Anshu Kumar

Tragedy


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Anshu Kumar

Tragedy


लॉकडाउन की एक सुबह

लॉकडाउन की एक सुबह

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लॉकडाउन के नियमों में ज़रा रियायत मिली तो मंत्री जी अपने काफ़िले संग सैर पे निकल पड़े। ज़रा सी देर में गाड़ियां हवा से बातें करने लगी। मंत्री जी अखबार देखते हुए बड़बड़ा रहे थे " क्या मूर्ख लोग हैं , चुपचाप घर पे नहीं बैठ सकते क्या "। उनकी ये बात सुनकर ड्राइवर मुस्कुराने लगा। धीमी आवाज़ में बगल की सीट पे बैठे बॉडीगार्ड से बोला " साहब दुनिया को ज्ञान बांचते रहते है , खुद घर पे नहीं बैठ सकते थे क्या ?" । मंत्री जी ने उसकी ये बात सुन ली , थोड़ा रूककर कठोर स्वर में बोले " सड़क पे ध्यान दे चुपचाप , मेरी बातों पे नहीं "। कुछ देर चलने के बाद अचानक काफ़िला रुक गया , एस्कॉर्ट की गाड़ी से एक आदमी उतारकर मंत्री जी की ओर बढ़ा। जैसे ही वह शीशे के पास पंहुचा मंत्री जी ने भन्नाते हुए कहा " जो बकना है गाड़ी के छः फ़ीट दूर से बको , हमको भी कोरोना नहीं हो जाए !"। उसने कहा " सर यहाँ से 500 मीटर दूर कुछ लोग नेशनल हाईवे पे सड़क के किनारे चल रहे हैं , कही आपको देखकर भीड़ न लग जाए । मंत्री जी बोले " पागल तो नहीं हो गए हो , जनता का तकलीफ़ देखना हमारा काम है , तुमलोग एक काम करो अपना हथियार सब निकाल लो ,मेरे चारों तरफ़ एक घेरा बनाओ और देखना कोई मेरे तरफ़ न आ सके।सिक्योरिटी वालों ने ऐसा ही किया और मंत्री जी को चारों तरफ से घेर लिया। वे सब अब भीड़ की ओर बढ़ने लगे। उस लम्बी कतार को देखकर मंत्री जी का मन बदल गया। उन्होंने फैसला किया की किसी एक परिवार को वहां से बुलवाया जाए, उसे कुछ सामान देकर एक तस्वीर निकाल ली जाए तो कल के अखबार में उसे छपवाया जा सकता था। उनकी छवि भी बच जाती और कोरोना का खतरा भी नहीं होता। एक अंगरक्षक भीड़ की तरफ बढ़ा और एक वृद्ध महिला से कुछ बातचीत की। उस वृद्ध महिला को लेकर वो मंत्री जी की ओर बढ़ने लगा। जैसे ही मंत्री जी ने उस महिला को देखा तो तुरंत गाड़ी के तरफ लपके और खुद को अंदर ही बंद कर लिया। उनके इस रवैये से सिक्योरिटी वाले हैरान हो गए , उन्होंने तुरंत किसी खतरे का अंदेशा समझकर अपने हथियार उठा लिए। तभी पीछे से मंत्री जी के असिस्टेंट ने कहा " चिंता करने की कोई बात नहीं है , तुमलोग अपना हथियार नीचे कर लो "। सिक्योरिटी इंचार्ज ने कहा " तो मंत्री जी भागे क्यों ?" असिस्टेंट ने जवाब देते हुए कहा " वो महिला मंत्री जी की माँ हैं , वैसे तो वृद्धाश्रम में रहती थीं , शायद वो अब बंद हो गया होगा "। थोड़ा रूककर उसने एक थैला सिक्योरिटी वाले को दिया और कहा " जाकर ये थैला साहब की माँ को देदो , धूप बहुत है कुछ खा लेंगी ,और जल्दी से घर की तरफ वापस चलो मैडम बार बार फ़ोन कर रही हैं "।


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