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Ridima Hotwani

Inspirational


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Ridima Hotwani

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हिंदू डाक्टर साहिबा

हिंदू डाक्टर साहिबा

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जगमगाती रोशनी, सुसज्जित मंच।उद्घोषक उद्घोषणा करते हुए। अब आपके सामने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में, मशहूर हृदय विशेषज्ञ, डा• मैरी डिसूजा अपनी मातृभाषा हिंदी के बारे में अपने विचार प्रकट करेंगी। सभी हिंदू प्रेमी तालियों से उनका अभिनंदन करें।धीमी धीमी बजती तालियों की गूंज के बीच में डॉक्टर मैरी डिसूजा ने मंच पर प्रवेश किया।

आप सभी हिंदू प्रेमी भाई बहनों को मेरा मैरी डिसूजा का विनम्र अभिवादन। मैं, आप, हम सब हिंदोस्तां की संतान हैं और हिंदी हमारी आपकी सबकी मातृभाषा। मुझे नहीं लगता कि हमें किसी एक दिन, हिंदी को अपनी मातृभाषा साबित करने, उसके उत्थान-पतन पर विचार विमर्श, व इसकी बढ़ोतरी के प्रयास में किये जाने वाले प्रयासों का बखान करना सही बात है। हिंदी ही हमारी मातृभाषा है और इसका प्रयोग सदा ही यथोचित है। किन्तु अपनी पढ़ाई, पेशे में जब हम अंग्रेजी का प्रयोग करते हैं तो इसका तात्पर्य ये नहीं कि हम हिंदी भाषा को सम्मान नहीं देते। तभी उनका मोबाइल जो उन्होंने अपने पर्स व अन्य सामान के साथ सर्व दयाल जी को दे रख था हिलने लगा वाइब्रेंट होने के कारण।

सर्व दयाल जी ने मोबाइल की तरफ एक नजर देखा और फिर भाषण सुनने में व्यस्त हो गये।किन्तु मोबाइल लगातार बजता ही जा रहा था। रिसीव न होने पर मैसैजिस की बाढ़ सी आने लगी बीप पर बीप बजती ही जा रही थीं। सर्व दयाल जी ने निकाल कर देखा तो मैसेज शो कर रहा

था कि, " मैरी मैम जल्द से जल्द हास्पिटल पहुुंचे। इमरजेंसी केस की हालत बिगड़ती ही जा रही है। केस आउट आॅफ कंट्रोल है। आपके सहयोग से शायद स्थिति काबू हो जाये। तकलीफ के लिए क्षमा चाहेंगे जानते हैं आप अवकाश पर हैं। पर प्लीज तुरंत पहुंचने का प्रयास करें। रेड क्रास हास्पिटल।

जैसे ही सर्व दयाल जी की नजर मैसेज पर गयी, वे तुरंत मैरी मैम के पास जाकर मोबाइल उन्हें देते हुए, स्वयं माइक अपने हाथों में थाम लिये।

और सभा को सम्बोधित करते हुए कहते हैं, सभी भाई-बंधुओं को बीच में हुई तकलीफ के लिए हमें खेद है। परन्तु डा• मैरी डिसूजा एक चिकित्सक पहले हैं और उनको जाना पड़ेगा काफी क्रिटिकल इमरजेंसी केस आने के कारण।

डा• मैरी डिसूजा सर्व दयाल जी के कान में कुछ कहते हुए, अपना सामान लेकर मंच से उतरती हुई अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ जाती हैं।सर्व दयाल जी भाषण को जारी रखते हुए बोलते हैं, मैरी डिसूजा वास्तव में एक सच्ची भारतीय व्यक्तित्व हैं। उनके लिए कर्त्तव्य व फर्ज अपनी निजी जिंदगी से भी पहले है। मैं मैरी को आज से नहीं अपितु बचपन से ही जानता हूं। स्वाभिमान उनकी आत्मा में समाहित है और फर्ज उनके जीवन में सर्वोपरि।

वो तो ऐसे आयोजनों की शोभा बनना पसंद भी नहीं करतीं, उनका मानना है कि, इतने समय में मैं कुछ सार्थक प्रयास करना ज्यादा पसंद करूंगी।

किन्तु आज के इस सभा आयोजन को सम्बोधित करने के लिए हमारी टीम ने अत्यधिक आग्रह करके उन्हें आमंत्रित किया तो वे मना न कर सकी। और बिना किसी तैयारी के अपना त्वरित भाषण देने के लिए मंच पर उपस्थित हो गयीं। जाते-जाते वे मेरे कान में कह कर गयीं कि मैं भाषण को स्वयं से जारी रखूं। किन्तु उनके पर्स से मोबाइल निकालते हुए मुझे एक कागज मिला, जिसे मैं आप सब के सम्मुख पढ़ना चाहूंगा।

" कि कौन हूं मैं?

मैरी डिसूजा एक अंग्रेजी नाम

क्या है मेरी पहचान?

कि ईसाई धर्म अनुयायी

कहां सम्पन्न होती है मेरी पूजा

क्या चर्च में?

क्या है मेरी बोली

हिंदी कि अंग्रेजी

जाना नहीं मैंने

जाना है तो जाना इतना मैंने

हिंदोस्तां में जन्मी मैं

हिन्दू हूं मैं

हिंदी ही मेरी बोली

पर सबसे पहले

मानव हूं मैं

और धर्म मेरा मानवता

और उसी धर्म को

बनकर डाक्टर पूजती मैं

कि यहीं पूरा होता है मेरा फ़र्ज़

और इसी फर्ज में पूरी हुई मैं।।

मैरी डिसूजा:: सिर्फ और सिर्फ

एक डाक्टर, जो हिंदुस्तानी सरजमीं मुलाजिम है।।

सच में मैरी एक वास्तविक व्यक्तित्व हैं हिन्दुत्व में रंगा हुआ। सर्व दयाल जी की आंखों से आंसु छलछला गये और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। जिसकी मंद ध्वनि गाड़ी चलाती डा• साहिबा मैरी डिसूजा के कानों में मिश्री सी घुली जा रही थी, और मैरी अपने कर्तव्य की राह बढ़ती ही चली जा रही थी।।



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