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Dharamvati Devi

Inspirational

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Dharamvati Devi

Inspirational

लघु कथा *शिक्षा*

लघु कथा *शिक्षा*

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     चीनी से सक्रिय हुए इस कोरोना वायरस ने दो साल में सब कुछ उलट-पलट कर रख दिया। पुलिस- सरकार- संस्थाएं व अन्य आमजन, सफाई-सुरक्षा दो- गज की दूरी तथा स्वस्थ रहने के उपाय के साथ युद्ध स्तर पर लड़े थे।

        24/ 3/2020 को लाक डाउन का ऐलान हुआ था। 4 दिन बाद मनमोहक वातावरण- चमकता सूरज- सुहानी धूप- सौम्य निखरा हुआ आसमान- ब्रह्मांड- दूर-दूर तक निखरा पर्यावरण-शुद्ध वायु- शीशे सी साफ दिखती हर वस्तु- यह सब कुछ मिला।

 महामारी से बचाव को लगे लाक डाउन में सब कुछ बंद- ठप्प। कारोबार- स्कूल-कॉलेज-व्यवसाय- नौकरी- अर्थव्यवस्था। जान- माल का भारी नुक़सान। अशांति- मातम - आंसू - दुख- स्थिरता- तबाही ही तबाही। सभी घरों में बंद हो गए। 

      स्कूल- कॉलेज बंद होने के कारण सभी बच्चों का भविष्य डामाडोल। ऑनलाइन माध्यम भी पूरी तरह सफल नहीं हुआ। 2 साल तक बच्चे- परिजन- शिक्षक- स्कूल- कॉलेज व शिक्षण संस्थान सभी उलझन में रहे। 

       लंबे समय की सोच- विचार के बाद बच्चों की पिछली कक्षाओं के रिजल्ट के आधार पर कड़ी मेहनत- अथक प्रयासों के बाद शिक्षकों- शिक्षा बोर्ड- स्कूल- कालेज के प्रबंधकों द्वारा रिजल्ट बनाकर बच्चों के 2 साल के बर्बाद होते भविष्य को संवारने का कार्य किया गया। अंत में सब कुछ ठीक ही हुआ------

     कहावत है सुख-दुख का जोड़ा होता है। ईश्वर के दिए हुए फूल यानी सुख वरदान है, तो ईश्वर के दिए हुए कांटे यानी दुख भी वरदान समझना चाहिए सुख से दुख मिलना और दुख से सुख मिलना निहित है। ये प्रकृति का नियम है, घबराना नहीं चाहिए, संयम धारण करना मानव के लिए बहुत आवश्यक है।------धन्यवाद-

            


 



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