पृथ्वी की रंगीन यादें
पृथ्वी की रंगीन यादें
एक बार पृथ्वी नाम की महिला थी। उसके पति का नाम अंतरिक्ष था| वह मंदाकिनी आकाशगंगा नाम के गांव में रहते थे| वहां कई लोग जैसे बुद्ध मंगल इत्यादि।
पृथ्वी व अंतरिक्ष खुद को अकेले महसूस करते थे। इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों ना बच्चे पैदा किए जाए| इस पर मंगल व चांद ने पृथ्वी को कहा कि " यह सब मत करो, वरना एक दिन तुम्हें पछताना पड़ेगा कि हमने ऐसा क्यों किया ?"
लेकिन पृथ्वी की ममता ने उसे बिल्कुल अंधा कर दिया इसलिए उसने किसी की नहीं सुनी| पृथ्वी ने बड़ी ही मेहनत से वातावरण , स्थल, जल, प्रकृति बनाई ताकि उसके बच्चे वहां आराम से रह सके वह उसकी बनाई चीजों की देखभाल कर सके वह अपनी आवश्यकतानुसार उन्हें काम में ले सकें|
पृथ्वी ने एक-एक करके जीवों को इस धरती पर जीवन दिया। शुरुआत में तो पृथ्वी अपने बच्चों के साथ बहुत खुश थी| बाद में मानव के आ जाने से वह और भी खुश हुई। मानव भी यहां पैदा होकर बहुत खुश हुआ| पृथ्वी को मानवों व जानवरों से अत्यधिक लगाव हो गया| मानव जैसे जैसा बड़ा होता गया उसने पृथ्वी से मांगे की| पृथ्वी भी उसकी मां ठहरी इसलिए उसने मानव की हर मांगे पूरी की| पृथ्वी मानव को उसके हर जन्मदिन पर कभी ठंड से बचने के लिए उपाय बताती ,कभी खाने के लिए पेड़ों से फल देती, तो कभी तन ढकने के लिए कपड़े देती|
धीरे-धीरे मानवों व जानवरों में लड़ाई होने लगी| दोनों ने पृथ्वी से कहा कि" हमारी लड़ाई का फैसला करो"| अब पृथ्वी ने सोचा कि जानवर है मानव को अलग-अलग करके इनकी लड़ाई का समाधान किया जा सकता है|
पृथ्वी ने सोचा कि जब दोनों भाई कई दिनों तक अलग-अलग रहेंगे तो अपने आप एक दूसरे की कमी महसूस होने पर वापस मिल जाएंगे|
इसलिए पृथ्वी ने सोचा कि मानव को मकान पसंद है व जानवर को गुफा जंगल तो क्यों ना जानवर को जंगल में व मानव को मकानों में बसा दूं और पृथ्वी ने ऐसा ही किया| मानव मकान में वह जानवर जंगल में खुशी-खुशी रहते। मानव की मांगे पृथ्वी हर बार पूरा करती और जानवर को कहती कि "कुछ दिन रुको।" जानवर ने पृथ्वी से कहा कि "मां देख लेना एक दिन यह मानो तुम्हें बर्बाद कर देगा वह साथ में मुझे भी।"
पृथ्वी "नहीं ऐसा कभी नहीं होगा मैं मानव की मां हूं , इसलिए वह मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं करेगा"|
जैसे जैसे मानव विकसित होता गया वैसे वैसे उसकी मांग बढ़ती गई। मानव अपने हर जन्मदिन पर पृथ्वी से कुछ ना कुछ मांगता। पृथ्वी मानव की हर मांगों को पूरी करती। जानवर ने एक बार पृथ्वी से कहा "आप हमेशा मानव के बारे में ही सोचती हो, लेकिन आपने मुझे जो दिया मैं उसी में खुश हूं|
मानव ने अपने एक जन्मदिन पर पृथ्वी से कहा कि "मां मुझे अक्षर के बारे में ज्ञान हो गया है इसलिए इसे आगे बढ़ा कर सुविधाजनक बनाना चाहिए|" पृथ्वी" हां तो बढ़ा लो मैं तुम्हारी सहायता करूंगी"|
पृथ्वी ने मानव के कहने पर सब कुछ किया और कुछ ही सालों में मानव बहुत विकसित हो गया| उससे यातायात सुविधा की इच्छा होने लगी तो उसने पृथ्वी को खोदकर उसमें से तेल, खनिज निकालें|
इस बात पर पृथ्वी को बहुत दुख हुआ कि जिस मां ने उसे जन्म दिया अपनी सुविधा के लिए उसी मां को खोदने लगा है ये मानव।
मानव को अपनी हर सुविधा के लिए पृथ्वी को क्षति पहुंचाने पड़ती थी लेकिन उसने अपनी सुविधा के लिए अपनी मां का दर्द ही नहीं देखा। मानव की जनसंख्या कम समय में बहुत ज्यादा होने लगी। पृथ्वी ने कहा "बेटा मानव मैं तेरी जनसंख्या की वजह से बहुत थक चुकी हूं ,मैं धीरे-धीरे एक और झुकती चली जा रही हूं।"
लेकिन मानव ने पृथ्वी की बिल्कुल भी नहीं सुनी और अपने फायदे के लिए पेड़ों को भी काटना शुरू कर दिया। मानव को यह बात पता थी कि पेड़ों से हमें ऑक्सीजन व फल मिलते हैं लेकिन वह फिर भी इनकी अंधाधुंध कटाई करते जा रहा था सिर्फ इंधन के लिए।
जंगल कम होने की वजह से जानवरों का भी निवास छिनने लगा तो जानवर ने पृथ्वी से जाकर मानव की शिकायत की। पृथ्वी बोली "मैं कुछ नहीं कर सकती ,अब मानव तभी रुकेगा जब वह अपना विनाश खुद कर लेगा।
मानव की बढ़ती जनसंख्या के कारण धरती पर भोजन की आवश्यकता भी ज्यादा होने लगी लेकिन पेड़ कम होने के कारण वर्षा भी नहीं हो पाती व कृषि कार्य ठीक से नहीं हो पाता।
पृथ्वी ने मानव को बार-बार समझाया कि इतनी ज्यादा जनसंख्या ठीक नहीं है लेकिन मानव हर बार यही कहता कि" मुझे अपने जैसे लोगों की जरूरत है।"
पृथ्वी हर बार मोन रहती। मानव विकसित होने के साथ-साथ क्रूर भी होता गया। मानव ने पहले तो जानवरों का आवास छिना अौर अब अपने शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए उनके मांस को खाना चालू कर दिया|
मानव के सुविधाजनक उपकरणों की वजह से जानवरों को कई बार मृत्यु का ग्रास बनना पड़ा। मानव ने पूरी पृथ्वी का अलग-अलग देशों में बंटवारा कर दिया। यह देखकर पृथ्वी बहुत रोई की मैंने जिस मानव को बनाया उसी ने आज मुझे अलग-अलग भागों में बांट दिया है।
मानव ने लगातार कई सालों तक धरती पर इतना कूड़ा करकट फैला दिया कि पानी के सभी स्रोत गंदे हो गए। मानव तो यंत्रों के माध्यम से पृथ्वी के अंदर से जल निकाल लेता है लेकिन जानवरों को वही मानव द्वारा किया गया दूषित पानी पीना पड़ता था।
जानवर दूषित पानी की वजह से बीमार पड़ जाते हैं लेकिन उन्हें अस्पताल ले जाने वाला कोई नहीं होता है। मानव ने अपने मनोरंजन के लिए जंगल से जानवरों को लाकर चिड़ियाघर में बंद कर दिया है।
प्रकृति ने जानवरों को भी स्वतंत्र रहने का हक दिया है। प्रकृति ने मानव को सोचने के लिए दिमाग दिया है लेकिन मानव ने उस का गलत फायदा उठाकर प्रकृति के कुछ नियमों के विपरीत कार्य किया है जिसका नुकसान मानव को बाढ़ भूकंप अकाल बीमारी जैसी आपदाओं का सामना करके भुगतना पड़ेगा।
मानव को अब यह ज्ञात होने लगा है कि पृथ्वी धीरे-धीरे दूषित होती जा रही है इसलिए मानव ने अंतरिक्ष में भी कचरा फैलाना शुरू कर दिया है मानव ने चांद को भी नहीं छोड़ा और वहां भी उसने धरती से ले जाकर कचरा फैला दिया है जब चांद पर भी कचरा फैला दिया है तो मंगल को कैसे बख्स सकता है। मानव सोचता है कि जब पृथ्वी रहने के लायक नहीं रहेगी तो हम मंगल पर जाकर बस जाएंगे।
मानव कार्बन डाइऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी गैसों से पृथ्वी का वायुमंडल खराब कर दिया है। अब पृथ्वी पर पेड़ों की कमी से ऑक्सीजन की कमी हो गई है इसलिए सारे देश आपस में पानी व कृत्रिम ऑक्सीजन के लिए लड़ाई कर रहे हैं।
अब पृथ्वी बहुत खराब हो चुकी है साथ ही साथ पृथ्वी थोड़ी बूढ़ी हो गई है। एक दिन पृथ्वी अपनी पुरानी तस्वीरों को देख रही थी जानवर ने पूछा" मां तुम क्या देख रही हो?" पृथ्वी "बेटा अपनी तस्वीरों को देख रही हूं"।
जानवर "आप तो पहले बहुत खूबसूरत थी" पृथ्वी "हां बेटा" जानवर "मां लेकिन आप इतनी खूबसूरत थी तो अब इतनी प्रदूषित कैसे हो गई? पृथ्वी "बेटा मानव ने मुझे अपने फायदे के लिए ऐसा कर दिया है।"
जानवर "लेकिन मां मानव तो अब मंगल के ऊपर बसने की सोच रहा है ना।" पृथ्वी "हां बेटा लेकिन मानव उसे भी मेरी तरह ही प्रदूषित कर देगा" जानवर "तो आप कुछ करो ना ?"
अंतरिक्ष "बेटा में एक बहुत बड़ा पत्थर कहीं से लाऊंगा वह पृथ्वी से उससे टकरा दूंगा , जिसकी वजह से पृथ्वी पर इतनी भयानक तबाही मच जाएगी कि मानव प्रजाति के साथ-साथ सब कुछ नष्ट हो जाएगा।"
अंतरिक्ष को पत्थर ढूंढने में समय लग गया तब तक पृथ्वी पर से पानी व वर्षा लगभग गायब हो चुकी थी। मानव ऐतिहासिक स्मारक के आगे जैसे फोटो खींचवाता था वैसे ही अब लोग पौधों की तस्वीरों के साथ फोटो खींचवाते है।
पृथ्वी अपनी पुरानी तस्वीरों को देख कर रोती रहती है। समुद्र की वह गहराई जहां तक प्रकाश की किरण नहीं पहुंच पाई वहां मानव द्वारा फेंका गया कूड़ा पहुंच गया था।
खेल में जीतने वाले लोगों को इनाम में ट्रॉफी नहीं पौधा दिए जाने लगे हैं।
चांद व मंगल पृथ्वी की यह हालत देखकर बहुत दुखी थे जो पृथ्वी हमारे सौर परिवार में सबसे सुंदर व रंगीन थी वही आज कितनी प्रदूषित हो गई है।
चांद व मंगल को भी डर लगने लगा कि कहीं मानव यहां भी आकर उन्हें भी प्रदूषित ना कर दे।
जब मानव पृथ्वी को छोड़कर मंगल पर चला गया तो पृथ्वी मानव से एक सवाल पूछती है "बेटा तूने धरती पर तो उन लोगों के लिए अनाथालय बना रखे हैं जिन्हें उनके माता-पिता ने छोड़ कर घर से निकाल दिया है।"
बेटा तूने भी तो मुझे खराब कर के यहां रहने लायक नहीं छोड़ा अब बता अगर अंतरिक्ष में तूने कहीं भी वृद्धाश्रम बना रखे हैं या बनाएगा तो मैं भी वहां जाऊंगी।
" अगर आपके पास पृथ्वी के सवाल का कोई जवाब है तो बताइए"?

