अंतिम घंटा
अंतिम घंटा
वाराणसी
वर्ष 2146
समय यात्रा अब विज्ञान-कथा नहीं रही थी।
लेकिन वह सामान्य परिवहन भी नहीं बनी थी।
समय में आगे जाना संभव था।
पीछे जाना भी संभव था।
परंतु अतीत में परिवर्तन करने पर भविष्य में उत्पन्न होने वाले प्रभावों की भविष्यवाणी अभी भी असंभव थी।
इसी कारण भारत ने समय-यात्रा के लिए एक कठोर नियम बनाया था—
"अतीत को देखा जा सकता है।
बदला नहीं जा सकता।"
समय-यात्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक विशेष संस्था बनाई गई थी—
काल-संरक्षण प्राधिकरण।
और उसके सबसे तेज़ प्रशिक्षित धावक का नाम था—
आरव सेन।
आरव की विशेषता लड़ना नहीं थी।
वह समय के भीतर स्थिर बिंदुओं के बीच दौड़ सकता था।
एक समय-मार्ग खुलता।
कुछ सेकंड के लिए अतीत और वर्तमान के बीच संपर्क बनता।
आरव उस मार्ग से गुजरता।
वह कोई वस्तु नहीं ले जाता था।
कोई हथियार नहीं।
सिर्फ संदेश।
क्योंकि संदेश इतिहास बदलने के लिए पर्याप्त हो सकता था।
एक रात नियंत्रण केंद्र में अचानक चेतावनी आई।
"काल-रेखा विचलन।"
मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मीरा कौल स्क्रीन के सामने पहुँचीं।
एक समय-बिंदु बदल रहा था।
वर्ष 2112।
लेकिन समस्या यह थी कि 2112 में कोई अधिकृत समय-यात्री नहीं था।
फिर एक संदेश दिखाई दिया।
"यदि यह संदेश तुम्हें मिल रहा है, तो भविष्य पहले ही बदल चुका है।"
नीचे केवल एक नाम था—
आरव सेन।
आरव स्क्रीन को देखता रह गया।
"यह मेरा संदेश है?"
मीरा ने कहा—
"हस्ताक्षर तुम्हारा है।"
"लेकिन मैंने इसे भेजा नहीं।"
मीरा ने उत्तर दिया—
"अभी नहीं।"
समय-विश्लेषण से पता चला कि 2112 में एक ऊर्जा अनुसंधान प्रयोग के दौरान दुर्घटना होने वाली थी।
मूल इतिहास में उस दुर्घटना से केवल 14 लोग प्रभावित हुए थे।
लेकिन बदली हुई समय-रेखा में वही घटना एक श्रृंखला शुरू कर रही थी।
उसके परिणामस्वरूप 2146 तक दुनिया की ऊर्जा प्रणाली पूरी तरह अलग हो जाती।
शहरों का विन्यास बदल जाता।
लाखों लोगों का जन्म ही नहीं होता।
और काल-संरक्षण प्राधिकरण अस्तित्व में नहीं आता।
आरव ने पूछा—
"तो मुझे 2112 में जाकर दुर्घटना रोकनी होगी?"
मीरा ने सिर हिलाया।
"नहीं।"
"हम दुर्घटना को रोक नहीं सकते।"
"हमें पता लगाना है कि समय-रेखा बदली कहाँ।"
आरव को 2112 भेजा गया।
वह एक अनुसंधान केंद्र के बाहर प्रकट हुआ।
उसने पुराने अभिलेख देखे।
सब कुछ सामान्य था।
फिर उसने एक वैज्ञानिक को देखा।
डॉ. समर राव।
वही व्यक्ति जिसने मूल इतिहास में दुर्घटना के बाद अपना जीवन ऊर्जा-सुरक्षा तकनीक विकसित करने में लगाया था।
लेकिन इस समय-रेखा में वह दुर्घटना से दो दिन पहले ही गायब हो गया था।
आरव ने उसका पीछा किया।
समर एक भूमिगत प्रयोगशाला में पहुँचा।
वहाँ एक छोटा समय-उपकरण सक्रिय था।
आरव ने उसे देखते ही समझ लिया—
समर ने भविष्य देखा था।
और भविष्य बदलने का प्रयास किया था।
समर ने आरव को देखकर कहा—
"आखिर तुम आ गए।"
आरव चौंका।
"तुम मुझे जानते हो?"
समर मुस्कुराया।
"तुम्हारे आने की भविष्यवाणी नहीं की थी।"
"तुम्हें भेजने वाले व्यक्ति की थी।"
आरव ने पूछा—
"किसने?"
समर ने एक रिकॉर्डिंग चलाई।
स्क्रीन पर स्वयं आरव दिखाई दिया।
लेकिन वह लगभग तीस वर्ष अधिक उम्र का था।
भविष्य का आरव कह रहा था—
"समर, यदि तुम यह देख रहे हो तो मेरी योजना विफल हो चुकी है।"
"लेकिन अभी एक अवसर है।"
रिकॉर्डिंग समाप्त हो गई।
आरव स्तब्ध था।
समर ने बताया कि भविष्य में एक विशाल समय-दुर्घटना हुई थी।
एक वैज्ञानिक समूह ने अतीत की एक छोटी घटना बदलकर दुनिया को बचाने की कोशिश की।
उन्होंने सफलता प्राप्त की।
लेकिन उस परिवर्तन ने एक ऐसी समय-श्रृंखला पैदा की जिसमें मानव सभ्यता धीरे-धीरे समाप्त हो गई।
भविष्य के आरव ने वह परिवर्तन उलटने के लिए समय-मार्ग बनाया था।
लेकिन उसे स्वयं अतीत में जाना संभव नहीं था।
इसलिए उसने संदेश भेजा था।
आरव ने पूछा—
"मुझे क्या करना है?"
समर ने उत्तर दिया—
"कुछ नहीं।"
"दुर्घटना होने दो।"
आरव ने विरोध किया।
"लोग मरेंगे।"
समर की आँखें झुक गईं।
"चौदह लोग।"
"लेकिन यदि तुम इसे रोकते हो..."
"...तो करोड़ों लोगों का भविष्य बदल जाएगा।"
आरव के लिए यह निर्णय असहनीय था।
उसे चौदह लोगों को बचाने का अवसर था।
लेकिन ऐसा करने से वह उस भविष्य को जन्म दे सकता था जिसमें लाखों लोग कभी अस्तित्व में ही नहीं आते।
उसने नियंत्रण केंद्र से संपर्क किया।
मीरा ने पूछा—
"क्या तुमने कारण खोज लिया?"
आरव ने उत्तर दिया—
"हाँ।"
"क्या हम इसे रोक सकते हैं?"
कुछ सेकंड मौन रहा।
फिर आरव बोला—
"हाँ।"
मीरा समझ गईं।
"और?"
आरव ने आँखें बंद कर लीं।
"और हमें नहीं रोकना चाहिए।"
समय-यात्रा का मार्ग बंद होने लगा।
आरव ने अंतिम बार प्रयोगशाला की ओर देखा।
समर अब भी वहाँ खड़ा था।
आरव ने पूछा—
"क्या तुम जानते थे कि मैं यह निर्णय लूँगा?"
समर ने सिर हिलाया।
"नहीं।"
"लेकिन मुझे उम्मीद थी।"
आरव वर्तमान में लौट आया।
समय-रेखा स्थिर होने लगी।
चौदह लोगों की मृत्यु हुई।
दुर्घटना के बाद वही अनुसंधान शुरू हुआ जिसने सुरक्षित ऊर्जा प्रणालियों का आधार बनाया।
सालों बाद वही तकनीक मानवता को एक विशाल ऊर्जा संकट से बचाने वाली थी।
लेकिन आरव को अपने निर्णय के बारे में कोई संतोष नहीं था।
वह चौदह चेहरों को भूल नहीं सका।
काल-संरक्षण प्राधिकरण का प्रशिक्षण कक्षकई वर्ष बाद आरव स्वयं प्रशिक्षक बन चुका था।
नए समय-धावकों के सामने उसने एक प्रश्न रखा—
"यदि आप अतीत में जाकर एक व्यक्ति को बचा सकते हैं..."
"...लेकिन उसके कारण भविष्य में हजारों लोग मर सकते हैं..."
"तो आप क्या करेंगे?"
एक प्रशिक्षु ने कहा—
"उन्हें बचाएँगे।"
दूसरे ने कहा—
"भविष्य की रक्षा करेंगे।"
आरव कुछ देर उन्हें देखता रहा।
फिर उसने कहा—
"पहले यह स्वीकार करना सीखो कि दोनों उत्तर आसान हैं।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
"समय में यात्रा करने वाले व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति यह नहीं है कि वह अतीत बदल सकता है।"
"उसकी सबसे बड़ी शक्ति यह है कि वह कभी-कभी अतीत को बदल सकने के बावजूद..."
"...अपना हाथ रोक सकता है।"
वह खिड़की के पास चला गया।
बाहर गंगा के ऊपर शाम उतर रही थी।
समय आगे बढ़ रहा था।
और इस बार...
उसे किसी को दौड़कर रोकना नहीं था।
