STORYMIRROR

Abhilasha Deshpande

Inspirational

5  

Abhilasha Deshpande

Inspirational

हाथ नहीं, हौसला है

हाथ नहीं, हौसला है

2 mins
3

- शीतल देवी* जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ की 17 साल की शीतल देवी के दोनों हाथ नहीं हैं। जन्म से ही एक दुर्लभ बीमारी के कारण उनके हाथ नहीं बने। लेकिन आज वही शीतल दुनिया की पहली बिना हाथ वाली तीरंदाज हैं। बचपन में स्कूल में बच्चे मजाक उड़ाते थे। शीतल रोती थी। एक दिन उसकी माँ ने कहा, "बेटा, हाथ नहीं है तो क्या हुआ, हौसला तो है!" 11 साल की उम्र में शीतल ने आर्मी के एक कैंप में तीरंदाजी देखी। कोच ने कहा - "पैर से तीर चलाओगी?" शीतल ने हाँ कहा। पहले दिन पैर से तीर उठाना भी मुश्किल था। पैर दुखते थे, तीर गिर जाता था। लेकिन शीतल ने हार नहीं मानी। रोज 6 घंटे प्रैक्टिस। और फिर चमत्कार हुआ। शीतल ने पैरों से 100 में से 95 निशाने लगाने शुरू कर दिए। 2023 में एशियन पैरा गेम्स में शीतल ने 2 गोल्ड मेडल जीते। 2024 में पेरिस पैरालंपिक में ब्रॉन्ज मेडल। आज उनके नाम कई वर्ल्ड रिकॉर्ड हैं। शीतल कहती हैं, "भगवान ने हाथ नहीं दिए, लेकिन हौसला इतना दिया है कि मैं आसमान छू सकती हूँ।" दोस्तों, अगर शीतल बिना हाथों के तीर चला सकती हैं, तो हम हाथ-पैर होते हुए क्यों हार मान लेते हैं? उनकी कहानी हमें सिखाती है - कमी शरीर में नहीं, सोच में होती है। *हाथ नहीं, हौसला है - यही है शीतल देवी।* --


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Inspirational