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Rachna Suneel

Tragedy

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Rachna Suneel

Tragedy

दाग़

दाग़

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आसमान की छाती चीरकर बेतहाशा शहर की ओर उड़ते गिद्धों के झुंड को देखकर क्षितिज पार से झूमते आते मेघों के झुंड ने धड़कते हुए दिल से पूछा , “ क्या आज फिर दंगा हुआ है शहरों में...?”

“अभी हुआ तो नही पर शुरू होने ही वाला है , शीघ्र चलो तुम सब भी और आज टूटकर बरसना ...दाग़ जो धोने हैं तुम्हें, ख़ून और आँसू दोनो को ही आज तुम्हारी बहुत ज़रूरत होगी...!”



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