एक एहसास ऐसा भी
एक एहसास ऐसा भी
उससे मिलने पर उसमें खो जाने का दिल करता और उसके न रहने पर उसे खो देने का डर ये कैसी कश्मकश है ऐ ख़ुदा, उसका मेरे पास होने पर बच्चा बन जाना और दूर जाने पर बड़ों जैसी सलाह देना आखिर क्या समझूँ इसे मैं ? दूर होता है तो झगड़ भी लेता है लेकिन पास आने पर बातें ही नहीं खत्म होती
आखिर क्या कहूँ मैं इसे ? गुस्से में उसका बहुत कुछ मुझे बोल जाना और फिर उसका खुद का पछताना। फिर मुझे मनाने की एक छोटी कोशिश करना
बहुत भाता है मुझे, मेरी हँसी की नकल उतारते-उतारते खुद ठहाके मार कर हँस देना मानो दिल छू जाता है।
वो रातें और बातें आज भी मुझे याद हैं जब हम पूरी रात खुली आँखों से सपने संजोया करते थे, जो शायद कभी पूरे नहीं हो सकते थे ठीक है कोई बात नहीं।
फिर भी हिम्मत तो देखो, आज भी हम खुली आँखों से मालदीव में हनीमून मनाने का सपना देखते हैं क्योंकि ये एहसास ही अलग है। ये सच है कि मैं और तुम कभी हम नहीं हो सकते लेकिन फिर भी टूट कर तुझे चाहने का एहसास ही अलग है खैर तुम नहीं समझोगे।
तेरा वो बुलेट से आना और मेरी वो तुझसे मिलने की तैयारी मैं कभी नहीं भूल सकती, क्योंकि हर बार एक नया उत्साह मन में होता था तुझ से मिलने का
ऐ मेरे बुलेट राजा ये शायद तुम नहीं समझोगे। खुले शहर में तेरे साथ घूमना-फिरना, मैं खुद को जानती हूँ मुझ में तो इतनी हिम्मत तो नहीं थी,
ये सब सिर्फ तेरे इश्क़ का रंग है, जिसमें मैं इस कदर रंग गई, जिसमें सिर्फ तू ही तू नजर आता है सिर्फ तू।
हर वो सुबह मुझे आज भी याद, जब मेरी सुबह तेरे फ़ोन से होती थी, फ़ोन उठाते ही तेरी भीनी से आवाज़ गुड मॉर्निंग जान उफ़्फ़फ़फ़ कान में हल्की सी गुदगुदी हो जाती, जो कहीं न कहीं तेरी मौजूदगी महसूस कराती। देखो आज फिर गुदगुदी सी लगी, ठीक है, झगड़े लड़ाई तो सब में होते हैं, वैसे ही हमारे में भी हुआ, वैसे ही हमारा ये प्यारा सा रिश्ता भी एक दिन कमजोर पड़ गया, शायद टूटने ही वाला था लेकिन....शायद वो प्यार सच्चा था, जो मैंने तुम्हें किया था, क्योंकि मुझे तेरी और तुझे मेरी आदत हो गयी थी, समय के रहते हमलोगों ने समझ लिया था हमारा साथ होना ही हम दोनों के लिए अच्छा होगा क्योंकि,
मैं तो कैसे भी रह लूंगी तेरे बिना लेकिन मेरे बिना तेरी क्या हालत होगी, ये मैं समझ सकती हूँ। खैर जुदाई की बातों से कहीं ज्यादा मुझे तेरे प्यार के चर्चे करने पसंद हैं क्योंकि, तेरे प्यार करने का तरीका ही अलग है। तेरा प्यार ही अलग है, शायद तू ही अलग है, शायद हम दोनो ही अलग हैं, शायद हम दोनो की प्रेम कहानी ही अलग है!
तेरे करीब होने का एहसास आखिर किससे बाटूं,आखिर किससे कहूँ की मुझे तेरे हाथ का तकिया बनाकर सोना कितना पसंद है, तेरी हर एक बात पर तुझे झट से चुम लेना कितना पसंद है आखिर किससे कहूँ। जब जब तू पास होता है ,जी करता है कि ऐसा क्या कर दूँ कि तू उसी पल, उसी वक्त तू हमेशा हमेशा के लिए मेरा हो जाये, ताकि वो पल ही न आये जब हम अपने रास्ते और तुम अपने रास्ते को हो जाते हो। अच्छा, इसबार देखा मैंने तेरे बाहों में सुकून कहीं ज्यादा था, शायद हमारी कहानी आगे बढ़ रही थी। वो सुकून से तेरे बाहों में सोयी हर एक झप्पकीयों से मुझे ना जाने क्यूँ प्यार सो हो गया है, अब ना जाने वो सुकून कब लौट कर आएगा। इंतज़ार रहेगा मुझे तुम्हारा एक बार फिर मेरे शहर आने का। मेरे लिए तो वही रात चांदनी थी जिस रात मैं तुम्हारी बाहों में थी, थी मैं खोयी तुम्हारे उस बेपनाह प्यार में, जो यादगार बन गयी है आज मेरी जिंदगी के इस कहानी में। काश! वो सुकून जिंदगी भर के लिए होता लेकिन नहीं, तुम्हरे जाते ही मैने खुद को फिर से अकेला पाया, आखिर आते ही क्यूँ हो जब जाना ही था, रहने दो अब और जिक्र करनी ही नहीं मुझे, क्योंकि हर बार की तरह आज भी दर्द सिर्फ मुझे होगा !

