काजू को माँ की याद आई
काजू को माँ की याद आई
काजू की कहानी में आपका स्वागत है 😇🙏
काजू घर में सबका प्यारा और दुलारा है। सिर्फ घर वाले ही नहीं बल्कि आस पड़ोस वाले भी काजू को बहुत प्यार करते हैं, और करें भी क्यों न वह है ही इतना प्यारा। एकदम मनमोहक, सबका मन मोह लेता है, यहाँ तक की राह चलते लोग भी उसे प्यार किए बिना नहीं रह पाते।
अभी कुछ समय की बात है जब काजू हमारे घर आया था। हम सब उसके लिए और वह हमारे लिए बिल्कुल अंजान, पर अब पूरे दिन घर में उधम मचाते फिरता है। उसका खेलने का मन हो और कोई उसके साथ न खेले... तो न वह खुद चैन से बैठता है और न दूसरे को बैठने देता है😂
आप सोच रहे होंगे कि यह काजू है कौन? असल में काजू- अमेरिकन एस्किमो, एक पालतू कुत्ते की नस्ल है। सफेद रंग का रोएंदार, क्यूट सा, अपनी एक झलक से सबको मोह लेने वाला। वैसे तो काजू हमेशा खुश रहता है पर कभी - कभी इतना शांत बैठा रहता है, इतना मासूम सा कि उसे देखकर लगता है कि वह कुछ कहना चाह रहा है। शायद कहता भी है पर हम मनुष्य उसकी भावनाएं समझ नहीं पाते हैं। अक्सर ऐसा ही होता है कि जानवर तो शायद मनुष्यों की भाषा समझ जाते है पर हम मनुष्य ही उनकी भाषा समझ नहीं पाते।
काजू भी जब अकेला होता है तो गुमसुम सा बैठा रहता है। याद है मुझे, जब वह पहली बार हमारे घर आया था, चुपचाप एक कोने में बैठ जाता और खाना देने पर पूछ हिला कर अपनी खुशी प्रकट करता। धीरे - धीरे वह सबके साथ घुल - मिल गया।
एक शाम हमारे घर के सामने वाली आंटी बड़े प्यार से अपनी बेटी की चोटी बना रहीं थीं। ठीक सामने हमारे द्वार पर बैठा काजू, शांत भाव से उन दोनों को देख रहा था। न जाने क्या सोच रहा था, बस निर्निमेष उन दोनों को ही देखे जा रहा था। एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे वो रो रहा हो, मैंने उसे आवाज लगाई - "काजू, काजू...!" उसने मेरी ओर देखा, बिना कोई प्रतिक्रिया दिए फिर उन दोनों के तरफ मुड़ गया। पर उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।
मेरे मन में प्रश्न आया "क्या...काजू को उसकी माँ की याद आ रही होगी?" उसकी माँ भी तो उसे ऐसे ही प्यार करती होगी।
जब भी मेरी माँ काजू को प्यार करती है, उसके चेहरे पर एक सुकून होता है ऐसा लगता है जैसे वो खुशी से झूम रहा हो। उसे बड़ा अच्छा लगता है जब भी उसे कोई प्यार करे और अटेंशन दे। मेरी माँ के गोद में वह देर तक बैठा रहता है और बहुत दुलार दिखाता है। माँ भी उसे एक छोटे बच्चे की तरह प्यार करती है, झूला झुलाती है।
तो... "क्या वह मेरी ही माँ को याद कर रहा था?" यह तो मेरे समझ नहीं आया, पर उसे देख कर मन बड़ा उदास हो गया। काश...!😔 जानवरों और मनुष्यों की भाषा एक ही होती।
मैंने अक्सर देखा है, काजू जब भी किसी को देखता है तो भाग कर सबसे पहले उसके पैरों को छू लेता है। मेरे समझ में यह नहीं आता था कि वह ऐसा क्यों करता है? शायद प्रकृति ने ही उसे ऐसा बनाया है, क्योंकि उसकी नियती ही यही है 🥲 कि उसे अपनी माँ से दूर, मनुष्यों के बीच अपनी दुनिया बसानी होगी। इसीलिए उसे मनुष्यों की खुशामद भी करनी होगी, सबके दिल में अपने लिए जगह बनाने के लिए।
