STORYMIRROR

Nisha Gupta

Drama

3  

Nisha Gupta

Drama

काम विध्वंसक

काम विध्वंसक

1 min
401

महंत ने आग्नेय नेत्रों से देव दासी को देखा जो आज बसंत ऋतु पर कामराज और रति के कामुक प्रस्तावित नृत्य को सब श्रेष्ठ जनों के सामने प्रस्तुत करने वाली थी।

कालरात्रि भैरवी का रूप ले न जाने क्यों आज देवदासी शाम्भवी सबके सामने उतरी थी बुलाने पर।

शायद शाम्भवी के अन्तःकरण में धधकती ज्वाला की इंतहा हो गई थी।उसने आज शिव का तांडव नृत्य करके विध्वंसक बनने की करने की शुरुवात कर दी थी।

महंत उसका ये रूप देख अंदर तक सहम गया।गजरे व सुगन्ध से महकती देह जो उसे सुख का कारक लगती थी और पुरुष पिपासा को शांत करती दिखती थी,वो आज अर्धनारीश्वर के समक्ष उपस्थिति महसूस कर विरक्ति का अनुभव कर रहा था।

आज उसे स्त्री की पूर्णता का दर्शन हुआ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Drama