STORYMIRROR

कुछ अनकहा

कुछ अनकहा

2 mins
15.1K


अपनी पसंद -नापसंद भरने के बाद मानसी पति की पसंद- नापसंद वाले पन्ने पर बेमन से प्रशांत की पसंदगी और नापसंदगी भरने लगी, उसने कनखियों से पुरुषों की तरफ बैठे प्रशांत को देखा

" उंह,क्या लिखेंगे जनाब ? जानते होते मेरी पसंद को तो फिर जरुरत ही क्या होती मुझे यहाँ से जाने की"

अभी दो दिन बाद नौकरी करने के लिए वो प्रशांत को छोड़ कर दूसरे शहर जा रही है। एक दूसरे से दूर व अकेले रहना अच्छा लगा तो दोनों तलाक ले लेंगे , अभी किसी को कुछ बताना नहीं है इसलिए आज वो इस पार्टी में प्रशांत के साथ चली आई थी और यहाँ मज़बूरी में शादीशुदा जोड़ों के लिए हो रहे इस खेल में उसे शामिल होना पड़ा था।

थोड़ी ही देर में सभी जोड़ों से उनके द्वारा भरे गये पन्ने एकत्र कर आयोजक जोड़ों द्वारा दिए गये सभी सवाल-जवाब उनके साथी द्वारा दिए गए सवाल -जवाब से मिलाते हुए ऊँची आवाज़ में पढ़कर बताने लगे, एक दूसरे की पसंद कई जोड़े काफी हद तक सही बताने में सफल रहे थे. पर उन दोनों को छोड़ कर कोई भी जोड़ा अपने साथी की नापसंदगी बताने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था।

प्रशांत और मानसी की जोड़ी को "सर्वोत्तम जोड़े" की उपाधि से नवाज़ते हुए आयोजक कह रहा था -

"पसंद तो अपने साथी की सभी जान लेते हैं और वो पूरी भी करते हैं,पर अगर अपने साथी को क्या नापसंद है ये जान लें और वो सब ध्यान में रखें तो कभी मनमुटाव या अनबन नहीं होगी,"

"ओह्ह ,ये कितना अजीब -सा सच है। हम लोगों ने एक दूसरे को क्या नापसंद है ये पूरी तरह जान लिया है। पर इस जानकारी का उपयोग आज तक हमने सिर्फ लड़ने और एक दूसरे को चिढ़ाने के लिए किया है" मानसी की नम आँखें प्रशांत से कह रही थी।

प्रशांत की नज़रें भी उसे निहारते हुए प्रत्युत्तर में बहुत कुछ कह रही थी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Inspirational