मुझे लगता है...
मुझे लगता है...
मैं एक अर्से से एक हक़ीक़त से लड़ रहा हूँ,
मैं एक अर्से से तेरे होने ना होने पर यक़ीं कर रहा हूँ,,
मुझे लगता है कि मेरे देखे हुए सारे ख्वाब सही हैं,
मुझे लगता है कि जो हक़ीक़त नज़र आ रही है, असल में हक़ीक़त ही नहीं है,,
मुझे लगता है कि तूं आज भी मुझसे बस नाराज़ है,
मुझे लगता है कि जितनी मोहब्बत हममें कल थी, उतनी ही आज है,,
मुझे लगता है कि "अगर मैं सिर्फ तेरा हूँ और तूं सिर्फ मेरा है तो हमारे दरमियाँ कौन आयेगा",
मुझे लगता है कि अब अगली ही घड़ी मुझे तेरा फोन आएगा,
मुझे लगता है कि जो कुछ भी यहाँ नज़र आ रहा है, वो सही नहीं है,,
मुझे लगता है कि मैं पिछले कुछ एक सालों से एक नींद में हूँ, जो टूटती ही नहीं है,,
मुझे लगता है कि तूं अभी भी मेरे आस पास है,
मुझे लगता है कि इस नज़्म को लिखने वाले भी तेरे हाथ हैं,,
मुझे लगता है और जो कुछ भी लगता है मैं बता रहा हूँ,
मुझे मालूम है ये तूं भी सुन रहा है जो मैं औरों को सुना रहा हूँ,,
अगर तू सुन रहा है तो अब मेरे साथ मिलकर कोशिश करना,
कोशिश करना कि मेरे जो भी ख्वाब हैं महज़ ख्वाब ना रहें,
कोशिश करना कि मैं जिस हक़ीक़त से डर रहा हूँ, वो हक़ीक़त ना बने....

