मेरी अधूरी कहानी
मेरी अधूरी कहानी
वो मेरा इत्तफाक से मिलना और बिछड़ना एक सपने जैसा था। मैं कभी अपने आप को कोसता हूं और कभी भगवान को भी कोसता हूँ कि तुमने हमें मिलाया तो हमें अलग ही क्यूं किया।
मैं एक हरियाणा का सीधा साधा लड़का और वो राजस्थान की एक सुंदर व होशियार लड़की थी। वो गर्मी का मौसम था और गर्म हवाएं चल रही थी। मैं राजस्थान में U.P.S.E का पेपर देने गया था। काॅलेज में मैं एक बेंच पर बैठा हुआ था। कि तभी एक लड़की आई और दूसरी बैंच पर आ कर बैठ गई।उसको देख कर मेरा मन प्रफुल्लित हो गया। और मैं उसको तिरछी नजरों से देखने लगा। मन ही मन मै उसकी सुंदरता का गान करने लगा।
वो इतनी सुन्दर थी कि पुष्प भी उसके गालों को स्पर्श करें तो हर्षित हो जाए। उसकी शोभा से शोभित मेरा मन भी शोभित हो जाए। उसकी प्रभा से प्रभावित हो मेरा हृदय भी प्रकाशित हो जाए। वास्तव में वो बहुत ही सुन्दर थी।
धीरे धीरे मैं उससे बातें करने लगा। बातों ही बातों में मैंने उसका फोन नंबर ले लिया। और बातों का सिलसिला शुरू हो गया। हम अक्सर रात को बात किया करते थे। एक दिन भी बात नहीं होती थी तो मन बेचैन हो उठता था। बातें करते करते कब मोहब्बत में बदल गई पता ही नहीं चला। मैं अक्सर हरियाणा से राजस्थान उससे मिलने जाया करता था।वो मुझसे मिलने वहां अपनी सहेली के बहाने आया करती थी। और पूरे दिन उसी के साथ बिताता था। ऐसा सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा। मैं उसके प्यार में इतना अंधा हो गया था कि उस पर शायरी भी लिखनी शुरू कर दी थी।
अब हमने शादी करने का पूरा मन बना लिया था। लेकिन उसके मांँ बाप नहीं मान रहे थे क्योंकि मैं उस समय बेरोजगार था।वो फोन पर बताती और कहती कि मैं तेरे बैगर नहीं रह सकती हूं। वो मुझसे बहुत प्यार करती थी और मैं भी उसके बेपनाह मोहब्बत करता था। वो अक्सर कहती थी कि यदि मेरी शादी तेरे साथ नहीं हुई तो मैं मर जाऊंगी। और मैं अक्सर समझाता रहता था कि ऐसी बातें नहीं करते। लेकिन फोन करती और रोती रहती थी।मेरा नाम उसकी बातें सुनकर कांप उठता था। फोन का सिलसिला और मिलने का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा। हम दोनों ही एक दूसरे के प्यार में डूबे हुए थे।
हमारा प्यार चर्म सीमा पर पहुंचने ही वाला था कि एक रात उसका फोन नहीं आया। और मुझे बेचैनी हो गई। अगली सुबह उठकर उसे फोन किया तो भी किसी ने भी नहीं उठाया। पर एक बात अच्छी ये थी कि उसने अपनी सहेली का नंबर मुझे दे रखा था। ताकि कोई भी बात हो तो मैं उसके पास फोन कर लूं। जब मैंने उसकी सहेली के पास फोन किया तो उसने कांपते होंठों से कहा कि अब वो इस दुनिया में नहीं रही। मेरी सांसें ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गई। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि वो आज इस दुनिया में नहीं रही। उसके साथ क्या हुआ कैसे हुआ मुझे कुछ नहीं पता। जो मैंने और उसने सपने देखे थे वो अधूरे रह गए। पर वो वक्त बहुत मुश्किल था और मैंने अपने आप को बहुत मुश्किल से सम्भाला। फिर मैं उसके वियोग में शायरी लिखने लग गया और अपनी शायरी में उसका जिक्र करता हूँ। वो दूर हो कर भी मेरे दिल के पास है। और मैं मरते दम तक उसको भूल नहीं सकता।

