हफ्ता वसूली भाग 48
हफ्ता वसूली भाग 48
पहली हाथ गाड़ी निकलते ही, पुरोहित धीरे से बाहर खड़े एस आई ठाकुर को कहते हैं, " पहला ऑर्डर निकल रहा है, कैप्चर प्रॉपर्ली।"
सामने से ठाकुर ओवर ऑल कहके काटता है।"
पुरोहित चाहता था बिना झंझट किए सारा माल पकड़ा जाए और अपराधी भी आराम से पकड़ लिए जाए, इसीलिए उसने दो टीम बनाई थी, जमील ने तो उसे पहले ही बता दिया था, तो उसने अपने खास लोगो को इंस्ट्रक्शन दे कर रोड के आस पास लगा दिया था, उन्होंने एक ट्रक भी मंगवा लिया था जिसमें माल भरा जाए।"
उधर दूसरा ठेला भी निकलता है, एक ग्रुप माल नाव से उतर रहा है और दूसरा ग्रुप उसे ठेलो में सेट करके रख रहा है, माल पूरा फ्रूट्स के पैकिंग में था, अभी हापुस का समय चल रहा था तो सारा माल हापुस के पैकिंग में था।"
पुरोहित और कुछ और ऑफिसर्स नाइट विजन वाला चश्मा लगा रखा था तो उन्हें सब साफ साफ दिखाई दे रहा था, यहां पर भी कुछ आठ लोग हथियार बंद दिखाई दे रहे थे, बाकी तो मजदूर थे पर इस वक्त मजदूरों के वेश भूषा में भी उनके आदमी हो सकते हैं, यह सोच कर पुरोहित साहब जल्दी बाज़ी नहीं करना चाहते थे।"
तीसरी गाड़ी भी निकलती है, पूरी दस हाथ गाडियां मंगाई गई थी और सबमें फुल लोडिंग किया जा रहा था, ऐसा लग रहा था की उसमे करीब करीब तीन क्विंटल माल लाद रहे थे।
ठाकुर का मैसेज आता है, फर्स्ट कैप्चर सेकंड ऑन लाइन।"
इस बार दो गाड़ी साथ में निकल रही थी, पुरोहित मैसेज कर बताते हैं, झाड़ियों में मच्छर बुरी तरह से काटने लगे थे, पर अभी कोई हिल नहीं सकता था।
बाहर दो गाड़ी माल पकड़ कर उसे ट्रक में लड़ भी दिया था और उसके आदमियों को पकड़ कर दूर गाड़ी में बिठा दिया था, वैसे तो वो लोग सच में मजदूर ठेले वाले ही थे उन्हे पैकेट में क्या है यह नही पता था, उन्हे तो मुंह मांगा कीमत मिल रहा था उनसे कहा गया था की नाव से हापुस आ रहा है, रत्नागिरी से और मालाड में ही सप्लाई। करना है तो इन लोगो ने भी करीब करी डबल कीमत मांगी थी तो उन लोगों ने कुछ भी नहीं कहा और आने के लिए कह दिया और उन्हे एडवांस भी दे दिया था।"
पुरोहित के सामने से दो गाड़ी और निकलती है, पुरोहित धीरे से जमील से पूछते हैं ",एक गाड़ी माल निकल ले जाओगे।"
जमील आश्चर्य से देखता है फिर हां में इशारा करता है, पुरोहित कहता है " तुम बाहर जाओ कमल हमारे साथ रहेगा, इनमें से एक गाड़ी तुम ले जाओ मैं ठाकुर से कहता हूं, जाओ निकालो जल्दी।"
जमील कमल को देखता है और जाता है, कमल को भी आश्चर्य होता पूरा एक हाथ गाड़ी का माल तो बहुत होगा अगर कला सोना है।
पुरोहित धीरे से ठाकुर से कहता है " एक गाड़ी जमील को दे दो किसी को पता नहीं चले अंदर से ही सेट कर दो।"
जमील बाहर पहुंचता है तो उसे सादे ड्रेस में ठाकुर दिखाई देता है, वह उसके पास जाता है, तभी दो गाड़ियां एक साथ बाहर आती है तो ठाकुर दोनो गाड़ी के मालिको को गन प्वाइंट पर लेटा है, दोनों घबरा जाते हैं, ठाकुर जमील को इशारा करता है तो वह एक गाड़ी धकेलता हुआ ले जाता है, दूसरा गाड़ी उसका मालिक धकेलते हुए ठाकुर के साथ ट्रक के पास आते है, ट्रक के पास खड़े पुलिस वाले माल चढ़ाते हैं।"
अंदर माल भिजवा रह आदमी अपने आदमी को कॉल करके पूछता है, " सिग्मेंट पहुंचा।"
वहां से कहाँ जाता है " अभी तक नहीं आया मैं तो बाहर आदमी भी लगा रखा है।"
यह सुन उस आदमी की आवाज क्रोधित हो जाती है वह एक भद्दी सी गाली देते हुए कहता है, " हराम के पिल्ले कहां रह गए कितना भी आराम से चलते तो भी पहुंच जाना चाहिए था, जरा आगे बढ़ कर देख लो।"!!
जमील ने तो पहले ही होशियारी कर ली थी वह उल्टे और निकल गया और वहां से एक टैक्सी में पूरा माल भर के निकल गया, टैक्सी वाले ने भी डबल भाड़ा ही मांगा था, वह माल लेकर सीधे सीधे अप्पा पाड़ा पक्या के घर पर माल उतार देता है।
पक्या पूछता है " क्या है भाई ये आप कहां से ले आए।"
वह कहता है, " मैं आ के बोलता हूं अभी उसे ढक के रख दे।"
उधर पुरोहित जहां छुपकर अपने लोगों के साथ बैठे थे, वही पर एक गुंडा पेशाब करने के लिए आता है, चार हाथ गाड़ी बाहर जाने के लिए तैयार थी, बाकी तो बाहर पकड़ी जा चुकी थी, ये करीब करीब अंतिम खेप था, वह आदमी जैसे उनके करीब आता है तो उसे झाड़ियों में कुछ चमकता सा दिखता है वह एक रेडियम वाली घड़ी थी, वह एकदम शॉक्ड होकर देखता है फिर चिल्लाता है, " भाई भागो पुलिस है।"
यह सुनते ही सभी एक्शन में आ जाते है, पुरोहित उछल कर उस आदमी के कनपटी पर एक जोरदार घुसा मारते हैं तो वह वही गिर पड़ता है, सभी तेज़ी से बाहर निकलते है, उधर भी अफरा तफरी मच जाती है, अपने आदमी को गिरते देख सामने से फायरिंग शुरू हो जाती है, जिसमें से दो गोली सीधे सीधे पुरोहित के कंधे में और एक पर में घुसती है।
पुरोहित चीख उठते हैं और एक ओर लुढ़कते है, कमल यह देख पुरोहित के ऊपर कूदकर उन्हें लुढ़कता हुआ थोड़ा दूर ले जाता है, बाकी पुलिस वाले भी एक्शन में आ जाते हैं और तड़ातड़ गोलियां चलाने लगते हैं, पुलिस वाले तुरंत जमीन पर लेट कर फायरिंग करते है।
कुछ पुलिस वाले फायरिंग करते हुए नाव की ओर जाते हैं और नाव पर फायरिंग करते हैं, नाव में सवार लोग माहौल को समझ पानी में कूद पड़ते है। और तैर कर दूसरी ओर जाने लगते हैं, फायरिंग की आवाज सुनते ही बाहर खड़ी टुकड़ी भी गाड़ी के साथ अंदर घुसते हैं।"
पुरोहित साहब की हालत खराब है, उनकी अटाडिया बाहर निकल आई है पर वह थे हिम्मती वह अपनी अतादियों को अंदर डाल उसे दबाते हैं, कमल अपनी शर्ट को निकल कर फाड़ देता है और उसको उनके घाव को बांध देता है और उन्हें धीरे धीरे घसीटने लगता है फायरिंग में उन्हें उठा कर ले नहीं जा सकता था।
दूसरी पुलिस टीम भी आ जाती है, पुरोहित साहब की हालत खराब देख उन्हें गाड़ी में डाल कर हॉस्पिटल भेजते हैं कमल उनके साथ जाता है, उसी समय बाहर जमील आता दिखाई देता है तो उसे आवाज देता है तो वह चलती जीप में ही भाग कर चढ़ता है।"
क्रमशः
