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Akanksha Srivastava

Inspirational


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Akanksha Srivastava

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बेड़ियां

बेड़ियां

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मैं हमेशा लड़कियों के ऊपर लेख लिखती आई हूं,लेकिन आज जो मैंने देखा है उससे मुझे ये पता लगा कि एक लड़की के पैर में बेड़िया बांधना कितना जरूरी और क्यों है?? माँ बाप यू ही नही बेड़िया से बांध देते है अपनी लाडो को ,समाज मे हो रही कुरीतियों ओर आए दिन के रेप केस जो घर बैठे दिल को सहमा देते हैं। कही न कही उसमे कुछ ऐसी लड़किया, मैं इस लेख को पढ़ने वालों से विनती करती हूं कृपया हर लड़की को उस नजरिया से मत लीजिएगा। मैं कुछ उन लड़कियों की बात कर रही जिनको न तो घर परिवार की चिंता होती है न माँ बाप की इज़्ज़त की। निकल पड़ती है अपनो को छोड़कर ...जो कितना सही है कितना गलत आप खुद सोचिए।

मैं नाम की पुष्टि नही करूंगी क्योंकि लड़की चाहें जो भी हो जैसी हो, है तो वो किसी के घर की इज्ज़त। कैंटोमेंट एरिया में रहने वाले उन परिवार में से एक परिवार है ,जिनकी तीन परिया है। वो अपनो बच्चों की हर बात को बचपन से लेकर आज तक पूरा कर रहे,लेकिन ऐसी क्या कमी हो गयी उनसे जो उनकी सबसे छोटी परी बिगड़ गयी? ऐसी क्या कमी है उसे जो उसे ये लगता है कि मेरे अपने नही दूसरे ही उसे पूरा कर सकते हैं?? 

खरे साहब एक बैंक में मैनेजर थे जो अब रिटायर्ड हो गए हैं । उनकी सिर्फ तीन बच्चियां है जिन्हें प्यार से परी बुलाते है।उनकी बड़ी लड़की की शादी हो चुकी है।बीच वाली की शादी नवम्बर में है ,माँ की तबियत खराब होने की वजह से खरे साहब ने अपने बेटियों की शादी जल्द ही कर दी। क्योंकि उनका मानना है कि फूल को सही जगह पे लगा दिजीए तो मन निश्चित और टेंशन भी कम रहता है। उन्होंने वाणी की शादी भी अच्छे खासे परिवार में किया। दामाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जो कि वाणी को लेकर बेंगलुरु में रहता हैं। वही दूसरी बेटी तृषा जिसकी शादी नागपुर में हो रही ,उनके दामाद का खुद का फैक्टरी चलता है,ओर साथ ही गेस्ट हाउस भी।जिसकी शादी नवम्बर में है अभी आपको ऊपर बताई। वही छोटी बेटी कृष्णा जो कि अभी पढ़ाई कर रही इंटर पास कर बी टेक में एडमिशन ली। यह कहानी और बेड़िया ....कृष्णा पे आधारित हैं।

ज़ाहिर सी बात है घर मे छोटी तो चुलबुली चुटीली होना लाजमी है,लेकिन जिद्दी सिर्फ एक समय तक ही ठीक लगता है। हर बेटी के माँ बाप अपनी लड़कियों को बहुत प्यार स्नेह से रखते है। खरे साहब भी अपनी बच्चियों में कभी कोई कमी नही रखें,लेकिन परसो जो हुआ वो अचंभित होने वाली बात थी। जब मैं शाम को घर लौटी तो देखी खरे साहब के घर पुलिस की गाड़ी ओर पन्द्रह बीस पुलिस खड़ी है। यह देख में आवक रह गयी ये क्या? क्या कोई बात हो गयी । मैंने जल्दी जल्दी कदम आगे बढ़ाएं ओर उनके घर तक पहुँची। पास खड़ी महिला पुलिस से पूछने का प्रयास की ,क्या हुआ सब ठीक तो है न ?? उन्होंने सीधे पूछा आप कौन ? मैंने उन्हें बताया मैं सामने वाले घर मे रहती हूं । खरे साहब ठीक तो है,कोई ऐसी बात तो नही। बोली आप अंदर जा कर खुद बात कर ले।

हिम्मत के साथ अंदर जाकर पूछने की कोशिश करने वाली थी कि खरे साहब की रुंध भरे गले से रोते हुए पुलिस वालो से हाथ जोड़ विनती कर रहे थे। साहब बच्ची है छोड़ दिजीए अब कभी नही करेगी। न जाने किस संगत में फस गयी जो इसने ऐसा कदम उठाया।

पुलिस वाले वार्निग दे कर रफा दफा हो गए। तब उनके घर मे शुरू हुआ कृष्णा के साथ हंगामा। खरे साहब जोर जोर से मारते रहे। बोलते रहे हमारे प्यार दुलार में क्या कमी रही जो तूने आज हम सबका मुँह काला कर दिया। हमारी समाज मे बेज्जती की। क्यों किया तूने ऐसा?? कृष्णा बुरी संगती में फस कर एक रात पहले घर से ये बोल निकल गयी कि मेरी फ्रेंड की बर्थडे पार्टी है मैं वहाँ जा रही। असल मे वो वहाँ न जाकर अपने दोस्तों के साथ होटल में रुक गई। शराब के नशे में उसने कब गलत कदम उठाए उसे पता भी न चला। सयोंग वश उसदिन होटल पर रेड पड़ गयी,जिसमे कृष्णा भी फस गयी। नशे में होने के कारण पुलिस वालो ने सबको पकड़ पुलिस स्टेशन ले आई। फोन आने पर जब खरे साहब को पता चला तो उनके पैर तले जमीन मानो खसक गयी हो। कृष्णा से उनका सिर्फ एक ही सवाल था कि जब हमने तेरे पैर में कभी बेड़िया न बाधी कभी रोक टोक न किया तो इतना बड़ा गलत काम क्यों ??? वही समय अच्छा था जब माँ बाप अपनी बेटियों के एक पैर में आजादी ओर दूसरे पैर में समय की बेड़िया बांध देते थे। आज कृष्णा जैसी बहुत सी लड़कियां है जो इन्ही बुरी लत,और संगत में पड़ अक्सर फस जाती है और गलत कदम उठा बैठती है। मैं ये नही कहती कि बेड़िया बांधना जरूरी है,न मैं ये कहती कि संस्कार कम दिए गए। क्योंकि समाज जब भी कुछ गलत होता है तो लोग सीधे संस्कार से जोड़ उंगली उठाने का कार्य करते हैं। हर माँ बाप अपनी बच्चियों को संस्कार देते हैं। क्योंकि ये हमारी मूल धरोहर है ,जो हमे बड़े होते एक हिदायत के रूप में कह दिया जाता है। देखो समय से अपना काम कर सीधे घर आ जाना। जहाँ जाओ बता कर जाना क्योंकि तुम लड़की हो??

वो लड़की है तो बेड़िया बांध दी आपने लेकिन जिसने उसके साथ गलत किया उसको बेड़िया नही बांधी गयी? आप भी सोचिए जरूर लड़की है तो संस्कार हो बेड़ियां हो...? लड़का हो तो आज़ादी? जहाँ मन वहाँ जाए जो जी वो करे। मैं ये नही कहती कि हर लड़का एक जैसा होता है लेकिन आज के समय मे जो हो रहा आए दिन रेप केस उसमे कहि न कही लड़को को भी संस्कार सिखाया जाना चाहिए। उन्हें भी बेड़ियों की हिदायत रिश्तों के मायने सिखाया जाना चाहिए तभी देश मे हो रहे ऐसे मामले थमेंगे। थमे न तो कुछ हद तक तो रुकेंगे।


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