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भाईदूज

भाईदूज

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आशा अब तो खाना खा लो, आखिर कब तक उपवास रखोगी। रोहन इस बार भी नहीं आएगा" - आलोक ने कहा।

"कैसे खा लूँ, आज भाईदूज हैं बिना रोहन को लड्डू खिलाए मैं अपना उपवास नहीं तोड़ सकती और रोहन ने मुझे कल ही फोन करके कहा की वह जरूर आएगा, अभी तो बहुत समय बाकी है। आप भी जानते हैं की उसे फुर्सत नहीं होती हैं" - आशा ने कहा।

"ये सब बातें कहकर तुम खुद को तसल्ली दे रही हो, इसी शहर में रहते हुए, आज तीन साल हो गए लेकिन उसने कभी तुम्हारा प्यार नहीं समझा अगर उसे तुम्हारी कद्र होती तो वह जरूर समय पर आ जाता "- आलोक ने कहा।

"इंतजार करते-करते शाम हो गई लेकिन रोहन नहीं आया, आशा ने उसे कई बार फोन लगाया लेकिन फोन व्यस्त आ रहा था।"

"बैठे-बैठे आशा अतीत में पहुंच गई, कैसे भाईदूज के दिन सुबह सुबह नहा कर रोहन कहता दीदी जल्दी आओ पूजा करते हैं फिर खाना खाएंगे।

"अरे रोहन तुम खाना खा लो, मुझे थोड़ा काम है"

"नहीं दीदी हम दोनों साथ पूजा करेंगे फिर खाना खाएंगे ना, मां ने तो यही कहा है की इस दिन भाई -बहन साथ पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं फिर उसके बाद उपवास तोड़ते हैं"।

"हां बेटा मैंने यही कहा है लेकिन तुम अभी बहुत छोटे हो, जब तुम बड़े होना फिर ऐसा करना। चलो अभी खाना खा लो" -मां ने कहा।

'भाई की प्यार भरी बातें सुन आशा मन ही मन उसकी बलइयाँ लेती', वर्षों बाद जो उसे भाईदूज के दिन ही भाई मिला था। रोहन, आशा से दस साल छोटा था, इसलिए आशा के लिए यह दिन बहुत खास था। भला भाई बिना कैसी भाईदूज सबको यही कहते सुना था उसने।

'मम्मा मम्मा .. ह हां - दीपक के बोलने से सहसा उसकी तन्द्रा टूटी'

"बोलो बेटा.. मम्मा मामा अभी तक नहीं आए। आ जाएंगे" - आशा ने कहा।

"आज रोहन को मेरी भूख की बिलकुल चिंता नहीं, ऐसा नहीं हो सकता जरूर कोई काम में फंस गया होगा" - आशा का मन मानने को तैयार ही नहीं था।

"आशा इसी उधेड़बुन में बैठी थी तभी रोहन का फोन आया।"

"दीदी आज मैं नहीं आ पाऊंगा.. लेकिन रोहन आज तो.. दीदी एक ऑफिस की मीटिंग थी.. तो मीटिंग के बाद मैंने खाना खा लिया.. अब एक और मीटिंग हैं मैं वहीं जा रहा हूं। लेकिन पूजा....... फोन कट जाता है।"

' रोहन नहीं आ पाएगा, चलो तुम खाना खा लो', ऑफिस के काम में फंसा होगा बेचारा - आलोक ने आशा के खुशी के लिए ऐसी बातें कही।

हम्म, आप ठीक ही कहते हैं.. आफिस में फंसा हुआ हैं, ना जाने कितना काम कराते हैं पर्व -त्योहार को भी नहीं बख्शते.. आंसू छुपाते हुए आशा रसोईघर में चली गई।

"तभी दरवाजे पर दस्तक होती हैं, आशा दरवाजा खोलती हैं तो देखती हैं रोहन खड़ा हैं, उसे देख उसकी आंखें भर आती हैं"।

अभी जो तुमने मुझे फोन पर कहा.. मैं तो मजाक कर रहा था, दरअसल आज सही में बैक टू बैक मीटिंग चलती रही और मैंने पहले जो भूल की है, वो आगे नहीं दोहराना चाहता, मुझे माफ कर दो दीदी - रोहन नजरें झुकाए बोला

'आशा ने उसे गले से लगा लिया'। चलो दीदी अंदर मुझे बहुत भूख लगी है.., दोनों साथ में अपना उपवास...... है।


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