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Nisha Biswan

Horror Thriller

4  

Nisha Biswan

Horror Thriller

"कभी मत खोलना: 😱उस पुरानी डायरी का खौफनाक सच"📖😱

"कभी मत खोलना: 😱उस पुरानी डायरी का खौफनाक सच"📖😱

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"अंटारी में मिली वो पुरानी डायरी खुद मेरे ओर खिस रही थी... जैसे किसी अदृश्य हाथ ने मुझे पकड़ लिया हो उसकी उँगलियों से अजीब सी कराह निकल रही थी, और मुझे लगा—
ये बात उन दिनों की है जब में किसी रहस्यमयी बातों पर भरोसा नहीं करती थी... लेकिन जब मेरे साथ ये सब हुआ, तो मुझे डर कहानी सच लगने लगी। ये तब की बात है जब में अपने गांव गई थी। वहाँ मैने बुजुर्गों से सुना था कि हमारे पास एक घर है जो कई सालों से बंद पड़ा है, क्योंकि उसमें कुछ ऐसा है जिसे हमें जानना नहीं चाहिए। लेकिन इंसान की जिज्ञासा कभी रुकती नहीं... ओर में भी उस घर में चली गई, जिसे सालों से बंद किया गया था।
घर के अंदर घुप्प अंधेरा था। टूटी खिड़कियों से आती हवा में सन्नाटा ओर तेज़ हो रही थी। दीवारों पर मकड़ी के जाले ऐसे लटक रहे थे जैसे किसी ने सालों से यहाँ कदम ही न रखा हो। में धीरे-धीरे अटारी तक पहुँची। वहाँ एक पुराना बॉक्स पड़ा था। जब मैने उसे खोला, तो उसमें एक काली डायरी थी।
उस वक्त मुझे अंदाजा नहीं था कि उसे छूना मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती होगी। जैसे ही मैंने डायरी को हाथ लगाया, मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कोई अदृश्य हाथ मुझे अपनी ओर खींच रहा है। उसकी उँगलियों से अजीब सी कराह निकल रही थी, ओर मेरे मन में एक ख्याल आया— अगर मैने इसे खोला, तो शायद में पहले जैसी न रहूँ।
रात को मैने डायरी की ज़ंजीर तोड़ दी। पन्ने खुलते ही कमरे की हवा अचानक ठंडी हो गई। मेरी साँसें मुंह में बदल गईं। पहला वाक्य था— "जो भी इसे पढ़ेगा, वो मेरे साथ रहेगा... हमेशा।"
पन्नों में एलिज़ा नाम की लड़की की कहानी थी, जो कई साल पहले रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। उसकी लिखावट में दर्द ओर बदला साफ झलक रहा था। लेकिन अचानक शब्द बदलने लगे। अब उसमें मेरा नाम था। मेरे गांव का ज़िक्र, मेरे कमरे का ज़िक्र... यहाँ तक कि मेरी धड़कनों की गिनती तक।
मैने घबराकर डायरी बंद कर दी। तभी अंधेरे में एक आवाज़ गूंजी— "तुमने खोल दिया... अब में तुम्हारे पास हूँ।"
दीवारों पर परछाइयाँ लंबी होकर मेरी ओर बढ़ने लगीं। में नीचे भागी, लेकिन हर कोने में एलिज़ा की आँखें मुझे घूर रही थीं। डायरी फिर से मेरे सामने थी, इस बार मेरे बिस्तर पर खुली हुई। आखिरी पन्ने पर लिखा था— "अब तुम मेरी आखिरी कहानी हो।" मैने उसे जलाने की कोशिश की, लेकिन आग बुझ गई। बाहर फेंका, तो वो फिर मेरे कमरे में लौट आई। हर बार उसकी फुसफुसाहट और तेज़ होती गई, इतनी कि अब मुझे उसकी साँस अपनी गर्दन पर महसूस होती है।
धीरे-धीरे मुझे लगा कि एलिज़ा सिर्फ़ मुझे डराना नहीं चाहती थी... वो मुझसे मदद मांग रही थी। उसकी लिखावट में दर्द और चीखें थीं, जैसे वो किसी कैद से बाहर निकलने के लिए पुकार रही हो।
लेकिन मेरा डर मुझ पर हावी हो गया। में चाहती थी कि उसकी मदद करूँ, लेकिन मेरे कदम पीछे हटते रहे। उस घर की दीवारें मुझे घेरने लगीं, और मुझे लगा अगर में रुकी तो शायद में भी उसी कैद का हिस्सा बन जाऊँगी।
मैने भागने का फैसला किया। उस गाँव से, उस घर से, उस डायरी से। और तब से आज तक मैंने ये सब किसी से नहीं कहा।
"ये मेरी जिंदगी का सच है जो मैंने आज तक किसी से नहीं कहा। लेकिन मुझे लगा आज मुझे ये बता देना चाहिए कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनमें हमें बड़ों की बात माननी चाहिए। क्योंकि बड़े सच कहते हैं... उन्होंने अनुभव किया होता है।
तो आप कभी उस डायरी को मत देखना, मत खोलना, मत पढ़ना। क्योंकि जो मैंने महसूस किया... वही आपके साथ भी हो सकता है। और अगर ऐसा हुआ... तो आपकी कहानी भी वहीं खत्म हो जाएगी, जैसे मेरी हुई।"


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