Rajeev Upadhyay

Drama

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Rajeev Upadhyay

Drama

लम्हे की कहानी

लम्हे की कहानी

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हर लम्हे की अपनी कहानी होती है। वो लम्हा भले ही हमारी नज़रों में कितना ही छोटा या फिर बेवजह ही क्यों ना हो पर उसके होने की वजह और सबब दोनों ही होता है। उसका होना ही इस बात की गवाही है।

परन्तु हम गवाहियों की परवाह कहाँ करते हैं? हम तो बस उन चीजों के होने से ही इत्तेफाक़ रखते हैं जो हममें इत्तेफाक़ रखती हैं। और जो हममें इत्तेफाक नहीं रखतीं, उसका होना, ना होना, हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता। हमारे लिए तो बस इतना ही महत्त्वपूर्ण है कि कौन, कितना दे सकता है और कितना ले सकता है? शायद इतना भर का ही कारोबार है। एक ऐसा व्यापार जो हमेशा ही घाटे का होता है। कुछ खोटी चीजों से जाने क्या-क्या बदल लेते हैं?

लेकिन ऐसा नहीं है कि कारोबार के परे कोई दुनिया ही ना हो ! है।

इसके परे भी एक बहुत बड़ी दुनिया है। एक ऐसी दुनिया जो शायद सबसे बड़ी है और खूबसूरत भी। जो ना आँखों से बयाँ होती है और ना ही बेवश शब्दों से की जुबाँ से कही जा सकती है। बल्कि वो बयाँ होती है तो बस साँसो की लय से। वो साँसें जो बहुत ही रेशमी होती हैं और जिनकी मात्रा इतनी बारीक होती है कि सुई की नोंक भी उसके आगे भोथरी लगती है। थोड़ी भी कम या ज्यादा हो जाए तो मतलब ही बदल जाता है। जो कभी इश्क बनकर आँखों का नूर बनता है तो कभी माँ की आँखों का दुलार। जाने कितने रूप धरता है ?

अपरिमित !


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