अंतिम वापसी
अंतिम वापसी
उत्तराखंड
वर्ष 2091
मेजर अर्जुन रावत ने बारह वर्षों से हथियार नहीं उठाया था।
कभी वह भारतीय सेना की विशेष बचाव इकाई का हिस्सा था।
उसकी विशेषज्ञता थी—
दुर्गम क्षेत्र में प्रवेश।
लापता लोगों की खोज।
बंधकों को सुरक्षित निकालना।
और ऐसी परिस्थितियों में जीवित रहना जहाँ सामान्य बचाव दल नहीं पहुँच सकते।
फिर एक अभियान में उसने अपने पाँच साथियों को खो दिया।
उसके बाद अर्जुन ने सेवा छोड़ दी।
अब वह उत्तराखंड के एक छोटे पहाड़ी गाँव देवगढ़ में रहता था।
वह स्थानीय बच्चों को पर्वतारोहण सिखाता।
टूटे रास्तों की मरम्मत करता।
और कभी-कभी वन विभाग के लिए लापता पर्यटकों की खोज में मदद करता।
उसने अपने पुराने जीवन से दूरी बना ली थी।
लेकिन पुराने जीवन ने उससे दूरी नहीं बनाई थी।
एक सुबह एक महिला उसके घर पहुँची।
कर्नल मीरा कपूर।
कभी वह अर्जुन की कमांडिंग अधिकारी थीं।
उन्होंने मेज पर एक तस्वीर रखी।
तस्वीर में छह युवा वैज्ञानिक थे।
"तीन दिन पहले गायब हुए।"
अर्जुन ने तस्वीर देखी।
"कहाँ?"
"नंदा क्षेत्र के उत्तर में।"
अर्जुन ने तुरंत तस्वीर वापस रख दी।
"नहीं।"
मीरा ने दूसरा नक्शा खोला।
उस पर लाल क्षेत्र चिन्हित था।
अर्जुन का चेहरा बदल गया।
"यह इलाका बंद है।"
"था।"
"क्यों गए थे वहाँ?"
"हिमनद के नीचे स्थापित पुराने जलवायु सेंसर निकालने।"
"और संपर्क?"
"बंद।"
अर्जुन ने पूछा—
"सेना?"
मीरा ने उत्तर दिया—
"भेज नहीं सकते।"
"क्यों?"
"क्योंकि वे अकेले नहीं हैं।"
पहाड़ के भीतरपिछले दशक में हिमालय में अनेक स्वायत्त खनन परियोजनाएँ बंद की गई थीं।
लेकिन उनमें से एक परियोजना वास्तव में बंद नहीं हुई थी।
एक निजी गिरोह पुराने रोबोटिक खनन नेटवर्क का उपयोग करके दुर्लभ खनिज निकाल रहा था।
वैज्ञानिकों ने अनजाने में उसके प्रमाण रिकॉर्ड कर लिए थे।
अब उन्हें एक परित्यक्त भूमिगत परिसर में बंधक बनाकर रखा गया था।
गिरोह चाहता था कि उनके द्वारा रिकॉर्ड किया गया डेटा नष्ट कर दिया जाए।
अर्जुन ने पूछा—
"कितने लोग?"
"कम-से-कम चालीस।"
"हथियार?"
"सैन्य स्तर के।"
"ड्रोन?"
"हाँ।"
अर्जुन ने फिर पूछा—
"और आप चाहती हैं कि मैं अकेला जाऊँ?"
मीरा ने सिर हिलाया।
"मैं चाहती हूँ कि तुम उन्हें वापस लाओ।"
अर्जुन बहुत देर तक कुछ नहीं बोला।
फिर उसने तस्वीर उठा ली।
"मुझे हथियार नहीं चाहिए।"
मीरा ने उसे देखा।
"फिर क्या चाहिए?"
"पुराना पर्वतीय नक्शा।"
"रस्सी।"
"चिकित्सा किट।"
"दो दिन का भोजन।"
"और कोई मेरे पीछे नहीं आएगा।"
प्रवेशअगली रात अर्जुन हिमरेखा पार कर चुका था।
उसने मुख्य मार्ग नहीं चुना।
वह जानता था कि निगरानी ड्रोन गर्मी पहचानते हैं।
इसलिए उसने पुराने हिमनदीय जलमार्ग का उपयोग किया।
पानी कमर तक था।
तापमान शून्य के आसपास।
लेकिन सुरंग सीधे खनन परिसर के नीचे जाती थी।
चार घंटे बाद वह भीतर था।
पहला सुरक्षा ड्रोन सामने आया।
अर्जुन ने गोली नहीं चलाई।
उसने दीवार से पुरानी खनन-केबल निकाली।
ड्रोन जैसे ही नीचे आया, उसने केबल उसके रोटर में फेंक दी।
मशीन दीवार से टकराकर बंद हो गई।
अर्जुन आगे बढ़ गया।
उसने पहला प्रहरी देखा।
उसे बेहोश किया।
उसका संचार उपकरण लिया।
फिर दूसरा।
फिर तीसरा।
कुछ ही मिनटों में गिरोह को पता चल गया—
कोई परिसर में घुस चुका था।
उनका नेता रणवीर मलिक था।
उसने सभी निकास बंद करने का आदेश दिया।
"वह अकेला है।"
एक आदमी ने पूछा—
"आपको कैसे पता?"
रणवीर ने स्क्रीन पर गतिविधि देखी।
"क्योंकि टीम होती तो वह इतनी चुप नहीं होती।"
छह बंधकअर्जुन ने वैज्ञानिकों को तीसरे स्तर पर खोज लिया।
उनमें से एक घायल था।
डॉ. नैना जोशी ने पूछा—
"बचाव दल कहाँ है?"
अर्जुन ने उत्तर दिया—
"आप उसे देख रही हैं।"
वह कुछ क्षण उसे देखती रही।
"आप अकेले आए हैं?"
"हाँ।"
"बाहर कम-से-कम तीस हथियारबंद लोग हैं।"
"अब सत्ताईस।"
अर्जुन ने उन्हें मुख्य द्वार की ओर नहीं ले गया।
उसने परिसर का पुराना वेंटिलेशन नक्शा देखा।
एक आपातकालीन सुरंग थी जो हिमनद के दूसरी ओर निकलती थी।
लेकिन उसके बीच एक पुराना मालवाहक शाफ्ट था।
उसका पुल वर्षों पहले टूट चुका था।
दूरी लगभग बारह मीटर थी।
अर्जुन ने रस्सी बाँधी।
पहले वैज्ञानिकों को पार कराया।
घायल व्यक्ति को पुली से खींचा।
पाँच लोग पार हो गए।
तभी गोली चली।
रणवीर के लोग पहुँच चुके थे।
अर्जुन ने अंतिम वैज्ञानिक को रस्सी पर भेजा।
फिर स्वयं पीछे रह गया।
नैना ने दूसरी ओर से चिल्लाकर कहा—
"आइए!"
अर्जुन ने उत्तर दिया—
"पहले उन्हें बाहर ले जाइए।"
"और आप?"
उसने पीछे आते लोगों की ओर देखा।
"मैं रास्ता बंद करूँगा।"
सीधा मुकाबलाअर्जुन ने पुराने खनन नियंत्रण कक्ष में प्रवेश किया।
उसने बिजली बहाल की।
खनन मशीनें सक्रिय हो गईं।
रणवीर ने सोचा कि अर्जुन उन्हें हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा।
लेकिन अर्जुन ने ऐसा नहीं किया।
उसने मशीनों से तीन मुख्य सुरंगों के सुरक्षा-द्वार बंद कर दिए।
गिरोह तीन हिस्सों में बँट गया।
अब चालीस लोग एक साथ उसका पीछा नहीं कर सकते थे।
रणवीर समझ गया।
"वह हमसे लड़ नहीं रहा।"
"वह हमें अलग कर रहा है।"
अर्जुन एक-एक गलियारे से आगे बढ़ा।
जहाँ संभव था, उसने लोगों को निःशस्त्र किया।
जहाँ गोली चली, उसने आवरण लिया।
जहाँ रास्ता बंद था, उसने पुरानी सेवा-सुरंगें इस्तेमाल कीं।
वह परिसर को उनसे बेहतर समझने लगा था।
क्योंकि वे उस स्थान को अपना अड्डा समझते थे।
अर्जुन उसे भूभाग की तरह पढ़ रहा था।
अंततः केवल रणवीर बचा।
वह मुख्य नियंत्रण कक्ष में था।
उसके पास वैज्ञानिकों का डेटा था।
उसने डेटा मॉड्यूल हाथ में उठाया।
"एक कदम और..."
"...तो सब नष्ट कर दूँगा।"
अर्जुन रुक गया।
रणवीर मुस्कुराया।
"आखिरकार।"
उसने हथियार अर्जुन की ओर किया।
"तुम्हारी समस्या पता है?"
"तुम अभी भी सोचते हो कि तुम किसी को बचाने आए हो।"
अर्जुन ने कहा—
"मैं छह लोगों को बचाने आया था।"
"वे जा चुके हैं।"
रणवीर का चेहरा बदल गया।
उसी क्षण परिसर की बिजली बंद हो गई।
पूर्ण अंधकार।
अर्जुन ने पहले ही आपातकालीन प्रणाली का समय निर्धारित कर दिया था।
रणवीर ने गोली चलाई।
गलत दिशा में।
अर्जुन ने उसकी आवाज़ से स्थान पहचान लिया।
कुछ सेकंड बाद रणवीर जमीन पर था।
उसका हथियार दूर जा चुका था।
डेटा मॉड्यूल सुरक्षित था।
अर्जुन ने उसे मारने के बजाय उसके हाथ बाँध दिए।
रणवीर ने पूछा—
"क्यों?"
अर्जुन ने डेटा मॉड्यूल उठाया।
"क्योंकि मैं न्यायाधीश नहीं हूँ।"
सुबहअर्जुन हिमनद से बाहर निकला।
दूर बचाव विमान उतर रहा था।
सभी छह वैज्ञानिक सुरक्षित थे।
नैना ने उसे आते देखा।
"हमने सोचा था आप वापस नहीं आएँगे।"
अर्जुन ने अपना बैग नीचे रखा।
"मैं भी।"
मीरा उसके पास आईं।
"रणवीर?"
"जीवित है।"
"डेटा?"
अर्जुन ने मॉड्यूल उनकी ओर बढ़ा दिया।
"पूरा।"
मीरा ने पूछा—
"वापस सेवा में आना चाहोगे?"
अर्जुन ने तुरंत उत्तर दिया—
"नहीं।"
"क्यों?"
अर्जुन ने दूर पहाड़ों की ओर देखा।
"मैं वापस आने के लिए वहाँ नहीं गया था।"
तीन दिन बाद देवगढ़ में बच्चे फिर पर्वतारोहण सीख रहे थे।
एक लड़के ने अर्जुन के हाथ पर नया घाव देखा।
"सर, यह कैसे लगा?"
अर्जुन ने रस्सी की गाँठ ठीक करते हुए कहा—
"फिसल गया था।"
बच्चे हँस पड़े।
अर्जुन ने उन्हें आगे चलने का संकेत दिया।
उसने पीछे मुड़कर पहाड़ों की ओर नहीं देखा।
उसे अब यह सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं थी कि वह पहले कौन था।
छह लोग अपने घर पहुँच चुके थे।
उसके लिए इतना ही पर्याप्त था।
