भगवान का सच
भगवान का सच
एक बार एक महत्मा से ,एक बूढ़ी औरत ने पूछा "महात्मा जी आप तो परम ज्ञानी है ,तो कृपा कर मुझे ये बताएं ,क्या इश्वर सच में होता है ?
महत्मा जी ने बूढ़ी औरत से कहा" हे माई आप काम क्या करती हो ?
बूढ़ी मां उसने कहा " महात्मा जी मै तो दिन भर घर में अपना चरखा कातती हूँ और घर के बाकि काम भी करती हूँ।
महात्मा जी पूछते है ,"तुम्हारे पति क्या करते हैं,?
वह कहती है "मेरे पति खेती करते हैं। अपनी मेहनत से खेतो में अनाज उगाते हैं,।
तब महात्मा जी ने कहा "माई एक बात बताओ, क्या ऐसा भी कभी हुआ है कि आप का चरखा बिना आपके चलाये चला
हो , या कि बिना किसी के चलाये चला हो ?
बुढ़िया ने कहा ""ऐसा कैसे हो सकता है कि वो बिना किसी के चलाये चल जाये, ऐसा तो संभव ही नहीं है,?
महत्मा जी ने फिर कहा ,"माई अगर आपका चरखा बिना किसी के चलाये नहीं
चल सकता ! तो फिर ये पूरी सृष्टि किसी के बिना चलाये कैसे चल सकती है ? और जो इस पूरी सृष्टि को चला रहा है वही इसका बनाने वाला भी है और उसे
ही ईश्वर या भगवान कहते हैं।
उसी तरह किसी और ने उसी महात्मा से पूछा ," महाराज ! आदमी मजबूर है या सक्षम ?
महात्मा जी उसकी ओर देखते हैं ,उन्होंने कहा " भाई तुम अपना एक पैर उठाओ।
उसने उठा दिया।
उसके बाद उन्होंने कहा " अब तुम
अपना दूसरा पैर भी उठाओ।
उस व्यक्ति ने कहा ऐसा ," ये कैसे हो सकता है ? भला मै एक साथ दोनों पैर कैसे उठा सकता हूँ ?
उसकी बात सुन उस से कही ,"भाई इंसान ऐसा ही है, ना पूरी तरह से मजबूर और ना ही पूरी तरह से सक्षम उसे भगवान ने एक हद तक सक्षम बनाया है और उसे
पूरी तरह से छूट भी नहीं दिया है। उसको भगवान ने सही गलत को समझने कि शक्ति दी हैऔर अब उस पर निर्भर करता है कि वो सही और गलत को समझ कर अपने कर्म को करेऔर भगवान की प्राप्ति की ओर और आगे बढ़े।
दोनों को ही महात्मा की बाते समझ आ जाती है।
दोनों ही ने महात्मा के सामने सिर झुकाया और संतुष्ट हो अपने घर के लिए चले।
