और 10 सितम्बर उसने मेरा स्टेटस पढ़ा "बैठे है बड़ी फुरसत से, तेरी फुर्सत के इंतजार में " और मुझे ब्लॉक कर दिया। फेसबुक पे तो दो चार दिन पहैले ही ब्लॉक कर दिया था एक ही आश थी वो भी ख़त्म हो गया। अब मुझे कुछ होश नहीं रहा मैं बहूँत बीमार हो चुकी थी न चलने की ताक़त न बोलने की। जिन होठो को उसने चूमा था अब उसमे बिलकुल भी जान न थी हैॉट सुख चूका था। और फिर 11 सितम्बर को पुरे दिन मैं बिलकुल बेहोश थी बिस्तर पर पड़ी। न खाने की फ़िक्र न समय की याद। इतने दिनों से जो बुखार मुझे थोड़ा थोड़ा था वो अब बहूँत तेज हो गया डॉक्टर भी परेशान हो गया। और उसने फिर से बहूँत हार्ड पावर की दवाई दी कहने लगा अगर अब बुखार कम नहीं हूँआ तो इसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा क्यों की 1 हैफ्ते से बुखार कम होने के बजाए बढ़ ही रहा है शरीर की हालत अब बिलकुल भी ठीक नहीं थी। और फिर 12 सितम्बर को सुबहै जबमैंने 5 बजे उसे कॉल किया कॉल तो उठाया नहीं पर उसका फिर से मैंसेज आया अ|पने मुझे कॉल क्यों किया था ??? प्लीज मुझे कॉल मत करो !मैंने मेरे लिए लड़की पसंद कर ली है दुबई में ! और मैं उसके साथ खुश हूँ ! प्लीज मुझे तंग न करो ! अल्लाहै हाफिज !!! और मुझे फिर से ब्लॉक कर दिया ! अब तो हैम सायद आधे मर चुके थे सुबहै सुबहै ऐसा जवाब शरीर के साथ साथ चेहैरे की रंगत भी जा चुकी थी। मन का दर्द अब शरीर को बेजान कर चूका था खाना पीना कम खाने की वजहै से चेहैरा भी अब और गन्दा हो चूका था। बुखार तो दो चार दिन में कम हो गया फिर मैं उस होटल में गयी तो मुझे किसी तरहै उस के साथ आये ड्राइवर का नाम और फ़ोन नंबर के साथ साथ उसके घर का पता मालूल चल गया लेकिन मैं घर के पता का क्या करती ?मैंने उस ड्राइवर को कॉल किया तोमैंने उसे बताया के मैं रफत बोल रही हूँ मेरा नाम सुनते ही उसने मुझे डाटा और मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया। लेकिन अब एक लड़की का चेहैरा एक तो पहैले से ही दिल्ली जाने के कारन थोड़ा दाना हूँआ था अब वो दाना बहूँत गन्दा हो चूका था। डॉक्टर जो मेरे चेहैरे का इलाज थोड़े से दाने के लिए कर रही थी अचानक चेहैरे का इतना गन्दा होने से परेशान हो गयी। और मैंं अब दिनभर ऑफिस में बैठ के रोने लगी। कोई आश नहीं था जब भी केबिन में कोई नहीं होता हैम रो लेते थे। दिनभर ऑफिस में रोती, शाम को मंदिर में,और रात को बिस्तर पे। अब कुछ होश नहीं रहा। अब मेरे शरीर का हाल बुरा हो चूका था ऑफिस भी कम जाने लगी। घर वालो ने मुझे अब एक और डॉक्टर के पास ले गया उसने मेरा पूरा शरीर चेक किया,खून चेक किया के आखिर मुझे हूँआ क्या है? मैंं पूरी तरहै बेजान हो चुकी थी लेकिन डॉक्टर की सारि रिपोर्ट नार्मल थी डॉक्टर कहने लगे हो सकता है के शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा हूँआ हो डॉक्टर को भी अब हैमारी बीमारी का पता नहीं चल पाया और उसने विटामिन वगैरहै की गोलियां दे दी। घर वाले पूरा परेशान और अब मेरा हैसना,बोलना,खेलना सब बंद हो चूका था। दिन में ऑफिस जाती थी तो कभी नहीं। ऑफिस वाले भी मेरे इतनी छुटियो से परेशान हो रही थे। और मैंं बस अब अँधेरे कमरे में बिस्तर पर सोये रहैती मुझे किसी भी बात का होश नहीं रहा। हैम मर रहैे थे लेकिन उसका कोई सन्देश नहीं आया सायद हैमारी दुनिया को लूट के अब वो अपनी दुनिया में बहूँत खुश था !!! आँखों में सिर्फ और सिर्फ अंशु थे ऊपर से डॉक्टर ने जो मरहैम दिया था अपने चेहैरे पे लगाने का उसके कारण चेहैरे का चमड़ा उखड रहा था उस पे मेरे नमक वाला अंशु बहूँत दर्द भी हो रहा था मुझे। समय बीतता गया लेकिन उसका कोई कॉल या मैंसेज नहीं आया मैं अब ऑफिस जाने लगी थी लेकिन मेरे हालत बिलकुल ठीक नहीं थी शाम को मंदिर और चर्च में जा के रोती। मेरे जैसी लड़की जो मंदिर में सिर्फ प्रसाद खाने जाया करती थी अब मैं मंदिर के घास पे बैठ के रो सकती हूँ इसलिए जाने लगी। मेरा विस्वाश कहैता था के मंदिर में प्रसाद का चढ़ाना,या चर्च में मोमबत्ती जलाना सिर्फ एक व्यवसाय ही है। ऐसा नहीं है के मैं भगवन को नहीं मानती थी लेकिन पूजा- पाठ में थोड़ा कम विस्वास था। मंदिरो से जान बुझ के भगवन के प्रसाद उठा के खाना,पहैले तो कभी कभी जब मैं बहैन के साथ चर्च में मोमबत्ती जलाने जाया करती थी,मेरी बहैन बड़े ही विस्वास से चर्च में मोमबत्ती जलाती थी और मैं रफत बड़े ही विस्वास से आसपास बिना जले मोमबत्तियों को उठा के अपने पास रख के घर ले आती। क्यों की मुझे लगता था के ये सब धन की बर्बादी है। और जिन मंदिरो में मैं प्रसाद खाने जाया करती थी उस के दान पेटी में फैसल सेख के नाम का दान किया। और कहा भगवन से क्या हूँआ सारे प्रसाद के पैसे ले रहैे हो ? ले लो पर मुझे मेरा प्यार लौटा दो ! जिस चर्च से मोमबत्ती उठाया था अब उस चर्च में मोमबत्तिया जलाने लगी थी मैं। चर्च में भी यही कहा जा के क्यों उस दिन मोमबत्ती घर ले गयी उसका हिसाब ले रहैे हो क्या ?पर उस से जयादा तोमैंने अब जला दिए मोमबत्ती आपकी चौखट पे ! अब तो लौटा दो मेरे फैसल सेख को ! अब मुझे अपने पढाई का भी होश नहीं था कुछ दिन टूशन नहीं गयी क्यों के मैं बीमार थी और फिर एक दिन जब टूशन गयी तो उस दिन नेट का क्लास ही नहीं था सर ने कहा मैंसेज नहीं देखा क्या ? मैंंने कहा नहीं !!!आज आपका क्लास नहीं है और इसलिए मैं फिर टूशन के पास वाले हालशा के मंदिर में चली गयी वहाँ कोई नहीं था मैं घंटो बैठ के वहाँ फुट फुट के रोई कहा भगवन तुम तो पत्थर हो ! कौन फैसल सेख को बताएगा के मैं इतना रो रही हूँ ?उसे कैसे पता चलेगा दुबई में ?कौन मेरा संदेसा पहूँचायेगा ? रो रो के 10 से 3 बज चूका था अब तो रोने के लिए भी आंशु नहीं था फिर सर उठाया तो देखा इस मंदिर में तो कैमरा है मेरा रोना उस कैमरा में रिकॉर्ड हो चूका था पर फिर भी अब मैं चुप हो गयी। और मुझे याद आया के ये कैमरा तो सायद उस चर्च और मंदिर में भी है जहां मैं अक्सर रोने के िए जाती हूँ। मैं और रोने लगी के अब रोने कहाँ जाऊ भगवान ? हैर जगहै तो कैमरा लगा है ? मैं इतनी हैरान थी की अब मुझे कुछ याद नहीं था न मेरे सपने न मेरी खुशियाँ ! सिर्फ और सिर्फ आँखों में अंशु ही थे ! मैं रोना नहीं चाहैती थी पर पता नहीं क्यों आँशु रुक ही नहीं रहैे थे ! दूसरे दिन फिर सेमैंने कोचिंग का मैंसेज नहीं पढ़ा उस दिन क्लास 3 बजे से था लेकिन मैंं 10 बजे ही पहूँंच गयी और व्हा पता चला के क्लास 3 बजे है और आज फिर मैं उसी मंदिर में गयी के थोड़ा रो लू लेकिन आज फिर से भगवान से शिकायत "हैे भगवन कैमरा लगा के मन नहीं भरा जो अब इतने लोग है यहां अब कहां जाऊ रोने ?

फिर भी थोड़ी देर बैठी व्हा सायद कोई पूजा थी एक आदमी आया और मेरे हाथो में प्रसाद दे गया खाने का तो मन नहीं था, फेक भी नहीं सकती थी प्रसाद था। और वो प्रसाद बहूँत जयादा था जितना आजकल मैं दोपहैर को खाना खाती थी। और फिर जबरदस्तीमैंने वो प्रसाद खाया। फिर व्हा से पंडित आया और कहने लगा खाना खा लो,इधर से जाओ व्हा खाना खिलाया जा रहा है। पेट में तो भूक थी ही नहीं पर पंडित की बात मैं टाल न स्की और मैं जहां सबलोगो को खाना खिलाया जा रहा था व्हा पहूँंची जब खाना लेने गयी तो कतार में मैं सबसे अंतिम में खड़ी थी और जैसे मेरा नंबर आया खाना ख़त्म हो चूका था। और अब सायदमैंने सोचा भगवन भी अब कुछ नहीं देने वाला चलो यहां से ! थोड़ा चावल था और अचार थाली में लिए और आँखों में और आँशु भर गए। के अब कुछ नहीं मिलेगा। जब हैमारी थाली पर खाना बांटने वाले की नजर पड़ी तो कहने लगा रुको ! तुम भगवान का भोग लगा दिव्य प्रसाद खा लो मैं ले के आता हूँ ! अब तो उस थाली में भोजन बहूँत था और मैं खाने बैठ गयी इतना भोजन खाना मेरे लिए संभव नहीं था पर वो तो दिव्य प्रसाद था फेक भी नहीं सकती थी और उसदिन न जाने कितने दिनों बादमैंने भर पेट खाना खाया ! दिन बीतता गया पर फैसल सेख का कोई कॉल,मैंसेज कुछ भी नहीं आया। और एकदिनमैंने सोचा कोई दूसरे नंबर से उसे मैंसेज करती हूँमैंने रात को जब दूसरे नंबर पे मैंसेज किया तो उसका जवाब आया लेकिन जवाब अब कुछ और ही था और फिर थोड़ी देर बाद मुझे दूसरे नंबर से मैंसेज आने लगा के तुम कौन ? तुम फैसल को कैसे जानती हो ? तुम मेरे बॉयफ्रेंड फैसल के पीछे क्यों पड़ी हो ? तुम चोर हो ! और मेरे बहूँत लिखने पे उसकी तरफ से जवाब आया " रेस्पेक्ट योर सेल्फ गर्ल "अजीब बात थी अब मुझे पता चला के सायद मैंसेज करने वाला कोई दूसरा व्यक्ति है। और उसके बाद मुझे रत 1 बजे तक उस नंबर से कॉल आने लगा परमैंने फ़ोन नहीं उठाया फिर भी उसने मुझे मैंसेज किया के तुम फ्रॉड हो,चोर हो इसलिए मेरा फ़ोन नहीं ले रही हो ! और मैं फ़ोन स्विच ऑफ कर के रख दिया फिर दूसरे दिन सुबहैमैंने उस नंबर पे कॉल किया और कहा आप जो भी हो मुझे वापस कॉल कर लो फिर बात करते है ! और थोड़ी देर बाद मुझे फिर से उस नंबर से कॉल आया

मैंने फ़ोन उठाया अब तो बात अलग ही थी वो किसी लड़की का फ़ोन था ! कहने लगी फैसल मेरा बॉयफ्रेंड है तुम उसे कैसे जानती हो ?मैंंनेउसे बताया के मैं उसकी गर्लफ्रेंड हूँ कहने लगी क्या तुम उस से मिली हो ?मैंंने हा कहै दिया उसे बताया के वो मुझ से निकाहै करना चाहैता था ! वो लड़की रोने लगी कहने लगी जब वो छुट्टियों में इंडिया गया था तब तुम उस से मिली न ?उसकी आवाज में बहूँत दर्द था कहने लगी तुम्हारे पास उस के साथ कोई तस्वीर है क्या ?मैंने न कहै दिया !मैंने कहा उस से उसने मुझे धोका दिया मैं जान दे दूंगी कहने लगी मुझे परवाहै नहीं है ! जब उसने मुझे कहा के वो कल रात मेरे साथ था जब तुम्हारा कॉल और मैंसेज आ रहा थामैंने पूछा अभी कहा है उसने कुछ नहीं बताया बार बार पूछने लगी क्या वो तुमसे मिला था ?अब न तो उसकी मुँहै में आवाज थी न मेरे सायद दोनों ही बस दंग थे एक दूसरे के बारे में जान के ! वो मुझे झूठा मान रही थी और मैं उसे !मैंने कहा उसने मुझे धोका दिया लड़की के आवाज में बहूँत दर्द था कहने लगी तुम्हैे ..............और उसने फ़ोन काट दिया। तुम्हैे ........अब मैं और परेशान हो गयीमैंने सोचा हो सकता है ये फैसल की कोई दोस्त वगैरहै होगी और मुझे बस ये बताने के लिए कॉल किया होगा के अब मैं उस से बात न करू| वो भी फैसल सेख के कहने पे। लेकिन लड़की के आवाज में जो दर्द था तुम्हैे .........ये सब्द मुझे कुछ और ही कहै रहैे थे। अब क्या कृ ?मन और रो पड़ा आखिर क्या है ? ये मन ने माना नहीं के ये लड़की लव की गर्लफ्रेंड है क्यों की उसने बार बार यही बोला था के उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। पर फिर ये क्या है हो सकता है झूठ हो लेकिन ये सब्द तुम्हैे ....मेरे कानो में गूंजने लगा के इतना दर्द एक लड़की की आवाज में क्यों ?

अब तो उम्मीद का बांध टूट रहा था फिरमैंने किसी तरहै उसके दोस्त से बात की और उसके दोस्त ने उसे बता दिया के मैं उस से उसके बारे में पूछ रही थी। और फिर उस दिन उसका कॉल आया कहने लगा रफत फैसल बोल रहा हूँ,मेरे मुँहै में तो अब आवाज ही नहीं था हा बोलिये कहने लगा रफत आप मेरे दोस्तों तक पहूँंच गयी !मैंने कहा आप ने मुझ से झूठ बोला दुबई में आपकी गर्लफ्रेंड है फिर भी आप क्यों आये थे ? कहने लगा शादी करनी थी?मैंने कहा तो अब क्या हूँआ ? कहने लगा नहीं करनी ?मैंने कहा लव चिल्ला के कहने लगामैंने कहा न अब नहीं करनी है ! यार आप मेरे टाइप की नहीं हो। बताओ बताओ क्या गलत किया बोलो अब मैं सिर्फ लव, लव बोल रही थी और उसके बदले हूँए अंदाज का असर तो आवाज की गूंज से मुझे पता चल रहा थामैंने कहा मुझे लाइफ ही नहीं चाहिए कहने लगा बताओ बोलो क्या गलत किया हैम तो ये पूछ ही नहीं पाए आखिर सही क्या किया ?कहने लगा यार...... मेरी इंगेजमेंट होने वाली है ऐसे कहा जैसे मैं ही उसके इंगेजमेंट टूटने का कारन हूँ ! मेरे लव, लव कहने पे कहने लगा और लव - लव क्या लगा रखा है ! कहने लगा देखो रफत घर पे आ के बैठूंगा समझ लेनामैंने कहा तो आ जाओ अच्छा है यही तो चाहैती हूँ मैं |थोड़ा ठंडा हूँआ और कहने लगा देखो रफत मैं जनता हूँ के आप एक अच्छी लड़की हो मैं भी अच्छा लड़का हूँ !!!आप चिंता मत करो मैं आपको दुबारा कॉल नहीं करूँगा ..ये वादा सायद उसका पक्का था आज इतने दिन बीत गए एक कॉल नहीं आया। एक लड़की की हालत अब बिलकुल ख़राब हो चुकी थी मन का सारा दुःख चेहैरे से छलकने लगा था अब फुल सा चेहैरा बिलकुल ख़राब और मायूस हो चूका था। किसी तरहैमैंने अब उसकी एक बहैन दिलसा सब से बात की। और फिर दिलसा सब ने मुझे कॉल किया और पूछा बताओ क्या हूँआ ?

मैंंने उसे अपने बारे में बताया अपने परिवार और फिर हैमारे और फैसल के बारे में बताया। मेरे कुछ बोलने से पहैले ही वो कहने लगी रफत देखो अगर फैसल ने तुम्हारे साथ कुछ गलत किया होगा तो अल्लाहै उसे जरूर सजा देगा !!!मैंंने उस से पूछा क्या आपका भाई शादी सुदा है? वो कहने लगी नहीं तोमैंने कहा क्या दुबई में उसकी कोई गर्लफ्रेंड है ?वो कहने लगी ये बात मुझे नहीं पता रफत आप एक काम करो उसकी गर्लफ्रेंड के बारे में उसके दोस्तों से पूछो ! पता नहीं अ|पने अपने घर वालो को क्या कहा होगा ? आजकल के बच्चे भी न पहैले घरवालों से तो कुछ पूछते नहीं है पर जब कुछ गलत हो जाता है तब उन्हैें परिवार याद आता है। और वो मुझे समझाने लगी। और वो पूछने लगी बताओ मैं आपकी कैसे मदद कर सकती हूँ ?अगर आप चाहैती है तो मैं उस से कहैूँगी के वो आप से बात करे।मैंने कहा नहीं वो सायद और गुस्सा हो जायेगा ! मैंं उस से मिलना चाहैती हूँ वो कहने लगी रफत वो अभी- अभी 15 दिन पहैले गया है और वो तभी आएगा जब तक शादी के कार्ड पे उसका नाम नहीं छप जाता। और बताओ मैं आपकी मदद कैसे कर सकती हूँ ?मैंने कहा हैमारी मदद सिर्फ मेरे और उसके अलावा कोई नहीं कर सकता। मेरे भाई ने मुझे आपके बारे में नहीं बताया उसने कहा था के उसे एक पढ़ी लिखी लड़की चाहिए और इसलिए मेरे स्कूल में जो बच्चो की डॉक्टर आती है मैं उसकी शादी के लिए उसको पूछने वाली हूँ। आप एक काम करो अपनी एक तस्वीर मुझे दे दो मैं आपके लिए अपने माता पिता से बात करुँगी। और हा पागल मत बनो चिंता मत करो जो अल्लाहै चाहैता है वही होगा पता नहीं अल्लाहै क्या चाहैता है। और कहने लगी अगर मैं आपके फ़ोन और मैंसेज का जवाब न दू तो इसका मतलब ये मत समझना के मैं जवाब नहीं दे रही हूँ मेरा मोबाइल मेरे बच्चो के हाथ में भी रहैता है।मैंने कहा वो वो, कहने लगी वो अभी तक लड़की देख रहा हैमैंने कहा मैंडम ऐसे ? कहने लगी रफत देखो अगर फैसल ने तुम्हारे साथ कुछ भी गलत किया होगा न तो अल्लाहै उसे जरूर सजा देगा ! चलो ठीक है मुझे तस्वीर दे दो। और फिरमैंने उसे अपनी तस्वीर भेज दी। बहैन ने तो बाते अच्छे से की पर वो क्या कर लेगी ? मन में तो यही सवाल था क्यों के जब लड़का कुछ समझना ही नहीं चाहैता था तो मैं उसे कैसे समझा सकती हूँ। पर ये बात मुझे पता चल गयी की उसकी कोई इंगेजमेंट नहीं होने वाली है। मन तो फिर भी डरा हूँआ ही था। आँशु रुकने का नाम ही नहीं ले रहैे थे। अब क्या है ये क्या सच क्या झूठ कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

एक दिन दो दिन बीत गए पर उधर से कोई कॉल नहीं आया और फिर 26 सितम्बर जब मैं ऑफिस से निकल के रोते हूँए चर्च में गयी वहाँ मोमबत्ती जलाया और फिर अपने चेहैरा के इलाज के लिए, डॉक्टर ने बुलाया था उस से मिली। चर्च में बहूँत रोने के बाद डॉक्टर के यहां से जब रोते रोते स्कूटी चला के आ रही थी तो मुझे बहूँत रोना आने लगा। मैं बहूँत भावुक हो चुकी थी औरमैंने अपनी आंखे बंद की और कहा या खुदा अगर फैसल सेख को मेरी दुनिया में नहीं भेज सकता तो मुझे ही उठा लो। और मैं आंखे बंद कर के स्कूटी चलाने लगी रोड तो टेढ़े मेढ़े होते है तक़रीबन 1 मीटर रोड सीधा था सायद उसके बाद राश्ते टेढ़े होंगे मेरी स्कूटी मुड़ गयी और मैं बहूँत ही जोर से गिर पड़ी क्यों की गाड़ी स्पीड में थी और मेरा आंख बंद ! किस्मत ख़राब कहूँ या अच्छी ! उस समय जब मैं गिरी तब सड़क पर कोई गाड़ी नहीं थी मैं अब गिर चुकी थी उठ के अपनी स्कूटी का चाभी घुमाया और दूर गिरे स्कूटी को बंद किया फिर वही बैठ के दर्द से कहारने लगी। और फिर बहूँत सारे लोग अपनी अपनी गाड़ी रोक के आ गए मेरे पास कहने लगे एम्बुलेंस को बुलाओमैंने कहा रहैने दो मैं ठीक हूँ। लोगो ने स्कूटी देखा तो वो चूर हो चूका था लोग कहने लगे ये स्कूटी अब चल नहीं पायेगी आप इसे यही खड़े कर दो और अपने परिवार वाले को यही बुला लोमैंने कहा ठीक है पर फिर लोगो ने कहा तुम्हारे परिवार वाले को आने में १ घंटा लगेगा। एक कार वाला मेरे घर की तरफ ही जा रहा था कहने लगा चलो आधे राश्ते मैं छोड़ देता हूँ कार में आ जाओ। लोगो की बातमैंने मान ली और कार में बैठ गयी। कार में बैठते ही मुझे दर्द का एहैसास होने लगा और ऐसा लगा अब मैं बेहोस हो जाउंगी।

मैंने बरसाती पहैना था मेरा शरीर पूरी तरहै ढाका था सायद इसलिए इतनी जोर से गिरने के बावजूद भी मुझे चोट नहीं लगा और कहि से खून नहीं निकला। मेरा फ़ोन बैग में था औरमैंने ऊपर से बरसाती पहैना था इसलिए मुझे कार वाले ने कहा अपने परिवार का नंबर बोलोमैंने उसे बताया और उसने मेरी बहैन को बताया के रफत का एक्सीडेंट हो गया है आप आ जाओ राश्ते में। उसने फ़ोन कर के काट दिया। अब मैंं दर्द से कहारने लगी मेरी कमर,घुटने और कन्धा बहूँत जोर से दर्द होने लगा पर फिर भी मुझे उस दर्द का एहैसास ही नहीं था। मेरे हाथ बहूँत जोर से दुखने लगे दर्द में कहैरता देख उस इंसान ने मुझे कहा चलो पास में हैॉस्पिटल है मैं तुम्हैे व्हा छोड़ देता हूँ और तुम्हारी बहैन को वही बुला लेता हूँ। मैं कार में अकेली मरने के हालत में और अब मुझे पानी पिने से भी डर लग रहा था के कहि ये आदमी ने कुछ गलत किया तो ? लेकिन वो आदमी एक अच्छा आदमी था वो मुझे अस्पताल ले गया और फिरमैंने अपना बरसाती निकाला और जोर जोर से रोने लगी। लोगो को लगा सायद मुझे बहूँत दर्द हो रहा है इसलिए मैं रो रही हूँ लेकिन ऐसा नहीं था मेरे आँखों में आंसू दर्द के कारन नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ फैसल सेख के कारन था। डॉक्टर जल्दी से मेरे पेपर बनाने लगीमैंने बैग से उसे पहैले का बना पेपर निकाल के दिया क्यों के इनदिनों मैंं डॉक्टर के पास जयादा जा रही थी और इसलिए पेपर मेरे पास ही था। मुझे इतना रोटा देख डॉक्टर ने मुझे सुई लगा दी दर्द का और कहा एक्स रे करने जाओमैंने एक्स रे के लिए दे दिया लेकिन रिपोर्ट आने में समय था और मैं जोर जोर से रोने लगी। सुई के नाम से ही मुझे डर लगता थामैंने कभी सुई नहीं ली थी। लेकिन उस दिनमैंने 10-10 मिनट में 3 सुई लिया क्यों के मैं रो रही थी और डॉक्टर को लगा के मैं दर्द से रो रही हूँ लेकिन फैसल सेख के धोके के आगे ये दर्द कम था।

आसपास के लोग कोई लंड़गा था,तो कोई अँधा,किसी के पेट में दर्द तो किसी के सर में सब लोग उस अस्पताल में अपने जीवन के लिए लड़ रहैे थे और एक मैं ही पागल थी इसलिए रो रही थी के मैं बच गयी। एक्स रे की रिपोर्ट आ गयी और डॉक्टर ने बताया के हाथ में दर्द चोट के कारन है कोई टूट फुट नहीं हूँयी है आपको हाथ में बेल्ट लगाना पड़ेगा। अब अस्पताल में मेरा परिवार पहूँंच चूका था और डॉक्टर ने मुझे दवाई दे के घर जाने को कहा। अब सब ख़तम जिन हाथो में नेट एग्जाम की तैयारी के लिए पेन होना चाहिए अब उन हाथो में बेल्ट लग चूका था। डॉक्टर की दवाई में इतना नशा था और एक फैसल सेख का दुःख दोनों के कारन अब मैं दिन रात अँधेरे कमरे में सिर्फ और सिर्फ बिस्तर पे रहैने लगी। दिन के 5 बार खाना खाने वाली लड़की ने सायद एक दिन भी पेट भर खाना नहीं खाया। मैं फैसल सेख के कारन उदास नहीं होना चाहैती थी पर अपने मन को कैसे समझाती जिसे भूक ही नहीं थी। एक लड़की मर रही थी पर इस बात का ख्याल फैसल सेख को तो था ही नहीं। और फिर दुर्घटना के दो दिन बादमैंने उसकी बहैन दिलसा सब को मैंसेज किया केमैंने आत्महैत्या करने की कोसिस की लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। और फिर सायद शाम को कॉल आया कहने लगी आप इतनी पढ़ी लिखी हो के ये सब क्यों कर रही हो ? वो बहूँत गुस्सा थी मेरी आत्महैत्या की कोसिस से ? वो नाराज थी और कहने लगीमैंने फैसल को पूछा लेकिन वो तो कुछ और ही कहै रहा है ! मैं क्या कृ ?मैं रोने लगी तो उसे और गुस्सा आया कहने लगी क्यों कर रही हो ये सब ?मुझे कॉल मत करो !

जहैन्नम में जाओ मुझे कोई लेना देना नहीं है !होटल में मुझ से पूछ के गयी थी क्या ?अब तो सारि आस ख़त्म हो चूका था कोई राश्ता नहीं बचा मेरी दुर्खटना की खबर सुन के भी उसका कोई फ़ोन नहीं आया। अब मेरी हालत बिलकुल भी ठीक नहीं था न ऑफिस,न पढाई, न टूशन सिर्फ बिस्तर। और फिर 2 दिन बाद दिलसा सब का कॉल आया 1 अक्टूबर को तक़रीबन 11 बजे कहने लगी रफत उसने शादी की है दुबई में ! अब तो मेरे मुँहै में आवाज ही नहीं था। क्या ! मुझे लगा वो झूठ बोल रही है मुझे विश्वास ही नहीं हूँआ ! कहने लगी उसने दुबई में 4 नवंबर 2018 को  शादी की है और लड़की को 40-45 दिन का दिन चढ़ा है अब तो मेरे पैरो तले जमीन खिसक चूका था मुझे उस पे विस्वास ही नहीं हूँआ मैंं उसकी बात नहीं मान रही थी।मैंने माना ही नहीं वो सायद पहैले से ही गुस्सा थी कहने लगी तू कॉल गर्ल है !मुझे सब पता है बता तू कितने में बिकेंगे 100 या 500 में ?मैंंने कहा आप एक लड़की को ऐसा कैसे कहै सकती हो कहने लगी मुझे सब पता है तेरी माँ तुझे पाल रही है। तेरे पास स्मार्टफोन तो होगा न अपनी माँ को लाइन पे ले ! कहने लगी तेरा भाई भी कैसा है मुझे सब पता हैमैंने सब पता किया है। वो मुझे गालिया देने लगी कहने लगी कमीनी,कुट्टी मुझे पता है तू हिलाने को गयी थी न। मुझे तो समझ में ही नहीं आ रहा था आखिर वो गालियाँ क्यों दे रही है !मैंने कहा आप आ के मिल लो मुझ से कहने लगी मेरी जूतियाँ भी न मिले। तेरी औकात क्या है। मुझे बहूँत गुस्सा आया औरमैंने भी पूछ डाला और आप बताओ आप कितने में बिकोगी ?कितने करोड़ में ?कहने लगे करोड़ तुमने तो हैज़ार रूपये का कपडा भी नहीं पहैना है ! बहूँत सारि बाते सुंन|ने के बाद उसने फ़ोन काट दिया। मुझे अफ़सोस हूँआ के वो अपनी मर्यादा पार गयी तो क्या हूँआ मुझे ऐसा नहीं पूछना चाहिए के आप बताओ आप की कीमत क्या है ?मैंंने फिर से फ़ोन लगाया और कहा मुझे माफ़ कर दो आप बहूँत ही महैँगी हो बहूँत कीमती हो क्यों के आप एक नारी हो !

आपने दो दो बच्चों को 9 महीने पेट में रखा है आप बहूँत कीमती हो मैं आपको नहीं खरीद सकती मुझे माफ़ कर दोमैंने गुस्से से बोल दिया कहने लगी आ गयी औकात पे। और वो फिर से उल्टा सीधा बोलने लगीमैंने सिर्फ इतना ही पूछा आखिर वो आया क्यों था मेरे पास ?उसने मुझे बहूँत कुछ कहामैंने कहा मैं लिखती हूँ और अगर ये गलत है तो फिर सिर्फ और सिर्फ 2 रुपया का पेन ही काफी है उसके लिए वो फिर भी बहूँत सुना के फ़ोन काट दी। मन को तो इन सब पे विस्वास ही नहीं हूँआ !अब मैं थक के बैठ गयी फिरमैंने अपना फेसबुक अकाउंट देखा तो लव ने मुझे अनब्लॉक किया था सायद मेरी दुर्घटना के बाद मेरे ऑनलाइन आने का इंतजार कर रहा था लेकिन मैं 3-4 दिन से दुर्खटना के कारण ऑनलाइन हूँयी ही नहीं थी। अपने अकाउंट को अनब्लॉक देख मैं अब उसे मैंसेज करने लगीमैंने लिखा "लव बोलो सच क्या है ? सच बोलो मेरे लव ! क्या आप शादी सुदा हो ?क्या आप मुझे धोका देने आये थे ?बस एक बार सच कहै दो ! मेरा मन नहीं मानता ! के आप धोकेबाज हो ! बस एकबार कहै दो के आइशा आपकी बीबी है और वो मां बनने वाली है ! एक लड़की के सवालो का जवाब दे दो मेरे लव ! बस एक बार सच कहै दो मेरे लव !मैंने आत्महैत्या करने की कोसिस की और एक लड़की अन्धो की तरहै आपका इंतजार कर रही है ! इसलिए सच कहै दो मेरे लव ! बहूँत विस्वास किया है आप पे ! जब मैं स्कूटी चला रही थी तोमैंने अपनी आंखे बंद कर ली और मेरे हाथ में चोट लग गया है मेरे लव ! मैं अपाहिज हो गयी !

और फिर उसका एक जवाब आया 1 अक्टूबर 3:15 को " मुझे नहीं पता के आप मेरे पीछे क्यों पड़ी हो !मैंने तुम्हैे पहैले भी बताया था के मैंं शादी सुदा हूँ। आएशा मेरी बीबी है और वो माँ बनने वाली है। " इतना कहै के उसने मुझे फिर से ब्लॉक कर दिया सायद कहानी जो फेसबुक पे सुरु हूँयी थी वही आ के सिमट गयी। और मैं यही सोचते रहै गयी के उसने मुझे कब बताया के वो शादी सुदा है ? अबतो मैं पूरी तरहै पड़ गयी अब किसी बात का होश न था मुझे। और ऑफिस से घर लौटते समय मदर मेर्री के चर्च पे पहूँंची। उस जगहै पे भीमैंने पहैले फैसल सेख के नाम का मोमबत्ती जलाया था। लेकिन आँखों में और अंशु भर गया क्यों की चर्च में ताला बंद था मैं रो पड़ी इसका मतलब क्या माँ ? सब दरवाजे बंद हो गए ? फिर मेरी नजर अंदर रखे मोमबत्ती पे पड़ीमैंने जाली से हाथ डाल के मोमबत्ती निकाला फिर भी माचिस कहा से लाउ ? और कहाँ जला के रखु फिर सामने देखा तो पास में धीमी आंच में लालटेन जल रहा थामैंने मेरी मोमबत्ती जलाई पर रखु कहाँ ? पास में एक जगहै थी जो मोमबत्ती जलाने के लिए ही थीमैंने अपना मोमबत्ती जलाया और रो पड़ी इसका क्या मतलब दरवाजा तो बंद हो चूका तो फिर अपने विस्वास का मोमबत्ती कैसे जलाते चलू ? अब मांगू भी तो क्या ? मन फिर भी कुछ मानने को तैयार नहीं था पर सच तो यही था के उसने ही कहा के प्यार करता है ! अब नहीं करता तो क्या करू ? हो सकता है ये बाते झूठ हो लेकिन सच तो यही है के उसे अब मेरी जरूरत नहीं है। मन अब और घुटने लगा, न मंदिर में चैन, न चर्च में न ऑफिस में न बिस्तर पे। पता नहीं क्यों अब मुस्कुराने का मन तो कर ही नहीं रहा था। माँ ने तो कहै दिया के हैमने अपनी बेटी खो दी है।

परिवार वाले हैँसाने की हैर कोसिस कर के थक गए पर मैं खुल के हैस न स्की। हैफ्ता दो हैफ्ता बीत गए पर अब किसी का कोई कॉल और मैंसेज नहीं आया। इस दौरान मैं राजस्थान भी गयी ख्वाजा के दर पे। फैसल सेख से मिलने के पहैले भी मैं ख्वाजा के दरबार में माँ के कहने पे गयी थी पर बात तो यही थी की मुझे मजार हो या मंदिर उतनी आस्था नहीं थी। पिछली दफा जब मैं उस दर पे गयी थी तो सुना था के वहा जो भी मांगो पूरा होता है मुझे तो इन सब पे विस्वास था ही नहीं लेकिन इसबारमैंने फैसल सेख के लिए व्हा भी मन्नत का धागा बंधा। पता नहीं मैं उस दर से खाली आयी या भर के। पिछली दफा जब मैं उस दर पे गयी थी तोमैंने माँ को कहा था मुझे ये भिखारी की तरहै लंगरों में बैठ के नहीं खाना है मैं नहीं खाउंगी यहां का खाना ! माँ ने कहा लंगर में खाना खाने से घमंड कम होता है, गुरुर मिटता है,और मन में इंसानियत आती है और उसदिन माँ ने मुझे जबरदस्ती लंगर में बिठा के खाना खिलाया था लेकिन आज मैं इस लंगर में अपने मर्जी से बैठी थी। सिर्फ और सिर्फ अपने प्यार के लिए। मन बिलकुल अशांत था क्यों के इन सब बातो पे अबतक मुझे यकीन नहीं हो रहा था। और अब ये घटना मुझे हिंदी धारावाहिक क्राइम पेट्रोल की झलक लग रही थी। फिर अचानकमैंने उस ड्राइवर से मिलने का फैसला किया ड्राइवर का घर गोवा से 3 घंटे की दुरी पर थामैंने सोचा उसके घर जा के देखते है क्यों के वो उसका रिस्तेदार है तो उसे उसके घर का पता जरूर मालूम होगा। क्यों के उस दिन होटल वालो ने मुझे ड्राइवर का लाइसेंस दिखाया था पर फैसल सेख का पता थोड़ा कम लिखा था फॉर्म में।

करवर एक बड़ी जगहै थी और सिर्फ मुहै्हैला का नाम पता होने से किसी को ढूँढना एक मुश्किल काम था लेकिनमैंने सोचा चलो जा के देखते है। 26 अक्टूबर लक्मी पूजा थी और मौसम विभाग के अनुसार तेज बारिश और तूफान की संभावना थी पर मन का तूफान बाहैर के तूफान से जयादा बड़ा था औरमैंने उस तूफानी दिन में ही जाने का फैसला किया। अब एकदिन का भी इंतजार मेरे बस में नहीं था उसदिन मैं सुबहै के 3 बजे उठी जल्दी जल्दी तैयार हो गयी और सुबहै के 4 बजे इस तूफानी मौसम में बरसाती पहैन के निकल पड़ी स्कूटी से। जाना बहूँत दूर था और फिर किसी को ढूँढना ! इसलिए मैं जल्दी निकली। अक्टूबर 26 लक्समी पूजा के दिन करवर में मौसम इतना ख़राब था की अँधेरे के कारण राश्ते तक दिखाई नहीं दे रहा था फिर भी देश की एक निडर लड़की अँधेरे राश्ते में स्कूटी की लाइट की मदद से 100 किलोमीटर का राहै

तय कर के शाहिद सेख के घर का राश्ता पूछते हूँए करवर पहूँंच गयी। वहां पहूँंचने के बाद लड़की को पता चला शाहिद सेख एक ड्राइवर है और कार चलाता है। अब लड़की शाहिद सेख के दरवाजे पे पहूँंच के आवाज लगाई शाहिद -शाहिद अंदर से उसके बाबा निकल के आये और शाहिद को बहार बुलाया। सुबहै सुबहै एक लड़की को अपने दरवाजे पे देख के वो बस हैरान हो गया और पूछने लगा क्या हूँआ ?लड़की ने कुछ नहीं कहा और पूछने लगी बताओ फैसल सेख का घर हैेड क्वाटर में कहा कहा है। शाहिद ने बताया के फैसल सेख के पिता का नाम हान सेख है और वहै पहैले करवर के हैेड क्वाटर में रहैते थे लेकिन अब वहै रिटायर हो गए है और वो लोग अब उनर में रहैते है उनको लोग सेख मास्टर के नाम से जानते है। एक लड़की जो सुबहै के 4 बजे से ड्राइव कर के 100 किमीटर की यात्रा 8:30 तक तय कर के करवर पहूँँचती है ये जान के परेशान हो जाती हैं के अब वो यहै से फिर से 100 किलोमीटर की यात्रा तय कर के उनर कैसे जाएगी अगर पहूँंच भी गयी तो वापस आने में 4 घंटे तो लग ही जायेंगे फिर भी मन के तूफान के आगे ये 100 किलोमीटर की यात्रा भी कम था। 

और इतनी लम्बी दुरी तय करने के बाद लड़की अब लड़के के दरवाजे पे कड़ी थी की लड़के से पिता से मिलेगी। लड़की ने जब दरवाजे पे खड़े हो के आवाज लगाई तो लड़के के माता पिता दादी और बहैन सब घर के बाहैर आ गए जब लड़की ने पूछा के क्या ये फैसल सेख का घर है ?पूरा परिवार चुप था फिर लड़की ने पिता को उसकी फोटो जो फैसल सेख ने अपने माता पिता कहै के दिया था। अजीब बात थी एक इंसान जो पुलिस में काम कर चूका था अपनी ही तस्वीर देख के कहने लगा मुझे नहीं पता ये कौन है।

लड़की फिर भी दरवाजे पे खड़ी रही फिर लड़के की बहैन बालकनी में आयी कहने लगी माँमैंने अभी अभी बाबू को दूध पिलाया है तो सब खुल्ला खुल्ला है बहार कैसे जाऊ ?मैंने भी देखा तो नाइटी से उसका एक स्तन दिखाई दे रहा था फिर भी लड़की दुप्पटा ले के बहार आयी और मेरे गाड़ी का तस्वीर निकालने लगी और फिर मेरी भी तस्वीर लिया कहने लगी अगर मेरे बाबा से बात करनी है तो मोबाइल उधर रखो हैमे सब पता है तुम हैमारी बाते रिकॉर्ड कर लोगी। बहैन का ये रूप देख एक लड़की और हैरान हो गयी के पहैले ये लोग मेरी तस्वीर क्यों ले रहैे है ? ये इतने डरे हूँए क्यों है ?और अंत में लड़के की बहैन ने मुझे को घर के अंदर बुलाया। बाबा का सर झुका हूँआ था कहने लगे हैमे बताये बिना उसने दुबई में शादी की है। लड़के की बहैन कहने लगी पहैले बोलना चाहिए न हैम अंदर आने देते तुम्हैे |मैंंने तुम्हैे तुम्हारे कपड़ो से पहैचान लिया के तू रफत है। सायद उसने जो थोड़ी देर पहैले मेरे साथ बुरी तरहै बात की थी उसका अफ़सोस था उसे। बाबा अफ़सोस से कहने लगे वो एक शादी सुदा इंसान है जा बेटा मैं तुझे बहूँत दुआ देता हूँ तू बहूँत खुश रहैेगी तू जा। बाबा सर झुकाये बैठे थे कहने लगे तू वो नहीं है मुझे समझ में नहीं आया, वो नहीं मतलब कहने लगे तू कॉल गर्ल नहीं हैमैंने पता किया है । मैं और चौक गयी क्या ? मैं उस समय बहूँत उदास थी और बाबा से पूछ न पायी के आखिर किस दुकान में जा के आपने ये पता किया के एक लड़की कॉल गर्ल है या नहीं? बाबा बहूँत ही गुस्सा थे अपने बेटे पे।

कहने लगे बेटा देख मैं अब उस से बात भी नहीं करता !मैंने अभी तक किसी को नहीं बताया के मेरा बेटा शादी कर चूका है दुबई में ये बात मैं सिर्फ तुझे बता रहा हूँ । हैमसब घर वाले तो उसकी शादी की तैयारी कर रहैे थे पर वो तो बाल बच्चे वाला निकला! कहने लगे बेटा हैमलोग इज़्ज़तदार लोग नहीं है क्यों की हैमारा बेटा ऐसे ही लड़कियों को फसाता है । हैम पहैले भी जहां रहैते थे,वहाँ भी हैमलोग इस वजहै से बदनाम थे । मुझे तो बाबा की बातो पर विस्वास ही नहीं हूँआ ! मैंं और अंशु भ के रोने लगी । वो कहने लगे बेटा हैमारी और दो बेटी है । चारो बेटियों की शादीमैंने की है । कहने लगे मैं भी पहैले पुलिस में था और ये बेटी नौशा भी अभी पुलिस में ही काम करती है । बहैन की आँखों में अंशु था वो अपने भाई से बहूँत नाराज़ थी पता नहीं क्यों कहने लगी तू बहूँत अच्छी है । तू काम भी करती है तू जा ये तेरे लायक नहीं है।

पूछने लगी तू ऐसे इंसान से शादी करेगी रे ? ये अच्छा इंसान नहीं है ! हैम चार बहैनो का ये एक ही भाई है इसलिए हैमलोग कुछ नहीं बोलते है । बहैन ने मुझे बहूँत समझाया कहने लगी जहां माँ बाप चाहैते है तू उधर शादी कर ऐसे लोगो का कोई भरोसा नहीं होता ! बहैन कहने लगी के उसने जो किया है उसे अल्लाहै जरूर सजा देगा ! मैंं तो और सोच में डूब गयी के बचपन से आज तक वो अल्लाहै आया ही नहीं जो मर्दो द्वारा किये गए, लड़कियों पर,दुर्व्यवहार पर,उसे सजा दे ! !! मुझे यकीन ही नहीं हूँआ के फैसल सेख इतना गन्दा इंसान है ! मैं बस रोती रही अब तो कुछ भी नहीं बचा था ।मैंने बाबा से पूछा अगर ये इतना बुरा है तो आप बंदूके क्यों नहीं उठाते ? कहने लगे उठाऊंगा ! बचपन से मुझे इस बात की शिकायत थी के ये खान- पठान और खानदानी लोगो में एहैसास नहीं होता है । हमने बचपन से अपने कुछ लोगो के यहां बंदूके देखि थी मैं बार बार अपने पिता से पूछती थी पापा ये लोग बन्दुक क्यों रखते है ?इनके घरो में कुछ हो न हो पर बन्दुक का लाइसेंस जरूर होता है क्यों ? पापा कहैते थे बन्दुक तो शान है बेटा ! मुझे बहूँत गुस्सा आता था, ये देख के क्यों के उस समय बन्दुक तो किसी को मारने के लिए इस्तेमाल नहीं होता था,और शिकार के लिए भी नहीं । लेकिन उन बंदूकों का इस्तेमाल ये घर के लड़को की शादी में रॉब जताने के लिए जरूर करते थे । और मेरा मानना भी था के जो बन्दुक रखते है वो स्वाभाव में भावुक नहीं होते है इसलिए मुझे गुस्सा आता था । पापा कहा करते थे हमेशा बेटा बन्दुक शान होती है लेकिन कलम की ताक़त बहूँत बड़ी ताक़त है,जीवन में कभी भी संकट आये तो कलम उठाना तुम जित जाओगी । मुझे बचपन से शान सब्द से बस घिर्णा होती थी मैं हमेशा से चाहैती थी के मेरा जीवन साथी और उसका परिवार खान,पठान जैसी शान वाला न हो । पापा की तरहै थोड़ा झुका हूँआ इंसान हो । लेकिन आज तो बाबा का इतना झुका सर देख मैं और रो पड़ी । के झुके हूँए को क्या झुकाना ? कोई इतना झुका हूँआ कैसे हो सकता है ? इन्होने तो मर्द सब्द का अर्थ ही गलत निकाल लिया है ?बस मन से बाबा और नौशा सेख की बात सुनने के बाद छी… ही निकला । और अब मैं उनके घर के बहार आ गयी और अपने स्कूटी पे बैठ के सोचने लगी ये क्या है ? अब क्या कृ कहा जाऊ? किस पुलिस के पास जाऊ ? किस से मांगू अपना हिस्सा? और मांगू क्या? मन और विचलित हो चूका था और फैसल सेख के बारे में ये सब सुन के विस्वास ही नहीं हूँआ !पर बाबा का झुका हूँआ सर ! बहैन के आँखों के अंशु ! ये सब को मैं झुटला तो नहीं सकती थी न ! घर वापस लौट आयी ! 2-3 दिन सोचा फिर मुझे लगा कहि न कहि ये एक जुल्म है और मुझे ये बात पुलिस को बतानी चाहिए । मेरे पापा हमेशा कहा करते थे अपना वादा कभी मत तोडना औरमैंने तो फैसल सेख से वडा किया था के मैंं उसका अपमान कभी नहीं करुँगी लेकिन ये तो अब जुल्म ही है,अब क्या कृ ?मेरे पिता का कहैना था के कुत्ते को कभी भी कुत्ता मत कहैना ! और कभी भी किसी को उसके गलतियों की सजा मत देना क्युके सजा उसे और गलत बना सकती है । और अगर तुमने किसी को कोई भी वादा किया हो उसे हमेशा निभाना चाहैे वो कितना भी गलत इंसान क्यों न हो । क्योंके अगर धोका देना या लोगो को परेशान करना उसकी आदत है तो वो उसकी आदत है तुम्हारी नहीं ! तुम उसके वजहै से अपने आप को कभी उसके जैसा मत बनाना । तुम तुम हो ! वो वो है ! हमेशा अपना झंडा गाड़ना शान से ! मेरे पिता हमेशा कहा करते थे के अगर कोई चोर है तो वो चोर है अगर वो तुम्हारे घर में चोरी नहीं करता, तो तुम उसे कभी चोर मत कहैना ! क्यों के वो तुम्हारे लिए एक अच्छा इंसान है । अब मैंं और उदास थी के क्या कृ पुलिस तो मुझे ही डाँटेगी । और मन में एक और बात थी के सिर्फ किश के लिए सजा क्या हो सकती है ?जब पुलिस इनसब को इकठा करेगी तो उसका मकसद यही देखना होगा के फैसल सेख ने लड़की के साथ क्या किया ?मन ने यही गवाही दी के,माना हो सकता है, वो कंडोम ले के मुझे फॅसा के सेक्स करने आया था पर सच तो यही है के उसने ऐसा नहीं किया । अगर एक कमरे में एक लड़की सुरछित है तो इसका मतलब ये नहीं के लड़की बहूँत संस्कारी है,बल्कि इसमें लड़के का भी एक बहूँत बड़ा योगदान है । लेकिन बात ये भी सच थी के उसने मुझे अछूता नहीं छोड़ा था । उसने एक लड़की को किश ही क्यों न हो पर किया तो था । मैंं एक बहादुर लड़की थी लड़को से निपटना मुझे अच्छे से आता था । लेकिन फैसल सेख के मामले में, मैंं उसे कोई सजा देना नहीं चाहैती थी ।मैंने तो उस से प्यार किया था और उसके साथ जीना चाहैती थी । वो बुरा है के भला, उसके लिए मैंं उसे कोई मैंडल क्यों दू ?ये रिश्ता तो सिर्फमैंने उसके साथ खुश होने के लिए ही जोड़ा था । अपनी खान -पठान वाली बहादुरी दिखाने के लिए नहीं ! था तो ये एक सिनेमा की तरहै का जुल्म और फिरमैंने फैसला किया के मैंं पुलिस को ये बात जरूर बताउंगी क्यों की एक लड़की अब अंदर ही अंदर एक लड़के के द्वारा की गयी ऐसी हैरकत से मर रही थी । अब सारि बातेमैंने एक कागज पे लिखा कभी सोचा नहीं था के मैंं अपने प्यार की शिकायत करने पुलिस के पास जाउंगी । मुझे पता था के पुलिस मुझ से बहूँत सवाल करेगी इसलिएमैंने कागज पे पूरी बाते एक दम साफ साफ लिख दिया क्यों के मेरे आँखों में अंशु थे और रोने के कारन सायद मेरे मुँहै से पुलिस के सामने आवाज न निकले !और डर भी था के अगर मुझे जानने वाले पुलिस वाले मिलेंगे कहैेंगे इतना पढ़ के तुमने क्या किया ? आंख नम थी ! और अब मैंं वाना पुलिस थाने में जा पहूँंची ! और चुप चाप टेबल के सामने बैठी एक वर्दी पहैनी लड़की को कागज दे दिया वो पूछने लगी क्या हूँआ ?क्या शिकायत है?मैंने कुछ नहीं कहा और मेरा जवाब न प्| के वो चुप चाप सर झुका के उस कागज को पढ़ने लगी । पढ़ने के बाद अब उस वर्दी पहैनी लड़की के मुँहै में भी सब्द न था और चुप चाप वो कागज ले के अपने से बड़े अफसर को दे दिया । कागज अब सिधार कामत के हाथ में था और मैंं अब सिधार कामत के सामने उसके टेबल पे बैठी थी । सिधार कामत ने जब उस पेपर को पढ़ा उसे भी कुछ समझ नहीं आया और वो उस कागज को ले के अपने से बड़े अफसर के पास चला गया । कागज अब सिधार कामत के हाथ में था और मैंं अब सिधार कामत के सामने उसके टेबल पे बैठी थी । सिधार कामत ने जब उस पेपर को पढ़ा उसे भी कुछ समझ नहीं आया ऐसी घटना से वो भी बहूँत परेशान हो गया, और वो उस कागज को ले के अपने से बड़े अफसर के पास चला गया । सिधार कामत ने जो बताया और फिर मेरी बात सुनने के बाद वो बहूँत गुस्सा हो गया ! कहने लगा तुम्हैे पता है के तुम लड़की हो ? और उस समय मुझे ये एहैसास हो गया के सायद मैं लड़की हूँ और फैसल शेख ने मुझे उपभोग की वस्तु समझा है !पर मैं कर भी क्या सकती थी !मन ने तो माना ही नहीं के उसका प्यार झूट था । ये बात भी सही थी परमैंने उस से कहा के मैं सुरछित हूँ लेकिन एक लड़के की इतनी हिम्मत !!अफसर बहूँत गुस्सा हो गया था मैं तो मायूस थी । वो कहने लगा ये सब एक लड़की की मर्जी से हूँआ है इसलिए हैम जयादा कुछ नहीं कर सकते है । और वो मुझे ही डाटने लगामैंने कहा के मुझे कुछ नहीं सुनना है ये सुन के वो और गुस्सा हो गया कहने लगा तुम उधर जाओ और सिधार कामत को आदेश दिया के वो मेरी शिकायत दर्ज कर ले ! क्या कहूँ मन में तो यही सवाल था के फैसल सेख ने मुझे नंगा नहीं किया था !नंगा तो वो खुद हूँआ था ! अफसर ने पूछा क्या उसने सेक्स कियामैंने न कहै दिया और वो थोड़ा शांत हो गया । कहने लगा ऐसे लोगो को पकड़ के मरना चाहिए तुम जा के मारो उसे ! पास खड़े सिधार कामत ने बताया के लड़का अभी दुबई में है ये सुन के उसे और गुस्सा आया ! अब मैं सिधार कामत के टेबल पे बैठी थी एक बात थी के सिधार कामत ने मुझ से इस बारे में जयादा सवाल नहीं किया । पर पास बैठे एक और बड़े अफसर ने मुझ से मेरी पीएचडी का टॉपिक पूछा और पूछा के क्या, कहा, कैसे ?सायद उस अफसर से बाते करके मुझे अच्छा लग रहा था और मेरी मन में जो कुछ भी था फैसल सेख के बारे में बहार आ रही थी । उस अफसर से बात कर के मेरा मन थोड़ा हैल्का हो गया । सायद मेरी मन हैल्का होने की वजहै यही थी की अगर ये जुल्म है तो कहि न कहि पुलिस के फाइल में आ गयी है । सर झुकाये मायूस सा चेहैरा लिए मैं सिधार कामत के सामने बैठी थी । और वो चुप चाप सर झुकाये लैपटॉप पे मेरी रिपोर्ट लिख रहा था । मैं तो उस अफसर से नजरे भी नहीं मिला पा रही थी । खैर वो एक जवान लड़का था और उसने मुझे जयादा परेशान नहीं किया । मैं बहूँत मायूस थी और फिर उसने कागज पे पूरी रिपोर्ट लिखने के बाद मुझे कहा के पढ़ के दस्तखत कर दोमैंने कहा ऐसा नहीं है कहने लगा जो तुम्हैे गलत लगता है उसे काट के पेन से सही कर के लिख दो । मैंने कागज को पढ़ा उसमे एक वाक्य लिखा था "फिजिकल क्लोज म्यूच्यूअल कॉन्स्टेंट "। मन और उदास हो गया ये देख के और मुझे एहैसास हो गया के फैसल सेख यही करने आया था लड़की की मर्जी से लड़की के पास आना । फिर भीमैंने सिधार कामत से पूछा सर इस वाक्य का क्या मतलब उसने कहा "फिजिकल क्लोज म्यूच्यूअल कॉन्स्टेंट "तुम्हैे नहीं पता ! एक दूसरे की मर्जी से एक दूसरे के पास आना । मैंने उस वाक्य को फिर से पढ़ा और मुझे एहैसास हो गया सायद फैसल सेख कानून का, यही कानून उपयोग करने मेरे पास आया था । ये कोई प्यार नहीं था । मैं उस वाक्य को बस देखती रही मुझे उस वाक्य को बार बार दुहैराते देख सिधार कामत कहने लगा के तुम्हारी मर्जी से हूँआ है अगर मर्जी नहीं है तो अभी चलो मेरे साथ हैम अभी करवाई करेंगे !मैंंने बस सर झुकाया और मैं उस कागज पे दस्तखत करने लगी । वहा कुछ शरीक सम्बन्ध के बारे में लिखा थामैंने उस कागज पे साफ साफ लिख दिया के सिर्फ किश किया है और कुछ नहीं !क्यों के मैंं अपने आप के साथ साथ उसे भी कोई परेशानी में नहीं डाल सकती थी । सिर्फ किश पढ़ के सिधार कामत कहने लगा सिर्फ किसेस मैंंने उसका मुँहै देखा और फिर सर झुका लिया । लेकिन सायद किश का अंग्रेजी में स्पेलिंग गलत थामैंने "के आई अस अस " ही लिखा था और कामत के कहने का मतलब था एक ही किश तो नहीं किया होगा ! लेकिन फिर भीमैंने उस की बात पे ध्यान नहीं दिया और कागज दे दी । सिधार कामत ने मुझ से पूछा के अच्छा बताओ फैसल सेख ने कितना पढ़ा हैमैंने कहा एम् बी ऐ । और कहने लगा तुम नहीं जानती के मेरे दिमाग में क्या चल रहा है ! तुमने कैसे भरोसा कीया ! सिधार कामत के सवालो का जवाब मेरे पास नहीं था । मैं चुप चाप सर झुकाये उसके सामने बैठी थी । फिर वो बड़े ही अफ़सोस से कहने लगामैंने तुमसे ये कभी उम्मीद नहीं की थी ! सिधार कामत ने मेरी चैटिंग पढ़ी उसने देखा के उसमे लिखा था केमैंने आत्महैत्या करने की कोसिस की ! अब सिधार कामत मुझ से पूछने लगा अच्छा बताओ क्या ये बात सच है के तुमने आत्महैत्या की कोसिस की ? अब मेरी नजरे नहीं उठ रही थी क्यों के अगर सिधार कामत को ये पता चल जाता के उसके सामने टेबल पे बैठी लड़की ने सिर्फ अपने एक्सीडेंट ही नहीं किया बल्कि इतने दिनों से ठीक से खाया भी नहीं है !मैंने सिधार कामत को बताया के ये एक्सीडेंट वाली बात सच है और ये मेरा हाथ अबतक ठीक नहीं हूँआ है ! कहने लगा तुम क्या सोचती हो ? तुम्हैे इस से अच्छा नहीं मिलेगा ? अरे तुम्हैे तो वैज्ञानिक मिलेगा ! सिधार कामत के सवालो का जवाब मेरे पास नहीं था ! और फिर सिधार कामत ने फैसल सेख को फ़ोन लगा के स्पीकर पे रख दिया फ़ोन । अब सिधार कामत ने फैसल सेख को बताया के वो वाना पुलिस ठाणे से इंस्पेक्टर बात कर रहा है । औरमैंने उसकी शिकायत दर्ज की है । और फिर सिधार कामत ने उसे बताया के रफत ने आपके खिलाफ शिकायत की है वो कहने लगामैंने उस के साथ कुछ भी गलत नहीं किया ! जो भी किया उसमे उसकी मर्जी थी ! पता नहीं क्यों वो मेरे पीछे पड़ी है ! सिधार कामत ने कहा ये एक लगाव है ! उस समय उसकी खबरहैट साफ साफ उसके आवाज में सुनाई दे रही थी । फिर भी उसने अपनी कसर नहीं छोड़ी कहने लगामैंने कुछ भी गलत नहीं किया ! उसकी ऐसी बाते सुन सिधार कामत पूछ बैठा क्या तुम्हैे पता है के वो एक लड़की है ? फैसल सेख चुप था ! सिधार कामत ने फिर पूछा क्या इस रिश्ते के बारे में तुम्हारी बीबी को पता है ? फैसल सेख तब भी चुप था वो बार बार सिर्फ यही कहने की कोसिस कर रहा था के लड़की की मर्जी से ये सब हूँआ है। और इस तरहै सिधार कामत ने उस से बहूँत सारे सवाल किए । सायद उस दिन सिधार कामत ने उस से मेरी मन की बात पूछ ली जो मैं उस से कभी पूछ ही नहीं सकती थी । मेरा मन थोड़ा और हैल्का हो गया था । और फिर सिधार कामत ने फैसल सेख के परिवार वाले को मिलने के लिए बुलाया । सिधार कामत ने फैसल सेख को कहा के अगर तुम नहीं आ सकते तो अपने किसी परिवार के सदस्य को भेजो । और फ़ोन बंद कर दिया । और सिधार कामत ने पूछा मुझ से अब तो तुम खुश हो न ? खुश तो मैं नहीं थी क्यों के मैंं फैसल सेख को सजा नहीं बल्कि उस के साथ जीवन चाहैती थी ! लेकिन फिर भी थोड़ा मन हैल्का हो गया ! सिधार कामत ने कहा अब तुम जाओ अगर तुम्हारी जरूरत पड़ी तो फिर बुलाएँगे !!! और अब मैंं वापस आने लगी सिधार कामत ने मुझे गुड नाईट कहा पर मेरा मन इतना उदास था के मैं मूड के उसे गुड नाईट भी न कहै स्की !!!बस हैसी और ठाणे से बहार आ गयी !! अब रिश्ता जो कभी था ही नहीं पूरी तरहै ख़त्म हो चूका था । अब मैं अपने सपनो की तरफ बढ़ने की कोसिस कर रही थी क्यों के घर वाले बार बार मुझे मेरे सपने याद दिला रहैे थे पर मुझ में इतनी हिम्मत नहीं थी के जुड़ पाउ फिर से !!! घर वालो की तरहै तरहै की कोसिस मुझे हैँसाने के लिए !!! कोई तकिया फेकता तो कोई मजाक करता कोई कुछ ले के आता और फिर मेरे चेहैरे पर ज़बरदस्ती की मुस्कान देख के उदास हो जाता ।मैंने भी कोसिस की के हैसु पर हैस न स्की !!! अबतो घरवाले मेरे चेहैरे की मुस्कान को देख कहने लगे थोड़ा खुल के हैस दोगी तो कुछ नहीं होगा !!!परिवार वाले मेरे चेहैरे को खींच के मुझे हैँसाने की कोसिस करते पर सायद उनका प्रयास असफल था !!! मैं हैस न पायी !!!पता नहीं किस बात का सदमा लगा था मुझे !!! एक दिन तो बहैन मेरे लिए किसी कॉलेज में कोई गायक आ रहा था उसका टिकट ले के आयी मेरे परिवार वालो को पता था के मैं छोटे कपडे पहैन के बहूँत खुश होती हूँ और इसलिए उन्होंने मुझ से कहा अब तो छोटे कपडे भी पहैन के जाओगी !!!मैंंने छोटे कपडे तो पहैन लिए पर अपने चेहैरे पर वो मुस्कान न ला पायी ! जिसे हैमारे परिवार वाले देखना चाहैते थे !!!बस जबरदस्ती की हैसी । और फिर मैं व्हा पहूँंच गयी जोर जोर से गाने बज रहैे थे और सरे बचे मस्त हो के अपने हाथ ऊपर कर के झूम रहैे थेमैंने भी कोसिस की के मैं भी अपने हाथ को उठा के उनके साथ झुमु पर नहीं कर पायी ! मन की उदासी मुझे हैँसा नहीं पायी !!! और फिर मैं सबसे आगे आ के खड़े हो गयी जहां कुछ लड़के-लड़कियां बहूँत जयादा ही मस्त हो के नाच रहैे थे । मैं बस तालियां बज|ती रही । पास में नाचती एक लड़की मेरे पास आयी और मेरे दोनों हाथो को पकड़ के ऊपर उठा के नाचने लगी इस गाने पर "शाही जोड़ा पहैन के,आयी जो बन थान के वही तो मेरी स्वीट हार्ट है " । काफी समय मेरे हाथो को उठा के नाचने के बाद मुझे गले लगाया कहने लगी तुमने दारू पि है क्या ?मैंने कहा नहीं !!! वो हैसने लगी और फिर नाचते हूँए दूसरे लड़को को चूमने लगी । और फिर अपने धुन में नाचने लगी अपने दोस्तों के साथ मैं बस उसकी ख़ुशी देखते रहै गयी !!! पर अब तो आगे बढ़ना ही था !क्यों के मांगने से मौत नहीं मिलती !!! और अगर मुझ जैसे लड़की ने आत्महैत्या किया तो पूरा समाज रोयेगा क्यों के हैम जैसी लड़कियां कहि न कहि हैमारे समाज के लिए एक उदाहैरण होते है । मैं सोच में डूब गयी के अगर इतना पढ़ केमैंने आत्महैत्या कर ली तो फिर हैमारे मुस्लिम समाज में हैमारी वजहै से कम से कम 10 बेटियों की आजादी ये कहै के छीन ली जाएगी के रफत को इतना आजादी दे के क्या मिला ?मैंंने तो साइनाइड को गोली भी देख ली थी पर अपने आप को मरना सायद एक बहूँत बड़ी बात होती है ! अगर मैं मर गयी तो मेरी वजहै से 2-4 बेटियों को तो सुन्ना पड़ेगा ही क्यों के वो कहैते है न समाज में जो हैम करते है समाज हैमारी छाप को देखता है ! लोग यही कहैेंगे इतनी आजादी का क्या हूँआ ?मैं तो वो निडर रफत खान हूँ जिसके कारण कल 10 लड़किया सर से आँचल उतारेगी और कहैेगी परदे में हैमे रुकने की जरूरत नहीं है बल्कि उन मर्दो को आंखे बंद करने की जरूरत है जो बेटियों को गंदे नजर से देखते है ! हैम जैसी लड़किया समाज का मान होती है और हैम से समाज कुछ आशा रखता है । मन तो अब भी सवालो में उलझा है और जवाब सायद सिर्फ कुदरत के पास है। मुझे पता नहीं था के जिस पेमैंने अँधा विश्वास किया वो हैमें ये बता जायेगा के मैंं सचमुच अंधी हैूँ| दिनाक 26-11-2019 मैं फिर से कर्नाटक गयी ताकि अब अपनी पीएचडी की तयारी के लिए किसी शिछक से मिल सकू सोचा न था के किस्मत फिर मुझे उसी मोड़ पे ला के खड़े कर देगी जिस से मैं अब बाहैर आना चाहैती हूँ । और इस तरहै पता नहीं कैसे मैं दिलसा सब के स्कूल के दरवाजे पे जा पहूँंची । ऐसा नहीं था के मुझे पता नहीं था के वो किसी सोशल वेलफेयर से चलने वाले स्कूल में बच्चो को पढ़ाती है । लेकिन मुझे पता नहीं था के अभी मैं जिस दरवाजे पे खड़ी हूँ, ये वही स्कूल है । हूँआ यु था के मैं किसी इंस्टिट्यूट का पता पूछते पूछते व्हा पहूँंची और व्हा के लोगो को हिंदी नहीं आती थी और मुझे कन्नड़ इसतरहै स्कूल मतलब उन्होंने मुझे वो पता बता दिया पर दरवाजे तक पहूँंचने के बाद मुझे अंदाजा हो गया था के सायद ये वो इंस्टिट्यूट नहीं है इतने में दिलसा सब आयी चेहैरा देखते हीमैंने पहैचान लिया के वो फैसल सेख की बहैन है । मन मेंमैंने यही कहा या अल्लाहै कहा पहूँंच गयी मैंं ?लेकिन अब क्या करती मैं तो दरवाजा खोल के अंदर भी जाने वाली थी खुदा का सुकुर है वो दरवाजे पे ही मिल गयी औरमैंने उसे देख लिया !मैंने पूछा दिलसा सब आप ही हो न ? हा !वो बहूँत गुस्से में थी कहने लगी तू रुक मैं अभी दिखाती हूँ ! मैंं और चौक गयी अब इसे क्या दिखाना है ? कहने लगी तू रुक ! मैं रुक गयीमैंने कहा मैं यहां किसी दूसरे इंस्टिट्यूट में आयी हूँ ! कहने लगी मैं तुझे उस इंस्टिट्यूट में छोड़ के आती हूँ !मैंने कहा पता ही बता दो मैं चली जाउंगी कहने लगी मैं छोड़ दूंगी तू रुक ! अजीब बात थी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था । इतना गुस्सा वैसे भी उसने तो पहैले ही फ़ोन पे काफी कुछ सुना दिया था । उसने तो फ़ोन पे मुझे धमकी भी दी थी के वो मेरी शिकायत पुलिस में करेगी । वो मुझसे कहने लगी यहां क्या किसी के साथ सोने आयी है ?मैंने कहा हाँ ! मैं अब अपना स्कूटी मोड़ने वाली ही थी के वो कहने लगी तू रुक तूने फैसल के खिलाफ सिधार कामत के पास वाना ठाणे में शिकायत दर्ज की है न ?मैंने कहा ऐसा नहीं है वो कहने लगी मुझे सब पता है क्यों की मैं खुद वाना ठाणे जा के आयी तेरी शिकायत अब एन जी ओ में जाएगी और फैसल को सजा होगी । मैं चुप थी के किश के लिए कौन सी शिकायत कीमैंने ! वो मेरी तस्वीर निकलने लगी और वो सिधार कामत को फ़ोन लगाने लगी मैं वही रुक गयी पर सायद फ़ोन पे सिधार कामत ने मेरी शिकायत लेने से इंकार कर दिया । अब वो मेरे सामने आ के रोने लगी वो गिडगिराने लगी कहने लगी तूने उसकी शिकायत की है न शरीफ लड़का फास जायेगा रे । कहने लगी बता फैसल ने तेरे साथ पूरी रत गुजारी क्या ? वो मुझे कुरान का कसम और अल्लाहै का वास्ता देने लगी वो मुझ से गिडगिराने लगी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था । लेकिन फिरमैंने सोचा अगर ये वाना ठाणे गयी थी मतलब सिधार कामत ने जुल्म को डरा ही दिया । लेकिन ये तो अब पुलिस का मामला था और पुलिस ने अगर अपनी करवाई की तो इसके लिए मैं कुछ नहीं कर सकती थी ! और मुझे पता नहीं था के सिधार कामत ने क्या कहा है ! ये डर देख अच्छा लगा मुझे पर अपने प्यार की बहैन को ऐसे गिरगिराते मैं नहीं देख सकती थी । वो मुझ से पूछने लगी बोल रे क्या फैसल ने तेर साथ पूरी रात गुजारी ?जबमैंने कुछ नहीं कहा तो कहने लगी मुझे सब पता है कुण्डी तूने बंद किया था ! अजीब बात थी यहां, बात कहा से कहा पहूँंच गयी थी और वो मुझे कुण्डी के नाम पे डराने की कोसिस कर रही थी । पापा की एक बात याद आ गयी पापा हमेशा कहा करते थे के बेटा कभी खुदा पे सवाल मत करना क्युकी वो जो भी करता है उसमे उसकी मस्लेहैत छुपी होती है । इस्पे भी पापा ने एक कहानी सुनाई थी के एक आदमी जब जंगल से गुजर रहा था तो उसने लतो में लटके कद्दु के, लता को देखा और कहने लगा खुदा भी कैसा है, थोड़ा तो दिमाग लगाता इस लत से कद्दू का भार नहीं शहा जा रहा है, और तो और उसने आम के पेड़ को देखते ही कहा इतने बड़े से पेड़ को इतना छोटा फल और इतनी सी लत को इतना बड़ा फल !उसी समय पेड़ से एक आम उसके सर पे गिरा और उसे चोट लग गयी । वो आदमी मुस्कुराया और कहा खुदा तेरी मस्लेहैत तू ही जाने, अगर इस आम के पेड़ पे कद्दु होता तो मैं मर ही जाता । और मैं हैंस पड़ी के बात तो सही है माना के फैसल सेख मुझे लूटने आया था पर उस से मिलना कुदरत ही है । ये भी तो हो सकता था के उसे ऐसी लड़की मिलती जो उस तक पहूँंच ही नहीं पाती पर मेरे जैसी निडर का मिलना सिर्फ और सिर्फ खुदा की ही कुदरत है । मुझे एहै्साहै हूँआ मैं तो वो लड़की हूँ जो 10 लड़कियों के बिच अलग ही पहैचान रखती है । मैं तो हिटलर हूँ !!! पर अपने प्यार के साथ हिटलर कैसे बनु ?मैं अपना वादा नहीं तोड़ सकती ! मैं उसका अपमान नहीं करुँगी ! बहैन कहने लगी बोल नहीं तो चप्पल चप्पल मारूंगी !मैंने कहा मारो उठाओ चप्पल !वो फिर मुझे कहने लगी मैं तुझे बदुआ देती हूँ तू कभी खुश नहीं रहैेगी और बहूँत अजीब तरहै से गिडगिराने लगी । अपना मोबाइल फ़ोन चालू कर के मेरी बातो को रिकॉर्ड करने लेगी कहने लगी बोलमैंने कहा फैसल ने सिर्फ किश किया है होठो पे !!! वो थोड़ी शांत हो गयी कहने लगी एक किश के लिया तू इतना रे ?मैं हैरान हो गयी ऐसे सवालो पे,जो औरत खुद अपने 30 इंच के स्तन को छुपाने के लिए न जाने कितने कपडे पहैनी है !और जब वो बाहैर निकलती है तो न जाने कितने मीटर का बुरखा पहैन के अपने आपको ढक के जाती है, वो पूछ रही है एक किश के लिए इतना रे !!! कहने लगी तूने क्या लिखा है फेसबुक पे ! मुझे और कुछ समझ नहीं आया कहने लगी अपने आईडी से लिख । मैं फिर हैरान हो गयी वो किसी लड़की का नाम ले के कहने लगी के उसने ये कहानी पढ़ा उसके आईडी पे ।मैंने कहा वो मेरी दोस्त है । कहने लगी तुं दुसरो की आईडी से क्यों लिखा, अपने आईडी से लिखो बाद में मुझे समझ में आया के हो सकता है, उसे मेरी कहानिया मिली होमैंने कहा वो कहानीमैंने मेरे आईडी से लिखा है ठीक से देखो मुझे तो उस कहानी के लिए "ऑथर ऑफ़ थे वीक " का अवार्ड भी मिला है कहने लगी झूठ लिखने के लिए । वो कहने लगी सब रिकॉर्ड कर लिया है मुझे कोई चिंता नहीं थी उनकी रिकॉर्डिंग का । मैं फिर से हैरान थी के आखिर कहानी लिखने से इनका क्या रिश्ता ? जो हूँआ है वो लिखना तो पड़ेगा ही वरना लोग कैसे जानेगे के बेटियों के लुटेरा किस हैद तक गिर चुके है । और कहानी किसी से कोई मतलब नहीं रखता और ये कहानी फेसबुक पे नहीं लिखी गयी है । इसमें उनको क्या आप्पति ? वो कुछ भी बोले जा रही थी वो बहूँत घबराई हूँयी थी । कहने लगी तेरा दिल साफ नहीं है इसलिए चेहैरा ऐसा हो गया है । बात तो उसकी सही थी चेहैरा तो दिल के गन्दगियो से गन्दा हो गया है अगरमैंने फैसल सेख को दिल से निकल दिया तो साफ हो जायेगा । कहने लगी मैं कार से आयी हूँ । मैं तेरे ऊपर माल हानि का केस डालूंगी । और फिर उसने अपनी चप्पल मेरे गालो तक सटा ही दिया । मैं सोच में पड़ गयी, मैं उसे चप्पल तो नहीं मार सकती थी,क्युकी ये मेरे संस्कार नहीं है !मैंने कहा और मारो मुझे वो बस सहैमी आँखों से मुझे देखने लगी । खुदा लेकिन इस चप्पल का अपमान घर ले के नहीं जा सकती मैं । मैंने अपनी स्कूटी लगाई और चुप चाप जा के जमीन से माटी उठा लियामैंने जैसे ही जमीन से माटी उठाई वो मेरे हाथ से माटी छीनने लगी कहने लगी तू जादू मंतर करेगी ?मैं बस हैरान थी औरमैंने अपने माटी लगे हाथ को अपने गलो पे लगा लिया वो बहूँत डरी हूँयी थी, घबरा कर मेरे गलो को अपने हाथो से साफ करने लगीमैंने मन में कहा खुदा तेरा बहूँत बहूँत सुक्रिया औरमैंने उसके हाथो को पकड़ के अपने गाल के सारे माटी साफ करवा लिए । उसने बड़े ही प्यार से मेरे गालो पे हाथ फेरा ऐसा लगा मनो उसने मेरा सारा दर्द ले लिया हो । अब मेरे चेहैरे पे थोड़ी ख़ुशी बढ़ गयी थी क्यों केमैंने जुल्म के हाथ में चप्पल जो देखा था । मैं खुश थी के अगर भाई ऐसी हैरकत करेगा तो पढ़ी लिखी बहैन अपने संस्कार भूल के चप्पल ही उठाएगी !और फिर मेरे सर पे हाथ फेरा और खींच के मेरे बाल निकाल लिए कहने लगीमैंने तुम्हारे बाल रख लिए ।मैंने बस उसका चेहैरा देखा और हैंसी । बहैन की ऐसी हैरकत देख मेरे चेहैरे पे थोड़ी हैंसी आ गयी थी । मैंं वैसे भी परेशान हो चुकी थी और फिर मैंं इंस्टिट्यूट गयी ही नहीं । और घर आ गयी । और थक के सो गयी जब शाम को मेरी नींद खुली, तो मुझे एक कॉल आया कहने लगा तुम भटका गयी थी आज ?मैंने हाँ कहा और उसने फ़ोन रख दिया । नंबर से मुझे पता चला के ये भटका के पुलिस का नंबर है और उसके बाद मुझे दिलसा सब का कॉल आने लगामैंने उसका फ़ोन नहीं उठाया । पर मुझे लगा के ये बात मुझे सिधार कामत को बता देना चाहिए और मैं जब पुलिस ठाणे पहूँंची सिधार कामत कहने लगा दिलसा सब ने तुम्हारे खिलाफ भटका में शिकायत की है धमकी का, पुलिस तुम्हैे लेने आ रहैे है । ये वहाँ के आईजी का फ़ोन आया था । उसकी एक बहैन पुलिस में है,उसका बाप पहैले पुलिस में था अब वो तुम्हैे लेने आ रहैे है । मेरा मन खुश हो गया के आखिर मेरे लिए उन्होंने अपने रुतबा का इस्तेमाल कर ही दिया । मैं सहैमी आँखों से सिधार कामत को देखने लगी वो कहने लगा अब जाओ तुम्हैे कुछ नहीं होगा मैं फिर भी सिधार कामत को देखती रही । पास बैठे अफसर ने कहा इसने तुम्हैे वादा किया है, न फिर जाओमैंने कहा 4 दिन बाद मेरा एग्जाम है,वो कहने लगा चिंता मत करो एग्जाम दो । मैं फिर भी सिधार कामत को देखती रही वो कहने लगा वर्दी पे भरोसा नहीं है ?ये सितारे चमक नहीं रहैे क्या ?तुम्हैे कोई शक है ? मैं हैंसी और चुप चाप चली आयी वहाँ से । मुझे भरोसा तो था के सिधार कामत के रहैते मुझे कुछ नहीं होगा पर, उस वर्दी को मैं इसलिए देख रही थी के मुझे एहैसास हूँआ के वर्दी तो कानून है । और कानून सबकी सोचता है मतलब घर में ताले तो हैम इसलिए लगाते है,ताकि किसी शरीफ आदमी की नियत ख़राब न हो जाये ! क्यों के जो चोर है, वो तो ताले तोड़ के चोरी करेगा । मतलब कानून,सराफत,इंसानियत सिर्फ और सिर्फ अछाइयो के लिए ही होती है । जो चोर है वो तो डाका डालेगा ही । मेरे चेहैरे पे और खुशियां लौट गयी के सायद उन्हैें समझ आ गया के मैं कोई वस्तु नहीं हूँ जो 100-500 में खरीदी जाये ! मैं तो नारी हूँ जिसे मिटाने के लिए बहूँत कोसिस करनी पड़ेगी । मैं कोई बिस्तर नहीं हूँ जिसे फैसल सेख भूल गया, मैं तो नारी हूँ !!! जो फैसल सेख के दिल और दिमाग दोनों में बस्ती है ।

जिनकी फितरत मे हैरत समायी नहीं,जिनको हैवश से जयादा मैं भाई नहीं

ऐसे साजन की मुझ को जरूरत नहीं,न कहने का सुन लो मुहैूर्त यही

मैं अकेली चलूंगी किस्मत से मिलूंगी,अरे मुझे क्या बेचेगा रूपया !!!

जबमैंने सिधार कामत के मुँहै से सुना के किसी बड़े अफसर का फ़ोन आया था । और इस तरहै पुलिस, वो भी बड़े स्तर का मेरी खुशिया अब लौट चुकी थी मेरे चेहैरे पर । मैं मुस्कुरा पड़ी थी अब दिल से । क्युकी 26 नवंबर के बाद मुझे बार बार दिलसा सब का फ़ोन आते रहा ।मैंने उठाया नहीं पर मैं समझ गयी के ये फ़ोन एक नारी को डराने के लिए ही आया है । फिरमैंने देखा के दिलसा सब ने मुझे मेरे स्टोरी वाले साइट पे भी फॉलो किया है मुझे बहूँत ख़ुशी हूँयी अच्छा लगा मुझे के मेरे प्यार की कहानी किसी होटल के कमरे में कैद हो के नहीं रुकी । बल्कि हैमारे घर से ले के वाना पुलिस ठाणे के साथ साथ भटक के पुलिस ठाणे और फैसल सेख के घर में गुंजी है । अब मेरा मन अंदर से खुश था और अब मेरे चेहैरे पर खुसिया लौट पड़ी थी मेरा परिवार मुझे खुश देख बहूँत खुश हो गया क्युकी चेहैरे पे ख़ुशी के कारन चेहैरे का जो रंग ख़राब हूँआ था अब वो वापस आने लगा था । चेहैरे पे अचानक से इतना रंगत देख मेरी डॉक्टर जो मेरे चेहैरे का इलाज कर रही थी वो भी हैरान थी पर खुश थी के मेरा चेहैरा अब ठीक हो रहा है । पूरा दिसंबर मेरा एग्जाम था और मुझे पता था के रिजल्ट यही आएगा के मैं हैर विषय में फ़ैल हो गयी । पर मेरी आश थी के मैं ये एग्जाम अगली दफा जरूर पास कर लुंगी । मैं पूरी तरहै अपने सपनो की तरफ लौट रही थी । मन फिर भी थोड़ा उदास था ।

पर बाते अब यही थी के

"अभी समय है अभी कुछ भी नहीं बिगड़ा है,देखो अभी सुयोग तुम्हारे पास खड़ा है ।

करना है जो काम उसी पे चित लगा दो,अपने पर विश्वास रखो संदेहै भगा दो ।

आएगा क्या समय,समय तो टला जा रहा है,देखो जीवन वयर्थ तुम्हारा चला जा रहा है ।

तो विरो की भांति खड़े हो जाओ अब भी,करके कुछ जग बिच बड़े हो जाओ अब भी "

और फिरमैंने 23 दिसंबर को वाना ठाणे से गुजर रही थी तो सोचा सिधार कामत से मिल के पूछ लू ! क्या हूँआ उसदिन जो पुलिस आये थे । जैसे ही मैं ठाणे पहूँंची व्हा कुछ लोग माटी खुदाई कर रहैे थे । मैं ये देख समझ न पायी के आखिर वो कर क्या रहैे है ! सिधार कामत भी वर्दी में नहीं था और वही खड़ा था आधी बाते तो मैं उसने वर्दी नहीं पहैनी थी इसलिए भूल गयी और आधी उस के अंदाज देख के । मैं उसके पास खड़ी हूँयी तो वो कहने लगा ये यहां क्रिश्मस की बधाई देने आयी है ! फिर मुझे समझ आया ये लोग यहां खड़े हो के क्रिसमस की तयारी कर रहैे है । अब क्या था बात भी सही थी उसकी ! औरमैंने भी कहा हा सही कहा आपने क्रिश्मस की ही बधाई देने आयी हूँ । और इस तरहै सिधार कामत ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और कहने लगा "मेर्री क्रिश्मस "मैंने उस से हाथ मिलाया । और फिरमैंने पूछा उस दिन का क्या हूँआ न तो वो कुछ बताना चाहैता था न जयादा इस विषय पे बात करना चाहैता था उसकी भी बात सही थी फिरमैंने जैसे ही नजरे उठाया मेरी नजर उसकी आँखों से टकराई और मुझे समझ आ गया के वो मेरा हीरो नहीं है पर इस देश का हीरो जरूर है असली हीरो यही है । और मैं चुप हो गयी और वापस हैश के घर आ गयी । मैंं सोचने लगी असली हीरो तो सिधार कामत है । पर प्यार मुझे सिर्फ फैसल सेख से ही हूँआ । अजीब बात थी न जाने हैमारे जीवन में कितने अच्छे अच्छे लड़के आये पर प्यार और विश्वास सिर्फ और सिर्फ एक फैसल सेख पे ही हूँआ । अब मुझे समझ आ गया था मर्दानगी तो सिधार कामत में है जो न जाने कब,कहा कैसे कितने लोगो की मदद कर देता है । मर्दानगी इस बात में नहीं है के किसी लड़की को धोके से प्यार में पटा के अपनी हैवश पूरी करने की कोसिस की जाये । फिर भी एक बात तो थी की वो हैवस मुझे छू नहीं पाया था लेकिन मन फिर भी गुस्सा था किश तो किया ही और कहि न कहि फैसल सेख ने अपनी शारीरिक संतुष्टि की है । मन में गुस्सा आ रहा था पर पापा के सिख के अनुसार अगर किसी से प्यार करो तो वो क्या है वो मत देखो । तुम, तुम हो और सिर्फ और सिर्फ तुम अपने सिधान्तो पर चलो । और सही थी । ये तो फैसल शेख की सोच थी की वो एक लड़की को झूठे या सच्चे प्यार ये तो मुझे नहीं पता, पर ये सिर्फ फैसल सेख की ही सोच है के एक लड़की को प्यार के नाम पे नंगे हो के अपना लिंग दिखा देने को प्यार कहैते है ! ये सिर्फ उसकी सोच है के ऐसे व्यवहार को मर्दानगी कहा जाता है ! ये सिर्फ सिधार कामत की सोच ही थी जो पास टेबल पे बैठी एक मायूस लड़की से ये पूछा के अब तो तुम खुश हो न !ये सिर्फ सिधार कामत की सोच है । फैसल सेख ने तो अपना धर्म निभाया था उसके हिसाब से ऐसे किसी लड़की को फसा के प्यार की पट्टी पढ़ाना और किश करना मॉडर्न सोच है । और ये तो फैसल सेख की सोच है किसी को धोका देना ! हैम क्या है ! हैमारी सोच क्या है सही बात है और फिर जिस रिश्ता का मान खुद फैसल सेख नहीं रख पाया फिर हैम क्यों सोचे के वो शादी सुदा है या और किसी रिश्ते में है । मुझे तो पता ही नहीं के आखिर उस लड़की का रिश्ता क्या था फैसल सेख से, और अब सायद मुझे जानना भी नहीं के, वो किस के साथ कौन से रिश्ते में है । क्या वास्ता उसका जीवन उसकी सोच !मैंने तो उस से रिश्ता सिर्फ खुश रहैने के लिए ही जोड़ा था और जिन रिश्तो से ख़ुशी न मिले उस रिश्ते का कोई मतलब ही नहीं होता है । विस्वास एक बहूँत बड़ी बात होती है दो लोगो के बिच !अगर वो ही टूट जाये तो कोई रिश्ता नहीं बचता । प्यार एक बहूँत ही गिरा हूँआ सब्द है प्यार का मतलब सिर्फ शादी नहीं होता । वो कहैते है न अगर फूलो से प्यार है तो फूलो को तोड़ो मत पौधों को पानी दो । हैम ये नहीं कहै सकते के फैसल सेख को मुझ से प्यार था या नहीं ! लेकिन ये बात तो मुझे समझ में आ गयी थी की फैसल सेख ने अपने गंदे हाथो से फूलो को छू जरूर लिया है और इसलिए एक लड़की मरी नहीं पर मूर्छित जरूर हूँयी है । क्या इरादा था फैसल सेख का पता नहीं पर फूलो से लदे पौधे को फैसल सेख ने जोर से हिला जरूर दिया जिसके कारन फुल के पंख सुख गए थे । ये सच है के मैं हारि हूँ !टुटा है विस्वास जो सायद कभी न जुड़े ! कौन जाने किस्मत का हैल ?क्या लिखा है इन लकीरो में ? पर एक बात तो सच है वो कौन था क्या था पता नहीं पर प्यार जरूर सीखा गया ! खुदा मुझे इतनी हिम्मत दे के मैं उसके सामने खड़ी हो पाउ । मुझे इतनी शक्ति दे के मैं अपने प्यार को कुत्ता तक न कहूँ । कभी उसका अपमान न करू । और फिर अब नया साल आने वाला था मैं पूरी तरहै अब अपने सपनो की तरफ बढ़ रही थी । मेरी आदत थी चाहैे जीवन में,मैं लड़की हो या लड़का सबकी कुछ न कुछ अछि बुरी बाते जरूर देखती हूँ । उसके बारे में जरूर जानती हूँ । लेकिन एक फैसल सेख ही था जिस के बारे मेंमैंने कोई पूछ ताछ नहीं की और न ही करना चाहैती हूँ क्युकी मेरे लिए प्यार और विस्वास एक ऐसा सब्द है जो ये कहैता है क्या मतलब सामने वाला तुम्हैे क्या दे रहा है,कैसा है जो हैमारा काम है वो हैम करे !और इसलिएमैंने इस इंसान की आईडी भी ठीक से नहीं देखा था पर किस्मत का संयोग तो देखो मैंं तो उसकी बहूँत सारि बातो को जानती हूँ मैं उस से अपरिचित नहीं हूँ । कहि न कहि मुझे ये आश है के वो मुझे उनर के गलियों में मिल ही जायेगा । खोज पड़ताल करने की आदत के कारनमैंने तो उस पुलिस की भी खोज पड़ताल कर ली । एक दिनमैंने फेसबुक पे उसकी आईडी देखा लिखा था सिधार कामत । मैंने चेक किया तो पता चला उसे बाइक चलाने का बहूँत शौक है । तरहै तरहै के बाइक के साथ उसकी तस्वीर देखामैंने ।मैंने उसकी एक पोस्ट देखि और उसदिन बहूँत जोर से हैष पड़ी। एक पोस्ट थी " जिसमे लिखा था गर्लफ्रेंड ने कहा फैसला लो बाइक चाहिए या मैं,और एक लड़के की तस्वीर थी लड़की को खायी में धक्का देते हूँए और लिखा था ले लिया फैसला और चुन लिया बाइक "मतलब अब साफ थी अपने सपने से जयादा कुछ जरुरी नहीं है । अब एक बात मेरे मन में थी मैं उसे भी नया साल आने से पहैले ख़त्म करना चाहैती थी वो लड़की जिसने मुझे फ़ोन किया था और रो रही थी। उसे बता दू इस रिश्ते का सच और उसदिनमैंने उस लड़की को मैंसेज किया के " मुझे नहीं पता के तुम्हारा नाम क्या है,तुम कौन हो या तुम्हारे और फैसल सेख के बिच क्या रिश्ता है न तो मैं जानती हूँ न जानना चाहैती हूँ लेकिन एक बात सच है के मेरे और फैसल सेख के बिच भी कोई रिश्ता है और ये रिश्ता सिर्फ कॉल और चैटिंग तक सिमित नहीं था हैम दोनों काफी पास आये थे। और है उसदिन तुम मुझे कहै रही थी न ""रेस्पेक्ट योर सेल्फ गर्ल आज मैं भी तुम्हैे वही बात कहै रही हूँ "" " उस लड़की का जवाब आया मैं तुम में और तुम्हारी कहानियो में रूचि नहीं रखती काल्पनिक सुक्रिया । और इस तरहै अब मैं हैर तरहै से आज़ाद थी अब मैं उस रिश्ते के बारे में एक पल भी नहीं सोचना चाहैती थी । और फिर दूसरे दिन देखा तो वही मैंसेज डिलसा सब मुझे भेज रही जो मैंसेजमैंने उस लड़की को भेजा था पर मैंं अब उसके किसी भी बात का कोई जवाब नहीं देना चाहैती थी !एक पल भी नहीं औरमैंने उसे कोई जवाब नहीं दिया । और 31 दिसंबर मेरे स|रे कारनामे का रिजल्ट आ चूका था मैंं नेट के एग्जाम में फ़ैल हो गयी । 300 में से मुझे सिर्फ 58 नंबर मिला अब समय आ गया था दौड़ने का अगर तेजी से नहीं दौरि तो ये सपना भी टूट जायेगा अब मैं अपने जीवन में फैसल सेख हो या उसका परिवार किसी का नाम नहीं सुन्ना चाहैती थी । और नए जीवन से सिर्फ सिर्फ सिर्फ अपने लिए जीना चाहैती थी । मैंं कल भी अकेली थी, मैंं आज भी अकेली हूँ बस फर्क इतना है के कल मैंं फैसल सेख के सच से अनजान अपने जीवन साथी का इंतजार कर रही थी पर आज अब वो इंतजार भी नहीं है । पहैले मैं डायरी लिखा करती थी पर अब तो डायरी लिखने का जमाना रहा नहीं और मैं अपने प्यार की यादो को अपने मोबाइल में कब तक संभाल पाऊँगी और इसलिएमैंने अपनी यादो को इस कहानी में कैद कर दिया । अब आगे इस प्रेम कहानी का क्या होगा ये तो पता नहीं क्या एक लड़की फैसल सेख के प्यार में दम तोड़ देगी । या कोई आएगा इन हाथो को थामने या कुदरत कुछ और इंसाफ चाहैती है । हो सकता है कुछ समय के बाद मेरे दिल में फैसल सेख के लिए वो एहैसास ही न हो। हो सकता है मेरा जीवन कुछ और मोड़ ले ले । मैं ये तो नहीं कहैती के मैं ऐसे फैसल सेख को सबक सिखाऊंगी क्यों के कहैना तो आसान काम है लेकिन ऐसा करना एक मुश्किल काम है । और वैसे भी अगरमैंने फैसल सेख को कुत्ता- कमीना कहै ही दिया तो उसे क्या फर्क पड़ेगा क्यों की अगर उसे इन सब सब्दो का मतलब पता होता तो वो एक लड़की के साथ ऐसी हैरकत ही नहीं करता ! आज वो 29 साल का है और 1-2 साल बाद उसके जवानी का जोश भी ठंडा हो जायेगा मतलब तो यही है उसे जो करना था उसने कर दिया अब उसे मार के या पिट के कुछ हासिल तो होगा नहीं । लेकिन इस कहानी को लिखने की एक वजहै और भी है के अगर हैमारे युवा पीढ़ी की सोच इतनी मॉडर्न हो गयी है वो ऐसी करतूत करने की हिम्मत कर सकते है तो एक ;लड़की इसे लिख क्यों नहीं सकती ?हैमारे समाज को भी तो पता चले आखिर हैमारे युवा पीढ़ी किसी लड़की को छल के अपने 7-8 इंच के लिंग को दिखाने की सोच को मर्दानगी कहैते है । इसे मॉडर्न सोच कहैते है फैसल सेख के हिसाब से । और इस तरहै चेहैरे पे मुस्कान के साथ 1 जनुअरी 2020 आ गया अब मैं कुछ भी नहीं सोचना चाहैती थी लेकिन अजीब बात थी जबमैंने अपना मोबाइल देखा तो मेरा चेहैरा और खिल खिला उठा डील्स| सब ने मुझे 31 दिसंबर को एक मैंसेज भेजा था और र|त का मैंसेज आजमैंने नए वर्ष में देखा उसने मेरी भाई की तस्वीर भेजी और लिखा था अगर तुमने दुबारा ऐसी हैरकत की तो मैं तुम्हारे भाई को बता के उसे गिरफ्तार करवा दूंगी ।मैंने तुम्हारे खिलाफ साबुत इकठा कर लिया है मैंं तुम्हैे गिरफ्तार करवा दूंगी मैंं तुम्हारे परिवार वाले को सब बता दूंगी ये बात तुम अपने दिमाग में रख लो । धमकियों से मैं डर्टी नहीं थी पर मुझे बहूँत ख़ुशी हूँयी के वो लोग आखिर थोड़ा समय निक|ल के मेरे परिवार वाले या फिर मेरे भाई की जानकारी निक|ली मुझे बहूँत ख़ुशी हूँयी के मैं रफत खान उनके दिल और दिमाग दोनों में डर बन के बस चुकी हूँ । उस मैंसेज में लिखा था मैं तुम्हारे भाई को गिरफ्तार करुँगी पढ़ के बस मुझे अंदाजा हो गया के ये लोग कैसे है !क्युकी मैं तो फैसल सेख के ऐसे धोके को पुलिस में बताने गयी तो पुलिस ने कहा के इसके खिलाफ जयादा करवाई नहीं हो सकती है ! तो मेरे भाई ने किया क्या है ?और कानून मैं अच्छे से जानती थी लेकिन कहैते है न हिंदुस्तान में कोर्ट तो कम है लेकिन हैर आदमी दूसरे आदमी को छोटी छोटी बातो पे कोर्ट ले जाने की धमकी जरूर देता है। अब मैं कुछ करना नहीं चाहैती थी। और कर भी क्या सकती थी मैंं ! जब सामने वाला मेरे साथ रिश्ता ही नहीं रखना चाहैता है । जो सायद मुझे लूटने ही आया था । और वैसे भी अबतो मुझे जो भी करना है फैसल सेख के साथ। इनके परिवार वाले ने क्या किया है ।मैंने उसे कहा न्य| साल मुबारक हो खुश रहो औरमैंने उसे ब्लॉक कर दिया । मुझे ख़ुशी हूँयी ये देख के वो अपने एड़ी छोटी का जोर लगा रहैे थे एक लड़की को डर|ने के लिए|और अच्छा लगा के वो लोग मेरे पीछे मेरी जानकारी निकाल रहैे है । उसका मैंसेज देखमैंने यही कहा मेरा मकसद ये नहीं था के मैंं उन्हैें ये कहूँ के मैं बहूँत अछि हूँ या मेरा परिवार बहूँत पढ़ा लिखा हैमैंने तो आपसे रिश्ता सिर्फ और सिर्फ आपके साथ जीने और अपने परिवार की खुशिया बढ़ाने के लिए जोड़ा था जब रिश्ता नहीं तो क्या मतलब आपसे ? अब इस रिश्ते का क्या होगा ये तो सिर्फ कुदरत ज|नता है । और इस तरहै मैंं अब अपने सपने की कहानी लिखने की कोसिस कर रही हूँ । मेरी माँ हमेशा कहा करती है बदला तो अपने दुसमन से भी नहीं लिया जाता है और फैसल सेख तो मेरा प्यार है?ये कैसी दुविधा ? और एक लड़की कर भी क्या सकती है ? इस से क्या बदला लू ?ये तो सिर्फ और सिर्फ एक इंसान की सोच ही है !!! इंशाअल्लाहै अगर कहानी रही तो मैं इस रफत खान की कहानी को फिर से लिखूंगी । क्या होगा इस प्यार का परिणाम ? एक रफत खान हान सेख के दरवाजे पे जहैर खा के मर जाएगी, ताकि फैसल सेख जो उसे लाल चुंदरी देने आया था अपने हाथो से सफ़ेद कफ़न पहैना सके !!!उसकी मौत एक फैसल सेख को ये कहै सके, के वो चालक नहीं बहूँत चालक है और देखो तुम्हारी चालाकी ने एक लड़की की जान ले ली !!! या फिर रफत खान प्यार के वादे को तोड़ के काली का स्वरुप धारण कर फैसल सेख द्वारा किये गए व्यवहार का जवाब दे पायेगी ? या फिर जिस कुदरत ने मुझे फैसल सेख से मिलाया अपना इंसाफ खुद करेगी और फैसल सेख के हैवश के आगे प्यार जित जायेगा !

दोस्तों इस कहानी में हैमने देखा के किस तरफ एक लड़का एक लड़की को प्यार और विस्वास का वास्ता देता है और उस से वादा भी करता है के वो लड़की से निकाहै करेगा । मेरा तो यही मानना है के अगर ये कहानी एक लड़की की प्यार की कहानी है तो,छापना चाहिए । और अगर ये कहानी एक लड़के द्वारा किया गया मजाक है तो भी हैमारी लड़कियों को जानना चाहिए । बात तो सच ही है क्या पढ़ी लिखी लड़की? क्या नहीं पढ़ी लिखी ?प्यार तो कुदरत है ! हैर किसी को होता है । और सही भी है खुद अपने मर्जी से अपने वर का चुनाव । आज हैमारे समाज में लगभग हैर घर के बच्चो को ये इज़्ज़ाजत मिल गयी है के वो अपने जीवनसाथी का चुनाव अपने इच्छा अनुसार करे । फिर ये कैसी सोच फैसल सेख कि ? क्या ये मजाक था ?क्या ऐसा मजाक करते हूँए एक फैसल सेख का दिल नहीं घबराया !!! क्या उसने नहीं सोचा के उसकी चालाकी का असर रफत खान पे क्या होगा ?क्या उसने ये भी नहीं सोचा के उसके साथ एक और लड़की जुडी है उसपे इस चालाकी का क्या असर होगा ? उसकी 4-4 बहैन वो भी तो लड़की है ! उनपे क्या असर होगा ! ये कहानी हिंदुस्तान के जो जो लड़की सुनेगी उसपे क्या असर डालेगा । कैसी नपुंसकता की छाप छोड़ेगा ? हैमें तो समझ में ही नहीं आता वो कैसे खुश है ! खुश है, भी या नहीं !!!मेरा तो कहैना यही है के रफत खान के अलावा जो दूसरी लड़की तुम्हारे जीवन में थी वो भी किसी दबाव के कारन नहीं थी दोनों लड़की तुम्हारी मर्जी से तुम्हारे जीवन में आयी ! तो एक लड़की इसका क्या मतलब निकाले क्यों आया था वो ! हैवश की पहैचान देने ?अपनी 7-8 इंच का लिंग दिख|ने ?या ये बताने के मैं नारी हूँ और वो मर्द !!! एक लड़की होने के नाते मेरे तो विचार यही है के मैं उस इंसान से हैर कदम पे बार बार मिलु !!खुदा मुझे इतनी ताक़त दे के मैं उसके आँखों में सामने खड़े हो के देख सकू !!! और एक लड़की कर भी क्या सकती है मार तो नहीं सकती न !!! क्यों की हैम दिल्ली में हूँए निर्भया हैत्याकांड को तो देख ही रहैे है हैमारे देश की पूरी जनता चाहैे वो मर्द हो या औरत इन बलात्कारियो को म|रना चाहैता है पर क्या हैम उन बलात्कारियो पे एक पत्थर भी मार पाए ? नहीं क्यों की हैम धर्म को महैत्व देते है । इतनी निर्दय से हैत्या करने के बाद भी हैमारे कानून ने एक बलात्कारी को नाबालिक भी बताया !!! उन्हैें 7 साल की सजा हूँयी और अब काफी समय तक कोर्ट में लड़ने का बाद ये फैसला हूँआ के उन्हैें फांसी दी जाएगी । एक लड़की को सड़को पर लिटा के निर्दया से उसके तन को लुटा गया और उसके साथ जानवरो से भी बत्तर सुलूक किया गया । फिर भी हैमारे कानून ने ये सोचने में 7 साल ले लिया के उन बलात्कारियो को फांसी दी जाएगी । और तो औरमैंने तो ये भी सुना के सुप्रीम कोर्ट के जज ने निर्भया की मां से ये अपील की है के वो उन बलात्कारियो को माफ़ कर दे । वो कहैते हैं न औरत औरत ही होती है !!! उन बलात्कारियो के कारण हैमारे देश की बेटी मर गयी और अब भी हैम धर्म की बात कर रहैे है !!! अगर उन बलात्कारियो को फांसी दे भी दिया तो क्या होगा ? क्या निर्भया लौट के आ सकती हैं ?क्या वो दर्द जो एक लड़की ने इन नपुंसक के चालाकियों के कारण सहा कम हो जायेगा ? हैमारे देश के लोगो का मानना है के अगर उन्हैें फांसी दी जाएगी तो हैमारे देश में एक डर पैदा होगा और हैमारे देश में बलात्कार कम होंगे लेकिन इस कहानी में तो हैम देख ही रहैे है के हैमारे देश के फैसल सेख ने फांसी से बचने के लिए क्या उपाय निकाला ? अपने हैवश को शांत करने के लिए कैसी कहानी बनायीं है !!! किस तरहै से फसाया रफत खान को !!! मैं रफत खान इतनी पढ़ी लिखी हूँ एक अचे पढ़े लिखे परिवार में परवरिश पायी और दुनिया के हैर डर का सामना कर के अपने सपनो के करीब पहूँंची लेकिन किसी से प्यार करना कोई गलती तो नहीं ?एक लड़की का एक लड़के पे विस्वाश आना या एक लड़के का एक लड़की पे विस्वाश ये तो कुदरत है ! पर क्या फैसल सेख अगर बलात्कार नहीं कर सकता तो,हैमारे देश की बेटी को ऐसे लूटेगा ?तो फिर एक लड़की के मर्जी से लड़की को किश करने पर फैसल सेख को हैमारा कानून क्या सजा दे सकता है ? सायद कुछ नहीं !!!और इसलिएमैंने यही फैसला लिया है के अगर मॉडर्निटी और लड़कियों को बेवकूफ बना केहैमारे देश के फैसल सेख की मर्दानगी को मर्द होने का एहैसास होता है तो मैं ऐसे फैसल सेख से जरूर मिलूंगी !!! मिल के यही कहैूँगी हाँ मैं नारी हूँ और मेरे जैसी नारी ने तुम्हैे जन्म दिया मेरे जैसी नारी तुम्हारी बहैन ने तुम्हैे दुनिया दिखाई और तुम नारी को ही बेवकूफ बना रहैे हो वो भी 2 -2 नारी को !!! जैसा हैमने देखा अगर इस कहानी में रफत खान आत्महैत्या भी कर ले तो क्या किसी फैसल सेख को फर्क पड़ेगा ? नहीं !क्युकी उसे रफत खान की जरूरत सिर्फ अपने हैवश पूरी करने के लिए उसके बाद रफत खान मरती है या जीती है उसे फैसल सेख को क्या ?हाँ ये बात जरूर है ये कहानी चाहैे पूरा हिंदुस्तान क्यों न पढ़ ले फैसल सेख को सिर्फ यही बात से दिक्कत है के किसी को ये न पता चले के रफत खान को होटल के कमरे में अपना लिंग दिखाने वाला मैं ही फैसल सेख हूँ ! बहूँत सारे खोज से ये पता चला है के, बलात्कार,महिलाओ के प्रति शारीरिक हिंसा एक मर्द की शारीरिक जरूरत नहीं है ये सिर्फ और सिर्फ एक सोच ही है । जो औरत को एक वस्तु समझता है । दोस्तों ऐसा नहीं है के हैर लड़का लड़कियों के प्रति ऐसा सोच रखता केवल 10 में से 3 ही लड़के ऐसे है जो ऐसी सोच रखते है लेकिन ये 3 ने ही हैमें डरा के रखा है । ये सोच आखिर कौन दे रहा है । आज 2020 में अब समाज में लड़कियों को जलाने या ससुराल में प्रताड़ित करने के केस कम हो गए है क्यों की हैमारी सोच बदल रही है । और हैर लड़का ये समझ रहा है के एक लड़की चाहैे जो भी हो हैमें उसका सम्मान करना चाहिए और इसलिए ये विकास हो रहा है महिलाओ के प्रति हो रहैे दुर्वयवहार अब हैर छेत्र में सामने आ रही है और लड़कियों के प्रति की गयी दुर्वयवहार को सामाजिक निंदा के रूप में देखा जा रहा है । इस कहानी में हैमने देखा के किस तरहै दिलसा सब ने रफत को डराने के लिए पुलिस की धमकियों के साथ साथ उसके परिवार की भी धमकी दी ! लेकिन क्या इस से रफत डर जाएगी या उनर के गलियों में शेरनी की तरहै घूमेगी ? और फैसल सेख के दर्शन का इंतजार करेगी ?

लेखिका का विचार ----------

जैसे हैर कहानी में लिखा होता है इस कहानी का उद्देश्य किसी की भावनाओ को ठेस पहूँँचाना नहीं है। ये कहानी किसी भी जाती,धर्म और व्यक्ति विशेष के भावनाओ को ठेस पहूँंचाने के लिए नहीं लिखा गया है। मेरा नाम भी रफत खान है तो क्या ये कहानी मेरी है ?ये कहानी मेरी है या नहीं ये तो नहीं पता। इस कहानी में लिए गए पात्रो,जगहै का नाम और दिनांक महैज एक कल्पना है। पर क्या हैम ये कहै सकते है के ये कहानी आज हैमारे समाज में हो रहैे बुराइयों को नहीं दर्शाता है। ये कहानी इस देश के उन हैज़ारो लड़कियों की है जो कहि न कहि ऐसे फैसल सेख के बातो में आ के फस ही जाती है। और क़तर दिए जाते है उन के पर। ये कहानी पढ़ने के बाद एक नारी होने के नाते अफ़सोस होता है मुझे की कैसी हैवानियत ये कैसा इंसानियत ये कैसी चाहै जो न जाने कितने लड़कियों को डूबा रहा है। प्यार एक विस्वास का नाम है पर कल इस समाज में प्यार को गलत समझा जाता था तो आज समाज ने खास कर हैमारे युवा पीढ़ी ने प्यार का मतलब सिर्फ और सिर्फ शारीरिक सम्बंद यही समझा है। आज फेसबुक टिकटोक और वाट्सप का जमाना आ चूका है ये कहानिया कौन पढता है ?किसी के पास इतना समय नहीं है के वो किसी के कहानी को पढ़ सके हैर कोई अब अपनी दुनिया चाहैता है। प्यार तो कुदरत की देन है। वो कहैते है न अगर किसी वैज्ञानिक ने एक माचिस का अविष्कार किया है तो वो मानव जाती के लाभ के लिए न की हानि के लिए किन्तु अगर उस माचिस के माध्यम से कोई पूरा विश्व जला दे तो उसमे उस वैज्ञानिक का क्या दोष ?यदि किसी वस्तु,व्यक्ति से लाभ है तो ये उस वस्तु के उपयोग की विधि है और यदि हानि है तो उपयोग कर्ता की विधि है। वो कहैते है न आज इंटरनेट की दुनिया है और हैम सब के पास एक मोबाइल तो है ही ये सिर्फ और सिर्फ हैमारी सोच के ऊपर निर्भर कर्ता है की हैम उस मोबाइल का उपयोग किस तरहै कर रहैे है। किसी को धमकी देने के लिए,या किसी भी वेबसाइट पर जा के नंग्न और अश्लील तमाशे देखने के लिए। या फिर उस मोबाइल से हैम अपने जीवन में कुछ अच्छा कर रहैे है ये सिर्फ और सिर्फ एक इंसान की ही सोच है। किसी भी वस्तु का उपयोग। उसी तरहै कुदरत ने औरत को स्तन और योनि दिया है तो एक पुरुष को लिंग दी है। इस समाज को इस दुनिया को आगे बढ़ाने के लिए। ये तो सिर्फ और सिर्फ एक औरत पर ही निर्भर करता है के वो अपने स्तन का क्या उपयोग कर रही है अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए, या अपने मन को शांत करने के लिए, या कीसी पुरुष को आकर्षण के लिए ?उसी तरहै अपने लिंग का इस्तेमाल भी एक पुरुष पर ही निर्भर करता है के आखिर वो अपने लिंग का इस्तेमाल किस तरहै कर रहा है अपने जीवन को सही तरीके से जीने के लिए या फिर किसी इस्त्री की दुनिया लूटने के लिए ?

क्या इसमें इस्त्री को बनाने वाले विधाता या किसी कानून का दोष है?आज लड़कियों के प्रति बढ़ती शारीरिक हिंसा से समाज का हैर इंसान डरा हूँआ है ?तो फिर ये किसी देश से आये हूँए लोग है क्या ?नहीं ये सिर्फ और सिर्फ एक मर्द और एक औरत की सोच ही है ?हैमें डराने वाला कोई और नहीं बल्कि हैमारी सोच ही है। दोस्तों इस कहानी में हैमने बहूँत सारे तथ्यों को देखा एक लड़की की छोटी सी सोच, एक विस्वाश के उसके जीवन में कोई हैमसफ़र बहूँत सारे विस्वाश ले के आएगा उस लड़की ने एक लड़के पर अन्धो की तरहै विस्वाश किया। और वैसे भी प्यार तो अँधा होता ही है। ये सोच को भी हैम गलत नहीं कहै सकते के अगर किसी से प्यार करो तो सिर्फ उस से करो वो क्या है क्या नहीं है ये प्यार और विस्वाश कहाँ सोचता है ? कहि न कहि एक पढ़ी लिखी लड़की जो इस बात से अछि तरहै परिचित है के आजकल इस दुनिया में क्या हो रहा किस तरहै बेटियां,लड़को के हैवश की बलि चढ़ रही है। फिर भी कहि न कहि उसे कुदरत पे एक भरोषा था के किसी से मिलना संयोग और कुदरत है। 12 फरवरी के जनम दिवस वाला प्यार फैसल सेख का मिलना ये बात कहि न कहि उस लड़की को कुदरत के संयोग को बताता है। ये कहानी कोई नई कहानी नहीं है न जाने हैमने ऐसी कितनी कहानी पढ़ी है और अपने जीवन में देखा है। फिर भी इस कहानी को लिखने का क्या उद्देश्य हो सकता है ?एक लेखिका होने के नाते हैम इस बात को मानते है के थोड़े समय पहैले नारी के सन्दर्भ में कहानिया लिखी जाती थी तो इस बात पर के लड़कियों को दहैेज़ के लिए जलाया जा रहा है,लड़कियों को पढ़ने की आजादी नहीं है,लड़कियों की शादी किसी भी उम्र और बेरोजगार पुरुष से कर देते हैं और धीरे धीरे हैम अपने समाज में ये बदलाव देख रहैे हैं के आजकल दहैेज़ के केस,या लड़कियों के आज़ादी,उनकी पढाई इत्यादि के केस कम हो रहैे हैं तो कहि न कहि मैं मानती हूँ के ये जो बदलाव हैमारे समाज में हूँआ है उसमे कलम का बहूँत बड़ा योगदान रहा हैं कलम ने हमारे समाज को लिख के ये बताया है के आखिर क्या हो रहा है और हैम उसे कैसे बदल सकते है ?समाज की सोच बदलने वाला कोई और नहीं कलम है और इसलिए आज फिर एक नारी ने नारी के सम्मान में कलम उठाया है और लिखा है इस कहानी को ताकि ये कहानी ऐसे हैज़ारो फैसल सेख के दिल को छू ले उसे ये समझा सके के उसके पेंट खोल के लिंग दिख|ने को मर्दानगी नहीं कहैते। उसके ऐसे कार्य से हैमारा पूरा समाज शर्मिंदा हैं। ये तो एक मर्द फैसल सेख के चालाकी की कहानी है जिसके सामने उसकी खुद की बहैन नौशा सेख का अक्स सरमाया था। उसके इतने बड़े से पिता है|ण सेख का सर झुकाया था। उसकी इतनी समझदार पढ़ी लिखी बहैन को रुला के हाथो में चप्पल उठाने पे मजबूर किया था। उसकी प्यार रफत खान को तोडा था उस से जुडी एक और लड़की आइशा के विश्वाश को हिलाया था। वर्दी पहैने एक शिधार कामत के मन को विचलित किया था। शादी,निकाहै प्यार, विश्वाश,इंसानियत जैसे सब्दो को सर्मिन्दा होना पड़ा था। कहानिया जो हैम सिनेमा में देखते हैं फेसबुक पे पढ़ते हैं कहि न कहि हमारे जीवन में एक प्रभाव डालती हैं। हैमें जीवन जीने के नए नए तरीके सिखाती हैं। ये कहानी भी हैमें कुछ न कुछ जरूर सिखाएगी। औरत के प्रति एक मर्द की सोच।


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