छोटी बिटिया
छोटी बिटिया
छोटी तीन बर्षीया मेरी बिटिया का मेरे प्रति व्यवहार मेरे व्यवहार का ही प्रतिरूप है।जब मैं चाहती हूँ कि वह मेरे पास नहीं आए तो मैं कहती हूँ -“जाओ मुझे पढ़ने , यहॉं मत आओ।”
ऐसे ही वह भी कहती है। जब वह खेल रही होती है और मैं वहॉं आ जाती हूँ तो वह कहती है-“ अम्मा ! तुम जाओ, हम खेल रहे हैं, यहॉं से जाओ। “
अगर मैं उसको एकदम से हटाने के बजाय धीरे से उसके आने का स्वागत करूँ, उसे प्यार से बैठाऊँ, तो वह भी मेरे साथ ऐसा ही बर्ताव करेगी। बच्चा वैसा ही व्यवहार करता है और जैसा कि हम उसके साथ करते हैं।
“ अभी आ रहे हैं”- कहने की बिटिया की आदत पड़ गई है, पर कभी आती नहीं।
“ एक मिनट ,हम वहाँ पर जाकर तुम्हारे पास आते हैं”- ऐसा कहकर वह चली जाती है और फिर लौटकर नहीं आती। यह भी उसने मेरे से ही सीखा है।
इस तरह खाना खाने व नहाने के टाईम वह मुझे बहुत परेशान करती है। जब मैं उससे अपना पिंड छुड़ाना चाहती हूँ, तो यही कहा करती हूँ-“ बिटिया, तुम इसके साथ खेलो, मैं अभी एक मिनट में आई ।” फिर मैं उसके पास जाती नहीं। यही वह सीख गई है। और जल्दी नहीं आती।
ऐसे ही फ्रॉक पहनने के मामले में होता है।मैं कहती हूँ- अभी यह फ्रॉक पहिन लो , ये जो तुम कह रही हो,शाम को पहना दूँगी ।”
मैं समझती हूँ कि वह भूल जायेगी शाम तक, पर वह भूलती नहीं। और कभी- कभी इस तरह ज़िद करती है-
“ इस समय फूल वाली फ्रॉक पहिना दो, इसको पहिनने के बाद शाम को दूसरी पहनेंगे या इसी के ऊपर पहिन लेंगे ।”पर बाद में भाग जाती है।
“अम्मा मुझे मारती क्यों है”- वह पूछती है।
बच्चों को मार-पीट करना आसान है, इससे हम उनसे क्षणिक छुटकारा भले ही पा जायें, पर उनका चरित्र नहीं बना सकते।
बच्चों से सदा एक वस्तु के विषय में एक सा ही व्यवहार करना चाहिए । यह नहीं कि आज इस बात पर डॉंट रहे हैं तो कल इसी बात पर हँस रहे हैं। किसी बात पर हमारी प्रतिक्रिया कैसी होगी, इसका उसे पता होना चाहिए।
अगर उसका ग़ुस्से में किताबें नीचे फेंकना मुझे पसन्द नहीं तो हमेशा मुझे इस बारे में अपनी नापसन्दगी ही ज़ाहिर करनी चाहिए, यह नहीं कि एक बार हँसकर टाल दिया तो एक बार पीट दिया। इससे बच्चा आपकी बात नहीं मानेगा। बच्चे बहुत कोमल होते हैं इसलिए उनसे सहानुभूति से स्नेहमय व्यवहार करना चाहिये।
