Ajay Sri

Inspirational


3.7  

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“काली चिड़िया”

“काली चिड़िया”

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काली चिड़िया”
एक छोटा सा तीन साल का लड़का रोज़ सवेरे उठ कर सामने वाले घर को कभी खिड़की से, कभी दरवाज़े से, कभी सामने लॉन से देखा करता था ! स्कूल से लौटते समय सामने वाले घर में लॉन में धुप में सूख रहे कपडे को देख कर उसे अच्छा लगता था ! शाम को उसी घर के बाहर खड़ा स्कूटर उसे अच्छा लगता और वो चुपके से कभी कभी उस स्कूटर को छूता !
रात में जल रही लाइट देख कर, दरवाज़े पर लटके पंखे की हवा में हिलते हुए परदे उसे अच्छे लगते थे ! लोगो का उस घर में आना जाना उसे अच्छा लगता था ! लॉन में सुन्दर रंग बिरंगे फूल देखना, वो सोचता था न जाने कब वो सामने के घर में जाकर फिर से वह कमरो में खेलेगा ! सोफे के पीछे छुप कर बैठेगा, किचेन में स्टूल लगा कर खाने और पीने की चीज़ो को निकाल कर खायेगा ! कमरो के लटकते हुए परदे में अपने को लपेटेगा और सामने वाली खिड़की में खड़ा होकर सारे कॉलोनी के बच्चो को वो आवाज़ देगा, कब वो साइकिल चलाएगा और न जाने किस दिन वो उस स्कूटर में बैठेगा ! बाथरूम में वो पानी से खेलेगा और उस घर के आँगन में छोटी छोटी खिलोने वाली कार चलाएगा ! उसकी यही इंतज़ार था की कब सामने वाले घर से उसे कोई आवाज़ देगा !
ये लड़का एक कॉलोनी में रहता था जहा आमने सामने ऐ ब्लॉक में चौबीस घर थे और सब घरो के बीच में एक छोटा सा पार्क था जिसमे चार झूले लगे थे ! इन्ही झूलो में झूलना और बगल के पार्क में खेलना ही इसकी शाम की ज़िन्दगी हुआ करती थी! वो रोज़ यही सोचता की कब मिलकर पार्क में खेलेंगे ! यही सोचते हुए की न जाने कब उस की ज़िन्दगी में सब पहले की तरह होगा उस छोटे से बच्चे के दो साल गुज़र गए !
कुछ दिन वो लड़का बीमार रहा और सामने वाले घर को भी न देख सका ! थोड़ा ठीक होने पर सवेरे स्कूल जाने के लिए वो बाहर निकला और वो लड़का बैचैन हो गया क्युकि सामने वाले घर का दरवाज़ा अभी तक बंद था और साइकिल भी उसे नज़र नहीं आ रही थी, ना ही स्कूटर दिख रहा था ! स्कूल से लौटते समय उसने लॉन की तरफ देखा वहा उसे कोई धुप में सूखता कपडा भी नहीं दिखा ! रात को उस घर में लाइट भी नहीं जली और खिड़की दरवाज़े सब रात भर बंद रहे !
रात भर उसे नींद नहीं आई और सवेरे स्कूल जाने से पहले वो लड़का सामने वाले गेट के पास जा कर देखने लगा उसे वह कोई आवाज़ भी नहीं सुनाई दी और ना ही कोई दिखाई दिया ! लगातार तीन महीने उदास उस घर को वो देखता रहा और अकेले में खूब रोता रहा !
तीन महीने बाद दिवाली के कुछ दिन पहले उस से मिलने सामने वाले घर के लोग आये ! वो लड़का बहुत ख़ुश हुआ कि अब फिर से वो अपनी माँ के साथ रह सकेगा !
माँ को देखते ही वो लड़का माँ के गले में लिपट गया ,वो लड़का खूब रोया और उसके आसुओ से उसकी माँ कि साडी और उसकी शर्ट तक भीग गयी इतने दिनों से रोके हुए आसुओ को वो रोक नहीं पाया और उसकी उम्र भी तो सिर्फ पांच साल कि थी ये उसके खुशी के आंसू थे क्यों कि उस तो अब अपने घर जाना था ! जब उसने कहा कि माँ अब तो तुम मुझे ले जा रही हो उसकी माँ के खूब आंसू निकले और वो चुपचाप रही ! उसकी माँ उसे लेने नहीं उस से हमेशा के लिए दूर होने वाली थी और ये बात वो लड़का नहीं जनता था !
वो लड़का दौड़ कर अपने खिलोने और कुछ कपडे व कॉपी किताब एक बैग में भर कर ले आया क्यों कि वो तो यही जानता था कि माँ उस अपने साथ लेने आई है ! 
वो लड़का जैसी ही अपनी लकड़ी वाली काली चिड़िया लेने गया जिसको लेकर वो रात को सोता था इतने में ही उसकी माँ बिना उस से मिले एक चिठ्ठी देकर चली गयी ! जैसे ही वो आया उसने देखा उसकी माँ उस से बहुत दूर निकल गयी वो यही सोचता रहा की उसके पापा उसे आवाज़ देंगे , उसे बुलाएंगे और माँ साथ में ले जाएगी लेकिन थोड़ी देर में वो सब उस की आँखों से दूर हो गए और वो लड़का खूब रोता रहा, सिसकियाँ भरता रहा, सुबकता रहा और किसी ने भी पीछे मुड कर नहीं देखा ! सामने के घर में रहने वाला सिन्हा परिवार हमेशा के लिए वहां से चला गया !
कई सालो बाद जब वो लड़का बड़ा हुआ तब उसने वही बैग खोला जिसको उसकी माँ ने दिया था और उसमे कुछ खिलोने और एक लकड़ी की काली चिड़िया वाला खिलौना भी था ! इसी बैग में उसकी माँ की चिठ्ठी भी थी ! यह वही बैग था जिसको उसकी माँ ने पहली बार उसे दिया था और कहा था की तुम कुछ दिन तक सामने वाली ऑन्टी और अंकल के साथ रहना मै तुम्हे कुछ दिन बाद वापस बुला लूंगी ! उसकी माँ ने कहा की तुम ऑन्टी अंकल और उनके बेटे को परेशान मत करना वो तुम्हे अच्छे से रखेंगे !
चिठ्ठी में उसकी माँ ने लिखा था ......मेरे बेटे ........हो सके तो मुझे माफ़ कर देना.... मै हमेशा के लिए तुम्हे छोड़ कर जा रही हू .....तुम्हे ढेर सारा प्यार .....----तुम्हारी माँ
आज कई सालो बाद वो रात याद आ गयी जिस दिन उसके घर में माँ और पापा का खूब झगड़ा हुआ वो लड़का रात भर सामने पार्क में बेंच पर रोते रोते सो गया और सवेरे उसने सामने वाली ऑन्टी की गोदी में उसने अपनी आँखे खोली ! ऑन्टी ने उसके माँ और पापा को खूब डाटा और उस लड़के को लेकर थोड़ी देर में अपने घर आ गयी ! अंकल ने भी उसके पापा को खूब डाटा ! बाद में उन्होंने इस लड़के को अपने घर में रखने का फैसला किया!
वो लड़का आज तक नहीं समझ पाया क्यों उसकी माँ उसे छोड़ के चली गयी ...क्यों बचपन में वो उसे दुसरो के घर खेलने भेज देती थी ......क्यों वो उसके साथ नहीं रहना चाहती थी .....और ये "क्यों" ढूढ़ते ढूढ़ते उस लड़के की ज़िन्दगी खुद एक .....जो ऑन्टी उसे लायी थी ....जिन्होने उसे अपने बच्चे की तरह पाला ...जिसे वह लड़का मम्मी कहता था ....वो भो आज इस "क्यों" को बताने के लिए दुनिया में नहीं है.....वो लड़का इसका जवाब उस लकड़ी कि काली चिड़िया में ढूढ़ता है ...लेकिन कही खिलोने जवाब देतें है क्या.....


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