बारिश और तुम
बारिश और तुम
बारिश और तुम
रात के 9 बज रहे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। चारों तरफ सिर्फ बारिश की आवाज़ गूंज रही थी।
आरव अपनी बालकनी में खड़ा कॉफी पी रहा था। उसकी आँखों में अजीब सी उदासी थी। आज फिर उसे वही दिन याद आ रहा था… जिस दिन उसकी ज़िंदगी बदल गई थी।
तीन साल पहले…
दिल्ली की एक छोटी सी लाइब्रेरी में आरव पहली बार मीरा से मिला था। मीरा बहुत साधारण सी लड़की थी। ना ज़्यादा मेकअप, ना दिखावा। लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी।
उस दिन मीरा जल्दी में थी और उसके हाथ से किताबें नीचे गिर गईं।
आरव तुरंत झुककर किताबें उठाने लगा।
“थैंक यू…” मीरा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
बस वही मुस्कान आरव के दिल में उतर गई।
उसके बाद दोनों रोज़ लाइब्रेरी में मिलने लगे। धीरे-धीरे बातें दोस्ती में बदलीं और दोस्ती प्यार में।
मीरा को बारिश बहुत पसंद थी। जब भी बारिश होती, वो बच्चों की तरह खुश हो जाती।
आरव हमेशा कहता—
“इतनी बारिश में मत भीगा करो, बीमार पड़ जाओगी।”
और मीरा हँसते हुए जवाब देती—
“बारिश में भीगने से बीमारी नहीं… यादें मिलती हैं।”
दोनों का प्यार बहुत खूबसूरत था। सड़क किनारे चाय पीना, लंबी बातें करना, रात-रात भर फोन पर हँसना… सब किसी सपने जैसा लगता था।
लेकिन हर कहानी हमेशा खूबसूरत नहीं रहती।
एक दिन मीरा ने आरव को मिलने बुलाया। उसकी आँखें नम थीं।
“क्या हुआ?” आरव ने परेशान होकर पूछा।
मीरा कुछ देर चुप रही, फिर धीरे से बोली—
“पापा ने मेरी शादी तय कर दी है…”
आरव के हाथ से कॉफी का कप गिर गया।
“क्या…?”
“मैंने बहुत समझाया, लेकिन वो नहीं माने।”
आरव की आँखों में आँसू आ गए।
“तुम मना कर दो… हम शादी कर लेंगे।”
मीरा हल्का सा मुस्कुराई, लेकिन उस मुस्कान में दर्द था।
“हर मोहब्बत की कहानी पूरी नहीं होती, आरव…”
उस रात बहुत तेज बारिश हुई थी। शायद आसमान भी रो रहा था।
कुछ दिनों बाद मीरा हमेशा के लिए चली गई।
आरव पूरी तरह टूट चुका था। उसने खुद को काम में व्यस्त कर लिया, लेकिन दिल में मीरा की जगह कभी कोई नहीं ले पाया।
और आज… तीन साल बाद…
फिर वही बारिश हो रही थी।
आरव बालकनी में खड़ा पुरानी यादों में खोया था कि तभी उसका फोन बजा।
अनजान नंबर था।
“हैलो?”
कुछ पल तक दूसरी तरफ खामोशी रही।
फिर एक धीमी आवाज़ आई—
“बारिश में भीगने से यादें मिलती हैं… याद है?”
आरव का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
“मीरा…?”
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“क्या कल मिल सकते हो?” मीरा ने पूछा।
अगले दिन आरव उसी पुरानी लाइब्रेरी के बाहर खड़ा था। दिल में हजार सवाल थे।
थोड़ी देर बाद सफेद सूट में मीरा उसके सामने आकर खड़ी हो गई। लेकिन इस बार उसकी आँखों की चमक कहीं खो चुकी थी।
“कैसे हो?” मीरा ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।
“तुम्हारे बिना… ठीक नहीं था।” आरव ने सच कह दिया।
मीरा की आँखें भर आईं।
“मैं भी खुश नहीं हूँ, आरव…”
कुछ देर दोनों चुप रहे।
फिर मीरा ने धीरे से कहा—
“मेरी शादी टूट चुकी है। शायद किस्मत हमें एक और मौका देना चाहती है।”
आरव को अपनी बातों पर यकीन नहीं हो रहा था।
तभी फिर से बारिश शुरू हो गई।
मीरा मुस्कुराई—
“चलो… भीगते हैं। नई यादें बनाते हैं।”
इस बार आरव ने उसे रोका नहीं।
दोनों बारिश में भीगते हुए मुस्कुरा रहे थे। जैसे तीन साल का सारा दर्द उस बारिश के साथ बह गया हो।
कभी-कभी ज़िंदगी हमें दूसरा मौका ज़रूर देती है… बस हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। ❤️

