बारिश में खोया प्यार – एक अधूरी प्रेम कहानी
बारिश में खोया प्यार – एक अधूरी प्रेम कहानी
वो मानसून की पहली बारिश थी। शहर की सड़कें पानी से तरबतर, और मेरा दिल उदास। मैं, आरव, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, ऑफिस से घर लौट रहा था। छाता भूल गया था, सो भीगते हुए बस स्टॉप पर खड़ा था। तभी वो आई – नेहा। लाल साड़ी में, बालों से पानी टपकता हुआ, मुस्कुराती हुई।
"छाता शेयर करेंगे?" उसने पूछा, आवाज में मिठास घुली हुई।
मैंने हाँ कहा। हम एक ही छाते के नीचे आ गए। बारिश तेज हो गई, और हमारी बातें शुरू हो गईं। वो कॉलेज स्टूडेंट थी, आर्ट्स की, सपनों से भरी हुई। मैंने बताया कि मैं किताबें पढ़ना पसंद करता हूँ, वो बोली, "मुझे पेंटिंग करना अच्छा लगता है। बारिश में पेंट करना तो जैसे जादू होता है।"
उस दिन से हम रोज मिलने लगे। बस स्टॉप पर, कॉफी शॉप में, पार्क में। नेहा का हँसना, उसकी आँखों में चमक – सब कुछ मुझे अपना लगने लगा। एक शाम, बारिश फिर बरसी। हम पार्क में थे। वो बोली, "आरव, मुझे तुमसे प्यार हो गया है।"
मेरा दिल धड़क गया। मैंने उसका हाथ थामा, "नेहा, तुम मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत बारिश हो।"
हमारा प्यार परवान चढ़ने लगा। रोज फोन पर घंटों बातें, लेट नाइट मैसेज, सपनों की दुनिया। नेहा ने मुझे अपनी पेंटिंग्स दिखाईं – उनमें बारिश, इंद्रधनुष, और हम दोनों। मैंने उसे अपनी कविताएँ सुनाईं। सब कुछ परफेक्ट था।
लेकिन जिंदगी कभी परफेक्ट नहीं रहती। नेहा के पापा को मेरे बारे में पता चला। वो एक बिजनेसमैन थे, सख्त मिजाज। "तुम्हारी शादी कहीं और तय है," उन्होंने नेहा से कहा। नेहा रोई, बहस की, लेकिन परिवार का दबाव ज्यादा था।
एक दिन नेहा का फोन बंद हो गया। मैं उसके घर गया, लेकिन गेट पर गार्ड ने रोक दिया। "मेमसाहब शहर छोड़कर चली गईं।"
मैं टूट गया। बारिश फिर बरसी, लेकिन इस बार अकेले। मैं उस बस स्टॉप पर गया जहाँ हम मिले थे। वहाँ एक पेंटिंग पड़ी थी – नेहा की बनाई हुई। हम दोनों बारिश में, हाथ में हाथ डाले। पीछे लिखा था: "आरव, ये प्यार अधूरा नहीं, अमर है। कभी मिलेंगे।"
आज भी हर बारिश में मैं उसे याद करता हूँ। वो पहली बारिश, वो पहला प्यार। अधूरा सा, लेकिन सबसे खूबसूरत। क्या पता, कोई दिन फिर बारिश में वो मिल जाए...

