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Kirti bind

Romance

3  

Kirti bind

Romance

हर जन्म मिलेंगे वादा रहा

हर जन्म मिलेंगे वादा रहा

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समाज में प्रेम करने का अधिकार सबको होता हैं। इसकी ना कोई उम्र होती है ना कोई जेंडर ये जब चाहें जिस से चाहे हो सकती हैं।। ये कहानी भी दो लड़कियों की हैं जिन्हे एक दूसरे से महोब्ब्त हो जाती है। लेकिन उन दोनो के प्यार की सबसे बड़ी दीवार ये समाज हैं।।

तो आइए देखते हैं इस कहानी को की क्या समाज अपनाएगा इनके प्यार को या एक बार फिर अधूरा रह जायेगा ये प्रेम..................... 

* राजकुमारी प्रियदर्शनी महादेव के मंदिर में जाने को होती हैं तभी उनके कान में किसी की आवाज पड़ती है।

‘राजकुमारी इधर आइए हम यहां है राजकुमारी '

राजकुमारी उस आवाज की दिशा में बढ़ने लगती हैं। जैसे उनको किसी ने अपने वश में कर लिया हो। लेकिन तभी पीछे से एक और आवाज़ आती हैं। 

“रुक जाइए शहजादी उधर मत जाइए” 

राजकुमारी होश में आतीं हैं । वो जैसे ही पीछे मुड़ती हैं। एक गहरे खाई में गिर जाती हैं।।।

बचाओ;!!!!!!!!बचाओ!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! 

सीमा - क्या हुआ बेटा???? 

लीजिए पानी पीजिए आप?

प्रतीक्षा एक ही सांस में पानी खत्म कर देती हैं। वो पूरी पसीने से भीग चुकी होती हैं।

सीमा - आपको फिर वही सपना आया?

प्रतीक्षा - हा मां हम तो परेशान हो गए हैं इस रोज रोज के सपनों से जाने कब खत्म होगा यह सब।।

सीमा -  ठीक हो जायेगा बेटा। आप तबतक मंत्रो का जाप करिए जो गुरुदेव ने बताया हैं।

प्रतीक्षा -  हा मां।

शाम के 5 बज रहे होते हैं -

सीमा गुरुदेव के पास फोन लगती है।

सीमा -  प्रणाम गुरु जी।

गुरुदेव - तथास्तु। क्या हुआ क्या बात है?

सीमा - गुरुदेव प्रतीक्षा को वो सपने अब दिन मे भी दिखाई देने लगे हैं। पहले सिर्फ रात में दिखते थे। लेकिन अब तो जब वो नींद में हो वही सपने देखने लगती हैं।

गुरुदेव - उसका 20वां वर्ष लगने वाला हैं और इस वर्ष उसे बहुत कठिनाइयों का सामना करना होगा। बस ध्यान रखना की वो सुबह 5 बजे से पहले घर के बाहर नही निकलनी चाहिए और शाम को 7 बजे के बाद घर में रहना है।।

सीमा - ठीक हैं बाबा ऐसा ही होगा। अच्छा बाबा प्रणाम।।

इतना कह के सीमा फोन रख देती है।

नीचे टीवी हॉल में।

सीमा - परीक्षा बेटा नीचे आइए।।

प्रतीक्षा - हा मां अभी आते है।

सीमा - ये देखिए प्रतीक्षा हिस्ट्री के बारे में आ रहा हैं। टीवी पर आपको भी तो इसी से रिलेटेड प्रोजेक्ट बनाना हैं ना।

प्रतीक्षा - हा मां ये तो बहुत ही इंटरेस्टिंग बताया जा रहा हैं। अब हम यही से कुछ नॉलेज लेकर प्रोजेक्ट की तैयारियां कर देंगे।

इस तरह प्रतीक्षा भी बैठ कर वो चैनल देखने लगती हैं। तभी वहा रुद्रगढ़ के राज्य के बारे में बताया जाने लगता हैं।

पूरा महल दिखाया जाता हैं जिसे देख कर प्रतीक्षा बड़बड़ाने लगती हैं।

“हमारा महल आज भी वैसे का वैसा ही हैं, लेकिन वो......”

प्रतीक्षा कुछ कह पाती उसकी मां ने उस चैनल को बदल दिया तब जाकर कही प्रतीक्षा को होश आया।

सीमा - क्या हुआ प्रतीक्षा क्या हो गया था आपको,क्या बोले जा रही थी आप। 

प्रतीक्षा - मां आप क्या कह रही हैं हमे तो कुछ भी समझ नही आ रहा। और चैनल क्यू बदल दिया आपने अच्छा अब हमे जरा देख लेने दीजिए आप।

इधर सीमा मन में सोचने लगती है।“ क्या हो रहा हैं हमारी बेटी के साथ जितना भी उस महल से इसे दूर करने की कोशिश करते हैं। उतना ही वो महल इनके सामने आ जाया करता है जाने क्या हैं उस महल का राज और इससे हमारी बेटी का क्या रिश्ता है उस महल के सामने आने से ये जाने क्या क्या कहने लगती हैं।प्रतीक्षा अपनी मां को झकझोरते हुए -मां किन ख्यालों में खोई हैं आप कबसे बुला रहे हैं आपको।

सीमा - कुछ नही बेटा चलिए जरा अब हमारी मदद किचन में कर दीजिए आपके भाई और पापा आते होंगे। 

प्रतीक्षा - हा मां ठीक हैं।

रात के 10 बजे -

सीमा - चलिए अब प्रतीक्षा हमे भी नींद आ रही हैं। और आपको कॉलेज भी जल्दी जाना है ना।  

प्रतीक्षा - हा मां लेकिन हम आज अकेले सोएंगे । जितना डरेंगे उतना ही य सपना हम पर हावी होता रहेगा।इसलिए आज से हम अकेले सोया करेंगे।

सीमा - (गंभीर होते हुए )  आप वाकई हमे अपने पास नही सुलाना चाहती हैं?

प्रतीक्षा - हा मां आप फिक्र मत कीजिए।

सीमा - ठीक है बेटा आपको कोई जरूरत हो तो हमे बुला लीजिएगा। गुड नाईट।

प्रतीक्षा - ठीक है मां गुड नाईट।

प्रतीक्षा अपने कमरे में आज अकेली सोई थी क्युकी उसे भी जानना था की वो कौन है जो उसको उसके सपने में आकर उसे रोकती हैं और दिखाई नही देता क्युकी अब प्रतीक्षा परेशान हो चुकी थी इस रोज रोज के सपनों से .....

हम शायद तुझे पसंद नही ,ना जाने किस्मत का क्या इरादा हैं 

मुझसा कोई और न मिल पायेगा तुझे

        ये मेरा वादा है।।


चेतना - क्या बात हैं राजकुमारी किसे देख कर आज आपका मन शायरना हो रही हैं।।

राजकुमारी - तुम तो हमारी खास सहेली हो और तुम्हे ही ज्ञात नही!

चेतना - लेकिन हमे तो आप से सुनना हैं ना राजकुमारी।

राजकुमारी मुस्कुराते हुए - इनको यहां आएं दो दिन हो गए और हमने अभी तक इनसे बात तक नहीं की इनसे पहले तो कई देश की राजकुमारियां भी आ चुकी हैं हमारे राज्य में लेकिन इनमें कुछ बात हैं जो हमे इनकी तरफ खींचता हैं लेकिन एक ही समस्या हैं इनके पास जाते ही हमारी धड़कने ही तेज हो जाती हैं।

चेतना - आप तो इनके प्रेम में पड़ गई हैं राजकुमारी।

राजकुमारी प्रियदर्शनी - हट्ट पागल ऐसा भी होता हैं भला कही?

चेतना - अरे क्यों नही हो सकता प्रेम- प्रेम होता हैं चाहे किसी से भी हो। और आपके तो हर एक अंदाज से पता चलता है की इनके प्रेम में पड़ गई हैं। 

राजकुमारी मुस्कुरा देती है।

उसी समय शहजादी अफिया को महसूस होता हैं की उनपर किसी की नजर है वो पीछे मुड़ कर देखती हैं। दोनो की नजरें एक दूसरे से टकरा जाती हैं। तभी प्रतीक्षा की सांसे तेज होने लगती हैं। 

मीना - उठिए बेटा प्रतीक्षा......प्रतीक्षा.....

प्रतीक्षा घबराकर उठ जाती हैं उसकी सांसे तेज हुई होती है। 

मीना - पानी पीजिए 

प्रतीक्षा एक ही सांस में पूरा ग्लास खत्म कर देती है।

मीना - फिर वही सपना आया ना।

प्रतीक्षा - (छुपाते हुए)हा मां।

मीना -  कहा था न हमने आपसे चलिए सो जाइए अब। इतना कह मीना सो जाती हैं। 

इधर प्रतीक्षा करवटें बदलते हुए यही सोचती हैं। शहजादी अफिया को कही तो देखा हैं लेकिन उसे याद क्यों नही आ रहा।

प्रतीक्षा - हे माता रानी अब तो आप ही हमारा सहारा है। नही तो हम तो पगला जायेंगे।

सोचते हुए प्रतीक्षा सो जाती हैं।

अगली सुबह - 

प्रतीक्षा - मां हमारा लंच रेडी हो गया न?

मीना - हा हो गया है। लो रख लो।

प्रतीक्षा - और आज आने में जरा देर हो जायेगा आप फिक्र मत कीजिएगा।।

मीना - (गंभीरता से) लेकिन ता थोड़ा जल्दी आने की कोशिश कीजियेगा।

प्रतीक्षा -  आप चिंता मत कीजिए मां अब  बाय।

इतना कह के प्रतीक्षा स्कूटी लेकर कॉलेज के लिए निकल जाती हैं ।

वहां पहुंच कर -

मोना,राहुल,सुनिधि - गुड मॉर्निंग प्रतीक्षा।

प्रतीक्षा - गुड मॉर्निंग गाइज।

प्रॉजेक्ट बन गया सबका।

मोना - (मस्ती करते हुए) हा सबका बन गया सिवाय एक इंसान के और उसका नाम तो सभी जानते ही हैं बताने की जरूरत नहीं। उसे खाने से फुर्सत मिले तब तो बिचारा अपना प्रोजेक्ट कंप्लीट करेगा।

राहुल - हा तो तेरा क्या जा रहा है। मोटी।

मोना - में मोटी तू मोटा हैं

सुनिधि - अरे अब दोनो लड़का बंद करो। वैसे प्रतीक्षा तुम्हारा प्रोजेक्ट रेडी हैं??

प्रतीक्षा - नही लेंकिन बन जायेगा।

सुनिधि - एक दिन में बना लोगी!!!!???

प्रतीक्षा -(मुस्कुराते हुए) हां बन जायेगा, अच्छा चलो अब टाइम हो गया क्लास में चलते हैं।

आज प्रोजेक्ट को लेकर क्लास बहुत देर ज्यादा चलती है जिसकी वजह से प्रतीक्षा को कॉलेज में ही शाम 4 बज जाते हैं। और प्रतीक्षा प्रोजेक्ट का कुछ समान खरीदने अब मार्केट चली जाती हैं। आज मंडे था जिसकी वजह से मार्केट में भी बहुत भीड़ थी। तभी उसका फोन बजता हैं।

स्क्रीन पर देखती है तो मां का कॉल होता हैं।

प्रतीक्षा - हा मां बोलिए?

सीमा - बेटा शाम के 6 बज चुके हैं आप किधर हैं।

प्रतीक्षा - मां हमे मार्केट में काम था इसलिए चले आएं।

सीमा - बेटा जल्दी आ जायेगा। आपको पता हैं ना 7 बजे से पहले घर आना हैं।

प्रतीक्षा - हा मां। आप फिक्र मत कीजिए बस निकल रहे हैं हम।

सीमा - ठीक हैं हम फोन रखते हैं जल्दी आइए।

प्रतीक्षा - ठीक हैं मां बाय। और इतना कह के प्रतीक्षा फोन काट देती हैं।

वो जैसे स्कूटी के पास पहुंचती हैं उसकी नजर स्कूटी के टायर पर जाती हैं। वो पेंचर हो चुका होता हैं।

प्रतीक्षा - हे माता रानी आज ही सारी परेशानियां होनी थी। अब इसमें तो कुछ वक्त लग जायेगा। अब क्या करें बनवाना ही पड़ेगा।

और कुछ देर में टायर ठीक करवा कर प्रतीक्षा घर के लिए निकल जाती हैं। शाम के 6:35 हो चुके होते हैं। तभी अचानक से प्रतीक्षा के टायर की हवा खत्म हो जाती हैं।

प्रतीक्षा (गुस्से में अपने आप से ) - हे माता रानी यहां सब बेकार काम क्यू करते हैं पैसे भी उस दुकानदार ने पूरे लिए अब देखिए हमारी स्कूटी बीच रास्ते में दोखा दे गई हमे उधर मां परेशान हो रही होंगी। अरे ये क्या नेटवर्क भी नही हैं फोन में माता रानी ऐसा क्यों मतलब कुछ दिन पूजा नही किए तो आप भी हमे परेशान कर रही हैं ठीक है,ठीक है। एक तो दूर दूर तक कोई गाड़ी भी नजर नही आ रही की लिफ्ट ले सकें हम जो भी गाड़ियां हैं सब मार्केट कि तरफ ही जा रही।

तभी प्रतीक्षा को मार्केट की तरफ से आती एक कार दिखाई देती हैं जो ब्लैक कलर की बड़ी गाड़ी होती हैं।

प्रतीक्षा -रोकिए रोकिए.....

कार रुक जाती हैं एक बुजुर्ग जो कार चला रहा होता हैं।

ड्राइवर - क्या हुआ बिटिया? कहा जाना है?

प्रतीक्षा - दादा देखिए ना हमारी स्कूटी खराब हो गई हैं घर पर मां परेशान हैं और मोबाइल में नेटवर्क नही आ रहा हैं की फोन करें घर जरा कुछ दूर जाना हैं छोड़ दीजिए ना।

ड्राइवर कुछ सोच कर पीछे मुड़ कर किसी से बात करता हैं इजाजत मिलने पर -

आ जाओ बिटिया बैठ जाओ।

प्रतीक्षा आगे का गेट खोल का अंदर आने की कोशिश करती हैं।

ड्राइवर - नही बिटिया पीछे बैठ जाओ हमारी मैडम को नही पसंद की आगे कोई बैठे।।

प्रतीक्षा जैसे ही पीछे वाले गेट के पास जाती है उस कार की खिड़की ऑटोमैटिक नीचे होता हैं अंदर एक बहुत रईस खानदान की लड़की बैठी हुई थी। दिखने में भी बहुत खूबसूरत थी, लेकिन प्रतीक्षा भी कुछ कम थोड़ी थी। उस लडक़ी ने प्रतीक्षा की तरफ देखा दोनो की आंखे चार हुई। वक्त जैसे रुक सा गया कुछ होश ही नहीं रहा......


मिल जाए तू मुझे बस यही काफी है,मेरी हर सांस ने बस यही दुआ मांगी है

जहां कही दिल खींचा जाता है तेरी तरफ,लगता है तूने भी मुझे पाने को दुआ मांगी है। शहजादी आफिया......

तभी....... हमारा नाम आफिया नही कृशिका है अब जल्दी अंदर आओ हमे लेट हो रहा है।

प्रतीक्षा - ह..हा आ... आते हैं। प्रतीक्षा बैठ जाती हैं।

प्रतीक्षा (मन में) ये हमारे सपनों में आने वाली वही लड़की है आफीया जरा एक बार और देखें तो..... जैसे ही प्रतीक्षा उस लड़की को तरफ देखती हैं वो लड़की उसे पहले से देख रही होती हैं दोनो की नजरें टकरा जाती है।

प्रतीक्षा थोड़ा घबरा जाती है और कहती है - हमे ऐसे क्यों देख रही हो?

कृशिका - हम तबसे सुने जा रहे तुम हमे अफिया.... आफिया कहे जा रही अरे हम आफिया नही कृशिका हैं वैसे लगता है तुम इस शहर में न्यू हो इसलिए हमे नही जानती।

प्रतीक्षा - क्यों आप कही की प्रधानमंत्री है????

कृशिका - एक्सक्यूज मी!!

प्रतीक्षा - इतनी इंग्लिश हमे भी आती है ओके। अपने आप को ज्यादा स्मार्ट नही समझना चाहिए।

कृशिका - ओह रियली। बाय द वे डोंट क्रॉस योर लिमिट्स । अब चुपचाप बैठो।

प्रतीक्षा - उसको देख मुंह बना कर दूसरी तरफ देखने लगती है।

कृशिका(मन में) - कैसी अजीब सी लड़की है ये सपनो में तो इतनी मासूम नजर आती है और यहां देखो इसको।

तभी प्रतीक्षा का घर आ जाता है।

( सिंघानिया खानदान के ड्राइवर्स को हर एरिया की खबर रहती है)

ड्राइवर - बिटिया आपका घर आ गया।

प्रतीक्षा - धन्यवाद दादा।

प्रतीक्षा एक प्यारी भरी मुस्कान से कृशिका की तरफ देखती है और कृशिका भी उसे ही देखे जा रही थी। दोनो एक बार फिर एक। दूसरे की आंखों में खो से जाते है पर प्रतीक्षा हंस के घर में चली जाती हैं।

(रात के 7:30 हो चुके होते है)

कृशिका - चलिए।

सीमा -(घबराते हुए) अपनी बेटी को गले से लगा लेती हैं।।

“बेटा कहा थी आप कितनी फिक्र हो गई थी आपकी हमे आपका फोन तक बंद आ रहा था"

प्रतीक्षा - मां शांत हो जाइए बैठिए यहां बताते है क्या हुआ।

हम प्रोजेक्ट का समान खरीदने मार्केट गए भीड़ थी समान लेकर लौटे आपका फोन आया बात करने के बाद स्कूटी के पास गए उसका एक टायर खराब हो गया था वो बनवाने में वक्त लग गया स्कूटी लेकर निकले बीच रास्ते में फिर से वही टायर खराब हो गया उस नालायक दुकानदार की वजह से। पैसे भी पूरे लिए काम भी अच्छे से नही किया। फिर एक तो गाड़ी भी नही मिल रही थी मुश्किल से एक गाड़ी से लिफ्ट लेकर आए और आप टेंशन मत लिया कीजिए हम ठीक है।

अरुण - {प्रतीक्षा का बड़ा भाई} अच्छा हमे बता दो स्कूटी लेकर आते है।

 प्रतीक्षा- हा भाई रुकिए जरा हम फ्रेश हो लें।

अरुण - हा ओके आराम से।

इधर सीमा सोचती है“ गुरुदेव कह रहे थे अपने सदियों पुराने प्रेमी से आज प्रतीक्षा मिल जाएंगी और उन्हें सब याद भी आ जायेगा लेकिन लगता है सब ठीक हैं धन्यवाद माता रानी"

प्रतीक्षा अपने कमरे में जा कर खिड़की के पास खड़े होकर चांद को देखे जा रही थी.....

तुम से खफां होकर हम जायेंगे कहां,तुम सा साथी हम पाएंगे कहां,दिल को कैसे भी समझा लेंगे लेकिन,आंखो से आपका प्यार छुपाएंगे कहां।।  



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