नितिन और मुस्कान – एक कॉलेज की कहानी
नितिन और मुस्कान – एक कॉलेज की कहानी
कॉलेज का पहला दिन था।
नए चेहरे, नई किताबें और ढेर सारे सपने।
नितिन क्लास में सबसे पीछे वाली सीट पर चुपचाप बैठा था। हाथ में डायरी, आँखों में अपने भविष्य के सपने। तभी क्लास का दरवाज़ा खुला।
सफेद कुर्ता, हल्की सी मुस्कान और आँखों में आत्मविश्वास—
वह थी मुस्कान।
पूरी क्लास की नज़रें उस पर टिक गईं,
लेकिन नितिन की नज़र कुछ अलग ही ठहर गई।
उस दिन पहली बार उसे एहसास हुआ—
“शायद यही वो लड़की है, जो ज़िंदगी बदल देती है।”
कुछ दिनों बाद किस्मत ने दोनों को एक ही ग्रुप प्रोजेक्ट में मिला दिया।
पहली बातचीत थोड़ी अजीब थी,
नितिन कम बोलता था,
और मुस्कान हर बात में हँसी ढूँढ लेती थी।
धीरे-धीरे बातें बढ़ने लगीं।
कभी कैंटीन की चाय पर,
कभी लाइब्रेरी की खामोशी में।
नितिन अपने सपनों के बारे में बताता,
और मुस्कान ध्यान से सुनती—
जैसे कोई उसे सच में समझ रहा हो।
एक दिन मुस्कान ने कहा,
“नितिन, तुम बोलते कम हो…
पर जब बोलते हो, दिल से बोलते हो।”
उस दिन नितिन पहली बार मुस्कुराया था, दिल से।
समय बीतता गया।
दोस्ती कब प्यार में बदल गई,
पता ही नहीं चला।
कॉलेज की बारिश,
छत पर बैठकर बातें,
और एग्ज़ाम के बाद की राहत—
हर पल में दोनों साथ थे।
लेकिन हर कहानी आसान नहीं होती।
फाइनल ईयर आया।
करियर, परिवार और ज़िम्मेदारियों का दबाव बढ़ गया।
मुस्कान को दूसरे शहर में जॉब मिल गई।
नितिन अपने सपनों के पीछे यहीं रुक गया।
आख़िरी दिन कॉलेज गेट पर दोनों खड़े थे।
आँखों में आँसू, होंठों पर अधूरी मुस्कान।
मुस्कान ने कहा,
“अगर हमारा प्यार सच्चा है,
तो दूरी इसे तोड़ नहीं पाएगी।”
नितिन ने बस इतना कहा,
“मैं इंतज़ार करूँगा।”
सालों बाद…
एक दिन उसी कॉलेज के सामने,
जहाँ सब शुरू हुआ था,
मुस्कान फिर खड़ी थी।
और सामने—
नितिन, वही डायरी हाथ में लिए।
इस बार कहानी अधूरी नहीं थी।
इस बार साथ हमेशा के लिए था।
