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Anand Mishra

Action

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Anand Mishra

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मेरी पेशेवर यात्रा — “स्वयं से प्रतिस्पर्धा”

मेरी पेशेवर यात्रा — “स्वयं से प्रतिस्पर्धा”

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मेरी पेशेवर यात्रा की शुरुआत IPCL से हुई।

मुझे वडोदरा में Chief Human Officer (CHO) को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया।

जॉइनिंग की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद, CHO हमें कुछ अन्य पेशेवरों के साथ एक कॉन्फ्रेंस रूम में ले गए। वहाँ मंच पर एक व्यक्ति बैठे थे।

CHO ने परिचय कराया:

“ये M/s Academy Consultant से आए Executive Director (ED) हैं।

ये हमें तीन महीने का General Management Program – Level III देंगे।”

इतना कहकर CHO कमरे से बाहर चले गए।

🔹 पहला दिन — एक अलग शुरुआत

ED ने हम सबको देखा और कहा,

“एक-एक करके अपना परिचय दीजिए।”

जब मेरी बारी आई, मैंने पूछा:

“पहले आप बताइए—आपके लिए मैं कौन हूँ?”

कमरे में हल्की चुप्पी छा गई।

ED ने कुछ नहीं कहा।

उन्होंने सबको कहा—

“सब लोग अपनी जेब से 100 रुपये का नोट निकालिए।”

सबने नोट निकाला—मैंने भी।

फिर उन्होंने शांत स्वर में कहा—

“इसे फाड़ दीजिए।”

कुछ लोग हिचकिचाए।

कुछ ने एक-दूसरे को देखा।

मैंने बिना रुके नोट फाड़ दिया।

ED ने मेरी ओर देखा, हल्की मुस्कान दी और कहा:

“You are The One.”

और फिर बिना कोई और टिप्पणी किए, कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया।

🔹 तीन महीने — एक अनुशासन

अगले तीन महीनों में, मैंने एक अभ्यास अपनाया—

हर दिन एक नोट (सीख) लिखना।

यह केवल नोट्स नहीं थे,

बल्कि दिन की समझ, निर्णय और अनुभव का सार थे।

आज भी यह अभ्यास जारी है—

समय के साथ, आवश्यकता के अनुसार, मैं उन्हें अपडेट करता रहता हूँ।

🔹 समापन — एक निजी संवाद

कार्यक्रम के अंत में, CHO ने मुझे अपने कार्यालय में बुलाया।

लगभग 15 मिनट की बातचीत हुई—

सौम्य, गहरी, और व्यक्तिगत।

उस बातचीत को मैं आज भी व्यक्तिगत और गोपनीय रखना उचित समझता हूँ।

🔹 एक स्पष्ट दृष्टि

मैं किसी को भी “एकत्व” के मार्ग पर चलने की सलाह नहीं देता।

यह मार्ग:

जोखिमों से भरा है,

अपेक्षाएँ ऊँची हैं,

और चुनौतियाँ गहरी हैं।

फिर भी, मैंने लोगों और संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखा—

यहाँ तक कि जब मुझे गलत आरोपों का सामना करना पड़ा,

या जब लोगों के उद्देश्य—विशेषकर केवल लाभ कमाना—पूरे हो गए।

🔹 प्रतिस्पर्धा पर मेरा दृष्टिकोण

मैं इस अवसर के लिए आभारी हूँ,

पर मैं प्रतिस्पर्धा में विश्वास नहीं करता।

मेरे लिए:

मैं हमेशा स्वयं से ही प्रतिस्पर्धा करता हूँ।

🔹 हर व्यक्ति अलग है

मेरे लिए हर व्यक्ति एक अलग क्षमता वाला पात्र है—

कोई 10 लीटर का,

कोई 20 लीटर का,

और कोई शायद असीम क्षमता वाला।

महत्व यह नहीं कि कौन बड़ा है,

बल्कि यह है कि:

जो क्षमता मिली है, उसका कितना उपयोग हुआ।

यदि 10 लीटर क्षमता वाला व्यक्ति 10 लीटर भरता है—

तो वह पूर्ण है।

पर यदि 20 लीटर क्षमता वाला केवल 15 लीटर ही भरता है—

तो वह अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं है।

🕯️ अंतिम पंक्ति

पूर्णता तुलना में नहीं,

अपनी क्षमता को पूर्ण रूप से जीने में है।


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