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कुमार संदीप

Drama

3  

कुमार संदीप

Drama

हौसला

हौसला

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उमंग के पिता जी को गुजरे हुए 6 वर्ष हो चुके थे। घर का खर्च किसी तरह माँ के द्वारा कमाए पैसे से चलता था। माँ दूसरे के घर बर्तन माँजती और पापड़ बनाने का काम करती। उमंग को अच्छा इंसान बनाना माँ का सपना था। उमंग बचपन से निर्धनता को बखूबी झेल रहा था।

गांव के कुछ लोग और विद्यालय के छात्र उमंग के फटे कपड़े का उपहास उड़ाते थे। उमंग को पढ़ने के प्रति काफी लगन था और वह पढ़ने में काफी होशियार था। अभी उमंग 8वीं कक्षा में था। उमंग बाकी छात्रों से अलग बहुत मेधावी छात्र था। गणतंत्र दिवस आने में दस दिन शेष थे। समारोह की तैयारियां चल रही थी। वर्ग शिक्षक ने घोषणा की छात्र जिस कला में प्रदर्शन करना चाहे अपना नाम अंकित करवाएं। सबों ने अपना नाम अंकित करवाया।

अंत में उमंग ने भी अपना नाम दर्ज करवाया तो छात्र उसका उपहास उड़ाने लगे। गणतंत्र दिवस वाले दिन सभी छात्रों ने नये-नये कपड़े पहने सज सँवर कर सभी छात्र-छात्राएं विद्यालय पहुँचे। पर उमंग वही पुराने कपड़े पहन कर पहुँचा था।

पोषाक की राशि उसे भी मिली पर वह राषि माँ की दवा में खर्च हो गयी थी। इसलिए वह पुराने कपड़े में ही आया। सबों ने अपनी कला दिखलाई। अब बारी थी। उमंग की उमंग ने माइक को अपने हाथ में थाम लिया और बोलना शुरू किया। उसने निर्धन बालक के दर्द पर भाषण देने के लिए नाम अंकित करवाया था। उसने अपने सभी दर्द को शब्दों द्वारा प्रस्तुत करना प्रारंभ कर दिया। उसने कहा गुरुजनों को प्रणाम प्यारे मित्र को ढ़ेर सारा प्यार। गरीबी क्या होती है?ये एक गरीब ही जानता है। दूसरे उपहास करने के सिवा कुछ नहीं जानते।

अनगिनत दुखों को झेलना पड़ता है। भुखे रहने पर भी कई दिनों तक अनाज के अभाव में आधे पेट खाकर रहना पड़ता है। बुखार रहने पर भी पैसे के अभाव में दवा नहीं मिलने कि स्थिति में कई दिनों तक बिमारी से लड़ना पड़ता है। बारिश वाले दिन टपकते पानी में रात भर न चाहते हुए भी चू रहें फूस के घर में रहना पड़ता है। बर्गर,चाउमीन मिठाइयां खाना तो मानो हम गरीबों का सपना ही होता है।

अन्य असहनीय दर्द जो गरीब छात्र झेलते हैं,उसे उमंग ने शब्दों द्वारा व्यक्त किया। सभी की आँखें नम हो गई, उपहास उड़ाने वाले छात्र व गाँव के लोगों के आँखें अब नम हो गई थी। शिक्षक ने उमंग को नम आँखों से गले लगाते हुए कहा बेटा तू एक दिन बड़ा आदमी बनेगा। तेरे सभी दुःख तो मैं दूर नहीं कर सकता पर हर महीने तुझे मैं अपनी तनख्वाह से चार हजार रुपए तुझे पढा़ई के लिए दूँगा। तू अच्छे से पढ़ अच्छा इंसान बन। मेरा आशीर्वाद सदैव तेरे साथ है। उमंग की आँखें नम हो गयी वह गुरु के चरण स्पर्श कर रोने लगा। उमंग के अंतस से आवाज आई "उमंग तू हौसला रख बुलंद एक दिन तेरा हुनर जग में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा।


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