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Dayawati d

Inspirational

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Dayawati d

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रिश्ते

रिश्ते

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खाट में बीमार पड़ा हुआ जमालु, सोच रहा था।मेरे मांँ, बाप ने इतनी गरीबाई मैं पढ़ा लिखा कर काबिल बनाया और मैंने बड़ी ईमानदारी और मेहनत से धन संपत्ति बच्चों के लिए जोड़ी पर,मुझे इज्जत न मिली। हे ईश्वर ! अब तू !मुझे यहांँ से उठा ले ! मैंने अपने सारे फर्ज पूरे कर लिए हैं।इतना कहते बीमार पड़े जमालु के प्राण पखेरू हो गए । बड़ा बेटा, वह सीधे मुंँह कभी बात न करता था। पिता की बंद आंँखें देखकर वह बोला-- आज तुमने हमारी हिम्मत तोड़दी।जीवन में कभी तुम बीमार न पड़े थे, मैं तुम्हारी मोहब्बत को न समझ पाया।मुझे हमेशा के लिए क्षमा कर देना।

जब चिड़िया चुग गई खेत फिर पछताने से क्या होता है ?जीते जी कदर न जानी ।"मरने के बाद क्षमा मांगी"।


मृत्यु को 10 दिन भी न हुए थे, कि छोटा बेटा मांँ से बोला - "अब तो चौधरन बन गई है!" मांँ ने कहा- "हांँ चौधरन तो मैं हूंँ ही "तेरा बाप जो चौधरी ठहरा था ।उसने अपने लिए और मेरे लिए एक आशियाना बनाया था ।अब ईश्वर ने उन्हें मेरे से अलग कर दिया है ,अगर तुम भी मुझे न समझोगे ,तो मैं भी उनके साथ स्वर्ग सिधार जाऊंँगी और तुम्हारे लिए हिसाब किताब नहीं कर पाऊँगी।" इतना सुनते ही," बेटे ने मांँ को गले लगा लिया" और क्षमा मांँगने लगे । अब कभी हम बंँटवारे की बातें नहीं करेंगे और आप का ध्यान रखेंगे।जैसा तुम्हारा मन चाहे वैसा ही तुम करना ।हम पहले ही पिता को खो बैठे हैं, अब तुम्हें नहीं खोना चाहते ।यह सुनते सभी बेटे, बेटियों तथा मांँ की आंँखें आंँसुओं के सागर में डूब गईं ।



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