मुझे गद्दा चाहिए
मुझे गद्दा चाहिए
(सत्य घटना पर आधारित लघु कथा)
वर्षा एक गरीब मजदूर थी जो अपने पति के साथ ईंट भट्टे पर काम करती थी। उसका पांच छः साल का एक बेटा था जिससे वह पढ़ा-लिखा कर बहुत बड़ा आदमी बनाने का सपना देखा करती थी, वह स्वयं भी डांस करने की शौकीन थी। वह टीवी के लाइव शो में आने वाली कोरियोग्राफर वर्तिका झा को अपना आइकॉन मानकर समय मिलते ही अकेले में थिरकने लगती थी। वर्षा का पति उसके इस हुनर को जानता था और एक छोटा टीवी भी लाकर अपनी झोंपड़ी में लगा दिया था। वर्षा को एक दिन डीआईडी सुपर मॉम के चल रहे ऑडिशन के बारे में पता चला तो वह भी ऑडिशन देने पंहूच गई। दो दिन तक लंबी लाइन में लगने के बाद उसका नंबर आया और वह सलेक्ट हो गई। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि अब उसे मेगा ऑडिशन के लिए मुंबई बुलाया गया। उसके सामने साकार होता उसका सपना था। मुंबई जाने के लिए पति-पत्नी दोनों ने अपने साथी मजदूरों से कुछ रुपए उधार लिए और बेटे को साथ लेकर चल पड़े मायानगरी मुंबई की ओर। टॉप ट्वेल्व में सलेक्ट होने का सपना लिए घबराते कांपते हुए उसने डीआईडी के भव्य मंच पर कदम रखा। जहां उसका सामना बड़े-बड़े दिग्गज कोरियोग्राफर्स और मेंटोर्स(डांस गुरुओं) से हुआ। परफॉर्मेंस से पूर्व जब उससे पूछा गया कि "यदि तुम्हें इस जी मार्केट से कुछ लेने को कहा जाए तो तुम क्या लोगी?" उसने हसरत भरी नज़रों से सारे सामान को देखा पर एक कोने में जाकर उसकी नजर ठहर गई सामने एक गद्दा रखा था उसने कहा "मुझे यह गद्दा चाहिए" उसकी इतनी छोटी सी इच्छा को जानकर सभी हैरान थे। उस जी मार्केट में हजारों एक से एक कीमती चीजें थी वह चाहती तो कुछ भी ले सकती थी पर उसने केवल एक गद्दे पर ही नजर डाली। जब उससे पूछा गया कि "कीमती वस्तुओं में से आपने सस्ता सा केवल गद्दा ही क्यों चुना"? वर्षा ने जो जवाब दिया उसे सुनकर सभी भावुक होकर आत्मविभोर हो उठे।
उसने कहा हम शाम को काम करके जब अपनी झोपड़ी में वापस आते हैं तो बहुत थके हुए होते हैं फिर मैं खाने-पीने का काम निपटाते हुए और तक जाती हूं।"वह थोड़ा भावुक हुई और फिर आगे कहा "घर में केवल एक चारपाई है मैं अपने बेटे को लेकर उस चारपाई पर सो जाती हूं और मेरे पति जमीन में चटाई बिछाकर सोते हैं। इसलिए मैं अपने पति के लिए यह गद्दा लेना चाहती हूं मेरे लिए तो यही सबसे कीमती चीज है।"उसकी बात सुनकर सबकी आंखों में आंसू आ गए।
गद्दा उसे दे दिया गया और अब उसका डीआईडी सुपर मॉम का सफर प्रारंभ हुआ। टॉप 12 में चुने जाने के बाद उसने अपनी लगन, निष्ठा और कड़ी मेहनत के बल पर डीआईडी सुपर मॉम का खिताब हासिल कर देश और दुनिया भर में अपनी पहचान कायम की।
