Shobhit शोभित

Drama


4.9  

Shobhit शोभित

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एक प्यार ऐसा भी

एक प्यार ऐसा भी

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प्यार कभी भी किसी को किसी से भी हो सकता है। हालाँकि इसे लड़का लड़की से ज्यादा जोड़कर देखा जाता है पर क्या एक बेटे को अपने माँ, बाप, भाई, बहन से प्यार नहीं होता यहाँ मैं आपको अपनी ज़िन्दगी का एक अध्याय बताना चाहता हूँ, जहाँ मुझे महसूस हुआ कि प्यार किया नहीं जाता बस हो जाता है।


मुझे बचपन से ही कुत्तों से बड़ा डर लगता था। कुछ तो कारण यह था कि घर वाले शुरू से डराते थे कि कुत्ते से बच के रहो वो काट लेता है कोई गलती करूँ तो दोबारा ऐसा किया तो कुत्ते के साथ बाँध देंगे। रही सही कसर इस बात से निकल गई कि मेरे एक मौसेरे भाई को और अन्यत्र मेरे एक मित्र को कुत्ते ने काट लिया और उनको 14 इंजेक्शन लगे यह सुन कर ही पसीने छूट गए थे।


जब बड़ा हुआ, जॉब करने लगा। सौभाग्य से कुछ ही महीनों में मुझे दक्षिण अफ्रीका भेजे जाने का निर्णय हुआ, पहली विदेशी यात्रा थी तो इंटरनेट खूब खंगाला गया मित्रो रिश्तेदारों को ख़बरें भेजवाई गई। एक बात हर जगह से आ रही थी कि दक्षिण अफ्रीका में संभल कर रहना है वहां गुंडा गर्दी बहुत है।


खैर जाना तो था ही, गए भी। पता चला कि वहां सुरक्षा के भरपूर इन्तजाम हर घर में होते हैं भारत में शायद ऐसे इन्तजाम होने में अभी कुछ समय लगेगा। पर भारत की एक बात वहां भी दिखी कि वहां भी सुरक्षा के लिए कुत्ते हर घर में पाले जाते हैं।


जोहानसबर्ग के जिस घर में मैं रह रहा था वहां भी एक कुत्ता था और काफी बड़े साइज़ का डरावना सा कुत्ता था। उस घर में मेरा सबसे पहले स्वागत उस कुत्ते ने ही किया था और मेरा मन हुआ था कि सीधे वापसी की फ्लाइट पकड़ लूं।


जब भी मैं घर में आता था या जाता था, कमरे से दरवाजे तक की यात्रा का साथी वो जरुर होता था। शुरू शुरू में मेरी मदद के लिए कोई न कोई ऑफिस का साथी रहता था पर शायद वक़्त के साथ मैंने यह मान लिया था कि यह भी मेरे साथ इस घर का हिस्सा है। डर भी कम हुआ था। पर बीच बीच में वो जब मेरे सामने उछलता था तो कसम से कलेजा बाहर आने को तैयार हो जाता था। मेरे मकान मालिक ने मुझे कहा कि “यह हमारा ‘डेनिस’ तुम्हारे साथ खेलना चाहता है, यह पिछले 3 महीने से उदास था क्योंकि इसके साथी ‘एंजेल’ कि मृत्यु हो गई थी। अब इसको खुश देखकर ख़ुशी होती है” पर मेरा डर मुझे उसको साथ खेलने की इज़ाज़त नहीं दे रहा था।


दक्षिण अफ्रीका का मौसम काफी बदलता रहता है, कहना बहुत मुश्किल होता है कि कब बारिश होगी, कब ठण्ड हो जाएगी और कब गर्मी। एक दिन की बात है मैं सुबह सुबह अपने कपड़े धोकर, खिली हुई धूप में सुखाने के लिए डालकर ऑफिस चला गया एक घंटे बाद ही बारिश पड़ने लगी और मुझे बड़ी फिक्र हुई कि मेरा कपड़े धोना तो अब बेकार ही हो गया। सबसे ज्यादा फिर्क मुझे अपनी एक शर्ट की थी क्योंकि ये शर्ट मेरे पापा की आखिरी निशानी थी मेरे लिए और दक्षिण अफ्रीका में जो हवा उस समय चल रही थी, मेरी शर्ट उड़कर पाकिस्तान चली जाती तो भी अविश्वास नहीं होता। खैर अब ऑफिस से घर तो कोई जाने नहीं देता और इतनी बारिश में तो बिलकुल नहीं।


जब शाम को छुट्टी हुई तो भाग के घर पहुंचा और आवाज़ सुनकर डेनिस दरवाजे पर आ ही गया था। सबसे पहले मैं अपने कपड़े समेटने के लिए पहुंचा, पर वहां मेरा एक भी कपड़ा नहीं था। मैं अपने आस पास के लोगों से पूछा पर किसी को पता नहीं था कि मेरे कपड़े कहाँ हैं। कपड़े खोने का उतना दुख नहीं था पर उस शर्ट का ज्यादा था। खैर भारी क़दमों से मैं अपने कमरे तक पहुँच तो क्या देखता हूँ कि मेरे कपड़े वहां पड़े हुए हैं और थोड़े गंदे हैं, वो तो खैर घास पर गिरकर हो ही जाने थे। पर ये किया किसने?


मैं अभी उसमें अपनी शर्ट को ढूँढने ही वाला था कि मैंने देखा कि डेनिस मेरी उसी शर्ट को अपने मुहं में दबाये ला रहा है।


हे राम! इसने मेरे कपड़ो को बारिश में भीगने से बचाया।


सच बताऊँ तो इस काम की उम्मीद मुझे अपने साथ रह रहे लोगों से भी नहीं थी। वो तो जब कपड़े नहीं मिले थे तो मैं उनके पास चला गया था।


मेरी आँखों में डेनिस के लिए पूर्व में दिखाया गया सारा गुस्सा, भय सब कुछ आंसुओं में बह रहा था और दिल में आ रहा था उसके लिए प्यार।


इस प्यार को मैंने पहली बार महसूस किया था और अब मुझे डेनिस के पास जाने में कोई डर नहीं था इसका सबूत यह था कि मैं ज़िन्दगी में पहली बार डेनिस को गले से लगा रहा था।


यहाँ से हमारा एक नया रिश्ता शुरू हुआ था। मुझे एक छोटा भाई मिल गया था।


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