kartikey pandey

Romance


4.5  

kartikey pandey

Romance


मेट्रो वाली लड़की |

मेट्रो वाली लड़की |

6 mins 147 6 mins 147

दिल्ली के कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर सुबह 7 बजे फॉर्मल कपड़ो में ,और अपने पीठ पर एक बैग लिए हुवे लगभग 26 से 27 साल का एक लड़का अपने मेट्रो के आने के इंतजार में खड़ा था| जिसका नाम है प्रकाश| यू तो हर रोज कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर भीड़ ज्यादा हुवा करती थी पर न जाने क्यों उस दिन भीड़ थोड़ी कम थी| और मेट्रो भी थोड़े देर देर से आ रहे थे। प्रकाश ये सोच ही रहा था कि कहीं वह आज अपने ऑफिस पहुचने में लेट ना हो जाये और फिर से उसे अपने बॉस की डाट सुननी पड़े तभी उसके सामने एक मेट्रो आ खड़ी हुवी| प्रकाश झट से मेट्रो में चढ़ गया| आज मेट्रो भी थोड़ी खाली थी इसलिए प्रकाश को बैठने के लिए सीट मिल गयी| मेट्रो दिलशान गार्डन से होकर रिठाला जाने वाली रेड लाइन पर आगे बढ़ी| मेट्रो जैसे ही कश्मीरी गेट से निकलती है तो प्रकाश की नजर सामने सीट पर बैठी हल्की गुलाबी साड़ी पहने हुवे एक लड़की पर पड़ी| उसने कान में इयरफोन लगा रखा था और उसकी नजरे मोबाईल के स्क्रीन पर थी|

ऐसा ही होता है ना मेट्रो में, लोग आस-पास तो होते है पर सबकी नजरे अपनी मोबाईल पर ही टिकी रहती है| यहाँ लोग एक-दूसरे से बहुत कम ही बात करते है| प्रकाश अब भी उस लड़की की ओर ही देख रहा था| लड़की के बाल काले, घने और लंबे थे|चेहरे पर एक मासूमियत सी थी| होते है ना कुछ लोग जो पहली ही नजर में अपनी ओर दूसरे का ध्यान आकर्षित कर लेते है| ये लड़की भी उन्ही में से एक थी। प्रकाश उस लड़की के ओर देख ही रहा था तभी लड़की ने उसकी ओर देखा तो प्रकाश ने झट से अपनी नजरे हटा ली और इधर उधर देखने लगा| प्रकाश को लगा कि शायद वह लड़की यह जान गयी है कि मैं उसकी और देख रहा हु|

जैसे ही मेट्रो इंद्रलोक स्टेशन पहुची प्रकाश के डिब्बे में एक 60-65 साल के बुजुर्ग चढ़े| चुकि सभी सीट भरे थे तो इस वजह से वह बुजुर्ग प्रकाश के आस-पास ही कही खड़े हो गए| मेट्रो इंद्रलोक से आगे बढ़ी| प्रकाश अपने ही सीट पर बैठा रहा पर जब थोड़ी देर बाद उस बुजुर्ग को किसी ने सीट नही दी तो वह अपने सीट से खड़ा हुवा और बुजुर'अंकल आप मेरे सीट पर बैठ जाइए'| बुजुर्ग के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आयी और उन्होंने प्रकाश से कहा- 'थैंक्यू बेटा'| और बुजुर्ग प्रकाश की सीट पर जाकर बैठ गए| वह लड़की यह सब देख रही थी| प्रकाश वही खड़ा हो गया जहाँ बुजुर्ग खड़े थे| प्रकाश की नजर एक बार फिर से उस लड़की पर जा पहुची| कुछ देर बाद जब मेट्रो प्रीतमपुरा स्टेशन पहुचती है तो मेट्रो की एनाउंसमेंट से प्रकाश का ध्यान टूटा और वह मेट्रो से उतर गया| प्रकाश प्रीतमपुरा में ही एक बड़े से प्रिंटिंग प्रेस में कंप्यूटर ऑपरेटर के पोस्ट पर काम करता है|

अगले दिन हर रोज की तरह प्रकाश फिर से अपने ऑफिस के लिए कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन से मेट्रो में चढ़ता है| उसकी नजरे उस लड़की को खोज रही थी जिसने उसे कल मेट्रो में देखा था| वह उसकी खोज में दुसरो डब्बो में आगे बढ़ता है पहले डब्बे में वह उसे नहीं दिखती है फिर इसी तरह वह दूसरे डब्बे से होते हुवे तीसरे डब्बे की ओर बढ़ता है प्रकाश का मन हल्का सा भरी होने लगता है तभी उसकी नजर एक लड़की पर पड़ती है, ये वही गुलाबी साड़ी वाली ही लड़की थी | आज उस लड़की ने हल्के पीले रंग की साड़ी पहन राखी थी| आज मोबाइल की जगह उसके हाथों में एक किताब थी जिसे वह बड़े ध्यान से पढ़ रही थी| प्रकाश बैठने के लिए इधर उधर सीट देखता है पर आज कोई सीट खाली नही थी| वह वही उस लड़की के आस-पास कही खड़ा हो जाता है| लड़की ने भी प्रकाश को देख लिया था| जैसे ही मेट्रो शास्त्रीनगर पहुचती है लड़की के बगल वाली सीट खाली हो जाती है| पर प्रकाश अब भी खड़ा रहता है वह उस सीट पर नही बैठता है| तभी लड़की खुद प्रकाश से हल्का सा मुस्कुराते हुवे कहती है'आप यहाँ बैठ सकते है, यह सीट बैठने के| प्रकाश के चेहरे पर भी एक हँसी आ जाती है| और प्रकाश सीट पर बैठते हुवे लड़की से कहता है-'थैंक्स'| कुछ समय बाद मेट्रो प्रीतमपुरा स्टेशन पर पहुच जाती है और प्रकाश मेट्रो से उतर जाता है|प्रकाश आज जब ऑफिस से घर आता है तो वह पूरे समय लड़की के बारे में ही सोचता रहता है कि, क्या नाम होगा उस लड़की का? वह क्या करती होगी ? कहा रहती होगी? और बहुत से सवाल उसके मन में चल रहे थे|

प्रकाश जब अगले दिन ऑफिस के लिए जाता है तो वह उस लड़की को मेट्रो में नही पाता है| प्रकाश का मन बैठ जाता है| प्रकाश अपने ऑफिस में कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहा था| पर प्रकाश का मन अपने काम में बिलकुल भी नहीं लग रहा था| तभी किसी की आवज ने प्रकाश को अपनी ओर आकर्षित किया ये आवाज थी उसके बॉस क'ओ प्रकाश जरा देखना तो ,इन मैडम को कोई कार्ड छपवाना है| प्रकाश ने जब उस लड़की की और देखा तो प्रकाश की दिल की धड़कनें बढ गयी| यह लड़की, वही मेट्रो वाली लड़की थी|

लड़की प्रकाश की ओर बढ़ती है और कहत'अरे आप?'

प्रकाश लड़की से कहता है- 'क्या आप मुझे जानती है?

तो लड़की कहती है- 'हाँ, हम मेट्रो में तो मिले थे, मैंने आप को अपनी बगल वाली सीट दी थी, आप भूल गए क्या?'प्रकाश की दिल की धड़कनें और बढ़ गयी थी| प्रकाश ने कहा'नहीं, बिल्कुल नहीं मुझे आप अच्छे से याद है'| उस लड़की को क्या पता था कि प्रकाश उसे अब कभी नहीं भूलने वाला था| प्रकाश ने लड़की से कहाँ-'बताइये आप को कैसा कार्ड छपवाना है तो लड़की कहती है कि-'मैं एक एनजीओ में काम करती हूं जो अनाथ बच्चो को मुफ्त में शिक्षा देती है उन्हें खाना ,कपडा और पढ़ने के लिए किताबे भी मुफ्त में देती है| तो दो दिन बाद हमने बच्चो का एक कार्यक्रम रखा है जिसमे हमे कुछ लोगो को बुलाना है, जिसके लिए हम एक इनविटेशन कार्ड छपवाना चाहते है'|

फिर लड़की वही प्रकाश के पास रखे एक चेयर पर बैठ जाती है और अपने हिसाब से कार्ड को बनवाती है| जैसे जैसे वह लड़की बताती जाती है प्रकाश उस हिसाब से कार्ड को डिजाइन करता है| जब कार्ड तैयार हो जाता है तो लड़की कार्ड को लेकर बड़े ध्यान से देखती है कि कही इसमें कुछ गलत तो नहीं|

फिर लड़की प्रकाश की ओर एक कार्ड बढाती है और कहत'ये लीजिये पहला कार्ड आपके लिए आप भी आइयेगा हमारे कार्यक्रम में'| प्रकाश कार्ड को लेते हुवे कहता है-'थैंक्स , मैं जरूर आऊंगा| फिर जब लड़की पैसे देने के लिए काउंटर पर आगे बढ़ने लगती है तो प्रकाश पीछे से पूछता है-'मैंम, आपका नाम तो लड़की कहती है-'प्राची'|

और फिर प्राची पैसे देकर वहां से चली जाती है|

प्रकाश अब उस लड़की का नाम जान चुका था ,वह यह भी जान चुका था कि प्राची रोहिणी में एक एनजीओ के लिए काम करती है| वह अपने मन में अपने और प्राची के नाम को जोड़कर सोचता है कि ,'प्राची-प्रकाश', कितना अच्छा लगता है न यह दोनों नाम एक साथ|

अगले दो दिन तक प्रकाश के मन में बार बार प्राची का ही नाम गुज रहा था| वह बार बार यही सोच रहा था कि जब वह प्राची से मिलेगा तो उससे क्या बाते करेगा?और यही सोचते सोचते दो दिन कब निकल गए प्रकाश को पता भी नहीं चला। कुछ हो गया था प्रकाश को| शायद प्यार हो गया था प्रकाश को|

प्रकाश ने कार्यक्रम के दिन जल्दी ही ऑफिस से छुट्टी ले ली और वह प्रीतमपुरा मेट्रो स्टेशन से रिठाला की ओर जाने वाली मेट्रो पर बैठ गया | मेट्रो का सफर सुरु हो गया था| और सुरु हो गया था प्रकाश के प्यार का भी सफर

बस यही थी प्रकाश की और मेट्रो वाली लड़की की कहानी|



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