बीवी वो बीवी 20
बीवी वो बीवी 20
नीरज मौसी जी का टोंट सुन कहता है, " मौसी जी अब आप बड़ी हैं, जो चाहें कह सकती हैं।
मौसी पलट कर कहती है, "" इसका मतलब छोटी होती तो तुम उसकी बैंड बाजा देते, मतलब मेरा आना पसंद नही आया।
नीरज की सास सुषमा कहती है, " नीता बहन यदि तो मुसीबत है, इस नेहा ने लव तो कर लिया पर आदमी की नियत नही देखी।
तभी नेहा आती हुई कहती है, " क्या हुआ मम्मी जी आप लोग अंदर ही नही आई।
उसकी मौसी कहती है, " दामाद जी को हमारा आना पसंद नही आया।
सुषमा कहती है, " कह रह था बड़ी हो इसलिए कुछ बोल नहीं सकता।इसका क्या मतलब है।
नीरज कहता है, " मम्मी जी प्लीज आप लोग हर बात का उल्टा मीनिंग मत निकाला करिए !
मौसी कहती है, " चल तु ही सीधा मीनिंग बता दें, अरे मेरा दामाद तो सर नही उठाता मेरे सामने, ये तो ऐसे खड़ा है जैसे अभी मार देगा।
नेहा समझ गई की मौसी कुछ अधिक ही बोल रही है, वह कहती है, " मौसी प्लीज नीरज वैसा नहीं है जैसा आप सोच रही हैं।
उसके बोलने का स्टाईल ही ऐसा है, मम्मी जी तुम तो समझाओ मौसी जी को, बिना मतलब जा नीरज पर ब्लेम मत करो।आइए चलिए, नीरज हम दस मिनट में फ्रेश होकर आ रहे हैं तब तक खाना लगा लो साथ ही खायेंगे।
अच्छा हुआ नेहा ने बीच में आकर मामले को सम्हाल लिया, नही तो ये मौसी तो पता नही कहां तू बात पहुंचा देती।
जगत कुमार दुकान से घर खाना खाने आते हैं, आज घर में किसी वजह से खाना नही बना था।
वह अपनी पत्नी अंबिका जिसके नाम पर दुकान का भी नाम रखा गया है अंबिका फूट वियर।
उस से कहते हैं, " अंबिका ये तो गलत बात है, अगर खाना नही बना था तो फोन करके बोल देती मैं वही कुछ खा लेता यहां तक आने की नौबत नही आती।
अंबिका उनकी ओर देख कर कहती है, " यहां तक आ गए तो पैर घस गए क्या, , चप्पल जूते बेचते बेचते, तुम्हारी शक्ल भी चप्पल की तरह हो गई है, और अकल पर जूते पड़े हैं। एक टाइम खाना नही खाने से मर नही जाओगे। जाओ क्षण को खा लेना कहीं पर दो दिन खाना नही बनेगा, जाओ।
जगत की बहू अंदर से कहती है।
पापा जी रुकिए, मैं आपके लिए कुछ बनाती हूं।
अंबिका कहती है, " अगर तूने कुछ भी बनाया तो मैं खुद को आग लगा लूंगी और पूरा ब्लेम तुम सब पर लगा दूंगी, मेरे मरने के बाद पूरा खानदान जेल की रोटी खाना।
जगत कुमार कहते हैं, " ऐसी क्या बात हो गई जो तुम आग लगाने की धमकी दे रही हो।
अंबिका कहती है, " तुम्हारा नामर्द लड़का अपनी पत्नी के इशारों पर चलता है, ये कविता जैसा नचाती है वैसे ही नाचता है, मेरे बात की कोई वैल्यू ही नही करता।मैने तो सिर्फ इतना ही कहा था की बेटे जरा मेरे लिए एक सोने की एक तोले की अंगूठी बनवा दे, उसके बाद अंदर क्या खुसर फुसर हुई की आकर कहता है, मम्मी इस उमर में अंगूठी पहन कर क्या करोगी, एक दो बढ़िया साड़ी ला देता हूं।
जगत कुमार कहते हैं, " तो क्या गलत किया तुमने भी तो यही किया था, कविता तो तुमसे फिर भी अच्छे से बात करती है, मम्मी जी मम्मी जी कहती नही थकती है, तुम तो मेरी मां मर गई पर कड़ी उस से ढंग से बात नही की, और में भी तुम्हारी गुलामी के आगे कुछ नहीं बोल सका।
अंबिका गुस्से के मारे पास पड़ा बर्तन उठा कर पटक देती है और कहती है, तुम सबको मैं देख लूंगी। तुम सब मेरे खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हो मुझे पागल बांस कर घर से निकाल देना चाहते हो, पर मैं भी अंबिका हूं यहीं जान दे दूंगी और चुड़ैल बन कर तुम सबका जीना हराम कर दूंगी।
जगत कुमार धीरे से कहते हैं, " अब तुम से बुरी चुड़ैल तो नही होगी उस बेचारी को तो बख्श दो।
अंबिका कहती हैं " तुमने मुझे चुड़ैल कहा, दुकान और मकान मेरे नाम पर है, सभी को धक्के मारकर बाहर कर दूंगी।
जगत कुमार उठते हैं और बाहर निकलने लगते हैं।
अंबिका पीछे से चिल्लाती है, " मैं ही इस घर की दुश्मन हुं मैं तुम लोगो को देख लुंगी सबको सबक सिखाऊंगी।
कविता जगत को फोन कर कहती है, , " पापा जी आप दुकान पर चलिए मैं खाना लेकर आती हूं।
नेहा की मौसी खाना खाते समय कहती है, " ये कैसा बकवास खाना बनाया है, लगता है बासी खाने को गर्म करके रख दिया सामने।
नीरज नेहा को देखता है फिर सास को।
सुषमा कहती है, " नीता बहन बस भी करो, खाना दामाद जी ने नशा बनाया है, यहां के सबसे बेस्ट होटल से मंगवाया है।
नीता कहती है, " अरे इस से अच्छा तो हमारे यहां का ठेले वाला बनाता है, सुबह कुलचे हम लोग वहीं से मंगवाते हैं।
नीरज कहता है, " अब समझा मौसी जी, अब ठेले वाले का खाना खाने वालों को अच्छे होटल का खाना पसंद नही आयेगा, वह लोग थोड़ा तेल मसाला अधिक डालते हैं।
नीता तो एकदम आप से बाहर हो जाती है और कहती है, " सुषमा तुम मेरी इंसल्ट कराने के लिए यहां ले आई हो। मेरा रिटर्न टिकट करवा दो मैं एक दिन भी यहां नही रह सकती हूं, मेरा दामाद होता तो अब तक मैं उसका ठोबड़ा लाल कर देती।
सुषमा कहती है, " नीता बहन बस भी करो, तुम्हारा दामाद तुम्हारे जूते की नोक पर रहता होगा, मैं अपने दामाद की पूरी इज्जत करती हु, इसकी बेइज्जती करने का अर्थ है अपनी बेइज्जती करना।
एक बात तो थी नीरज की पत्नी और सास कभी उसकी इतनी बेइज्जती नही करती थी, पर उनका यही प्रोब्लम था की नीरज जो पर्सनल फैमली लाइफ जीना चाहता था वह नही जी पा रहा था, वह नेहा के साथ एक मिनट के लिए बैठ नही पाता था, वह उसके साथ बैठ कर चुहल बाजी करना चाहता था, और एक अच्छे पति पत्नी की तरह जीवन जीना चाहता था जो सास की वजह से पॉसिबल नही था। क्योंकि उसकी सास सुषमा हमेशा बेटी से चिपकी रहती थी और नेहा को भी यही पसंद था।
क्रमशः
