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Dinesh Dubey

Drama

4  

Dinesh Dubey

Drama

अपने पराए

अपने पराए

6 mins
280

रुचिका की शादी हुए मात्र दो साल हुए और वह विधवा हो गई, उसका दिवंगत पति जयेश इतने जल्दी बच्चे नहीं चाहता था इसलिए बच्चे नहीं हुए, अभी दो साल पहले ही धूम धाम से उनकी अरेंज मैरेज हुई थी, उसके पिता दो साल से लड़का ढूंढ रहे थे, तब जाकर उन्हें जयेश पसंद आया था, पूरे 40 लाख खर्च किए थे, पर सब व्यर्थ हो गया, आज 4 दिन हुए जयेश का एक्सीडेंट हुए, जयेश आर्किटेक्ट था, वह एक नए प्रोजेक्ट को मीटिंग के लिए गया था, बिल्डर उसे अपने एक अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग में बुलाया था उसका भी काम जयेश ही देख रहा था,वो बिल्डिंग का प्रोग्रेस देखने के लिए 18th फ्लोर पर गए थे, और वहा उसे वाशरूम की जरूरत महसूस हुई तो वह एक साइड पर जाकर निपट लिया तभी नीचे से किसी के लड़ने की आवाज सुनाई दी तो वह नीचे देखने के लिए आगे बढ़ा तो उसका पैर स्लीप हो गया और वह 18th फ्लोर से टकराता हुआ नीचे आकर गिरा उसने बीच में बल्ली पकड़ने की कोशिश भी किया पर नहीं पकड़ पाया और कुछ ही सेकंड में वह भगवान को प्यारा हो गया था, वह तो उस वक्त कई लोग वहां मौजूद थे वरना लोग बिल्डर पर ही इल्जाम लगा देते और लंबी वसूली करते, फिर भी बिल्डर ने कहा कि वह इस बिल्डिंग में एक थ्री रूम किचेन का फ्लैट दे देगा जिसकी कीमत कम से कम 3 करोड़ की होगी, वह भी उसकी पत्नी के नाम, इस बात से घर में हंगामा मचा था, लोग बेटे की मौत को भूल इस बात में लग गए की वह फ्लैट उनके नाम पर हो, जयेश का भाई तो बिल्डर से जाकर मिल भी आया, पर बिल्डर ने माना कर दिया उसने कहा," मैं उसकी वाइफ के नाम पर करूंगा हां अगर वो खुद बोले तो मैं उनके पिता के नाम कर दूंगा, ! इस बात से उसका भाई उस से चिढ़ कर बात करने लगा है, रुचिका सोचती है कि अभी चार दिन में इनका ये हाल है, तो आगे क्या होगा, ये लोग काम से काम 13 दिन तो शांत रहते, रुचिका खुद भी इंटीरियर डिजाइनर थी, और उसके पास भी काम था,वह अच्छा काम कर रही थी, ।

उसके मां और डैड उस से मिलने आए थे, उन लोगो को इस बात की चिंता सता रही थी कि अब बेटी का क्या होगा, पूरी जिंदगी बाकी है, उसके भाई को लगने लगा कि उसकी बहन फिर से घर आयेगी तो वह भी हकदार बनने लगेगी तो वह उसे आकर सुना गया था कि डैड ने तो उसके लिए 40 लाख खर्च कर दिया था, उनके लिए तो कुछ बचा नहीं है, और उसे समझा गए की ये लोग कुछ भी कहे अपना हक मत छोड़ना, ।

बड़ी मुश्किल से 13 दिन बीता उसके दूसरे दिन ही घर में पंचायत बैठ गई, जेठ और जेठानी के साथ सास और ससुर उसके सामने बैठ गए और पूछने लगे, " उसने पैसे कहां कहां इन्वेस्ट किए हैं, और कितने पैसे तुम्हारे पास है, 2 साल से तो सारे पैसे तो तुम्हे ही देता था, और तुम ही हमे जो देती थी हैं ले लेते थे, ! रुचिका सोचने लगी कि इनको कैसे समझाए स्टैंडर्ड लाइफ जीने में ही कितने पैसे बरबाद होते हैं, जयेश ने नई जगुआर कार सिर्फ दिखावे के लिए लिया था, जयेश को दिखावे की बहुत आदत थी वह फाइव स्टार होटल में ही मीटिंग्स करता था, फाइव स्टार लाइफ जीना चाहता था,उसे जुए की आदत पड़ चुकी थी, काफी पैसे वह जूए में हार चुका था, उसने उसे कसम दे रखी थी इसलिए उसने किसी से कहा नहीं, यहां तक की उसने उसके कमाए 50 लाख भी जुए में उड़ा दिया था,और अब उन्हें बेटे की कमाई का हिसाब चाहिए था, उसके जेठ ने जगुआर कार पर अघोषित कब्जा कर लिया था अब वह उसी कार से आता जाता था, ! उसके सास तो अब ताने मरने शुरू कर दिए थे कि बेटे को खा गई अब हमे भी खा कर दम लेगी, ।

ताने एक ऐसा अस्त्र है जो इंसान को डिस्टर्ब कर देता है, ये लोग अब नहीं चाहते थे कि रुचिका इस घर में रहे और हक जताए खास कर उसका जेठ सतीश तो एकदम नहीं चाहता है, रुचिका के मायके वाले भी शायद नहीं चाहते है की वो आए,

उसके डैड एक बार आकर बोल गए थे, " बेटी जब तक मैं हूं, तुम कभी भी आ सकती हो, ! मैं भी का मतलब वो समझ गई कि उसका भाई नहीं चाहता है की वह घर आए, वह भाई जिसे वह जान से ज्यादा चाहती थी, अपनी पहली इनकम से उसने उसकी पसंद की बाइक दिलवाई थी जो उस वक्त 2 लाख रूपए की थी, वह कई बार डैड से बोल चुका था, पर डैड यही कहते थे की बेटा मेरे पास जो पैसे सम्हाले हैं वो तेरी दीदी के शादी के लिए हैं, डैड का बिजनेस में बहुत लॉस हुआ था, तो वह एक दूसरी कंपनी में कंसलटेंट के पोस्ट पर काम कर रहे थे, वहा से उन्हे 1.5 लाख पर मंथ मिलते हैं, उस से घर खर्च अच्छे से चल जाता था और थोड़ी बहुत सेविंग भी हो जाती थी, ससुराल के व्यवहार से वह बहुत तंग आ चुकी थी, उनके बार बार हिसाब मांगने पर एक दिन उसने बोल दिया कि तुम्हारा बेटे को जुए की लत थी उसने मेरे लिए भी एक रुपए नहीं छोड़ा, उल्टे मेरे पैसे भी ले लिए तो उन्हे भरोसा ही नहींं होता, वो अब मुझे जरूरत से ज्यादा परेशान करने लगे थे, बाकी जो दोस्त यार थे, विधवा होने के बाद उनकी नजर बदल चुकी थी अब सभी को वह वासना की मूर्ति नजर आने लगी थी, हर कोई उसे अपना बनाने के लिए ट्राई कर रहा था, पर किसी को उसके दिल में क्या बीत रही थी उसकी चिंता नहींं थी, उसके ससुराल वालों ने तो हद कर दी उसके ऊपर गहने चोरी के इल्जाम लगा दिया, एक रात पुलिस स्टेशन में काटने के बाद सुबह उसके पापा ने अपने सोर्स लगाकर उसे छुड़ाया, और साथ ये भी कहा तुम्हे ये सब करने की क्या जरूरत थी, उन्होंने भी ये मान लिया था की मैने सच में चोरी की, रुचिका समझ चुकी थी की इस समाज में रहना है तो अपने दम पर रहना होगा, वह एक दिन अपना सारा सामान पैक कर निकल ली, जाने से पहले बिल्डर से मिलकर कुछ पैसे कैश ले लिए बाकी का उसने एक साल में देने का वादा किया,एक वही था जो पुरे समय उसके सपोर्ट में रहा, रुचिका ने किसी को कुछ नहीं बताया और निकल पड़ी नई मंजिल पाने के लिए, उसे समझ नहींं आ रहा था इस दुनिया में कौन अपना है कौन पराया, वह सोचती मेरे अपने तो अपने रहे ही नहीं दूसरे को क्या दोष दे।


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