Kumar Vikash

Inspirational


3.5  

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औलाद की फसल

औलाद की फसल

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जिस तरह एक किसान खेत बनाता है ,फिर उसमें अच्छे बीज बोता है , पानी देता है , कीड़े न लगें दवाओं का छिड़काव करता है , आस पास उग रहे

खरपतवार से फसल को बचाने के लियेउन्हे उखाड़ फेंकता है । अधिक वर्षा और सूखे से बचाव के लिये अपनेकर्तव्य के साथ साथ ही ईश्वर से दिनरात प्रार्थना करता है । और लहलहाती फसल को बढ़ते देख खुश होता है ,फसल के पकने के इन्तजार में दिन रात खेत की तकवारी करता है , क्यों कि उस

फसल से उसका आगे का भविष्य जुड़ा होता है । खुशहाली जुड़ी होती है , तभीवह उस फसल के लिये इतना संवेदनशील रहता है , एक किसान औलाद की तरह ही अपनी फसल की देखभाल में लगा रहता है , और अंत में इस लहलहाती पकी फसल का सुख उठाता है । बिलकुल इसी एक किसान की तरह ही अगर सभी माता पिता और परिवार , अपने पुत्र पुत्रियों को बचपन से ही उनके पूर्ण मानसिक रूप से विकसित और परिपक्व होने तक ,उनकी छोटी छोटी बातों और व्यवहार को नजरअंदाज न करें , उन्हे अच्छे व्यवहार और संस्कार दें , तो माँ बाप को अपना बुढापा कभी भी वृद्धाश्रम में नहीं गुजरना पड़ेगा । उनकी वृद्धावस्था नातीपोतों के साथ खेलते कूदते बीतेगी ।और न ही जीवन में कभी अपने बच्चों के कारण नीचा देखना पड़ेगा ।।


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